तरल पदार्थ (Fluids) वे पदार्थ हैं जो बह सकते हैं, अर्थात जिनमें बहाव होता है। द्रव (Liquid) और गैस (Gas) दोनों ही तरल पदार्थ हैं। तरल पदार्थों के यांत्रिक गुणों का अध्ययन हाइड्रोस्टैटिक्स और हाइड्रोडायनामिक्स के रूप में किया जाता है। इस अध्याय में हम दाब, पास्कल का नियम, आर्किमिडीज का सिद्धांत, बरनौली का प्रमेय, श्यानता तथा पृष्ठ तनाव का अध्ययन करेंगे।
तरल पदार्थों की यांत्रिकी का ज्ञान विमानन, जहाज़ निर्माण, नलिकाओं में तरल प्रवाह, मौसम विज्ञान तथा जैविक प्रणालियों में अत्यंत उपयोगी है।
तरल पदार्थ में किसी बिंदु पर दाब उस बिंदु पर इकाई क्षेत्रफल पर लगने वाला अभिलंब बल है: $$P = \frac{F}{A}$$ दाब का SI मात्रक पास्कल (Pa) है। किसी तरल में गहराई h पर दाब: $$P = P_0 + \rho gh$$ जहाँ $P_0$ वायुमंडलीय दाब, $\rho$ तरल का घनत्व, g गुरुत्वीय त्वरण और h गहराई है।
पास्कल के नियम के अनुसार, स्थिर अवस्था में किसी संलग्न (enclosed) तरल पदार्थ में लगाया गया दाब तरल के प्रत्येक बिंदु पर समान रूप से संचारित होता है। यह नियम हाइड्रोलिक लिफ्ट और हाइड्रोलिक प्रेस का आधार है। हाइड्रोलिक प्रेस में: $$\frac{F_1}{A_1} = \frac{F_2}{A_2}$$
आर्किमिडीज के सिद्धांत के अनुसार, किसी तरल में डूबी या आंशिक रूप से डूबी वस्तु पर तरल द्वारा लगाया गया उत्प्लावन बल, वस्तु द्वारा हटाए गए तरल के भार के बराबर होता है: $$F_b = \rho_{liquid} V g$$ जहाँ $V$ वस्तु द्वारा हटाए गए तरल का आयतन है। इसी सिद्धांत पर जहाज़ और पनडुब्बी तैरते हैं।
आदर्श तरल (असंपीड्य, अश्यान) के स्थिर प्रवाह के लिए बरनौली का प्रमेय: $$P + \frac{1}{2}\rho v^2 + \rho gh = \text{स्थिरांक}$$ यह ऊर्जा संरक्षण का तरलों के लिए रूप है। बरनौली के प्रमेय के अनुप्रयोग: - हवाई जहाज़ के पंख का उठान (Lift) - वेंचुरी मीटर - टीन की छत का उड़ना - तूफान में छतें उड़ जाना
$$A_1v_1 = A_2v_2$$ किसी नलिका में क्षेत्रफल घटने पर वेग बढ़ता है।
तरल की वह अवस्था जो उसकी परतों के बीच आपेक्षिक गति का विरोध करती है, श्यानता कहलाती है। श्यानता गुणांक (Coefficient of Viscosity): $$F = -\eta A \frac{dv}{dx}$$ जहाँ $\eta$ श्यानता गुणांक है, जिसका SI मात्रक poise (गतिशीलता इकाई) या Pa·s है। $1 \ poise = 0.1 \ Pa \cdot s$।
किसी गोले पर श्यान तरल में गति करते समय लगने वाला श्यान बल: $$F = 6\pi\eta r v$$
गोले के गिरते समय जब श्यान बल, गुरुत्वीय बल और उत्प्लावन बल संतुलित होते हैं, तो वेग स्थिर हो जाता है: $$v_t = \frac{2r^2(\rho - \sigma)g}{9\eta}$$
तरल की सतह वहाँ होने वाली असंतुलित आणविक शक्तियों के कारण एक तनी हुई झिल्ली की तरह व्यवहार करती है। इसे पृष्ठ तनाव कहते हैं। पृष्ठ तनाव, पृष्ठ की इकाई लंबाई पर लगने वाला बल है: $$S = \frac{F}{L}$$ इसका SI मात्रक N/m है। पृष्ठ तनाव के कारण: - पानी की बूँद गोलाकार होती है - मच्छर पानी की सतह पर चल सकते हैं - केशिका (Capillary) नली में जल चढ़ता है
