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1. परिचय

गुरुत्वाकर्षण ब्रह्मांड का सबसे व्यापक बल है जो सभी द्रव्यमानों के बीच कार्य करता है। यही बल पृथ्वी की ओर वस्तुओं के गिरने, ग्रहों की सूर्य के चारों ओर गति तथा चंद्रमा की पृथ्वी के चारों ओर गति के लिए उत्तरदायी है। न्यूटन ने 1687 में अपने गुरुत्वाकर्षण के सार्वत्रिक नियम का प्रतिपादन किया। उन्होंने यह विचार व्यक्त किया कि पृथ्वी से सेब के गिरने और चंद्रमा की गति का कारण एक ही बल है।

आधुनिक भौतिकी में आइंस्टीन के सामान्य सापेक्षता सिद्धांत के अनुसार गुरुत्वाकर्षण द्रव्यमान के कारण स्पेस-टाइम की वक्रता है। परंतु इस अध्याय में हम न्यूटन के गुरुत्वाकर्षण नियम का ही अध्ययन करेंगे।

2. न्यूटन का गुरुत्वाकर्षण का सार्वत्रिक नियम

न्यूटन के नियम के अनुसार, ब्रह्मांड के प्रत्येक कण, अन्य प्रत्येक कण को अपनी ओर एक बल से आकर्षित करता है जो उनके द्रव्यमानों के गुणनफल के समानुपाती तथा उनके बीच की दूरी के वर्ग के व्युत्क्रमानुपाती होता है: $$F = \frac{Gm_1m_2}{r^2}$$ जहाँ $G = 6.67 \times 10^{-11} \ N \ m^2 \ kg^{-2}$ गुरुत्वीय स्थिरांक है।

गुरुत्वीय बल की प्रमुख विशेषताएँ: - यह सदैव आकर्षणात्मक होता है, कभी प्रतिकर्षणात्मक नहीं। - यह मध्यम (medium) पर निर्भर नहीं करता। - यह द्रव्यमानों के केंद्रों के बीच कार्य करता है। - यह न्यूटन के तृतीय नियम का पालन करता है।

3. गुरुत्वीय त्वरण (Acceleration due to Gravity)

पृथ्वी की सतह के पास किसी वस्तु पर लगने वाला गुरुत्वीय बल: $$F = mg = \frac{GM_Em}{R_E^2}$$ अतः पृथ्वी की सतह पर गुरुत्वीय त्वरण: $$g = \frac{GM_E}{R_E^2}$$ जहाँ $M_E$ पृथ्वी का द्रव्यमान और $R_E$ पृथ्वी की त्रिज्या है।

पृथ्वी की सतह से ऊँचाई h पर g

$$g_h = g\left(1 - \frac{2h}{R_E}\right) \quad (h \ll R_E)$$

पृथ्वी की सतह के नीचे गहराई d पर g

$$g_d = g\left(1 - \frac{d}{R_E}\right)$$

4. गुरुत्वीय स्थितिज ऊर्जा (Gravitational Potential Energy)

किसी द्रव्यमान $m$ की पृथ्वी से दूरी $r$ पर स्थिति वस्तु की गुरुत्वीय स्थितिज ऊर्जा: $$U = -\frac{GMm}{r}$$ ऋणात्मक चिह्न यह दर्शाता है कि गुरुत्वीय बल आकर्षणात्मक है। पृथ्वी की सतह पर: $$U = -\frac{GM_Em}{R_E}$$

गुरुत्वीय विभव (Gravitational Potential)

$$V = -\frac{GM}{r}$$

5. पलायन वेग (Escape Velocity)

पलायन वेग वह न्यूनतम वेग है जिससे किसी वस्तु को ऊपर फेंकने पर वह पृथ्वी के गुरुत्वीय क्षेत्र से बाहर निकल जाती है। इसके लिए गतिज ऊर्जा, गुरुत्वीय स्थितिज ऊर्जा के बराबर होनी चाहिए: $$\frac{1}{2}mv_e^2 = \frac{GM_Em}{R_E}$$ $$v_e = \sqrt{\frac{2GM_E}{R_E}} = \sqrt{2gR_E}$$ पृथ्वी के लिए पलायन वेग लगभग $11.2 \ km/s$ है।

