त्रिकोणमिति गणित की वह शाखा है जो त्रिभुजों की भुजाओं और कोणों के बीच के संबंधों का अध्ययन करती है। कक्षा 10 में हमने समकोण त्रिभुज के आधार पर त्रिकोणमितीय अनुपात सीखे थे। इस अध्याय में हम त्रिकोणमितीय फलनों को इकाई वृत्त के माध्यम से सामान्यीकृत रूप में अध्ययन करेंगे, क्योंकि फलन के रूप में इनका प्रांत सभी वास्तविक संख्याएँ होती हैं। इससे किसी भी कोण का मान ज्ञात करना संभव हो जाता है।
कोण को दो प्रणालियों में मापा जाता है:
एक पूर्ण चक्र $= 360^\circ$। $1^\circ = 60'$ (मिनट), $1' = 60''$ (सेकंड)।
वृत्त की त्रिज्या के बराबर चाप द्वारा केंद्र पर बनाया गया कोण एक रेडियन कहलाता है। $$\pi \text{ रेडियन} = 180^\circ$$ $$1 \text{ रेडियन} = \frac{180^\circ}{\pi} \approx 57.3^\circ$$ $$1^\circ = \frac{\pi}{180} \text{ रेडियन}$$
कुछ महत्वपूर्ण रूपांतरण: - $30^\circ = \pi/6$ रेडियन - $45^\circ = \pi/4$ रेडियन - $60^\circ = \pi/3$ रेडियन - $90^\circ = \pi/2$ रेडियन - $180^\circ = \pi$ रेडियन - $270^\circ = 3\pi/2$ रेडियन
चाप की लंबाई $l = r\theta$, जहाँ $\theta$ रेडियन में है।
मान लीजिए $\theta$ कोई कोण है। तब: $$\sin\theta = \frac{\text{लंब}}{\text{कर्ण}}, \quad \cos\theta = \frac{\text{आधार}}{\text{कर्ण}}, \quad \tan\theta = \frac{\sin\theta}{\cos\theta}$$
$$\cot\theta = \frac{\cos\theta}{\sin\theta}, \quad \sec\theta = \frac{1}{\cos\theta}, \quad \operatorname{cosec}\theta = \frac{1}{\sin\theta}$$
$$\sin^2\theta + \cos^2\theta = 1$$ $$1 + \tan^2\theta = \sec^2\theta$$ $$1 + \cot^2\theta = \operatorname{cosec}^2\theta$$
चार चतुर्थांशों में चिह्नों को याद रखने का आसान तरीका "सभी सिन तान कोस" है: - प्रथम चतुर्थांश (0° से 90°): सभी धनात्मक - द्वितीय चतुर्थांश (90° से 180°): केवल sin और cosec धनात्मक - तृतीय चतुर्थांश (180° से 270°): केवल tan और cot धनात्मक - चतुर्थ चतुर्थांश (270° से 360°): केवल cos और sec धनात्मक
| कोण | 0° | 30° | 45° | 60° | 90° |
|---|---|---|---|---|---|
| sin | 0 | 1/2 | 1/√2 | √3/2 | 1 |
| cos | 1 | √3/2 | 1/√2 | 1/2 | 0 |
| tan | 0 | 1/√3 | 1 | √3 | अपरिभाषित |
फलनों $\sin\theta$, $\cos\theta$, $\sec\theta$, $\operatorname{cosec}\theta$ का आवर्तकाल $2\pi$ है, जबकि $\tan\theta$ और $\cot\theta$ का आवर्तकाल $\pi$ है। आवर्तकाल का अर्थ है कि $f(\theta + T) = f(\theta)$ सभी $\theta$ के लिए।
$$sin(2x) = 2\sin x \cos x$$ $$\cos(2x) = \cos^2 x - \sin^2 x = 2\cos^2 x - 1 = 1 - 2\sin^2 x$$ $$\sin(x + y) = \sin x \cos y + \cos x \sin y$$ $$\sin(x - y) = \sin x \cos y - \cos x \sin y$$ $$\cos(x + y) = \cos x \cos y - \sin x \sin y$$ $$\cos(x - y) = \cos x \cos y + \sin x \sin y$$ $$\tan(x + y) = \frac{\tan x + \tan y}{1 - \tan x \tan y}$$
$$2\sin x \cos y = \sin(x + y) + \sin(x - y)$$ $$2\cos x \sin y = \sin(x + y) - \sin(x - y)$$ $$2\cos x \cos y = \cos(x + y) + \cos(x - y)$$ $$2\sin x \sin y = \cos(x - y) - \cos(x + y)$$ $$\sin x + \sin y = 2\sin\frac{x + y}{2}\cos\frac{x - y}{2}$$ $$\cos x + \cos y = 2\cos\frac{x + y}{2}\cos\frac{x - y}{2}$$
| चतुर्थांश | धनात्मक फलन |
|---|---|
| I (0°-90°) | सभी |
| II (90°-180°) | sin, cosec |
| III (180°-270°) | tan, cot |
| IV (270°-360°) | cos, sec |
| डिग्री | रेडियन |
|---|---|
| 30° | π/6 |
| 45° | π/4 |
| 60° | π/3 |
| 90° | π/2 |
| 180° | π |
त्रिकोणमितीय फलन कक्षा 11 गणित का सबसे महत्वपूर्ण और व्यापक अध्याय है, जिसका उपयोग भौतिकी, अभियांत्रिकी और कक्षा 12 के सीमा-अवकलज में होता है। रेडियन माप, सर्वसमिकाएँ, चतुर्थांश चिह्न, योग-अंतर सूत्र और आवर्तकाल इस अध्याय के प्रमुख बिंदु हैं। इन सूत्रों का नियमित अभ्यास ही दक्षता प्रदान करता है, क्योंकि त्रिकोणमिति में स्मरण और अनुप्रयोग दोनों आवश्यक हैं।