हमने कक्षा 11 में समीकरणों का अध्ययन किया, जिनमें दो व्यंजक बराबर होते हैं। परंतु वास्तविक जीवन में अनेक स्थितियाँ ऐसी होती हैं जिनमें दो राशियाँ बराबर नहीं होतीं, बल्कि एक दूसरी से बड़ी या छोटी होती है। इन्हीं संबंधों को व्यक्त करने के लिए असमिकाएँ (Inequalities) का प्रयोग होता है। जब असमिका में चर की अधिकतम घात 1 होती है, तो उसे रैखिक असमिका कहते हैं। इस अध्याय में हम रैखिक असमिकाओं के हल की विधियों का अध्ययन करेंगे।
दो संख्याएँ $a$ और $b$ हों, तो: - $a > b$ का अर्थ है a, b से बड़ा है - $a < b$ का अर्थ है a, b से छोटा है - $a \geq b$ का अर्थ है a, b से बड़ा या बराबर है - $a \leq b$ का अर्थ है a, b से छोटा या बराबर है
जब कोई राशि दो अन्य राशियों के बीच में हो, तो: $a \leq x \leq b$ जहाँ $x$ दोनों का समावेशी होने पर।
एक चर वाली रैखिक असमिका का सामान्य रूप $ax + b > 0$, $ax + b < 0$, $ax + b \geq 0$ या $ax + b \leq 0$ है, जहाँ $a \neq 0$। दो चरों वाली रैखिक असमिका का सामान्य रूप $ax + by > c$, $ax + by < c$, $ax + by \geq c$ या $ax + by \leq c$ है।
$$\text{यदि } a > b \text{ और } c < 0, \text{ तो } ac < bc$$
यह असमिकाओं का सबसे महत्वपूर्ण नियम है, जिसे विद्यार्थी प्रायः भूल जाते हैं।
असमिका को समीकरण की भाँति हल करते हैं, परंतु ऋणात्मक संख्या से गुणा/भाग करते समय चिह्न उलटना नहीं भूलते। हल को अंतराल रूप में या संख्या रेखा पर निरूपित करते हैं।
असमिका $3x - 5 > 7$ का हल: $$3x > 12 \Rightarrow x > 4$$ हल समुच्चय: $(4, \infty)$
असमिकाओं को हल करते समय हम समीकरणों की भाँति ही प्रक्रिया अपनाते हैं, परंतु एक महत्वपूर्ण अंतर यह है कि ऋणात्मक संख्या से गुणा या भाग करते समय असमिका का चिह्न उलट देना अनिवार्य है। उदाहरण के लिए, असमिका $-2x + 6 > 10$ को हल करने के लिए पहले दोनों पक्षों में से 6 घटाते हैं, जिससे $-2x > 4$ प्राप्त होता है। अब दोनों पक्षों को $-2$ से भाग देने पर चिह्न उलट जाता है और हमें $x < -2$ मिलता है। यदि हम चिह्न न उलटते तो $x > -2$ गलत उत्तर प्राप्त होता, जिसे संख्या रेखा पर जाँचने पर सरलता से पकड़ा जा सकता है: $x = 0$ को मूल असमिका में रखने पर $-2(0) + 6 = 6$, जो 10 से बड़ा नहीं है। इस प्रकार संख्या रेखा पर हल की जाँच करने की आदत गलतियों से बचाती है।
एक अन्य उदाहरण लें: असमिका $3(x - 1) \leq 2x + 5$। कोष्ठक खोलने पर $3x - 3 \leq 2x + 5$। अब दोनों पक्षों में 3 जोड़ने पर $3x \leq 2x + 8$, और दोनों पक्षों से $2x$ घटाने पर $x \leq 8$ प्राप्त होता है। इस स्थिति में कहीं भी ऋणात्मक संख्या से गुणा या भाग नहीं हुआ, अतः चिह्न अपरिवर्तित रहता है। हल समुच्चय $(-\infty, 8]$ है, जिसमें 8 भी शामिल है क्योंकि चिह्न $\leq$ है। ध्यान दीजिए कि असमिका को अंतराल रूप में लिखते समय समावेशी अंत बिंदु के लिए वर्ग कोष्ठक $[$ तथा असमावेशी अंत बिंदु के लिए गोल कोष्ठक $($ का प्रयोग होता है। इसी प्रकार यदि असमिका में भिन्न हों, तो पहले सभी पदों को हरों के लघुतम समापवर्त्य से गुणा करके पूर्णांक रूप में बदल लेना चाहिए, परंतु यदि यह गुणक ऋणात्मक हो, तो चिह्न उलटना न भूलें।
