दोलन (Oscillation) वह गति है जो समय के साथ बार-बार दोहराई जाती है। ऐसी गति को आवर्ती गति (Periodic Motion) कहते हैं। यदि कोई पिंड एक निश्चित समय अंतराल के बाद अपनी मूल स्थिति में लौट आता है, तो उसकी गति आवर्ती होती है। आवर्ती गति का विशेष प्रकार जिसमें वस्तु एक साम्य बिंदु के दोनों ओर दोलन करती है, दोलनी या कंपन गति कहलाती है।
दोलनी गति का सबसे महत्वपूर्ण उदाहरण सरल आवर्त गति (Simple Harmonic Motion) है। सरल आवर्त गति वह दोलनी गति है जिसमें प्रत्यानयन बल (restoring force) विस्थापन के अनुक्रमानुपाती होता है और साम्य स्थिति की ओर निर्देशित होता है।
किसी कण की सरल आवर्त गति में, त्वरण हमेशा साम्य स्थिति की ओर निर्देशित होता है और विस्थापन के समानुपाती होता है: $$a = -\omega^2 x$$ यहाँ $\omega$ कोणीय आवृत्ति और $x$ विस्थापन है। ऋणात्मक चिह्न दर्शाता है कि त्वरण साम्य स्थिति की ओर है।
$$x = A\sin(\omega t + \phi)$$ जहाँ $A$ आयाम (amplitude) है, $\phi$ प्रारंभिक कला है।
$$v = A\omega\cos(\omega t + \phi) = \omega\sqrt{A^2 - x^2}$$ - साम्य स्थिति (x = 0) पर वेग अधिकतम: $v_{max} = A\omega$ - चरम बिंदुओं (x = ±A) पर वेग शून्य।
$$a = -\omega^2 A\sin(\omega t + \phi) = -\omega^2 x$$ - साम्य स्थिति पर त्वरण शून्य। - चरम बिंदुओं पर त्वरण अधिकतम: $a_{max} = \omega^2 A$
SHM में कुल यांत्रिक ऊर्जा स्थिर रहती है: $$E = \frac{1}{2}m\omega^2 A^2$$
साम्य स्थिति पर KE अधिकतम और PE न्यूनतम; चरम बिंदुओं पर KE न्यूनतम और PE अधिकतम।
$$\omega = \sqrt{\frac{k}{m}}, \quad T = 2\pi\sqrt{\frac{m}{k}}$$ जहाँ $k$ स्प्रिंग स्थिरांक है।
$$T = 2\pi\sqrt{\frac{L}{g}}$$ जहाँ $L$ लोलक की लंबाई है।
जब किसी दोलनशील निकाय पर अवमंदन बल (जैसे घर्षण) कार्य करता है, तो ऊर्जा का ह्रास होता है और आयाम धीरे-धीरे घटता है। ऐसे दोलन अवमंदित दोलन कहलाते हैं। यदि अवमंदन बल वेग के समानुपाती हो, तो: $$F_d = -bv$$ जहाँ $b$ अवमंदन स्थिरांक है।
जब किसी दोलनशील निकाय पर बाह्य आवधिक बल की आवृत्ति निकाय की प्राकृतिक आवृत्ति के बराबर हो जाती है, तो आयाम अधिकतम हो जाता है। इस घटना को अनुनाद कहते हैं।
सरल आवर्त गति केवल स्प्रिंग और लोलक तक सीमित नहीं है, बल्कि यह प्रकृति में व्यापक रूप से पाई जाती है। परमाणुओं का कंपन, अणुओं की कंपन गति, पेंडुलम घड़ी की सुइयों की गति, संगीत वाद्यों की डोरियों का कंपन सभी सरल आवर्त गति के उदाहरण हैं। पृथ्वी के अंदर किसी भी मार्ग में गतिमान वस्तु भी लगभग सरल आवर्त गति करती है। इससे पता चलता है कि SHM एक सार्वभौमिक गति है।
