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1. परिचय

कंपनी को दीर्घकालीन ऋण की आवश्यकता होती है, जिसे वह ऋणपत्र (Debentures) निर्गमित करके प्राप्त करती है। ऋणपत्र धन उधार लेने की लिखित स्वीकृति है, जिसके अंतर्गत कंपनी निर्धारित समय पर एक निश्चित राशि (मूलधन) का भुगतान करने और उस पर एक निश्चित दर से ब्याज देने का वचन देती है। ऋणपत्रधारक कंपनी के लेनदार (Creditors) होते हैं, स्वामी नहीं। अतः उन्हें लाभांश नहीं, बल्कि ब्याज मिलता है। इस अध्याय में ऋणपत्रों के निर्गमन का लेखांकन सीखा जाएगा।

2. ऋणपत्रों के प्रकार (Types of Debentures)

  1. सममूल्य पर ऋणपत्र (at Par): जब ऋणपत्र का अंकित मूल्य = निर्गम मूल्य।
  2. प्रीमियम पर ऋणपत्र (at Premium): जब निर्गम मूल्य > अंकित मूल्य।
  3. छूट पर ऋणपत्र (at Discount): जब निर्गम मूल्य < अंकित मूल्य।
  4. सुरक्षित (Secured) एवं असुरक्षित (Unsecured) ऋणपत्र: कंपनी की संपत्तियों की धारोष्णा (Mortgage) के आधार पर।
  5. परिवर्तनीय एवं अपरिवर्तनीय ऋणपत्र: जिन्हें अंशों में परिवर्तित किया जा सकता है या नहीं।
  6. प्रथम एवं द्वितीय ऋणपत्र: शोधन के क्रम के आधार पर।

3. ऋणपत्रों का लेखांकन (Accounting for Issue of Debentures)

ऋणपत्रों के निर्गमन के समय मुख्य बिंदु:

  1. ऋणपत्र खाता में अंकित मूल्य पर ही क्रेडिट किया जाता है।
  2. प्रीमियम पर निर्गमन में प्रीमियम राशि ऋणपत्र प्रीमियम खाते में जमा होती है।
  3. छूट पर निर्गमन में छूट राशि ऋणपत्र छूट खाते में डेबिट होती है, जो वित्तीय हानि है।
  4. ऋणपत्रों पर ब्याज लाभ-हानि खाते के माध्यम से दिया जाता है।

प्रविष्टियाँ:

राशि नकद/बैंक में प्राप्त होने पर:

बैंक खाता (प्राप्त राशि)           डेबिट
ऋणपत्र छूट खाता (यदि छूट दी गई)           डेबिट
   ऋणपत्र खाता (अंकित मूल्य)        क्रेडिट
   ऋणपत्र प्रीमियम खाता (यदि प्रीमियम)        क्रेडिट

4. संपत्तियों के बदले ऋणपत्रों का निर्गमन (Issue for Consideration other than Cash)

जब कंपनी किसी संपत्ति (जैसे भूमि, भवन, मशीनरी) को खरीदती है और उसके बदले में ऋणपत्र निर्गमित करती है:

संपत्ति खाता           डेबिट
   विक्रेता का खाता        क्रेडिट

फिर:

विक्रेता का खाता           डेबिट
   ऋणपत्र खाता        क्रेडिट

5. कर्जदारों के बदले ऋणपत्रों का निर्गमन (Issue to Promoters)

कंपनी अपने प्रवर्तकों (Promoters) को उनकी सेवाओं के लिए ऋणपत्र निर्गमित कर सकती है:

ख्याति/प्रवर्तकों का खाता           डेबिट
   ऋणपत्र खाता        क्रेडिट

6. प्रतिभूतियों के बदले ऋणपत्र (Debentures as Collateral Security)

कभी-कभी कंपनी ऋण लेते समय अपने ऋणपत्रों को अतिरिक्त सुरक्षा (Collateral Security) के रूप में देती है। इस स्थिति में ऋणपत्रों का निर्गमन नहीं माना जाता, केवल आकस्मिक देयता के रूप में दिखाया जाता है:

ऋणपत्र आरक्षित (या सुरक्षा के रूप में दिए गए ऋणपत्र) खाता       डेबिट
   ऋणपत्र खाता        क्रेडिट