6. उपग्रह (Satellites)

पृथ्वी के चारों ओर घूमने वाले उपग्रह की गति में आवश्यक अभिकेंद्री बल गुरुत्वीय बल प्रदान करता है: $$\frac{GM_Em}{r^2} = \frac{mv^2}{r}$$

कक्षीय वेग (Orbital Velocity)

$$v_o = \sqrt{\frac{GM_E}{r}} = \sqrt{gR_E} \quad (r \approx R_E)$$

परिक्रमण काल (Time Period)

$$T = \frac{2\pi r}{v_o} = 2\pi\sqrt{\frac{r^3}{GM_E}}$$

भूस्थैतिक उपग्रह (Geostationary Satellite)

भूस्थैतिक उपग्रह पृथ्वी के भूमध्य रेखा के ऊपर स्थित होता है और पृथ्वी के साथ समान कोणीय वेग से घूमता है। इसकी ऊँचाई लगभग $35,786$ किमी और परिक्रमण काल 24 घंटे होता है। ऐसे उपग्रह पृथ्वी के किसी स्थान के सापेक्ष स्थिर प्रतीत होते हैं।

9. गुरुत्वीय क्षेत्र और खगोलीय गति

किसी द्रव्यमान के चारों ओर का वह क्षेत्र जिसमें कोई अन्य द्रव्यमान गुरुत्वीय बल का अनुभव करता है, गुरुत्वीय क्षेत्र कहलाता है। किसी बिंदु पर गुरुत्वीय क्षेत्र की तीव्रता उस बिंदु पर एकांक द्रव्यमान पर लगने वाला बल होता है। यह तीव्रता द्रव्यमान के केंद्र से दूरी के वर्ग के व्युत्क्रमानुपाती होती है। गुरुत्वीय क्षेत्र की संकल्पना से ग्रहों की गति, उपग्रहों की कक्षाएँ और पलायन वेग को सुविधापूर्वक समझा जा सकता है।

खगोलीय पिंडों की गति केपलर के तीन नियमों द्वारा वर्णित होती है। प्रथम नियम के अनुसार ग्रह सूर्य के चारों ओर दीर्घवृत्तीय कक्षाओं में घूमते हैं, जिनमें सूर्य एक नाभि पर स्थित होता है। द्वितीय नियम के अनुसार सूर्य से ग्रह को मिलाने वाली रेखा समान समय में समान क्षेत्रफल तय करती है, जो कोणीय संवेग संरक्षण का परिणाम है। तृतीय नियम के अनुसार परिक्रमण काल का वर्ग अर्ध-मुख्य अक्ष के घन के अनुक्रमानुपाती होता है। इन्हीं नियमों के आधार पर न्यूटन ने अपना गुरुत्वाकर्षण नियम प्रतिपादित किया था।

पृथ्वी के चारों ओर घूमते उपग्रहों में कक्षीय वेग त्रिज्या पर निर्भर करता है। कक्षा की त्रिज्या बढ़ाने पर कक्षीय वेग घटता है, परंतु परिक्रमण काल बढ़ता है। अंतरिक्ष यात्री जब कक्षा में होते हैं, तो वे भारहीनता का अनुभव करते हैं। यह भारहीनता इसलिए होती है क्योंकि उपग्रह और यात्री दोनों एक साथ गुरुत्वीय बल के अधीन मुक्त रूप से गिरते रहते हैं। वास्तव में भारहीनता का अर्थ यह नहीं है कि गुरुत्वीय बल नहीं लगता, बल्कि अभिलंब बल अनुपस्थित होता है। इस प्रकार गुरुत्वाकर्षण के अध्ययन से खगोलीय और कृत्रिम उपग्रहों की गति की पूर्ण समझ प्राप्त होती है।

