पिछले अध्याय में हमने एकविमीय गति का अध्ययन किया था, जिसमें वस्तु एक सीधी रेखा में गति करती है। परंतु अधिकांश वस्तुएँ द्विविमीय (समतल) में गति करती हैं। किसी प्रक्षेप्य की गति, वृत्तीय गति आदि समतल में गति के उदाहरण हैं। इस अध्याय में हम सदिशों की संकल्पना का उपयोग करके समतल में गति का अध्ययन करेंगे। सदिशों के बिना द्विविमीय गति का वर्णन संभव नहीं है।
समतल में गति के अध्ययन के लिए हम वस्तु की स्थिति को दो निर्देशांकों (x, y) द्वारा व्यक्त करते हैं। किसी क्षण पर वस्तु का स्थिति सदिश $r = x\hat{i} + y\hat{j}$ होता है।
वे राशियाँ जिनमें परिमाण और दिशा दोनों होते हैं, सदिश राशियाँ कहलाती हैं। उदाहरण: विस्थापन, वेग, त्वरण, बल, संवेग। जिन राशियों में केवल परिमाण होता है, वे अदिश राशियाँ कहलाती हैं। उदाहरण: द्रव्यमान, समय, चाल, कार्य, ऊर्जा, दूरी।
सदिशों का योग करने की दो विधियाँ हैं: - त्रिभुज नियम: दो सदिशों को क्रमानुसार जोड़कर उनके प्रथम के पुच्छ और अंतिम के शीर्ष को मिलाने से परिणामी सदिश प्राप्त होता है। - समांतर चतुर्भुज नियम: दो सदिशों को एक उभयनिष्ठ बिंदु से निरूपित करके समांतर चतुर्भुज पूर्ण करने पर विकर्ण परिणामी सदिश होता है।
दो सदिशों $a$ और $b$ के बीच कोण $\theta$ हो तो परिणामी: $$R = \sqrt{a^2 + b^2 + 2ab\cos\theta}$$ परिणामी की दिशा: $$\tan\phi = \frac{b\sin\theta}{a + b\cos\theta}$$
दो सदिशों का अदिश गुणननफल एक अदिश राशि होती है: $$a \cdot b = ab\cos\theta$$ - $a \cdot b = |a||b|\cos\theta$ - यदि $\theta = 90°$, तो $a \cdot b = 0$ - कार्य $W = F \cdot d = Fd\cos\theta$
दो सदिशों का सदिश गुणनफल एक सदिश राशि होती है: $$a \times b = ab\sin\theta \ \hat{n}$$ - यदि $\theta = 0°$ या $180°$, तो $a \times b = 0$ - बल आघूर्ण $\tau = r \times F$
यदि दो वस्तुएँ A और B वेगों $v_A$ और $v_B$ से गतिमान हैं, तो B के सापेक्ष A का वेग: $$v_{AB} = v_A - v_B$$ सापेक्ष वेग की संकल्पना से नदी पार करने, दो गाड़ियों के टकराने आदि की समस्याएँ हल की जाती हैं।
जब किसी वस्तु को प्रारंभिक वेग से क्षैतिज के साथ कुछ कोण बनाते हुए फेंका जाता है, तो वह प्रक्षेप्य कहलाती है और उसकी गति प्रक्षेप्य गति कहलाती है। प्रक्षेप्य का पथ परवलय होता है।
प्रारंभिक वेग $u$ और प्रक्षेपण कोण $\theta$ के लिए:
$$T = \frac{2u\sin\theta}{g}$$
$$H = \frac{u^2\sin^2\theta}{2g}$$
$$R = \frac{u^2\sin2\theta}{g}$$
$\theta = 45°$ पर परास अधिकतम होता है: $$R_{max} = \frac{u^2}{g}$$
किसी वस्तु का वृत्तीय पथ पर समान चाल से घूमना एकसमान वृत्तीय गति कहलाता है। एकसमान वृत्तीय गति में वस्तु का वेग (दिशा) लगातार बदलता रहता है, इसलिए त्वरण होता है।
$$a_c = \frac{v^2}{r} = \omega^2 r$$ यह त्वरण हमेशा वृत्त के केंद्र की ओर निर्देशित होता है।