दो चरों वाली असमिका $ax + by \geq c$ का हल तल के क्षेत्र के रूप में होता है। सबसे पहले संबंधित रेखा $ax + by = c$ खींचते हैं: - यदि असमिका में $\geq$ या $\leq$ है, तो रेखा ठोस होती है (रेखा भी हल में शामिल)। - यदि असमिका में $>$ या $<$ है, तो रेखा बिंदुदार होती है (रेखा हल में शामिल नहीं)।
फिर एक परीक्षण बिंदु (सामान्यतः मूल बिंदु (0, 0)) लेकर यह जाँचते हैं कि वह असमिका को संतुष्ट करता है या नहीं। यदि संतुष्ट करता है, तो परीक्षण बिंदु वाला क्षेत्र हल क्षेत्र होता है।
दो या अधिक रैखिक असमिकाओं के निकाय का हल वह क्षेत्र होता है जो सभी असमिकाओं के हल क्षेत्रों का सामान्य भाग (प्रतिच्छेदन) होता है। इसे "संभाव्य क्षेत्र" कहते हैं। प्रत्येक असमिका का क्षेत्र अलग-अलग छायांकित करके सामान्य क्षेत्र ज्ञात किया जाता है।
दो चरों वाली असमिका $2x + y \geq 4$ पर विचार करें। पहले संबंधित रेखा $2x + y = 4$ खींचते हैं, जो $x$-अक्ष को $(2, 0)$ पर तथा $y$-अक्ष को $(0, 4)$ पर काटती है। चूँकि चिह्न $\geq$ है, यह रेखा ठोस होगी, अर्थात रेखा के सभी बिंदु हल में शामिल हैं। अब परीक्षण बिंदु $(0, 0)$ लेते हैं; असमिका में रखने पर $2(0) + 0 = 0$, जो 4 से बड़ा या बराबर नहीं है। अतः मूल बिंदु वाला क्षेत्र हल क्षेत्र नहीं है, और इसके विपरीत दिशा का क्षेत्र छायांकित किया जाता है। यही विधि किसी भी दो चरों वाली असमिका पर लागू होती है। परीक्षण बिंदु के रूप में $(0, 0)$ का चयन इसलिए होता है क्योंकि इसकी गणना सबसे सरल है, परंतु यदि रेखा मूल बिंदु से गुजरती हो, तो $(1, 0)$ या $(0, 1)$ जैसा कोई अन्य बिंदु चुनना पड़ता है।
निकाय के प्रश्नों में प्रत्येक असमिका के हल क्षेत्र को अलग-अलग पहचान कर अंततः उनका सामान्य (उभयनिष्ठ) क्षेत्र ही हल होता है। उदाहरण के लिए, $x \geq 1$, $y \geq 0$ तथा $x + y \leq 4$ का निकाय एक त्रिभुजाकार क्षेत्र बनाता है, जिसके शीर्ष $(1, 0)$, $(4, 0)$ तथा $(1, 3)$ हैं। इस क्षेत्र के सभी बिंदु तीनों असमिकाओं को एक साथ संतुष्ट करते हैं। इस प्रकार के प्रश्न यह समझने के लिए महत्वपूर्ण हैं कि किसी निकाय का हल वास्तव में अनेक प्रतिबंधों का एक साथ समाधान होता है, और यही अवधारणा कक्षा 12 में रैखिक प्रोग्रामन का आधार बनती है, जहाँ इन्हीं क्षेत्रों के अंतर्गत उद्देश्य फलन का इष्टतम मान ज्ञात किया जाता है।
| संक्रिया | चिह्न पर प्रभाव |
|---|---|
| दोनों पक्षों में समान संख्या जोड़ना/घटाना | चिह्न अपरिवर्तित |
| धनात्मक संख्या से गुणा/भाग | चिह्न अपरिवर्तित |
| ऋणात्मक संख्या से गुणा/भाग | चिह्न उलट जाता है |
| व्युत्क्रम लेना | चिह्न उलट जाता है |
| अंतराल | निरूपण |
|---|---|
| a ≤ x ≤ b | [a, b] |
| a < x < b | (a, b) |
| a ≤ x < b | [a, b) |
| a < x ≤ b | (a, b] |
रैखिक असमिकाएँ गणित की वह शाखा है जो वास्तविक जीवन की सीमाओं और प्रतिबंधों को व्यक्त करती है। एक चर वाली असमिकाओं का हल संख्या रेखा पर तथा दो चरों वाली असमिकाओं का हल तल के क्षेत्र के रूप में निरूपित होता है। ऋणात्मक संख्या से गुणा करते समय चिह्न का उलटना और परीक्षण बिंदु से क्षेत्र की पहचान इस अध्याय के प्रमुख कौशल हैं। यह अध्याय कक्षा 12 के रैखिक प्रोग्रामन के लिए आधार प्रदान करता है।