त्वरित पुनरावृत्ति तालिकाएँ

तालिका 1: गुरुत्वाकर्षण से संबंधित प्रमुख राशियाँ

राशि सूत्र महत्वपूर्ण तथ्य
गुरुत्वीय बल $F = Gm_1m_2/r^2$ सदैव आकर्षणात्मक
सतह पर g $g = GM/R^2$ ≈ 9.8 m/s²
ऊँचाई पर g $g_h = g(1-2h/R)$ घटता है
पलायन वेग $v_e = \sqrt{2gR}$ पृथ्वी पर ≈ 11.2 km/s
कक्षीय वेग $v_o = \sqrt{GM/r}$ $v_o = v_e/\sqrt{2}$

तालिका 2: पलायन वेग और कक्षीय वेग की तुलना

गुण पलायन वेग कक्षीय वेग
परिभाषा गुरुत्वीय क्षेत्र से बाहर निकलने के लिए आवश्यक वेग वृत्तीय कक्षा में गति के लिए आवश्यक वेग
सूत्र $v_e = \sqrt{2GM/R}$ $v_o = \sqrt{GM/r}$
संबंध $v_e = \sqrt{2} \times v_o$ $v_o = v_e/\sqrt{2}$
द्रव्यमान पर निर्भरता नहीं नहीं

माइंड मैप

graph TD A["गुरुत्वाकर्षण"] --> B["न्यूटन का नियम"] A --> C["गुरुत्वीय त्वरण"] A --> D["गुरुत्वीय स्थितिज ऊर्जा"] A --> E["पलायन वेग"] A --> F["उपग्रह"] B --> B1["F = Gm1m2/r²"] C --> C1["g = GM/R²"] C --> C2["ऊँचाई पर घटता है"] D --> D1["U = -GMm/r"] E --> E1["ve = √(2GM/R)"] E --> E2["पृथ्वी पर 11.2 km/s"] F --> F1["कक्षीय वेग vo = √(GM/r)"] F --> F2["भूस्थैतिक उपग्रह: 24 घंटे"]

महत्वपूर्ण आरेख (SVG)

आरेख 1: पलायन वेग बनाम कक्षीय वेग

पलायन वेग और कक्षीय वेग पृथ्वी कक्षीय वेग vo = √(GM/r) उपग्रह पलायन वेग: ve = √(2GM/R) = √2 x vo ≈ 11.2 km/s ve > v > vo: दीर्घवृत्तीय कक्षा, v > ve: बाहर निकल जाता है स्वर्ण नियम (Golden Rule) कक्षीय वेग vo = √(GM/r) और पलायन वेग ve = √(2GM/R); ve = √2 x vo; दोनों पिंड के द्रव्यमान से स्वतंत्र हैं।
पलायन वेग: संकल्पना चित्र वस्तु को वेग v से फेंका गया गतिज ऊर्जा = ½mv² गुरुत्वीय स्थितिज ऊर्जा = GMm/R पलायन हेतु: ½mve² = GMm/R ve = √(2GM/R) = √(2gR) पृथ्वी के लिए ve ≈ 11.2 km/s स्वर्ण नियम (Golden Rule) पलायन वेग वस्तु के द्रव्यमान पर निर्भर नहीं करता; केवल ग्रह के द्रव्यमान और त्रिज्या पर निर्भर करता है (ve = √(2GM/R))।

आरेख 2: भूस्थैतिक उपग्रह की कक्षा

भूस्थैतिक उपग्रह पृथ्वी उपग्रह पृथ्वी से ऊँचाई ≈ 35,786 km कक्षीय त्रिज्या r परिक्रमण काल T = 24 घंटे कोणीय वेग = पृथ्वी का कोणीय वेग भूमध्य रेखा के ऊपर स्थित होता है स्वर्ण नियम (Golden Rule) भूस्थैतिक उपग्रह: T = 24 घंटे, भूमध्य रेखा के ऊपर, ऊँचाई ≈ 35,786 km; ये पृथ्वी के सापेक्ष स्थिर प्रतीत होते हैं। संचार उपग्रहों में प्रयुक्त

