किसी साझेदारी फर्म में लाभ-हानि का विभाजन साझेदारों के बीच सहमत अनुपात में होता है। जब साझेदारों के बीच परस्पर सहमति से लाभ-विभाजन अनुपात में परिवर्तन होता है, तो इसका प्रभाव केवल साझेदारों के अधिकारों पर पड़ता है, फर्म की पुस्तकों पर नहीं। परिवर्तन के समय उन साझेदारों को क्षतिपूर्ति (Compensation) दी जाती है, जिनके लाभ के अधिकार घट जाते हैं। यह क्षतिपूर्ति उन साझेदारों से वसूल की जाती है, जिनके अधिकार बढ़ जाते हैं। इस क्षतिपूर्ति की राशि त्याग अनुपात (Sacrificing Ratio) के आधार पर निर्धारित होती है। लाभ-विभाजन अनुपात में परिवर्तन का अध्ययन करने के लिए हमें पुराने अनुपात, नए अनुपात, त्याग अनुपात और लाभ अनुपात की अवधारणाओं को समझना होगा। किसी साझेदार के प्रवेश या सेवानिवृत्ति पर भी यही अवधारणाएँ लागू होती हैं।
परिवर्तन से पूर्व साझेदारों के बीच लाभ-हानि बाँटने का अनुपात पुराना अनुपात कहलाता है। उदाहरण के लिए, यदि A और B लाभों को 3:2 में बाँटते हैं, तो यह पुराना अनुपात है।
परिवर्तन के पश्चात् साझेदारों के बीच लाभ-हानि का नया विभाजन नया अनुपात कहलाता है। उदाहरण के लिए, यदि A और B सहमत हों कि अब लाभ 2:1 में बाँटे जाएँगे, तो यह नया अनुपात है।
जब कोई साझेदार अपने लाभ के अधिकारों में कटौती करता है, तो उसके द्वारा किया गया त्याग त्याग अनुपात में दिखाया जाता है:
$$ \text{त्याग अनुपात} = \text{पुराना अनुपात} - \text{नया अनुपात} $$
जिस साझेदार का त्याग अनुपात धनात्मक हो, उसे क्षतिपूर्ति मिलती है, और जिसका त्याग अनुपात ऋणात्मक हो, वह क्षतिपूर्ति देता है।
किसी साझेदार द्वारा प्राप्त किया गया अतिरिक्त लाभ-हिस्सा लाभ अनुपात में प्रकट होता है:
$$ \text{लाभ अनुपात} = \text{नया अनुपात} - \text{पुराना अनुपात} $$
A और B लाभों को 3:2 में बाँटते थे। अब वे 1:1 में बाँटने का निर्णय लेते हैं।
अतः A ने 1/10 त्याग किया और B को 1/10 का लाभ प्राप्त हुआ। B को A को 1/10 हिस्से का मुआवजा देना होगा।
लाभ-विभाजन अनुपात में परिवर्तन के निम्नलिखित प्रभाव होते हैं:
जब अनुपात में परिवर्तन होता है, तो लाभ प्राप्त करने वाले साझेदार को त्याग करने वाले साझेदार को उसके ख्याति हिस्से का भुगतान करना होता है। इसके लिए दो विधियाँ हैं:
ख्याति की राशि पुस्तकों में सृजित कर खाते में दिखाई जाती है, फिर उसे पुराने अनुपात में साझेदारों के बीच वितरित किया जाता है। लेकिन यह विधि लेखांकन के व्यवहारिक सिद्धांतों के अनुकूल नहीं है, क्योंकि ख्याति अमूर्त है और फर्म का मूल्यांकन नहीं बदलता।
इस विधि में ख्याति का खाता नहीं बनाया जाता, केवल साझेदारों के पूँजी खातों में समायोजन किया जाता है। लाभ प्राप्त करने वाले साझेदार का पूँजी खाता डेबिट किया जाता है और त्याग करने वाले का क्रेडिट:
