Comprehensive theory, key formulas, diagrams, and memory aids for अंश पूँजी का लेखांकन.
कंपनी (Company) एक कृत्रिम व्यक्ति है जो विधि द्वारा निर्मित होती है। कंपनी अपनी अंश पूँजी (Share Capital) जनता से अंशों को निर्गमित करके प्राप्त करती है। अंशधारक (Shareholder) कंपनी की पूँजी के स्वामी होते हैं। कंपनी के अंशों का निर्गमन अंशों का निर्गमन (Issue of Shares) कहलाता है। अंशों के बदले में कंपनी अंशधारकों को लाभांश (Dividend) वितरित करती है। कंपनी की पूँजी के संबंध में लेखांकन का अध्ययन अंश पूँजी का लेखांकन कहलाता है। अंशों का निर्गमन सममूल्य (at par), प्रीमियम पर (at premium) या छूट पर (at discount) किया जा सकता है।
$$ \text{माँग न परिपक्व पूँजी (Calls in Arrears)} = \text{माँगित पूँजी} - \text{चुकता पूँजी} $$
$$ \text{अग्रिम पूँजी (Calls in Advance)} = \text{माँग से पहले प्राप्त राशि} $$
अंशों की राशि सामान्यतः किश्तों में प्राप्त होती है:
जब अंश का अंकित मूल्य = जारी मूल्य। उदाहरण: ₹10 का अंश ₹10 पर जारी।
जब अंश का अंकित मूल्य से अधिक पर जारी हो। उदाहरण: ₹10 का अंश ₹12 पर जारी। ₹2 प्रीमियम है।
$$ \text{प्रीमियम} = \text{निर्गम मूल्य} - \text{अंकित मूल्य} $$
प्रीमियम की राशि अंश प्रीमियम खाते (Securities Premium Account) में जमा की जाती है।
जब अंश का अंकित मूल्य से कम पर जारी हो। भारत में छूट पर अंशों का निर्गमन केवल कंपनी अधिनियम, 2013 के तहत विशेष शर्तों पर संभव है।
बैंक खाता डेबिट
अंश आवेदन खाता क्रेडिट
अंश आवेदन खाता डेबिट
अंश पूँजी खाता क्रेडिट
अंश आवेदन खाता डेबिट
बैंक खाता क्रेडिट
बैंक खाता डेबिट
अंश आबंटन खाता क्रेडिट
अंश आबंटन खाता डेबिट
अंश पूँजी खाता क्रेडिट
प्रीमियम राशि अंश प्रीमियम खाते में जमा की जाती है:
अंश आबंटन/आवेदन खाता डेबिट
अंश प्रीमियम खाता क्रेडिट
जब कोई अंशधारक माँगी गई राशि का भुगतान नहीं करता, तो उस राशि को माँग न परिपक्व पूँजी खाता में डेबिट किया जाता है:
माँग न परिपक्व पूँजी खाता डेबिट
अंश माँग खाता क्रेडिट
अंत में माँग न परिपक्व पूँजी खाते की शेष राशि तुलन पत्र में पूँजी से घटाई जाती है।
जब अंशधारक माँग से पहले राशि जमा करता है:
बैंक खाता डेबिट
अग्रिम पूँजी खाता क्रेडिट
अग्रिम राशि पर 12% प्रति वर्ष ब्याज दिया जाता है। अंत में माँग पूरी होने पर अग्रिम राशि को माँग खाते में स्थानांतरित किया जाता है।
जब अंशधारक माँगों का भुगतान नहीं करता, तो कंपनी अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार उन अंशों को हरण (Forfeit) कर सकती है। हरण करने पर अंशधारक द्वारा चुकाई गई राशि कंपनी के पास रहती है और अंश हरण खाते में जमा होती है।
अंश पूँजी खाता (पूर्ण माँगित राशि) डेबिट
माँग न परिपक्व पूँजी (अवैतनिक राशि) क्रेडिट
अंश हरण खाता (प्राप्त राशि) क्रेडिट
हरण किए गए अंशों का पुनर्निर्गमन किया जा सकता है। पुनर्निर्गमन छूट पर भी हो सकता है, परंतु छूट की राशि हरण खाते की राशि से अधिक नहीं हो सकती।
बैंक खाता (प्राप्त राशि) डेबिट
अंश हरण खाता (छूट की राशि) डेबिट
अंश पूँजी खाता (अंकित मूल्य) क्रेडिट
हरण खाते का शेष लाभ पूँजी आरक्षित (Capital Reserve) में स्थानांतरित किया जाता है:
अंश हरण खाता डेबिट
पूँजी आरक्षित खाता क्रेडिट
graph TD
A["अंश पूँजी का लेखांकन"] --> B["पूँजी के प्रकार"]
A --> C["अंशों के प्रकार"]
A --> D["अंशों का निर्गमन"]
A --> E["माँग न परिपक्व / अग्रिम"]
A --> F["अंशों का हरण"]
D --> G["सममूल्य/प्रीमियम/छूट"]
E --> H["तुलन पत्र में समायोजन"]
F --> I["पुनर्निर्गमन"]
F --> J["पूँजी आरक्षित"]
B --> K["अधिकृत/निर्गमित/अभिदत्त/चुकता"]
| प्रकार | परिभाषा |
|---|---|
| अधिकृत पूँजी | ज्ञापन में अधिकतम अधिकृत पूँजी |
| निर्गमित पूँजी | जनता को निर्गमित अंशों का मूल्य |
| अभिदत्त पूँजी | अभिद्रा प्राप्त अंशों का मूल्य |
| माँगित पूँजी | माँग की गई राशि |
| चुकता पूँजी | वास्तव में प्राप्त राशि |
| प्रकार | शर्त | उदाहरण |
|---|---|---|
| सममूल्य | निर्गम मूल्य = अंकित मूल्य | ₹10 पर ₹10 |
| प्रीमियम | निर्गम मूल्य > अंकित मूल्य | ₹12 पर ₹10 |
| छूट | निर्गम मूल्य < अंकित मूल्य | ₹9 पर ₹10 |
| घटना | प्रविष्टि का सार |
|---|---|
| हरण | अंश पूँजी Dr., माँग न परिपक्व Cr., हरण Cr. |
| पुनर्निर्गमन | बैंक Dr., हरण Dr., अंश पूँजी Cr. |
| शेष लाभ | हरण Dr., पूँजी आरक्षित Cr. |
graph TD
A["अंश पूँजी लेखांकन"] --> B["पूँजी प्रकार"]
A --> C["निर्गमन"]
A --> D["माँग/अग्रिम"]
A --> E["हरण व पुनर्निर्गमन"]
C --> F["सममूल्य/प्रीमियम/छूट"]
C --> G["आवेदन-आबंटन-माँगें"]
D --> H["तुलन पत्र में घटाव/जोड़"]
E --> I["पूँजी आरक्षित"]
अंश पूँजी का लेखांकन कंपनी लेखांकन का प्रथम अध्याय है। पूँजी के प्रकार, अंशों का निर्गमन, माँग न परिपक्व/अग्रिम पूँजी तथा हरण-पुनर्निर्गमन की अवधारणाएँ परीक्षा का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। अगले अध्याय (ऋणपत्रों का निर्गमन) के लिए यह अध्याय आधार का कार्य करता है। इन प्रविष्टियों का लगातार अभ्यास ही सफलता की कुंजी है।