अणुगति सिद्धांत (Kinetic Theory of Gases) गैसों के स्थूल (macroscopic) गुणों को उनके अणुओं की गति से जोड़ता है। यह सिद्धांत गैस के व्यवहार को समझने का आधारभूत सैद्धांतिक ढांचा प्रदान करता है। इसके अनुसार, गैस अत्यधिक संख्या में सूक्ष्म कणों (अणुओं) से बनी होती है जो निरंतर यादृच्छिक गति में रहते हैं। गैस का दाब इन अणुओं के पात्र की दीवारों से टकराने के कारण उत्पन्न होता है।
अणुगति सिद्धांत का महत्व यह है कि इससे गैस का दाब, ताप, आंतरिक ऊर्जा, विशिष्ट ऊष्मा धारिताएँ, अणुओं की गति की गति आदि की गणना की जा सकती है। सन 1738 में डेनियल बर्नौली ने इस सिद्धांत का प्रारंभिक रूप दिया।
आदर्श गैस के लिए अवस्था समीकरण: $$PV = nRT$$ जहाँ P दाब, V आयतन, n मोलों की संख्या, R सार्वत्रिक गैस स्थिरांक और T परम ताप है।
R का मान: $R = 8.31 \ J \ mol^{-1} \ K^{-1}$
किसी गैस का दाब उसके अणुओं की औसत गतिज ऊर्जा से संबंधित होता है: $$P = \frac{1}{3}\rho \bar{v^2} = \frac{1}{3}\frac{mN}{V}\bar{v^2}$$ जहाँ $\rho$ गैस का घनत्व और $\bar{v^2}$ अणुओं के वेगों के वर्ग का माध्य है।
$$v_{rms} = \sqrt{\frac{3P}{\rho}} = \sqrt{\frac{3RT}{M}}$$ जहाँ M गैस का मोलर द्रव्यमान है।
एक अणु की औसत गतिज ऊर्जा: $$KE = \frac{3}{2}kT$$ जहाँ $k$ बोल्ट्ज़मान स्थिरांक है, $k = \frac{R}{N_A} = 1.38 \times 10^{-23} \ J/K$।
एक मोल गैस की कुल गतिज ऊर्जा: $$KE = \frac{3}{2}RT$$
गैस के अणुओं में ऊर्जा के स्वतंत्र वितरण के लिए स्वातंत्र्य कोटि की संकल्पना आवश्यक है। स्वातंत्र्य कोटि किसी अणु की स्थिति निर्धारित करने के लिए आवश्यक स्वतंत्र निर्देशांकों की संख्या है।
प्रत्येक स्वातंत्र्य कोटि के लिए औसत ऊर्जा $\frac{1}{2}kT$ होती है।
मेयर के संबंध के अनुसार: $$C_P - C_V = R$$
एकपरमाणुक गैस के लिए: $$C_V = \frac{3}{2}R, \quad C_P = \frac{5}{2}R$$
$$\gamma = \frac{C_P}{C_V}$$ एकपरमाणुक गैस के लिए $\gamma = \frac{5}{3} = 1.67$।
अणुगति सिद्धांत से विभिन्न गैस नियमों को भी समझाया जा सकता है। स्थिर ताप पर दाब आयतन के व्युत्क्रमानुपाती होता है, जिसे बॉयल का नियम कहते हैं। स्थिर दाब पर आयतन ताप के अनुक्रमानुपाती होता है, जिसे चार्ल्स का नियम कहते हैं। इन नियमों की सांख्यिकीय व्याख्या अणुगति सिद्धांत देता है। गैस की आंतरिक ऊर्जा केवल ताप पर निर्भर करती है क्योंकि आदर्श गैस में अणुओं के बीच कोई स्थितिज ऊर्जा नहीं होती। इसी कारण समतापी प्रक्रम में आंतरिक ऊर्जा स्थिर रहती है।
अणुगति सिद्धांत का एक और महत्वपूर्ण परिणाम यह है कि गैस अणुओं की माध्य मुक्त पथ (mean free path) की संकल्पना से घनत्व, दाब और आणविक आकार के बीच संबंध ज्ञात होता है। गैस में अणु निरंतर टकराते रहते हैं और दो क्रमागत टक्करों के बीच अणु जो औसत दूरी तय करता है, उसे माध्य मुक्त पथ कहते हैं। यह संकल्पना वास्तविक गैसों के व्यवहार, प्रसार की दर तथा ऊष्मा चालन को समझने में सहायक है।
प्रयोगशाला में गैस का ताप थर्मामीटर से मापा जाता है, परंतु अणुगति सिद्धांत के अनुसार ताप केवल अणुओं की औसत गतिज ऊर्जा का माप है। परम शून्य ताप (0 K) पर अणुओं की गतिज ऊर्जा न्यूनतम हो जाती है। वास्तविक गैसें परम शून्य से पहले ही द्रवित हो जाती हैं, इसलिए यह आदर्श गैसों की संकल्पना है। इस प्रकार अणुगति सिद्धांत स्थूल गुणों को सूक्ष्म गति से जोड़कर भौतिकी की एकता को प्रदर्शित करता है। गैसों के अध्ययन में यह सिद्धांत ऊष्मागतिकी के नियमों के साथ मिलकर पूर्ण चित्र प्रस्तुत करता है।
| गैस का प्रकार | स्वातंत्र्य कोटि | CV | CP | γ = CP/CV |
|---|---|---|---|---|
| एकपरमाणुक | 3 | (3/2)R | (5/2)R | 1.67 (5/3) |
| द्विपरमाणुक | 5 | (5/2)R | (7/2)R | 1.40 (7/5) |
| राशि | सूत्र | विशेषता |
|---|---|---|
| आदर्श गैस समीकरण | PV = nRT | सभी अवस्थाओं में |
| RMS वेग | $v_{rms} = \sqrt{3RT/M}$ | T पर निर्भर |
| एक अणु की KE | (3/2)kT | केवल T पर निर्भर |
| मेयर का संबंध | CP - CV = R | सभी आदर्श गैसों के लिए |
अणुगति सिद्धांत गैसों के व्यवहार को उनके सूक्ष्म घटकों की गति से जोड़ता है। इस सिद्धांत के अभिधारणाएँ गैस के दाब, ताप और ऊर्जा की सांख्यिकीय व्याख्या प्रदान करती हैं। आदर्श गैस समीकरण और अणुगति सिद्धांत से प्राप्त दाब के व्यंजक एक-दूसरे से संगत हैं, जो सिद्धांत की शुद्धता को प्रमाणित करते हैं। ऊर्जा समविभाजन का नियम और स्वातंत्र्य कोटि की संकल्पना गैसों की विशिष्ट ऊष्मा धारिताओं की व्याख्या करती है। यह सिद्धांत ऊष्मागतिकी और सांख्यिकीय यांत्रिकी के बीच सेतु का कार्य करता है।