गति भौतिकी का एक मूलभूत विषय है। जब कोई वस्तु समय के साथ अपनी स्थिति बदलती है, तो उसे गति में माना जाता है। किसी वस्तु की गति का अध्ययन करने के लिए हमें एक संदर्भ फ्रेम (Reference Frame) की आवश्यकता होती है। सामान्यतः पृथ्वी को संदर्भ फ्रेम मानकर वस्तुओं की स्थिति का वर्णन किया जाता है। इस अध्याय में हम सीधी रेखा में होने वाली गति, अर्थात एकविमीय गति का अध्ययन करेंगे।
गति के अध्ययन में हम मुख्यतः तीन राशियों का उपयोग करते हैं: स्थिति, वेग और त्वरण। यांत्रिकी के उस भाग को जिसमें गति के कारणों पर विचार किए बिना केवल गति का वर्णन किया जाता है, गतिकी (Kinematics) कहते हैं। जबकि जिसमें गति के कारणों (बल) पर विचार किया जाता है, उसे गतिकी (Dynamics) कहते हैं।
किसी वस्तु की स्थिति को संदर्भ बिंदु के सापेक्ष निर्धारित किया जाता है। सीधी रेखा में गति के लिए वस्तु की स्थिति को एक संख्या द्वारा व्यक्त किया जा सकता है।
औसत वेग विस्थापन और समय अंतराल का अनुपात होता है: $$\bar{v} = \frac{\Delta x}{\Delta t}$$ औसत चाल कुल दूरी और कुल समय का अनुपात होता है: $$\bar{s} = \frac{\text{कुल दूरी}}{\text{कुल समय}}$$ जब वस्तु एक ही दिशा में एक सीधी रेखा में चलती है, तभी औसत चाल और औसत वेग बराबर होते हैं। अन्यथा चाल सदैव वेग से अधिक या बराबर होती है।
किसी क्षण विशेष पर वेग को तात्क्षणिक वेग कहते हैं। इसे समय अंतराल शून्य की ओर अग्रसर करने पर प्राप्त होता है: $$v = \lim_{\Delta t \to 0} \frac{\Delta x}{\Delta t} = \frac{dx}{dt}$$ तात्क्षणिक चाल तात्क्षणिक वेग का परिमाण होता है, परंतु चाल सदैव धनात्मक होती है जबकि वेग धनात्मक या ऋणात्मक दोनों हो सकता है।
समय के साथ वेग में परिवर्तन की दर को त्वरण कहते हैं: $$a = \frac{dv}{dt}$$ त्वरण धनात्मक, ऋणात्मक (मंदन) या शून्य हो सकता है। जब वेग स्थिर रहता है, तब त्वरण शून्य होता है। त्वरण का SI मात्रक $m/s^2$ है।
जब त्वरण स्थिर होता है, तब निम्नलिखित तीन समीकरण लागू होते हैं: $$v = u + at$$ $$s = ut + \frac{1}{2}at^2$$ $$v^2 = u^2 + 2as$$ यहाँ $u$ प्रारंभिक वेग, $v$ अंतिम वेग, $a$ त्वरण, $t$ समय और $s$ विस्थापन है।
किसी भी समय t पर औसत वेग के लिए: $$s = \frac{(u+v)}{2} \times t$$
जब किसी वस्तु को केवल गुरुत्वाकर्षण बल के प्रभाव में गिरने दिया जाता है, तो उसे मुक्त पतन कहते हैं। इस स्थिति में त्वरण g (गुरुत्वीय त्वरण) होता है: $$v = u + gt$$ $$h = ut + \frac{1}{2}gt^2$$ $$v^2 = u^2 + 2gh$$ पृथ्वी की सतह पर g का मान लगभग $9.8 \ m/s^2$ होता है।
वेग-समय ग्राफ में वक्र के नीचे का क्षेत्रफल विस्थापन को दर्शाता है, जबकि वक्र का ढाल त्वरण को दर्शाता है। वेग-समय ग्राफ में वक्र के नीचे क्षेत्रफल (वेग x समय = विस्थापन) होता है। स्थिति-समय ग्राफ का ढाल वेग तथा वेग-समय ग्राफ का ढाल त्वरण प्रदान करता है।
