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1. परिचय

क्रमचय (Permutation) और संचय (Combination) गणित की वे शाखाएँ हैं जो वस्तुओं को क्रमबद्ध या अक्रमबद्ध रूप में चुनने तथा व्यवस्थित करने की विभिन्न विधियों की गणना करती हैं। जब हमें गिनना होता है कि किसी समुच्चय से तत्वों को कितनी विधियों से चुना और व्यवस्थित किया जा सकता है, तो इन संकल्पनाओं का प्रयोग होता है। ये प्रायिकता, गणितीय प्रेरण और अनेक व्यावहारिक स्थितियों में उपयोगी हैं। उदाहरण के लिए, 10 प्रतियोगियों से शीर्ष 3 का क्रम ज्ञात करना क्रमचय है, जबकि उनमें से 3 का दल बनाना संचय है।

2. मूल गिनती का सिद्धांत (Fundamental Principle of Counting)

गुणन का सिद्धांत

यदि एक घटना m प्रकार से और दूसरी घटना n प्रकार से घट सकती है, तो दोनों घटनाएँ क्रमशः $m \times n$ प्रकार से घट सकती हैं।

योग का सिद्धांत

यदि एक घटना m प्रकार से और दूसरी स्वतंत्र घटना n प्रकार से घट सकती है, तो दोनों में से कोई एक घटना $m + n$ प्रकार से घट सकती है।

3. क्रमगुणित (Factorial)

धनात्मक पूर्णांक n के क्रमगुणित को $n!$ लिखते हैं: $$n! = n(n - 1)(n - 2) \cdots 3 \cdot 2 \cdot 1$$ $$0! = 1$$

उदाहरण: $5! = 5 \times 4 \times 3 \times 2 \times 1 = 120$।

4. क्रमचय (Permutation)

n भिन्न वस्तुओं में से r वस्तुओं को क्रम में चुनने तथा व्यवस्थित करने की विधियों की संख्या को $^nP_r$ या $P(n, r)$ लिखते हैं: $$^nP_r = \frac{n!}{(n - r)!},\; 0 \leq r \leq n$$

पुनरावृत्ति सहित क्रमचय

यदि n वस्तुओं में से r वस्तुओं का चयन पुनरावृत्ति की अनुमति के साथ हो, तो विधियों की संख्या $n^r$ होती है।

वस्तुओं के पुनरावृत्त होने पर क्रमचय

यदि n वस्तुओं में $p_1$ वस्तुएँ एक जैसी, $p_2$ वस्तुएँ दूसरी जैसी, ... हों, तो विभिन्न क्रमचयों की संख्या: $$\frac{n!}{p_1! \cdot p_2! \cdot p_3! \cdots}$$

उदाहरण: "MISSISSIPPI" शब्द के अक्षरों से बने विभिन्न शब्दों की संख्या $\frac{11!}{4!4!2!}$।

5. वृत्तीय क्रमचय (Circular Permutation)

n भिन्न वस्तुओं को वृत्त में व्यवस्थित करने की संख्या $(n - 1)!$ होती है। यदि वृत्त का कोई निश्चित अभिविन्यास न हो, तो फ्लिप को समान मानने पर संख्या $\frac{(n - 1)!}{2}$ होती है। घड़ी के काँटों जैसी घूर्णी परिस्थितियों में $(n - 1)!$ ही सही रहता है।

6. संचय (Combination)

n भिन्न वस्तुओं में से r वस्तुओं का चयन (क्रम की चिंता के बिना) करने की विधियों की संख्या $^nC_r$ है: $$^nC_r = \frac{n!}{r!(n - r)!},\; 0 \leq r \leq n$$

संचय के महत्वपूर्ण गुण

$$^nC_r = ^nC_{n - r}$$ $$^nC_0 = ^nC_n = 1$$ $$^nC_1 = n$$ $$^nC_r + ^nC_{r-1} = ^{n+1}C_r$$

7. क्रमचय और संचय के बीच संबंध

$$^nP_r = r! \cdot ^nC_r$$ $$^nC_r = \frac{^nP_r}{r!}$$

अर्थात क्रमचय = संचय × r वस्तुओं की व्यवस्थाओं की संख्या। क्रमचय में क्रम मायने रखता है, संचय में नहीं।

8. व्यावहारिक उदाहरण

  1. 5 अलग-अलग पुस्तकों को 3-3 लेकर व्यवस्थित करना: $^5P_3 = \frac{5!}{2!} = 60$।
  2. 5 पुस्तकों में से 3 का चयन: $^5C_3 = \frac{5!}{3!2!} = 10$।
  3. "INDEPENDENCE" शब्द में अक्षरों से शब्द बनाना: कुल अक्षर 12, D दो बार, E चार बार, N तीन बार।
  4. एक दल में कम से कम एक लड़का चुनने के लिए कुल विधियाँ = $^nC_r$ के योग से।

