साझेदारी फर्म में जब कोई नया व्यक्ति साझेदार के रूप में शामिल होता है, तो उसे नया साझेदार कहते हैं। नए साझेदार का प्रवेश पुराने साझेदारों की सहमति के बिना संभव नहीं होता। भारतीय साझेदारी अधिनियम, 1932 के अनुसार नए साझेदार का प्रवेश पुराने साझेदारों की सहमति से होता है। नए साझेदार के प्रवेश के समय फर्म का पुनर्गठन होता है, जिसमें लाभ-विभाजन अनुपात में परिवर्तन, ख्याति का मूल्यांकन, संपत्तियों-देयताओं का पुनर्मूल्यांकन, संचयों का वितरण आदि कार्य किए जाते हैं। नया साझेदार फर्म में पूँजी लाता है और अपने लाभ-हिस्से के बदले पुराने साझेदारों को ख्याति का भुगतान करता है। इस अध्याय में हम नए साझेदार के प्रवेश पर होने वाले सभी लेखांकन समायोजनों का अध्ययन करेंगे।
नए साझेदार के प्रवेश पर निम्नलिखित लेखांकन समायोजन किए जाते हैं:
जब नया साझेदार अपने लाभ का हिस्सा प्राप्त करता है, तो पुराने साझेदारों के लाभ के हिस्सों में कटौती होती है। नए साझेदार का हिस्सा देने के लिए पुराने साझेदारों के हिस्सों का त्याग किया जाता है। दो स्थितियाँ होती हैं:
स्थिति 1: जब पुराने साझेदार अपने हिस्सों का त्याग समान अनुपात में करते हैं: $$ \text{प्रत्येक पुराने साझेदार का नया हिस्सा} = \text{पुराना हिस्सा} - \frac{\text{नए साझेदार का हिस्सा}}{\text{पुराने साझेदारों की संख्या}} $$
स्थिति 2: जब पुराने साझेदार अपने हिस्सों का त्याग अपने पुराने अनुपात में करते हैं: $$ \text{नया हिस्सा} = \text{पुराना हिस्सा} \times \left(1 - \frac{\text{नए साझेदार का हिस्सा}}{100}\right) $$
स्थिति 3: जब त्याग का अनुपात दिया गया हो: $$ \text{नया हिस्सा} = \text{पुराना हिस्सा} - \text{त्याग} $$
उदाहरण: A और B 3:2 में लाभ बाँटते हैं। C को 1/4 हिस्से के लिए प्रवेश दिया जाता है, जो अपना हिस्सा A और B से समान रूप से लेता है। - A का त्याग = 1/4 x 1/2 = 1/8 - B का त्याग = 1/4 x 1/2 = 1/8 - A का नया हिस्सा = 3/5 - 1/8 = (24-5)/40 = 19/40 - B का नया हिस्सा = 2/5 - 1/8 = (16-5)/40 = 11/40 - C का हिस्सा = 1/4 = 10/40 - नया अनुपात = 19:11:10
नए साझेदार के प्रवेश पर पुराने साझेदारों को ख्याति का भुगतान नए साझेदार द्वारा त्याग अनुपात के आधार पर किया जाता है। विधियाँ:
जब नया साझेदार नकद ख्याति लाता है, तो ख्याति खाता (Premium) बनाया जाता है: 1. पूर्ण ख्याति लाने पर:
रोकड़/बैंक खाता डेबिट
ख्याति खाता क्रेडिट
फिर त्याग अनुपात में:
ख्याति खाता डेबिट
पुराने साझेदारों के पूँजी खाते क्रेडिट (त्याग अनुपात में)
सीधे पुराने साझेदारों के पूँजी खातों में:
रोकड़/बैंक खाता डेबिट
पुराने साझेदारों के पूँजी खाते क्रेडिट (त्याग अनुपात में)
जब नया साझेदार ख्याति का केवल आंशिक भाग नकद में लाता है और शेष बाद में देने का वचन देता है: 1. प्राप्त नकद ख्याति:
रोकड़/बैंक खाता डेबिट
ख्याति खाता क्रेडिट
नए साझेदार का चालू खाता/पूँजी खाता डेबिट
