इस अध्याय में हम कणों के निकाय के द्रव्यमान केंद्र की गति तथा दृढ़ पिंडों की घूर्णी गति का अध्ययन करेंगे। पिछले अध्यायों में हमने स्थानांतरीय गति (Translational Motion) का अध्ययन किया था जिसमें पिंड के सभी कण समान विस्थापन से गति करते हैं। परंतु जब कोई पिंड अपने किसी अक्ष के परितः घूमता है, तो वह घूर्णी गति (Rotational Motion) करता है।
घूर्णी गति में, रेखीय गति के समांतर, कोणीय विस्थापन, कोणीय वेग, कोणीय त्वरण, बल आघूर्ण, जड़त्व आघूर्ण और कोणीय संवेग जैसी राशियाँ प्रयोग होती हैं। घूर्णी गति के नियम रेखीय गति के नियमों से मिलते-जुलते हैं।
कणों के निकाय का द्रव्यमान केंद्र वह बिंदु है जहाँ निकाय का समस्त द्रव्यमान केंद्रित माना जा सकता है। बाह्य बल के प्रभाव में संपूर्ण निकाय का व्यवहार वैसा ही होता है मानो समस्त द्रव्यमान द्रव्यमान केंद्र पर केंद्रित हो और बाह्य बल इसी बिंदु पर लग रहा हो।
दो कणों के निकाय का द्रव्यमान केंद्र: $$X_{cm} = \frac{m_1x_1 + m_2x_2}{m_1 + m_2}$$ अनेक कणों के लिए: $$X_{cm} = \frac{\sum m_ix_i}{\sum m_i}$$
कणों के निकाय का कुल संवेग द्रव्यमान केंद्र के संवेग के बराबर होता है: $$P = MV_{cm}$$ यदि बाह्य बल शून्य है, तो द्रव्यमान केंद्र का वेग स्थिर रहता है। इसी प्रकार, किसी निकाय पर लगा कुल बाह्य बल द्रव्यमान केंद्र के त्वरण का निर्धारण करता है: $$F_{ext} = MA_{cm}$$
कण द्वारा घूमा गया कोण $\theta$, मात्रक रेडियन (rad)।
$$\omega = \frac{d\theta}{dt}$$ मात्रक rad/s।
$$\alpha = \frac{d\omega}{dt}$$
$$\omega = \omega_0 + \alpha t$$ $$\theta = \omega_0t + \frac{1}{2}\alpha t^2$$ $$\omega^2 = \omega_0^2 + 2\alpha\theta$$
किसी बल की घूर्णन प्रभाविता को बल आघूर्ण कहते हैं: $$\tau = r \times F = rF\sin\theta$$ बल आघूर्ण का SI मात्रक N·m है।
किसी पिंड की घूर्णी जड़त्व को जड़त्व आघूर्ण कहते हैं। यह द्रव्यमान के वितरण पर निर्भर करता है: $$I = \sum m_ir_i^2$$
$$\tau = I\alpha$$ यह रेखीय गति के $F = ma$ का समांतर है।
जड़त्व आघूर्ण को घूर्णन त्रिज्या (Radius of Gyration) के रूप में भी व्यक्त किया जाता है: $$I = MK^2$$ जहाँ $K$ घूर्णन त्रिज्या है। घूर्णन त्रिज्या वह दूरी है जहाँ समस्त द्रव्यमान केंद्रित मानने पर जड़त्व आघूर्ण समान रहता है।
समांतर अक्ष प्रमेय के अनुसार, द्रव्यमान केंद्र से गुजरने वाली अक्ष के समांतर दूरी $d$ पर स्थित अक्ष के परितः जड़त्व आघूर्ण: $$I = I_{cm} + Md^2$$
समतल पटल (lamina) के लिए, पटल के तल में दो परस्पर लंबवत अक्षों के परितः जड़त्व आघूर्णों का योग तल के लंबवत अक्ष के परितः जड़त्व आघूर्ण के बराबर होता है: $$I_z = I_x + I_y$$
कोणीय संवेग किसी पिंड का घूर्णी संवेग है: $$L = I\omega$$ बल आघूर्ण और कोणीय संवेग में संबंध: $$\tau = \frac{dL}{dt}$$ यदि बाह्य बल आघूर्ण शून्य है, तो कोणीय संवेग संरक्षित रहता है: $$I_1\omega_1 = I_2\omega_2$$
