क्रमचय (Permutation) और संचय (Combination) गणित की वे शाखाएँ हैं जो वस्तुओं को क्रमबद्ध या अक्रमबद्ध रूप में चुनने तथा व्यवस्थित करने की विभिन्न विधियों की गणना करती हैं। जब हमें गिनना होता है कि किसी समुच्चय से तत्वों को कितनी विधियों से चुना और व्यवस्थित किया जा सकता है, तो इन संकल्पनाओं का प्रयोग होता है। ये प्रायिकता, गणितीय प्रेरण और अनेक व्यावहारिक स्थितियों में उपयोगी हैं। उदाहरण के लिए, 10 प्रतियोगियों से शीर्ष 3 का क्रम ज्ञात करना क्रमचय है, जबकि उनमें से 3 का दल बनाना संचय है।
यदि एक घटना m प्रकार से और दूसरी घटना n प्रकार से घट सकती है, तो दोनों घटनाएँ क्रमशः $m \times n$ प्रकार से घट सकती हैं।
यदि एक घटना m प्रकार से और दूसरी स्वतंत्र घटना n प्रकार से घट सकती है, तो दोनों में से कोई एक घटना $m + n$ प्रकार से घट सकती है।
धनात्मक पूर्णांक n के क्रमगुणित को $n!$ लिखते हैं: $$n! = n(n - 1)(n - 2) \cdots 3 \cdot 2 \cdot 1$$ $$0! = 1$$
उदाहरण: $5! = 5 \times 4 \times 3 \times 2 \times 1 = 120$।
n भिन्न वस्तुओं में से r वस्तुओं को क्रम में चुनने तथा व्यवस्थित करने की विधियों की संख्या को $^nP_r$ या $P(n, r)$ लिखते हैं: $$^nP_r = \frac{n!}{(n - r)!},\; 0 \leq r \leq n$$
यदि n वस्तुओं में से r वस्तुओं का चयन पुनरावृत्ति की अनुमति के साथ हो, तो विधियों की संख्या $n^r$ होती है।
यदि n वस्तुओं में $p_1$ वस्तुएँ एक जैसी, $p_2$ वस्तुएँ दूसरी जैसी, ... हों, तो विभिन्न क्रमचयों की संख्या: $$\frac{n!}{p_1! \cdot p_2! \cdot p_3! \cdots}$$
उदाहरण: "MISSISSIPPI" शब्द के अक्षरों से बने विभिन्न शब्दों की संख्या $\frac{11!}{4!4!2!}$।
n भिन्न वस्तुओं को वृत्त में व्यवस्थित करने की संख्या $(n - 1)!$ होती है। यदि वृत्त का कोई निश्चित अभिविन्यास न हो, तो फ्लिप को समान मानने पर संख्या $\frac{(n - 1)!}{2}$ होती है। घड़ी के काँटों जैसी घूर्णी परिस्थितियों में $(n - 1)!$ ही सही रहता है।
n भिन्न वस्तुओं में से r वस्तुओं का चयन (क्रम की चिंता के बिना) करने की विधियों की संख्या $^nC_r$ है: $$^nC_r = \frac{n!}{r!(n - r)!},\; 0 \leq r \leq n$$
$$^nC_r = ^nC_{n - r}$$ $$^nC_0 = ^nC_n = 1$$ $$^nC_1 = n$$ $$^nC_r + ^nC_{r-1} = ^{n+1}C_r$$
$$^nP_r = r! \cdot ^nC_r$$ $$^nC_r = \frac{^nP_r}{r!}$$
अर्थात क्रमचय = संचय × r वस्तुओं की व्यवस्थाओं की संख्या। क्रमचय में क्रम मायने रखता है, संचय में नहीं।
| अवधारणा | सूत्र | क्रम का महत्व |
|---|---|---|
| क्रमचय | $^nP_r = n!/(n-r)!$ | क्रम मायने रखता है |
| संचय | $^nC_r = n!/[r!(n-r)!]$ | क्रम मायने नहीं रखता |
| पुनरावृत्ति क्रमचय | $n^r$ | पुनरावृत्ति स्वीकार्य |
| गुण | सूत्र |
|---|---|
| सममिति | $^nC_r = ^nC_{n-r}$ |
| पास्कल समानता | $^nC_r + ^nC_{r-1} = ^{n+1}C_r$ |
| संबंध | $^nP_r = r!\,^nC_r$ |
क्रमचय और संचय गणित की वे शाखाएँ हैं जो चयन और व्यवस्था की विधियों की गणना करती हैं और प्रायिकता के लिए आधार प्रदान करती हैं। गुणन तथा योग सिद्धांत, क्रमगुणित, क्रमचय, संचय और उनके गुण इस अध्याय के प्रमुख बिंदु हैं। यह समझना सबसे महत्वपूर्ण है कि क्रमचय में क्रम मायने रखता है जबकि संचय में नहीं। यह अध्याय द्विपद प्रमेय और प्रायिकता जैसे आगामी अध्यायों के लिए नींव का कार्य करता है।