ख्याति खाता क्रेडिट
ख्याति खाता डेबिट
पुराने साझेदारों के पूँजी खाते क्रेडिट (त्याग अनुपात में)
यदि नया साझेदार ख्याति का भुगतान नहीं करता, तो उसका पूँजी खाता डेबिट किया जाता है और पुराने साझेदारों के पूँजी खाते त्याग अनुपात में क्रेडिट किए जाते हैं।
नए साझेदार के प्रवेश के समय फर्म की संपत्तियों और देयताओं का पुनर्मूल्यांकन किया जाता है, ताकि उनका मूल्य वर्तमान बाजार मूल्य के अनुसार हो। इस हेतु पुनर्मूल्यांकन खाता बनाया जाता है: - संपत्तियों के मूल्य में वृद्धि → पुनर्मूल्यांकन खाता क्रेडिट - संपत्तियों के मूल्य में कमी → पुनर्मूल्यांकन खाता डेबिट - देयताओं में वृद्धि → पुनर्मूल्यांकन खाता डेबिट - देयताओं में कमी → पुनर्मूल्यांकन खाता क्रेडिट
पुनर्मूल्यांकन खाते का शेष लाभ/हानि पुराने अनुपात में साझेदारों के पूँजी खातों में वितरित किया जाता है।
फर्म के सामान्य संचय, सामान्य भंडार, कर्मचारी कल्याण भंडार आदि को पुराने अनुपात में साझेदारों के बीच वितरित किया जाता है। प्रविष्टि:
सामान्य संचय खाता डेबिट
सामान्य भंडार खाता डेबिट
पुराने साझेदारों के पूँजी खाते क्रेडिट (पुराने अनुपात में)
यदि नए साझेदार को फर्म की पूँजी का एक निश्चित हिस्सा देना है, तो: $$ \text{नई फर्म की कुल पूँजी} = \frac{\text{नए साझेदार की पूँजी}}{\text{नए साझेदार का हिस्सा}} $$
यदि नई फर्म की कुल पूँजी दी गई है, तो प्रत्येक साझेदार की पूँजी: $$ \text{साझेदार की पूँजी} = \text{कुल पूँजी} \times \text{उसका नया हिस्सा} $$
कुछ प्रश्नों में 'अदृश्य साझेदार' (साझेदार जिसका नाम प्रकट नहीं होता) भी होते हैं। उनके हिस्से को नए अनुपात में समायोजित करना होता है।
| मद | वितरण अनुपात |
|---|---|
| ख्याति का प्रतिफल | त्याग अनुपात |
| पुनर्मूल्यांकन का लाभ/हानि | पुराना अनुपात |
| सामान्य संचय/भंडार | पुराना अनुपात |
| कर्मचारी कल्याण भंडार | पुराना अनुपात |
| संदिग्ध ऋण भंडार (सामान्य) | पुराना अनुपात |
| स्थिति | प्रविष्टि |
|---|---|
| पूर्ण नकद ख्याति | बैंक Dr., ख्याति खाता Cr.; फिर त्याग अनुपात में वितरण |
| आंशिक नकद | बैंक Dr., ख्याति खाता Cr.; अप्राप्त भाग चालू खाते में Dr. |
| ख्याति नहीं लाना | नए साझेदार का पूँजी खाता Dr., पुराने साझेदार Cr. |
| स्थिति | विधि |
|---|---|
| समान त्याग | नया = पुराना - (नए का हिस्सा / साझेदारों की संख्या) |
| पुराने अनुपात में त्याग | नया = पुराना x (1 - नया हिस्सा) |
| त्याग अनुपात दिया हो | नया = पुराना - त्याग |
साझेदार का प्रवेश साझेदारी लेखांकन का सबसे महत्वपूर्ण अध्याय है, जो परीक्षा में अधिकांश प्रश्नों का आधार है। त्याग अनुपात, नया अनुपात, ख्याति, पुनर्मूल्यांकन, संचय वितरण और पूँजी निर्धारण की अवधारणाएँ आपस में जुड़ी हैं। इनका क्रमबद्ध अभ्यास करने पर विद्यार्थी परीक्षा में उच्चतम अंक प्राप्त कर सकता है।