7. ऋणपत्र छूट का परिशोधन (Writing off Discount on Debentures)

ऋणपत्र छूट एक वित्तीय हानि है जिसे निम्न प्रकार परिशोधित किया जाता है:

$$ \text{वार्षिक परिशोधन} = \frac{\text{ऋणपत्र छूट की कुल राशि}}{\text{ऋणपत्रों की अवधि}} $$

सामान्यतः छूट को वित्त-व्यय के रूप में लाभ-हानि खाते में वितरित किया जाता है। इसे समान किस्त या प्रभावी ब्याज दर विधि से किया जा सकता है।

वित्त-व्यय / लाभ-हानि खाता           डेबिट
   ऋणपत्र छूट खाता        क्रेडिट

8. ब्याज का भुगतान (Interest on Debentures)

ऋणपत्रों पर ब्याज की दर निर्धारित होती है। ब्याज का भुगतान करते समय:

ऋणपत्रों पर ब्याज खाता           डेबिट
   बैंक खाता        क्रेडिट

वर्ष के अंत में:

लाभ-हानि खाता           डेबिट
   ऋणपत्रों पर ब्याज खाता        क्रेडिट

9. ऋणपत्रों का निर्गमन किस्तों में (Issue of Debentures in Instalments)

अंशों की तरह ऋणपत्रों की राशि भी आवेदन, आबंटन एवं माँगों के रूप में किश्तों में प्राप्त की जा सकती है।

10. ऋणपत्र एवं अंश में अंतर

बिंदु अंश ऋणपत्र
स्वामित्व अंशधारक स्वामी ऋणपत्रधारक लेनदार
प्रतिफल लाभांश ब्याज
जोखिम अधिक कम
मतदान अधिकार होता है नहीं होता
graph TD A["ऋणपत्रों का निर्गमन"] --> B["नकद/बैंक द्वारा"] A --> C["संपत्ति के बदले"] A --> D["प्रवर्तकों को"] A --> E["प्रतिभूति के रूप में"] B --> F["सममूल्य/प्रीमियम/छूट"] A --> G["ऋणपत्र छूट का परिशोधन"] A --> H["ब्याज का भुगतान"]

10. ऋणपत्रों का तुलन पत्र में वर्गीकरण एवं ब्याज का वार्षिक लेखांकन

ऋणपत्रों को तुलन पत्र में गैर-चालू देयताओं के अंतर्गत दिखाया जाता है। जब ऋणपत्रों की परिपक्वता अवधि एक वर्ष से अधिक होती है, तो वे दीर्घकालीन देयता होते हैं। ऋणपत्रों पर ब्याज का भुगतान एक निश्चित अवधि में किया जाता है, जिसकी गणना अंकित मूल्य पर निर्धारित दर से की जाती है। ब्याज का भुगतान वर्ष में दो बार (अर्धवार्षिक) भी हो सकता है, जैसा कि ऋणपत्रों की शर्तों में निर्धारित होता है। ब्याज के भुगतान के समय 'ऋणपत्रों पर ब्याज खाता' डेबिट किया जाता है और वर्ष के अंत में इस खाते की शेष राशि को लाभ-हानि खाते में हस्तांतरित किया जाता है, क्योंकि ब्याज कंपनी का वित्तीय व्यय है। ऋणपत्रों के निर्गमन के समय प्राप्त प्रीमियम को अंश प्रीमियम की भाँति पूँजी आरक्षित की श्रेणी में नहीं, बल्कि ऋणपत्र प्रीमियम खाते में रखा जाता है, जिसका उपयोग शोधन के समय किया जा सकता है। इसी प्रकार ऋणपत्र छूट एक वित्तीय हानि होने के कारण इसे ऋणपत्रों की अवधि में वितरित करके लाभ-हानि खाते में परिशोधित किया जाता है। किस्तों में निर्गमन की स्थिति में आवेदन, आबंटन और माँगों की राशि को अलग-अलग खातों में रखा जाता है तथा अंततः सभी राशियों को ऋणपत्र खाते में हस्तांतरित किया जाता है। प्रतिभूति के रूप में दिए गए ऋणपत्रों की स्थिति में कंपनी उन्हें आकस्मिक देयता के रूप में प्रकट करती है, और जब ऋण का भुगतान हो जाता है, तो ये ऋणपत्र वापस ले लिए जाते हैं। इस प्रकार ऋणपत्रों का निर्गमन कंपनी के ऋण वित्तपोषण का एक महत्वपूर्ण साधन है, जो कंपनी को दीर्घकालीन पूँजी उपलब्ध कराता है, बिना स्वामित्व के नियंत्रण को प्रभावित किए। यही कारण है कि बड़ी कंपनियाँ अपनी विस्तार योजनाओं के वित्तपोषण हेतु अंशों के स्थान पर ऋणपत्रों का निर्गमन करना अधिक उपयुक्त समझती हैं।

