हमने पिछली कक्षाओं में प्राकृत, पूर्ण, पूर्णांक, परिमेय और अपरिमेय संख्याओं का अध्ययन किया। किंतु इन संख्याओं से सभी द्विघात समीकरणों को हल नहीं किया जा सकता। उदाहरणार्थ, समीकरण $x^2 + 1 = 0$ का कोई वास्तविक हल नहीं है, क्योंकि किसी भी वास्तविक संख्या का वर्ग ऋणात्मक नहीं हो सकता। इस समस्या के समाधान के लिए काल्पनिक इकाई $i$ को प्रस्तुत किया गया, जहाँ $i^2 = -1$। इसी के आधार पर सम्मिश्र संख्याओं की संकल्पना विकसित हुई।
काल्पनिक इकाई $i$ ऐसी संख्या है जिसके लिए $i^2 = -1$। इससे $i = \sqrt{-1}$।
$z = a + ib$ के रूप की संख्या को सम्मिश्र संख्या कहते हैं, जहाँ $a$ और $b$ वास्तविक संख्याएँ हैं: - $a$ को $z$ का वास्तविक भाग (Re z) कहते हैं। - $b$ को $z$ का काल्पनिक भाग (Im z) कहते हैं।
यदि $b = 0$, तो $z$ वास्तविक संख्या होगी। यदि $a = 0$ और $b \neq 0$, तो $z$ शुद्ध काल्पनिक संख्या कहलाती है।
$$i = \sqrt{-1}, \quad i^2 = -1, \quad i^3 = -i, \quad i^4 = 1$$
$i$ की घातों में प्रत्येक चार के बाद चक्र दोहराता है। अतः $i^{4k} = 1$, $i^{4k+1} = i$, $i^{4k+2} = -1$, $i^{4k+3} = -i$।
मान लीजिए $z_1 = a + ib$ और $z_2 = c + id$:
$$z_1 + z_2 = (a + c) + i(b + d)$$ $$z_1 - z_2 = (a - c) + i(b - d)$$ $$z_1 \cdot z_2 = (ac - bd) + i(ad + bc)$$ $$\frac{z_1}{z_2} = \frac{(a + ib)(c - id)}{c^2 + d^2}$$
$z = a + ib$ का संयुग्मी $\bar{z} = a - ib$ होता है। $z$ का मापांक $|z| = \sqrt{a^2 + b^2}$ होता है।
$$z\bar{z} = |z|^2 = a^2 + b^2$$ $$|z_1 z_2| = |z_1||z_2|$$ $$\left|\frac{z_1}{z_2}\right| = \frac{|z_1|}{|z_2|},\; z_2 \neq 0$$ $$\overline{z_1 + z_2} = \bar{z_1} + \bar{z_2}$$ $$\overline{z_1 z_2} = \bar{z_1}\bar{z_2}$$
सम्मिश्र संख्या $z = a + ib$ को तल में बिंदु (a, b) द्वारा निरूपित किया जाता है, जिसे आर्गंड तल या सम्मिश्र तल कहते हैं। क्षैतिज अक्ष को वास्तविक अक्ष और ऊर्ध्वाधर अक्ष को काल्पनिक अक्ष कहते हैं। बिंदु और मूल बिंदु के बीच की दूरी मापांक $|z|$ होती है।
यदि $r = |z|$ और $\theta$ वास्तविक अक्ष से बिंदु द्वारा बनाया गया कोण हो, तो: $$z = r(\cos\theta + i\sin\theta)$$ जहाँ $\theta$ को $z$ का कोणांक या आर्ग्युमेंट कहते हैं, $\tan\theta = b/a$। कोणांक का मुख्य मान $-\pi < \theta \le \pi$ के अंतराल में होता है। $r = \sqrt{a^2 + b^2}$।
दो सम्मिश्र संख्याएँ $z_1 = r_1(\cos\theta_1 + i\sin\theta_1)$ और $z_2 = r_2(\cos\theta_2 + i\sin\theta_2)$: $$z_1 z_2 = r_1 r_2[\cos(\theta_1 + \theta_2) + i\sin(\theta_1 + \theta_2)]$$ $$\frac{z_1}{z_2} = \frac{r_1}{r_2}[\cos(\theta_1 - \theta_2) + i\sin(\theta_1 - \theta_2)]$$
द्विघात समीकरण $ax^2 + bx + c = 0$ का हल: $$x = \frac{-b \pm \sqrt{b^2 - 4ac}}{2a}$$
यहाँ विविक्तकर (Discriminant) $D = b^2 - 4ac$: - यदि $D > 0$: दो भिन्न वास्तविक मूल - यदि $D = 0$: दो समान वास्तविक मूल - यदि $D < 0$: सम्मिश्र मूल, जो संयुग्मी युग्म में होते हैं।
यदि $\alpha$ और $\beta$ मूल हों, तो: $$\alpha + \beta = -\frac{b}{a}, \quad \alpha\beta = \frac{c}{a}$$
मूलों वाला द्विघात समीकरण: $x^2 - (\alpha + \beta)x + \alpha\beta = 0$
समीकरण $x^2 + x + 1 = 0$ हल कीजिए। $$x = \frac{-1 \pm \sqrt{1 - 4}}{2} = \frac{-1 \pm \sqrt{-3}}{2} = \frac{-1 \pm i\sqrt{3}}{2}$$
| घात | मान |
|---|---|
| i¹ | i |
| i² | -1 |
| i³ | -i |
| i⁴ | 1 |
| विविक्तकर D | मूलों की प्रकृति |
|---|---|
| D > 0 | भिन्न वास्तविक मूल |
| D = 0 | समान वास्तविक मूल |
| D < 0 | सम्मिश्र (संयुग्मी युग्म) मूल |
सम्मिश्र संख्याएँ गणित को वास्तविक संख्याओं की सीमाओं से मुक्त करती हैं और सभी द्विघात समीकरणों का हल प्रदान करती हैं। $i$ की घातों का चक्र, संयुग्मी, मापांक, ध्रुवीय रूप तथा द्विघात मूलों का योग-गुणनफल इस अध्याय के प्रमुख विषय हैं। आर्गंड तल में सम्मिश्र संख्याओं का ज्यामितीय निरूपण अध्याय को रोचक और सहज बनाता है। यह अध्याय उच्चतर गणित, भौतिकी और विद्युत अभियांत्रिकी में भी उपयोगी है।