विभिन्न दोलनशील निकायों की तुलना से यह समझ आता है कि कोणीय आवृत्ति और आवर्तकाल निकाय की विशेषताओं पर निर्भर करते हैं। उदाहरण के लिए, स्प्रिंग-द्रव्यमान निकाय में आवर्तकाल स्प्रिंग स्थिरांक और द्रव्यमान पर निर्भर करता है, जबकि सरल लोलक में यह केवल लंबाई और गुरुत्वीय त्वरण पर निर्भर करता है। यदि लोलक को चंद्रमा पर ले जाया जाए, जहाँ g पृथ्वी की तुलना में लगभग छठवाँ भाग होता है, तो उसका आवर्तकाल लगभग 2.45 गुना बढ़ जाता है। इसी कारण पेंडुलम घड़ियाँ चंद्रमा पर धीमी चलती हैं।
अवमंदन की घटना भी दैनिक जीवन में दिखती है। वाहनों में शॉक अवशोषक अवमंदन के सिद्धांत पर कार्य करते हैं, जो कंपन को जल्दी समाप्त करते हैं। संगीत के स्वरों में अनुनाद का अत्यधिक महत्व है; संगीत वाद्यों की गुंज (resonance box) अनुनाद के कारण ही ध्वनि को प्रबल करती है। सेना की टुकड़ी जब किसी पुल पर कदमताल करके चलती है, तो पुल के कंपन में अनुनाद उत्पन्न होकर पुल टूट सकता है। इसीलिए पुल पार करते समय कदमताल छोड़ दी जाती है। इस प्रकार दोलन और उनसे संबंधित संकल्पनाएँ अभियांत्रिकी और दैनिक जीवन दोनों में महत्वपूर्ण हैं। इस अध्याय के अध्ययन से सभी दोलनशील प्रणालियों के विश्लेषण की विधि प्राप्त होती है।
संख्यात्मक समस्याओं को हल करते समय SHM की संकल्पनाओं का सही अनुप्रयोग आवश्यक है। सबसे पहले दिए गए आयाम, कोणीय आवृत्ति और समय से विस्थापन ज्ञात करें, फिर उससे वेग और त्वरण की गणना करें। अधिकतम वेग साम्य स्थिति पर और अधिकतम त्वरण चरम बिंदुओं पर होता है, यह याद रखना समस्याओं को सरल बनाता है। ऊर्जा संबंधी प्रश्नों में कुल ऊर्जा आयाम के वर्ग के अनुक्रमानुपाती होती है; आयाम दोगुना करने पर ऊर्जा चार गुना हो जाती है। सरल लोलक की तुलना में स्प्रिंग-द्रव्यमान निकाय में गुरुत्वाकर्षण के स्थान पर स्प्रिंग स्थिरांक की भूमिका होती है। इन सूक्ष्म अंतरों को समझकर ही विभिन्न परिस्थितियों में दोलन के प्रश्नों को हल किया जा सकता है।
| राशि | सूत्र | साम्य पर | चरम पर |
|---|---|---|---|
| विस्थापन x | $A\sin(\omega t + \phi)$ | 0 | ±A |
| वेग v | $\omega\sqrt{A^2-x^2}$ | अधिकतम (Aω) | शून्य |
| त्वरण a | $-\omega^2x$ | शून्य | अधिकतम (Aω²) |
| KE | $\frac{1}{2}m\omega^2(A^2-x^2)$ | अधिकतम | न्यूनतम |
| PE | $\frac{1}{2}m\omega^2x^2$ | न्यूनतम | अधिकतम |
| निकाय | कोणीय आवृत्ति | आवर्तकाल |
|---|---|---|
| स्प्रिंग-द्रव्यमान | $\omega = \sqrt{k/m}$ | $T = 2\pi\sqrt{m/k}$ |
| सरल लोलक | $\omega = \sqrt{g/L}$ | $T = 2\pi\sqrt{L/g}$ |
दोलन का अध्ययन भौतिकी की सबसे व्यापक रूप से लागू होने वाली संकल्पनाओं में से एक है। सरल आवर्त गति दोलनी गति का मूलभूत मॉडल है जो स्प्रिंग, लोलक, संगीत वाद्य, विद्युत परिपथ आदि में पाई जाती है। SHM में वेग, त्वरण और ऊर्जा का आवर्ती व्यवहार इसकी विशेषता है। ऊर्जा संरक्षण दोलनों में भी लागू होता है। अवमंदन और अनुनाद की संकल्पनाएँ वास्तविक दुनिया की घटनाओं (जैसे पुल का कंपन, ध्वनि अनुनाद) को समझाने में सहायक हैं। यह अध्याय अगले अध्याय 'तरंगें' के लिए आधार प्रदान करता है।