त्वरित पुनरावृत्ति तालिकाएँ

तालिका 1: निर्गमन के प्रकार

प्रकार निर्गम मूल्य प्रविष्टि का सार
सममूल्य = अंकित मूल्य बैंक Dr., ऋणपत्र Cr.
प्रीमियम > अंकित मूल्य बैंक Dr., ऋणपत्र Cr., प्रीमियम Cr.
छूट < अंकित मूल्य बैंक Dr., छूट Dr., ऋणपत्र Cr.

तालिका 2: अंश बनाम ऋणपत्र

बिंदु अंश ऋणपत्र
स्वामित्व स्वामी लेनदार
प्रतिफल लाभांश ब्याज
शोधन अनिवार्य नहीं निर्धारित समय पर

तालिका 3: विशेष निर्गमन

स्थिति प्रविष्टि
संपत्ति के बदले विक्रेता का खाता Dr., ऋणपत्र Cr.
प्रवर्तकों को ख्याति Dr., ऋणपत्र Cr.
प्रतिभूति के रूप में ऋणपत्र आरक्षित Dr., ऋणपत्र Cr.

माइंड मैप

graph TD A["ऋणपत्र निर्गमन"] --> B["प्रकार"] A --> C["लेखांकन"] A --> D["विशेष स्थितियाँ"] B --> E["सममूल्य/प्रीमियम/छूट"] C --> F["बैंक Dr., ऋणपत्र Cr."] D --> G["संपत्ति/प्रवर्तक/प्रतिभूति"] A --> H["छूट का परिशोधन"] A --> I["ब्याज भुगतान"]

महत्वपूर्ण आरेख (SVG)

ऋणपत्रों का निर्गमन सममूल्य पर प्रीमियम पर छूट पर निर्गम मूल्य = अंकित मूल्य प्रीमियम = निर्गम - अंकित प्रीमियम Cr. होता है छूट = अंकित - निर्गम छूट Dr. (वित्तीय हानि) ब्याज का भुगतान ऋणपत्रों पर ब्याज Dr., बैंक Cr.; वर्ष के अंत में लाभ-हानि में हस्तांतरण स्वर्ण नियम ऋणपत्रधारक लेनदार होते हैं, उन्हें लाभांश नहीं, ब्याज मिलता है
संपत्ति/प्रतिभूति के बदले निर्गमन संपत्ति के बदले निर्गमन संपत्ति खाता Dr., विक्रेता Cr. विक्रेता Dr., ऋणपत्र Cr. प्रवर्तकों के बदले ख्याति Dr., ऋणपत्र Cr. (प्रवर्तकों की सेवाएँ) प्रतिभूति (Collateral Security) के रूप में ऋणपत्र आरक्षित खाता Dr., ऋणपत्र खाता Cr. ऋण चुकाने पर प्रतिभूति वापस ली जाती है स्वर्ण नियम प्रतिभूति के रूप में दिए गए ऋणपत्रों का निर्गमन नहीं माना जाता ऋणपत्र छूट का परिशोधन: वित्त-व्यय में हस्तांतरण

