भौतिकी (Physics) विज्ञान की वह शाखा है जो पदार्थ और ऊर्जा के मूलभूत गुणों, उनके अंतर्संबंधों तथा प्रकृति में घटित होने वाली घटनाओं के नियमों का अध्ययन करती है। शब्द 'फिजिक्स' ग्रीक शब्द 'फ्यूसिस' से लिया गया है, जिसका अर्थ है 'प्रकृति'। प्राचीन काल से ही मानव ने आकाशीय पिंडों की गति, बिजली, चुंबकत्व, प्रकाश तथा ऊष्मा जैसी घटनाओं को समझने का प्रयास किया। भारत में आर्यभट्ट, ब्रह्मगुप्त और भास्कराचार्य जैसे वैज्ञानिकों ने खगोल विज्ञान तथा गणित के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दिया। आधुनिक भौतिकी की नींव गैलीलियो, न्यूटन, मैक्सवेल, आइंस्टीन जैसे वैज्ञानिकों के कार्यों पर आधारित है।
भौतिकी का क्षेत्र अत्यंत व्यापक है। यह क्वार्क जैसे अतिसूक्ष्म कणों से लेकर आकाशगंगाओं तक के अध्ययन तक विस्तृत है। भौतिकी की शाखाएँ मुख्यतः शास्त्रीय भौतिकी (यांत्रिकी, प्रकाशिकी, ध्वनि, ऊष्मा, विद्युत और चुंबकत्व) तथा आधुनिक भौतिकी (क्वांटम यांत्रिकी, सापेक्षता, परमाणु और कण भौतिकी) में विभाजित हैं। भौतिकी का क्षेत्र विज्ञान के अन्य क्षेत्रों जैसे रसायन विज्ञान, जीव विज्ञान और खगोल विज्ञान से अत्यंत घनिष्ठ रूप से जुड़ा हुआ है।
विज्ञान एक ज्ञान की प्रणाली है जो प्रेक्षण, प्रयोग, परिकल्पना और सिद्धांत निर्माण पर आधारित होती है। विज्ञान को मोटे तौर पर भौतिक विज्ञान (भौतिकी और रसायन), जैविक विज्ञान (वनस्पति और प्राणी विज्ञान) तथा तीसरे क्षेत्र (गणित, सांख्यिकी, तर्कशास्त्र) में विभाजित किया जा सकता है। भौतिकी को विज्ञान की जननी कहा जाता है क्योंकि यह सबसे मौलिक विज्ञान है। रसायन विज्ञान, जीव विज्ञान, भूविज्ञान तथा खगोल विज्ञान सभी भौतिकी के सिद्धांतों पर आधारित हैं।
भौतिकी का क्षेत्र अंतरिक्ष के पैमाने से लेकर अतिसूक्ष्म कणों के पैमाने तक फैला है। ब्रह्मांड की त्रिज्या लगभग $10^{26}$ मीटर है, जबकि प्रोटॉन की त्रिज्या लगभग $10^{-15}$ मीटर है। इस प्रकार भौतिकी की अध्ययन सीमा $10^{-15}$ से $10^{26}$ मीटर तक फैली हुई है। इस विशाल परास के बीच कण भौतिकी, परमाणु भौतिकी, नाभिकीय भौतिकी, ठोस अवस्था भौतिकी, खगोल भौतिकी आदि की शाखाएँ स्थित हैं।
भौतिकी के सबसे बड़े उपलब्धियों में से एक है विभिन्न प्रतीत होने वाली घटनाओं को कुछ ही मूलभूत नियमों द्वारा एकीकृत करना। भौतिकी का उद्देश्य प्रकृति के अनंत विविधता को सीमित संख्या में मूलभूत नियमों द्वारा समझाना है। उदाहरण के लिए, न्यूटन के गति के नियमों द्वारा पृथ्वी पर गिरते हुए पिंड तथा ग्रहों की गति दोनों को एक साथ समझाया जा सकता है। इसी प्रकार मैक्सवेल के विद्युत चुंबकत्व के समीकरणों द्वारा प्रकाश, रेडियो तरंगें, अवरक्त किरणें आदि सभी को एकीकृत रूप में समझाया गया।
प्रकृति में उपस्थित समस्त परस्पर क्रियाओं को चार मूलभूत बलों द्वारा समझाया जा सकता है। ये बल हैं:
यह बल किन्हीं दो पिंडों के बीच उनके द्रव्यमानों के कारण लगने वाला आकर्षण बल है। यह चारों बलों में सबसे दुर्बल बल है, परंतु इसकी परास अनंत होती है। गुरुत्वीय बल दूरी के वर्ग के व्युत्क्रमानुपाती होता है। इस बल की व्याख्या न्यूटन के गुरुत्वाकर्षण नियम द्वारा की जाती है: $$F = \frac{Gm_1 m_2}{r^2}$$ यहाँ $G = 6.67 \times 10^{-11}$ N m² kg⁻² गुरुत्वीय स्थिरांक है।
यह बल आवेशों के बीच कार्य करता है। यह गुरुत्वीय बल से लगभग $10^{36}$ गुना प्रबल है। इस बल की परास अनंत होती है। घर्षण, प्रत्यास्थता, श्यानता, रासायनिक बंध सभी विद्युत चुंबकीय बलों के ही विभिन्न रूप हैं।
यह बल नाभिक के प्रोटॉन और न्यूट्रॉन को एक साथ बांधता है। यह चारों बलों में सबसे प्रबल है, परंतु इसकी परास अत्यंत कम (लगभग $10^{-15}$ मीटर) होती है।