$$\omega = \frac{d\theta}{dt}$$ $$v = \omega r$$
$$F_c = \frac{mv^2}{r} = m\omega^2 r$$
सदिशों की संकल्पना का उपयोग अनेक वास्तविक जीवन की समस्याओं को हल करने में होता है। नाव द्वारा नदी पार करने, हवा की दिशा और गति से प्रभावित विमान का उड़ान, तथा दो अलग-अलग दिशाओं में खींची गई रस्सियों के बलों का परिणामी ज्ञात करने में सदिश विधियाँ अपरिहार्य हैं। नाविक को नदी के बहाव की भरपाई के लिए नाव को तिरछी दिशा में चलाना पड़ता है, और विमानचालक को पार्श्विक वायु के लिए विमान की दिशा समायोजित करनी पड़ती है। इन सबमें सापेक्ष वेग और सदिश योग की संकल्पनाएँ काम आती हैं।
प्रक्षेप्य गति का उपयोग खेलों में भी स्पष्ट रूप से दिखता है। गोला फेंकना, भाला फेंकना, क्रिकेट में गेंद का हवा में जाना और बास्केटबॉल की गेंद का टोकरी में गिरना, सभी प्रक्षेप्य गति के उदाहरण हैं। खिलाड़ी अधिकतम परास के लिए 45° के कोण पर फेंकता है, हालाँकि हवा का प्रतिरोध और ऊँचाई में भिन्नता के कारण वास्तविक इष्टतम कोण भिन्न हो सकता है। ऊँची कूद और लंबी कूद में भी प्रक्षेप्य सिद्धांत निहित हैं।
वृत्तीय गति का ज्ञान वाहनों के मोड़ने, सड़कों के अभिकल्पन और अपकेंद्री मशीनों के सिद्धांत में प्रयुक्त होता है। सड़क के मोड़ पर वाहन को अभिकेंद्री बल की आवश्यकता होती है, जो घर्षण से प्राप्त होता है। अपकेंद्री मशीन अत्यधिक कोणीय वेग से घूमकर भारी कणों को बाहर की ओर फेंकती है और हल्के कणों को केंद्र की ओर छोड़ती है। इसी सिद्धांत पर दूध से क्रीम अलग करना और कपड़ों से जल निकालना संभव होता है। इस प्रकार समतल में गति की संकल्पनाएँ केवल परीक्षा तक सीमित नहीं, बल्कि प्रौद्योगिकी और खेलों का आधार हैं।
| गुणधर्म | अदिश राशि | सदिश राशि |
|---|---|---|
| परिभाषा | केवल परिमाण | परिमाण और दिशा |
| योग नियम | साधारण बीजगणित | सदिश योग नियम |
| उदाहरण | द्रव्यमान, ऊर्जा, समय | वेग, बल, विस्थापन |
| विभाजन | सरल | घटकों में विभाजन |
| राशि | सूत्र | टिप्पणी |
|---|---|---|
| उड़ान काल (T) | $T = \frac{2u\sin\theta}{g}$ | $\theta = 90°$ पर अधिकतम |
| अधिकतम ऊँचाई (H) | $H = \frac{u^2\sin^2\theta}{2g}$ | $\theta = 90°$ पर अधिकतम |
| परास (R) | $R = \frac{u^2\sin2\theta}{g}$ | $\theta = 45°$ पर अधिकतम |
| अधिकतम परास | $R_{max} = \frac{u^2}{g}$ | $\theta = 45°$ पर |
समतल में गति का अध्ययन भौतिकी के विभिन्न क्षेत्रों में उपयोगी है। सदिशों की संकल्पना द्विविमीय गति के विश्लेषण के लिए अनिवार्य है। प्रक्षेप्य गति का परवलयाकार पथ, उड़ान काल, अधिकतम ऊँचाई और परास के सूत्र कई संख्यात्मक समस्याओं को हल करने में सहायक हैं। वृत्तीय गति में अभिकेंद्री त्वरण और बल की संकल्पना घूर्णी गति तथा अगले अध्याय 'गति के नियम' के लिए आधार प्रदान करती है। इन संकल्पनाओं की गहरी समझ यांत्रिकी के समग्र ज्ञान के लिए आवश्यक है।