गति का ग्राफीय विश्लेषण गणितीय हल से अधिक सहज होता है। स्थिति-समय ग्राफ में वक्र के ढाल से वेग का पता चलता है। यदि स्थिति-समय ग्राफ एक सीधी झुकी रेखा है, तो वेग स्थिर है; यदि यह परवलय है, तो त्वरण स्थिर है। वेग-समय ग्राफ में वक्र के नीचे का क्षेत्रफल विस्थापन देता है और ढाल त्वरण देता है। वेग-समय ग्राफ की ढाल के सकारात्मक या नकारात्मक होने से क्रमशः त्वरण या मंदन का ज्ञान होता है। यदि ग्राफ समय अक्ष को काटता है, तो उसका अर्थ है कि वस्तु की दिशा बदल गई है।
ग्राफीय विधि का सबसे बड़ा लाभ यह है कि इससे विभिन्न वस्तुओं की गति की एक साथ तुलना की जा सकती है। दो वस्तुओं के मिलने का समय और स्थान ग्राफों के प्रतिच्छेदन बिंदु से सीधे ज्ञात होता है। जब दो वस्तुएँ विपरीत दिशाओं में चलती हैं, तो उनके सापेक्ष वेग का उपयोग करके मिलने का समय ज्ञात किया जा सकता है। सापेक्ष वेग की यह विधि यातायात, रेलगाड़ियों और विमानों से संबंधित समस्याओं में अत्यधिक उपयोगी है।
गति के विश्लेषण में मात्रकों की संगति का ध्यान रखना आवश्यक है। किलोमीटर प्रति घंटा को मीटर प्रति सेकंड में बदलने के लिए 5/18 से गुणा किया जाता है। उदाहरण के लिए, 90 km/h = 90 x 5/18 = 25 m/s होता है। अनेक छात्र इस रूपांतरण में त्रुटि करते हैं और संख्यात्मक उत्तर गलत आ जाता है। इसके अतिरिक्त, ग्राफ से विस्थापन निकालते समय क्षेत्रफल के चिह्नों का भी ध्यान रखना चाहिए, क्योंकि ऋणात्मक क्षेत्रफल विपरीत दिशा के विस्थापन को दर्शाता है। गति के पूर्ण विश्लेषण के लिए गणितीय समीकरण और ग्राफीय विधि दोनों का समुचित उपयोग आवश्यक है।
| राशि | प्रकार | सूत्र | SI मात्रक |
|---|---|---|---|
| विस्थापन | सदिश | $x_2 - x_1$ | m |
| चाल | अदिश | दूरी/समय | m/s |
| वेग | सदिश | विस्थापन/समय | m/s |
| त्वरण | सदिश | $\Delta v/\Delta t$ | m/s² |
| पथ की लंबाई | अदिश | कुल दूरी | m |
| समीकरण | सूत्र | प्रयुक्त राशियाँ |
|---|---|---|
| प्रथम | $v = u + at$ | v, u, a, t |
| द्वितीय | $s = ut + \frac{1}{2}at^2$ | s, u, t, a |
| तृतीय | $v^2 = u^2 + 2as$ | v, u, a, s |
सरल रेखा में गति का अध्ययन यांत्रिकी का आधारभूत भाग है। स्थिति, विस्थापन, वेग, चाल और त्वरण जैसी संकल्पनाएँ गति के वर्णन की नींव हैं। स्थिर त्वरण के तीन समीकरण संख्यात्मक समस्याओं को हल करने के प्रमुख उपकरण हैं। ग्राफीय विधियों द्वारा गति का विश्लेषण भी अत्यंत महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे बिना गणना के वेग और त्वरण जैसी राशियाँ ज्ञात की जा सकती हैं। इस अध्याय की संकल्पनाएँ अगले अध्याय 'समतल में गति' के लिए आधार तैयार करती हैं।