यह बल कुछ विशेष क्षयों (जैसे बीटा क्षय) के लिए उत्तरदायी होता है। यह विद्युत चुंबकीय बल से दुर्बल परंतु गुरुत्वीय बल से प्रबल होता है। इसकी परास भी अत्यंत कम होती है।
भौतिकी के नियमों की कई प्रमुख विशेषताएँ होती हैं। सबसे पहले, भौतिकी के नियम निर्धारणवादी (deterministic) होते हैं, अर्थात यदि किसी प्रणाली की प्रारंभिक स्थिति ज्ञात हो तो उसकी भविष्य की स्थिति की भविष्यवाणी की जा सकती है। दूसरे, भौतिकी के नियमों की सार्वभौमिकता होती है। न्यूटन के नियम जो पृथ्वी पर मान्य हैं, वे ही ब्रह्मांड के किसी भी कोने में मान्य हैं। तीसरे, भौतिकी के नियम सरलता के सिद्धांत पर आधारित होते हैं। इसके अतिरिक्त भौतिकी के नियमों में कई संरक्षण नियम प्रमुख हैं, जैसे ऊर्जा संरक्षण, रेखीय संवेग संरक्षण, कोणीय संवेग संरक्षण तथा आवेश संरक्षण। ये संरक्षण नियम सममिति के सिद्धांतों से संबंधित हैं।
भौतिकी की भी अपनी कुछ सीमाएँ हैं। क्वांटम यांत्रिकी में अनिश्चितता सिद्धांत के अनुसार किसी कण की स्थिति और संवेग को एक साथ पूर्ण यथार्थता से नहीं जाना जा सकता। इसके अलावा, शास्त्रीय यांत्रिकी के नियम प्रकाश की गति के समीप चलने वाले कणों पर लागू नहीं होते। ऐसे कणों के लिए आइंस्टीन की विशेष सापेक्षता का उपयोग होता है। अत्यधिक द्रव्यमान वाले पिंडों के लिए सामान्य सापेक्षता की आवश्यकता होती है। इस प्रकार भौतिकी के विभिन्न नियम विभिन्न परिस्थितियों में लागू होते हैं।
भौतिकी और तकनीकी के बीच घनिष्ठ संबंध है। भौतिकी में की गई खोजें तकनीकी के विकास का मार्ग प्रशस्त करती हैं। उदाहरण के लिए, विद्युत चुंबकीय प्रेरण की खोज ने विद्युत जनरेटर के विकास का मार्ग प्रशस्त किया। ट्रांजिस्टर की खोज ने इलेक्ट्रॉनिक्स और कंप्यूटर के विकास को संभव बनाया। लेज़र की खोज का उपयोग संचार, सर्जरी तथा उद्योग में होता है। इसके विपरीत, तकनीकी उपकरण भी भौतिकी के अनुसंधान में सहायता करते हैं। इलेक्ट्रॉन माइक्रोस्कोप, कण त्वरक तथा टेलीस्कोप इसके प्रमुख उदाहरण हैं।
| बल | सापेक्ष प्रबलता | परास | कार्य क्षेत्र |
|---|---|---|---|
| प्रबल नाभिकीय बल | $10^2$ (सर्वाधिक) | $10^{-15}$ मीटर (अल्प) | नाभिक के अंदर |
| विद्युत चुंबकीय बल | $10^{-2}$ | अनंत | आवेशों के बीच |
| दुर्बल नाभिकीय बल | $10^{-13}$ | $10^{-16}$ मीटर | बीटा क्षय |
| गुरुत्वीय बल | $10^{-38}$ (सबसे दुर्बल) | अनंत | सभी द्रव्यमानों के बीच |
| शाखा | अध्ययन क्षेत्र | प्रमुख वैज्ञानिक |
|---|---|---|
| यांत्रिकी | गति, बल, ऊर्जा | गैलीलियो, न्यूटन |
| विद्युत चुंबकत्व | विद्युत और चुंबकीय परिघटनाएँ | मैक्सवेल, फैराडे |
| प्रकाशिकी | प्रकाश का परावर्तन, अपवर्तन | न्यूटन, ह्यूजेन्स |
| ऊष्मा गतिकी | ऊष्मा और कार्य के बीच संबंध | कार्नोट, क्लॉसियस |
| क्वांटम यांत्रिकी | अतिसूक्ष्म कणों का व्यवहार | प्लांक, बोह्र, हाइजेनबर्ग |
| सापेक्षता | उच्च वेगों पर भौतिक परिघटनाएँ | आइंस्टीन |
भौतिक जगत का अध्ययन हमें बताता है कि ब्रह्मांड में व्याप्त अत्यंत जटिल प्रतीत होने वाली घटनाएँ कुछ ही मूलभूत नियमों द्वारा नियंत्रित होती हैं। चार मूलभूत बल तथा कुछ संरक्षण नियम समस्त भौतिक परिघटनाओं की व्याख्या करते हैं। भौतिकी का क्षेत्र अतिसूक्ष्म कणों से लेकर विशाल आकाशगंगाओं तक विस्तृत है, और इसकी खोजों ने तकनीकी के विकास को गति दी है। यह अध्याय भौतिकी की सैद्धांतिक नींव को समझने के लिए आधारभूत है, जिसे बाद के अध्यायों में विस्तार से पढ़ा जाएगा। भौतिकी के नियमों की सार्वभौमिकता और सरलता ही इसे विज्ञान का सबसे मौलिक विषय बनाती है।