सामान्य गलतियाँ

  1. प्रीमियम को ऋणपत्र खाते में जमा करना: प्रीमियम ऋणपत्र प्रीमियम खाते में जमा होता है, ऋणपत्र खाते में नहीं।
  2. छूट को रोकड़ खाते में लिखना: छूट ऋणपत्र छूट खाते में डेबिट होती है (वित्तीय हानि)।
  3. ऋणपत्रधारक को अंशधारक समझना: ऋणपत्रधारक लेनदार हैं, स्वामी नहीं।
  4. ब्याज को लाभांश से भ्रमित करना: ऋणपत्रों पर ब्याज दिया जाता है, अंशों पर लाभांश।
  5. प्रतिभूति ऋणपत्रों का निर्गमन मानना: प्रतिभूति के ऋणपत्रों का निर्गमन नहीं माना जाता।
  6. ऋणपत्र छूट को वर्ष भर में नहीं परिशोधित करना
  7. संपत्ति के बदले निर्गमन में विक्रेता के खाते को गलत पक्ष में रखना

परीक्षा युक्तियाँ

  1. निर्गमन का प्रकार (सम/प्रीमियम/छूट) पहले तय करें।
  2. प्रीमियम और छूट की गणना: प्रीमियम = निर्गम - अंकित; छूट = अंकित - निर्गम।
  3. संपत्ति के बदले निर्गमन में दो प्रविष्टियाँ लिखें।
  4. प्रतिभूति ऋणपत्रों की स्थिति में आकस्मिक देयता दिखाएं।
  5. ऋणपत्र छूट का परिशोधन वित्त-व्यय में करें।
  6. ब्याज की गणना अंकित मूल्य पर करें।
  7. तुलन पत्र में ऋणपत्रों को दीर्घकालीन देयता में दिखाएं।

निष्कर्ष

ऋणपत्रों का निर्गमन कंपनी के ऋण वित्तपोषण का प्रमुख साधन है। ऋणपत्रों के प्रकार, सममूल्य/प्रीमियम/छूट पर निर्गमन, संपत्ति एवं प्रतिभूति के बदले निर्गमन तथा ब्याज भुगतान की अवधारणाएँ परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण हैं। ऋणपत्रों का शोधन (अगला अध्याय) इसी आधार पर किया जाता है। इन प्रविष्टियों का क्रमबद्ध अभ्यास आवश्यक है।

निर्गमन की प्रविष्टियाँ संख्यात्मक उदाहरण सहित

ऋणपत्रों के निर्गमन की प्रविष्टियों को संख्याओं के साथ समझना सबसे उपयोगी होता है। उदाहरण के लिए, एक कंपनी 100 रुपये अंकित मूल्य वाले 1000 ऋणपत्र सममूल्य पर निर्गमित करती है। इस स्थिति में प्राप्त राशि 1000 गुणा 100 = 1,00,000 रुपये होगी। प्रविष्टि होगी: बैंक खाता डेबिट 1,00,000, ऋणपत्र खाता क्रेडिट 1,00,000। चूँकि निर्गम मूल्य और अंकित मूल्य समान हैं, न तो प्रीमियम खाता बनता है और न ही छूट खाता। अब यदि वही ऋणपत्र 10 प्रतिशत प्रीमियम पर निर्गमित किए जाएँ, तो प्रत्येक ऋणपत्र के लिए निर्गम मूल्य 110 रुपये होगा और कुल प्राप्त राशि 1,10,000 रुपये। यहाँ अंकित मूल्य (1,00,000 रुपये) ऋणपत्र खाते में जमा होगा, और अतिरिक्त 10,000 रुपये ऋणपत्र प्रीमियम खाते में जमा होंगे। प्रीमियम को ऋणपत्र खाते में नहीं, बल्कि पृथक प्रीमियम खाते में रखना अनिवार्य है, क्योंकि ऋणपत्र खाते में केवल अंकित मूल्य ही दर्शाया जाता है। प्रीमियम पूँजी आरक्षित नहीं है और इसे शोधन के समय या निर्धारित प्रयोजनों में उपयोग किया जा सकता है। यही कारण है कि प्रीमियम को सदैव अलग खाते में दिखाया जाता है।