सामान्य गलतियाँ

  1. गुरुत्वीय बल को केवल पृथ्वी से संबंधित मानना गलत है। यह ब्रह्मांड के प्रत्येक द्रव्यमान के बीच कार्य करता है, इसीलिए इसे 'सार्वत्रिक' नियम कहा जाता है।
  2. g का मान पृथ्वी की सतह से ऊँचाई और गहराई दोनों पर घटता है, परंतु कई छात्र गहराई पर g बढ़ने की गलती करते हैं।
  3. पलायन वेग वस्तु के द्रव्यमान पर निर्भर नहीं करता, इसे द्रव्यमान पर निर्भर मानना सामान्य भूल है। $v_e = \sqrt{2GM/R}$ में m नहीं आता।
  4. कक्षीय वेग और पलायन वेग में भ्रम होता है। कक्षीय वेग $v_o = \sqrt{GM/r}$ है जबकि पलायन वेग $v_e = \sqrt{2GM/R}$ है, अतः $v_e = \sqrt{2}v_o$।
  5. गुरुत्वीय स्थितिज ऊर्जा का मान ऋणात्मक होता है ($U = -GMm/r$), इसे धनात्मक मानना गलत है।
  6. भूस्थैतिक उपग्रह के परिक्रमण काल को 24 घंटे के अलावा कुछ और लिखना गलत है। इसका परिक्रमण काल पृथ्वी के घूर्णन काल के बराबर (24 घंटे) होता है।
  7. गुरुत्वीय स्थिरांक G और गुरुत्वीय त्वरण g को एक ही राशि मानना गलत है। G एक सार्वत्रिक स्थिरांक है जबकि g स्थान पर निर्भर करता है।

परीक्षा युक्तियाँ

  1. न्यूटन के गुरुत्वाकर्षण नियम का सूत्र $F = Gm_1m_2/r^2$ और G का मान $6.67 \times 10^{-11}$ N m² kg⁻² लिखना न भूलें।
  2. पलायन वेग के सूत्र $v_e = \sqrt{2gR}$ को याद रखें; पृथ्वी पर यह लगभग 11.2 km/s है, यह तथ्य प्रश्न में बार-बार आता है।
  3. ऊँचाई पर g का सूत्र $g_h = g(1-2h/R)$ (जब h छोटा हो) और गहराई पर $g_d = g(1-d/R)$ याद रखें।
  4. उपग्रह के प्रश्नों में कक्षीय वेग $v_o = \sqrt{GM/r}$ और परिक्रमण काल $T = 2\pi\sqrt{r^3/GM}$ का उपयोग करें।
  5. भूस्थैतिक उपग्रह के तीन गुण याद रखें: T = 24 घंटे, भूमध्य रेखा के ऊपर, ऊँचाई लगभग 35,786 km।
  6. गुरुत्वीय स्थितिज ऊर्जा $U = -GMm/r$ में ऋणात्मक चिह्न का कारण बताना (आकर्षणात्मक प्रकृति) लिखकर अंक बढ़ाएँ।
  7. केपलर के नियमों से संबंधित प्रश्नों में तीसरा नियम $T^2 \propto a^3$ याद रखें।

निष्कर्ष

गुरुत्वाकर्षण ब्रह्मांड को जोड़ने वाला मूलभूत बल है। न्यूटन के सार्वत्रिक गुरुत्वाकर्षण नियम ने खगोलीय पिंडों की गति को सरलता से समझाया। गुरुत्वीय त्वरण g का स्थान के साथ परिवर्तन ऊँचाई, गहराई और पृथ्वी की आकृति से संबंधित है। पलायन वेग की संकल्पना अंतरिक्ष यात्रा की नींव है। उपग्रहों की गति, कक्षीय वेग और भूस्थैतिक उपग्रह आधुनिक संचार प्रणालियों के लिए आधारभूत हैं। यह अध्याय खगोल विज्ञान और अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी की समझ के लिए आवश्यक है।