ताप (Temperature) और ऊष्मा (Heat) द्रव्य के तापीय गुणों से संबंधित दो प्रमुख संकल्पनाएँ हैं। ताप किसी निकाय की आणविक गति की औसत गतिज ऊर्जा का माप है, जबकि ऊष्मा ऊर्जा का वह रूप है जो ताप में अंतर के कारण एक निकाय से दूसरे निकाय में प्रवाहित होती है। तापीय गुणों का अध्ययन ऊष्मा गतिकी (Thermodynamics) के विषय से घनिष्ठ रूप से जुड़ा है।
ताप के मापन के लिए थर्मामीटर का उपयोग होता है। ताप के मात्रक केल्विन (K), सेल्सियस (°C) और फारेनहाइट (°F) हैं। इस अध्याय में हम तापीय प्रसार, ऊष्मा धारिता, विशिष्ट ऊष्मा, अवस्था परिवर्तन, ऊष्मा चालन तथा किरणीय ऊष्मा स्थानांतरण का अध्ययन करेंगे।
ताप पैमानों के बीच संबंध: $$\frac{C}{100} = \frac{F - 32}{180} = \frac{K - 273.15}{100}$$ सेल्सियस और फारेनहाइट में संबंध: $$F = \frac{9}{5}C + 32$$ सेल्सियस और केल्विन में: $$K = C + 273.15$$
ताप बढ़ने पर पदार्थ का आकार बढ़ता है। यह घटना तापीय प्रसार कहलाती है।
लंबाई में प्रसार: $$\Delta L = \alpha L \Delta T$$ जहाँ $\alpha$ रेखीय प्रसार गुणांक है।
क्षेत्रफल में प्रसार: $$\Delta A = \beta A \Delta T$$ जहाँ $\beta$ क्षेत्रीय प्रसार गुणांक है।
आयतन में प्रसार: $$\Delta V = \gamma V \Delta T$$ जहाँ $\gamma$ आयतन प्रसार गुणांक है।
गुणांकों में संबंध: $$\beta = 2\alpha, \quad \gamma = 3\alpha$$
किसी पिंड का ताप 1 K बढ़ाने के लिए आवश्यक ऊष्मा की मात्रा: $$C = \frac{\Delta Q}{\Delta T}$$
इकाई द्रव्यमान का ताप 1 K बढ़ाने के लिए आवश्यक ऊष्मा: $$s = \frac{\Delta Q}{m\Delta T}$$ जल की विशिष्ट ऊष्मा धारिता $s = 4.186 \ J/g \cdot K$ या $4186 \ J/kg \cdot K$ होती है।
$$C = \frac{\Delta Q}{\mu \Delta T}$$
पदार्थ की अवस्था (ठोस, द्रव, गैस) में परिवर्तन अवस्था परिवर्तन कहलाता है। अवस्था परिवर्तन के दौरान ताप स्थिर रहता है, भले ही ऊष्मा दी जाती रहे।
गुप्त ऊष्मा (Latent Heat): अवस्था परिवर्तन के दौरान अवशोषित या उत्सर्जित ऊष्मा: $$Q = mL$$
गलन की गुप्त ऊष्मा (Latent Heat of Fusion): ठोस से द्रव में परिवर्तन के लिए (जल के लिए $L_f = 80 \ cal/g$ या $3.35 \times 10^5 \ J/kg$)
ऊष्मा चालन में ऊष्मा का स्थानांतरण माध्यम की परतों से होता है। फूरिये का चालन नियम: $$H = \frac{\Delta Q}{\Delta t} = -KA\frac{dT}{dx}$$ जहाँ $K$ ऊष्मीय चालकता है।
$$R = \frac{L}{KA}$$
ऊष्मा का वह स्थानांतरण जिसमें माध्यम की आवश्यकता नहीं होती, किरणीय स्थानांतरण कहलाता है। स्टीफन-बोल्ट्ज़मान नियम के अनुसार: $$E = \sigma T^4$$ जहाँ $\sigma = 5.67 \times 10^{-8} \ W/m^2K^4$ स्टीफन-बोल्ट्ज़मान स्थिरांक है।
$$\lambda_m T = \text{स्थिरांक} = 2.898 \times 10^{-3} \ m \cdot K$$
जब दो पदार्थों को विभिन्न तापों पर मिलाया जाता है, तो ऊष्मा गर्म पदार्थ से ठंडे पदार्थ की ओर तब तक प्रवाहित होती है जब तक दोनों का ताप समान नहीं हो जाता। इस सिद्धांत पर कैलोरीमेट्री आधारित है। ऊष्मा संतुलन की स्थिति में गर्म पदार्थ द्वारा खोई गई ऊष्मा, ठंडे पदार्थ द्वारा अर्जित ऊष्मा के बराबर होती है। इसी विधि से किसी पदार्थ की विशिष्ट ऊष्मा धारिता ज्ञात की जाती है। कैलोरीमीटर नामक उपकरण इसी सिद्धांत पर कार्य करता है।