त्वरित पुनरावृत्ति तालिकाएँ

तालिका 1: क्रमचय बनाम संचय

अवधारणा सूत्र क्रम का महत्व
क्रमचय $^nP_r = n!/(n-r)!$ क्रम मायने रखता है
संचय $^nC_r = n!/[r!(n-r)!]$ क्रम मायने नहीं रखता
पुनरावृत्ति क्रमचय $n^r$ पुनरावृत्ति स्वीकार्य

तालिका 2: संचय गुण

गुण सूत्र
सममिति $^nC_r = ^nC_{n-r}$
पास्कल समानता $^nC_r + ^nC_{r-1} = ^{n+1}C_r$
संबंध $^nP_r = r!\,^nC_r$

माइंड मैप

graph TD A["क्रमचय और संचय"] --> B["गिनती सिद्धांत: m×n, m+n"] A --> C["क्रमगुणित: n!"] A --> D["क्रमचय: nPr"] D --> E["पुनरावृत्ति सहित: n^r"] D --> F["पुनरावृत्ति सहित वस्तुएँ: n!/p₁!p₂!"] A --> G["संचय: nCr"] G --> H["गुण: nCr = nC(n-r)"]

महत्वपूर्ण आरेख (SVG)

क्रमचय बनाम संचय क्रमचय (AB, BA) 2 विधियाँ: A, B क्रम मायने रखता है nPr = n!/(n-r)! संचय (AB = BA) 1 विधि: {A, B} क्रम मायने नहीं रखता nCr = n!/[r!(n-r)!] संबंध: nPr = r! × nCr चुनाव + व्यवस्था = क्रमचय स्वर्ण नियम: क्रम से अंतर हो तो क्रमचय, नहीं तो संचय
पास्कल त्रिभुज 1 1 1 1 2 1 1 3 3 1 1 4 6 4 1 1 5 10 10 5 1 प्रत्येक संख्या = ऊपर की दो संख्याओं का योग nCr = nC(r-1) की पास्कल समानता का निरूपण स्वर्ण नियम: nCr + nC(r-1) = (n+1)Cr पास्कल समानता है

सामान्य गलतियाँ

  1. क्रमचय के प्रश्न में संचय का सूत्र लगाना और विपरीत; क्रम का महत्व देखें।
  2. $^nP_r$ में $r > n$ मान लेना; वास्तव में $r \leq n$ होना आवश्यक है।
  3. $0! = 1$ को 0 मान लेना।
  4. पुनरावृत्ति सहित वस्तुओं के क्रमचय में समान वस्तुओं के क्रमगुणित से भाग देना भूल जाना।
  5. $^nC_r = ^nC_{n-r}$ की जगह $^nC_r = ^nC_r$ गलत लिखना।
  6. वृत्तीय क्रमचय में $(n-1)!$ की जगह $n!$ लिखना।
  7. गुणन सिद्धांत के प्रश्नों में योग सिद्धांत लगाना।
  8. "कम से कम एक" के प्रश्न में कुल से पूरक घटाना भूलना।

परीक्षा युक्तियाँ

  1. प्रश्न में शब्दों "व्यवस्था", "क्रम", "स्थान" दिखें तो क्रमचय प्रयोग करें।
  2. "चयन", "समिति", "दल" जैसे शब्दों में संचय प्रयोग करें।
  3. "कम से कम एक" की स्थिति में कुल विधियाँ $2^n - 1$ होती हैं (रिक्त चयन घटाकर)।
  4. पुनरावृत्ति सहित शब्दों के प्रश्नों में सूत्र $n!/p_1!p_2!...$ का प्रयोग करें।
  5. $^nP_r = r! \times ^nC_r$ के संबंध से प्रश्न आसानी से हल होते हैं।
  6. बड़े मान के क्रमगुणित को गुणनफल के रूप में लिखकर सरल बनाएं।
  7. शब्दों में "स्वर एक साथ" होने पर स्वरों को एक इकाई मानकर गणना करें।

निष्कर्ष

क्रमचय और संचय गणित की वे शाखाएँ हैं जो चयन और व्यवस्था की विधियों की गणना करती हैं और प्रायिकता के लिए आधार प्रदान करती हैं। गुणन तथा योग सिद्धांत, क्रमगुणित, क्रमचय, संचय और उनके गुण इस अध्याय के प्रमुख बिंदु हैं। यह समझना सबसे महत्वपूर्ण है कि क्रमचय में क्रम मायने रखता है जबकि संचय में नहीं। यह अध्याय द्विपद प्रमेय और प्रायिकता जैसे आगामी अध्यायों के लिए नींव का कार्य करता है।