तरल यांत्रिकी के सिद्धांतों का उपयोग अनेक दैनिक उपकरणों में होता है। छिड़काव यंत्र (sprayer), बोतल की पंप और कार के कार्ब्युरेटर बरनौली के प्रमेय पर कार्य करते हैं। जब वायु किसी संकरी नली से तेजी से बहती है, तो वहाँ दाब कम हो जाता है, जिससे आसपास का द्रव ऊपर चढ़कर वायु में मिल जाता है। इसी प्रभाव से आइसक्रीम मशीन और इत्र की बोतल कार्य करती हैं। यह प्रभाव मैग्नस प्रभाव के रूप में क्रिकेट, टेनिस और फुटबॉल में गेंद की स्विंग के लिए भी उत्तरदायी है।
जल आपूर्ति प्रणाली में तरल दाब का उपयोग महत्वपूर्ण है। जल टंकी को ऊँचाई पर रखकर उसके तल पर अधिक दाब उत्पन्न किया जाता है, जिससे जल मकानों की ऊपरी मंजिलों तक पहुँचता है। दाब पात्र (pressure vessel) के अभिकल्पन में तरल दाब की गणना आवश्यक होती है। बैरोमीटर और मैनोमीटर दाब मापने के उपकरण हैं। वायुमंडलीय दाब मापने वाला बैरोमीटर मौसम विज्ञान में उपयोगी है; दाब में अचानक गिरावट तूफान आने का संकेत देती है।
श्यानता का ज्ञान स्नेहक तेलों के चयन, रक्त संचार की समझ और उद्योगों में पाइपलाइन के अभिकल्पन में आवश्यक है। रक्त की श्यानता अधिक होने पर हृदय को अधिक कार्य करना पड़ता है। सड़कों पर तेल गिरने से आवागमन सुरक्षित नहीं रहता क्योंकि तेल की श्यानता से घर्षण घट जाता है। पृष्ठ तनाव का उपयोग साबुन के बुलबुलों, बारिश की बूँदों और पौधों में जल के संवहन को समझने में होता है। रुई या तौलिया द्वारा जल सोखना केशिकत्व का ही परिणाम है। इस प्रकार तरलों के यांत्रिक गुणों का ज्ञान रोजमर्रा की जीवन और औद्योगिक तकनीक दोनों में अपरिहार्य है।
| नियम/सिद्धांत | कथन | सूत्र |
|---|---|---|
| पास्कल का नियम | संलग्न तरल में दाब सर्वत्र समान संचारित | $P_1/A_1 = P_2/A_2$ |
| आर्किमिडीज का सिद्धांत | उत्प्लावन बल = हटाए गए तरल का भार | $F_b = \rho Vg$ |
| बरनौली का प्रमेय | ऊर्जा संरक्षण (तरलों में) | $P + \frac{1}{2}\rho v^2 + \rho gh$ = स्थिर |
| सांतत्य समीकरण | A v स्थिर रहता है | $A_1v_1 = A_2v_2$ |
| स्टोक्स का नियम | श्यान बल | $F = 6\pi\eta r v$ |
| गुण | श्यानता | पृष्ठ तनाव |
|---|---|---|
| परिभाषा | परतों की आपेक्षिक गति का विरोध | पृष्ठ की तनी हुई झिल्ली जैसा व्यवहार |
| SI मात्रक | Pa·s (पॉइज़) | N/m |
| ताप पर प्रभाव | बढ़ता ताप घटाता है | बढ़ता ताप घटाता है |
| कारण | आणविक आसंजन | पृष्ठीय अणुओं का असंतुलन |
तरलों के यांत्रिक गुणों का अध्ययन भौतिकी का एक व्यावहारिक और महत्वपूर्ण विषय है। दाब की संकल्पना और पास्कल का नियम हाइड्रोलिक उपकरणों का आधार है। आर्किमिडीज का सिद्धांत तैराकी, जहाज़ निर्माण और पनडुब्बी के सिद्धांत को समझाता है। बरनौली का प्रमेय तरल गति का ऊर्जा-आधारित विश्लेषण देता है जो विमानन तकनीक में उपयोगी है। श्यानता और पृष्ठ तनाव तरलों के प्रवाही और सतही व्यवहार को समझाने में सहायक हैं। ये संकल्पनाएँ इंजीनियरिंग, जीव विज्ञान और मौसम विज्ञान के विभिन्न क्षेत्रों में प्रयुक्त होती हैं।