जल की विशिष्ट ऊष्मा धारिता का अधिक होना कई घटनाओं की व्याख्या करता है। समुद्री तटीय क्षेत्रों में दिन और रात के ताप में कम अंतर होता है, क्योंकि जल की उच्च ऊष्मा धारिता ऊष्मा को धीरे-धीरे अवशोषित और मुक्त करती है। इसी प्रकार, जल के उच्च वाष्पन की गुप्त ऊष्मा के कारण पसीना आने पर शरीर ठंडा होता है, क्योंकि पसीने के वाष्पन के लिए शरीर से ऊष्मा ली जाती है। गर्म देशों में मिट्टी के घड़े में जल ठंडा रहता है, क्योंकि घड़े से रिसने वाले जल के वाष्पन से आंतरिक जल की ऊष्मा नष्ट होती है।
रेफ्रिजरेटर, एयर कंडीशनर और थर्मस फ्लास्क ऊष्मा स्थानांतरण के सिद्धांतों पर कार्य करते हैं। थर्मस फ्लास्क की दोहरी दीवारों के बीच निर्वात चालन और संवहन को रोकता है, चमकदार चाँदी की सतह विकिरण को कम करती है, और कॉर्क का ढक्कन चालन को घटाता है। ऊष्मा स्थानांतरण के तीनों माध्यमों की गहरी समझ के बिना ऐसे उपकरणों का विकास संभव नहीं था। इस प्रकार द्रव्य के तापीय गुणों का अध्ययन केवल सैद्धांतिक ज्ञान नहीं, बल्कि अनेक व्यावहारिक तकनीकों का आधार है।
संख्यात्मक समस्याओं में ऊष्मा संतुलन के सिद्धांत का उपयोग करके मिश्रण का अंतिम ताप ज्ञात किया जा सकता है। यदि m1 द्रव्यमान का गर्म पदार्थ विशिष्ट ऊष्मा s1 से तापमान T1 पर है और m2 द्रव्यमान का ठंडा पदार्थ s2 से T2 ताप पर है, तो मिलाने पर अंतिम ताप T में खोई ऊष्मा और अर्जित ऊष्मा बराबर होती है। कैलोरीमीटर का जल समतुल्य भी ध्यान में रखा जाता है, क्योंकि कैलोरीमीटर स्वयं भी कुछ ऊष्मा अवशोषित करता है। अवस्था परिवर्तन वाले प्रश्नों में पहले तय करें कि ऊष्मा का उपयोग केवल ताप बढ़ाने में हो रहा है या अवस्था बदलने में। दोनों क्रियाएँ एक साथ होने पर ऊष्मा की गणना दो भागों में की जाती है। तापीय प्रसार की समस्याओं में रैखिक, क्षेत्रीय और आयतन प्रसार के गुणांकों का सही चयन आवश्यक है, क्योंकि सड़क की पटरियों, पुलों और इंजीनियरिंग संरचनाओं में तापीय प्रसार की भरपाई के लिए यह गणना अपरिहार्य है।
| प्रसार का प्रकार | गुणांक | सूत्र | संबंध |
|---|---|---|---|
| रेखीय | α | $\Delta L = \alpha L \Delta T$ | मूल |
| क्षेत्रीय | β | $\Delta A = \beta A \Delta T$ | β = 2α |
| आयतन | γ | $\Delta V = \gamma V \Delta T$ | γ = 3α |
| राशि | मान |
|---|---|
| विशिष्ट ऊष्मा धारिता | 4186 J/kg·K (1 cal/g·°C) |
| गलन की गुप्त ऊष्मा | 3.35 x 10^5 J/kg |
| वाष्पन की गुप्त ऊष्मा | 2.256 x 10^6 J/kg |
| जल का त्रैक बिंदु | 273.16 K |
द्रव्य के तापीय गुणों का अध्ययन ऊष्मा और ताप की मौलिक संकल्पनाओं को समझाता है। तापीय प्रसार पदार्थों के ताप पर आकार बदलने का नियम देता है जो इंजीनियरिंग में महत्वपूर्ण है। ऊष्मा धारिता और विशिष्ट ऊष्मा की संकल्पनाएँ ऊष्मा मापन और कैलोरीमेट्री का आधार हैं। अवस्था परिवर्तन और गुप्त ऊष्मा पदार्थ के व्यवहार को समझने में सहायक हैं। ऊष्मा स्थानांतरण के तीन माध्यम (चालन, संवहन, विकिरण) दैनिक जीवन और उद्योगों में प्रयुक्त होते हैं। यह अध्याय अगले अध्याय 'ऊष्मागतिकी' की तैयारी कराता है।