$$ \text{ख्याति का हिस्सा} = \text{ख्याति का कुल मूल्य} \times \text{त्याग/लाभ अनुपात} $$
लेखा प्रविष्टि:
लाभ प्राप्त करने वाले साझेदार का पूँजी खाता डेबिट
त्याग करने वाले साझेदार का पूँजी खाता क्रेडिट
1. संपत्तियों/देयताओं के पुनर्मूल्यांकन पर: - संपत्तियों का मूल्य बढ़ने पर: संपत्ति खाता डेबिट, साझेदारों के पूँजी खाते (पुराने अनुपात में) क्रेडिट - देयताओं का मूल्य घटने पर: देयता खाता डेबिट, साझेदारों के पूँजी खाते क्रेडिट - मूल्य घटने पर विपरीत प्रविष्टि
2. सामान्य संचय का वितरण:
सामान्य संचय खाता डेबिट
साझेदारों के पूँजी खाते क्रेडिट (पुराने अनुपात में)
3. सामान्य भंडार (Reserve):
सामान्य भंडार खाता डेबिट
साझेदारों के पूँजी खाते क्रेडिट
जब फर्म के पुनर्गठन पर संपत्तियों और देयताओं के मूल्यों में परिवर्तन होता है, तो उन्हें दर्ज करने के लिए पुनर्मूल्यांकन खाता बनाया जाता है। इस खाते का क्रेडिट शेष लाभ साझेदारों के पूँजी खातों में पुराने अनुपात में बाँटा जाता है और डेबिट शेष हानि के रूप में।
जब पुराना अनुपात दिया हो और नया अनुपात भी दिया हो, तो सीधे त्याग/लाभ अनुपात की गणना की जा सकती है। कुछ प्रश्नों में नए साझेदार का लाभ-हिस्सा दिया होता है और पुराने साझेदारों का नया अनुपात पूछा जाता है। इस स्थिति में:
$$ \text{नया हिस्सा} = \text{पुराना हिस्सा} - \text{त्याग} $$
| अनुपात | सूत्र | टिप्पणी |
|---|---|---|
| त्याग अनुपात | पुराना अनुपात - नया अनुपात | धनात्मक = त्याग |
| लाभ अनुपात | नया अनुपात - पुराना अनुपात | धनात्मक = लाभ |
| नया अनुपात | पुराना अनुपात + लाभ का हिस्सा | प्रवेश के समय |
| पुराना अनुपात | नया अनुपात + त्याग | सेवानिवृत्ति के समय |
| मद | समायोजन विधि |
|---|---|
| ख्याति | लाभ/त्याग अनुपात में पूँजी खातों में समायोजन |
| संपत्तियाँ व देयताएँ | पुनर्मूल्यांकन, फिर पुराने अनुपात में लाभ/हानि |
| सामान्य संचय | पुराने अनुपात में वितरण |
| सामान्य भंडार | पुराने अनुपात में वितरण |
| कर्मचारी कल्याण भंडार | पुराने अनुपात में वितरण |
| साझेदार | पुराना (3:2) | नया (1:1) | त्याग/लाभ |
|---|---|---|---|
| A | 3/5 | 1/2 | 1/10 (त्याग) |
| B | 2/5 | 1/2 | -1/10 (लाभ) |
लाभ-विभाजन अनुपात में परिवर्तन साझेदारी लेखांकन की एक महत्वपूर्ण अवधारणा है, जो साझेदार के प्रवेश, सेवानिवृत्ति और मृत्यु के समय भी लागू होती है। त्याग व लाभ अनुपात की सही गणना, ख्याति का समायोजन, पुनर्मूल्यांकन तथा संचय का वितरण—ये सभी बिंदु परीक्षा में पूछे जाते हैं। इन अवधारणाओं की गहन समझ आगे के अध्यायों में अत्यंत उपयोगी सिद्ध होगी।