जब कोई वस्तु समतल सतह पर बिना फिसले लुढ़कती है, तो उसकी गति स्थानांतरीय और घूर्णी गति का संयोजन होती है। ऐसी गति में संपर्क बिंदु तात्क्षणिक रूप से विराम में होता है। लुढ़कती वस्तु की कुल गतिज ऊर्जा, स्थानांतरीय गतिज ऊर्जा और घूर्णी गतिज ऊर्जा का योग होती है। एक ढाल पर लुढ़कती वस्तु का त्वरण उसके जड़त्व आघूर्ण पर निर्भर करता है। वलय सबसे धीमी और ठोस गोला सबसे तेज लुढ़कता है, क्योंकि वलय का जड़त्व आघूर्ण सबसे अधिक होता है।
घूर्णी गति के सिद्धांत अनेक दैनिक उपकरणों और खेलों में प्रयुक्त होते हैं। डिस्कस और भाला फेंकने वाले खिलाड़ी पहले घूर्णन करके कोणीय संवेग बढ़ाते हैं और फिर उसे छोड़ देते हैं। जाइरोस्कोप और शीर्ष (top) कोणीय संवेग संरक्षण के कारण स्थिर रहते हैं। साइकिल के पहिये की घूर्णन गति उसे संतुलित रखने में सहायता करती है। नर्तक और स्केटर अपनी बाहों को अंदर खींचकर जड़त्व आघूर्ण कम करते हैं और कोणीय वेग बढ़ाकर तेजी से घूमते हैं। यह सब कोणीय संवेग संरक्षण के नियम का ही परिणाम है।
कठोर पिंडों के साम्यावस्था के विश्लेषण में भी बल आघूर्ण की संकल्पना आवश्यक है। किसी पिंड की साम्यावस्था के लिए आवश्यक है कि उस पर लगने वाले बलों का कुल योग शून्य हो तथा किसी बिंदु के परितः बल आघूर्णों का कुल योग भी शून्य हो। भारित वस्तुओं के उठाने, क्रेन के संतुलन और संरचनाओं के अभिकल्पन में इन्हीं स्थितियों का उपयोग होता है। इस प्रकार कणों के निकाय और घूर्णी गति का अध्ययन इंजीनियरिंग यांत्रिकी की नींव है।
| रेखीय राशि | घूर्णी राशि | संबंध |
|---|---|---|
| विस्थापन (x) | कोणीय विस्थापन (θ) | x = rθ |
| वेग (v) | कोणीय वेग (ω) | v = rω |
| त्वरण (a) | कोणीय त्वरण (α) | a = rα |
| द्रव्यमान (m) | जड़त्व आघूर्ण (I) | I = Σmr² |
| बल (F) | बल आघूर्ण (τ) | τ = rF |
| संवेग (p) | कोणीय संवेग (L) | L = Iω |
| $F = ma$ | $\tau = I\alpha$ | समानता |
| पिंड | अक्ष | जड़त्व आघूर्ण |
|---|---|---|
| एकसमान छड़ | केंद्र से गुजरती लंबवत अक्ष | $\frac{1}{12}ML^2$ |
| एकसमान छड़ | एक सिरे से गुजरती अक्ष | $\frac{1}{3}ML^2$ |
| वृत्ताकार वलय | केंद्र से लंबवत अक्ष | $MR^2$ |
| ठोस गोला | व्यास | $\frac{2}{5}MR^2$ |
| ठोस बेलन | केंद्रीय अक्ष | $\frac{1}{2}MR^2$ |
कणों के निकाय और घूर्णी गति का अध्ययन भौतिकी की घूर्णी यांत्रिकी की नींव है। द्रव्यमान केंद्र की संकल्पना पूरे निकाय की गति को एक बिंदु पर केंद्रित करती है। घूर्णी गति में रेखीय गति के सभी नियमों के समांतर नियम होते हैं। जड़त्व आघूर्ण घूर्णी जड़त्व का माप है जो अक्ष पर निर्भर करता है। बल आघूर्ण और कोणीय संवेग की संकल्पनाएँ घूर्णी गति के विश्लेषण में आवश्यक हैं। कोणीय संवेग का संरक्षण नियम अनेक खगोलीय घटनाओं की व्याख्या करता है। यह अध्याय उच्च शिक्षा में घूर्णी यांत्रिकी के अध्ययन की तैयारी कराता है।