छूट पर निर्गमन की स्थिति को भी इसी प्रकार समझें। यदि 100 रुपये अंकित मूल्य वाले 1000 ऋणपत्र 5 प्रतिशत छूट पर निर्गमित किए जाएँ, तो प्रत्येक ऋणपत्र का निर्गम मूल्य 95 रुपये और कुल प्राप्त राशि 95,000 रुपये होगी। प्रविष्टि में बैंक खाता डेबिट 95,000, ऋणपत्र छूट खाता डेबिट 5,000, और ऋणपत्र खाता क्रेडिट 1,00,000। छूट की राशि कंपनी के लिए वित्तीय हानि है, अतः इसे ऋणपत्रों की पूरी अवधि में वितरित करके लाभ-हानि खाते में परिशोधित किया जाता है। यदि ऋणपत्रों की अवधि 5 वर्ष है, तो प्रत्येक वर्ष 5,000 भाग 5 = 1,000 रुपये की छूट को वित्त-व्यय में हस्तांतरित किया जाएगा। परिशोधन की प्रविष्टि में वित्त-व्यय खाता डेबिट तथा ऋणपत्र छूट खाता क्रेडिट होता है। इस प्रकार सममूल्य, प्रीमियम और छूट तीनों स्थितियों का विश्लेषण करने से विद्यार्थी को प्रविष्टियों की पूरी समझ विकसित होती है, और यही तीन स्थितियाँ परीक्षा के अधिकांश प्रश्नों का आधार हैं।

किस्तों में निर्गमन की स्थिति में भी संख्यात्मक उदाहरण सहायक है। मान लीजिए 100 रुपये मूल्य का ऋणपत्र 40 रुपये आवेदन, 30 रुपये आबंटन और शेष 30 रुपये प्रथम माँग पर देय है। आवेदन राशि प्राप्त होने पर बैंक खाता डेबिट और ऋणपत्र आवेदन खाता क्रेडिट किया जाता है। आबंटन के समय बैंक खाता डेबिट, ऋणपत्र आबंटन खाता क्रेडिट, और साथ ही ऋणपत्र आवेदन तथा आबंटन दोनों खातों को समाप्त कर उनकी राशि ऋणपत्र खाते में हस्तांतरित की जाती है। माँगों की राशि के लिए यही प्रक्रिया दोहराई जाती है। जब सभी किश्तें प्राप्त हो जाती हैं, तो ऋणपत्र खाते में पूरी अंकित राशि जमा दिखती है। अंतिम प्रविष्टि में ऋणपत्र आवेदन, आबंटन तथा माँग खातों को डेबिट कर ऋणपत्र खाते को क्रेडिट किया जाता है। इस प्रकार विभिन्न किश्तों की राशियाँ अंततः एक ही खाते में एकत्रित हो जाती हैं और तुलन पत्र में केवल ऋणपत्र खाते की शेष राशि दिखाई देती है।

प्रतिभूति के रूप में दिए गए ऋणपत्रों की स्थिति में लेखांकन भिन्न होता है। यहाँ कंपनी बैंक से ऋण लेती है और उसके बदले सुरक्षा के रूप में अपने ऋणपत्र देती है। ऋण प्राप्त होने पर बैंक खाता डेबिट और ऋण खाता क्रेडिट किया जाता है। प्रतिभूति के ऋणपत्रों के लिए ऋणपत्र आरक्षित खाता डेबिट और ऋणपत्र खाता क्रेडिट करते हैं, क्योंकि ये वास्तव में निर्गमित नहीं हुए हैं। ऋण के पुनर्भुगतान के समय ये ऋणपत्र वापस ले लिए जाते हैं और विपरीत प्रविष्टि की जाती है। तुलन पत्र में इन ऋणपत्रों को आकस्मिक देयता के रूप में प्रकट किया जाता है, क्योंकि उन पर भुगतान केवल तभी संभव है जब कंपनी ऋण नहीं चुका पाए। इस स्थिति की समझ से परीक्षा में पूछे जाने वाले अनेक बहुविकल्पीय प्रश्नों के उत्तर सही हो जाते हैं। इस प्रकार ऋणपत्रों का निर्गमन, प्रीमियम और छूट का लेखांकन, किस्तों में निर्गमन तथा प्रतिभूति के रूप में निर्गमन सभी पहलुओं का समग्र अभ्यास इस अध्याय में आवश्यक है, और यही अभ्यास अगले अध्याय में ऋणपत्रों के शोधन को समझने का आधार भी बनाता है।