ऋणपत्र कंपनी की दीर्घकालीन देयता है, जिसका भुगतान निर्धारित समय पर करना होता है। ऋणपत्रों की राशि का भुगतान करने की प्रक्रिया को ऋणपत्रों का शोधन (Redemption of Debentures) कहते हैं। शोधन के समय ऋणपत्रधारकों को अंकित मूल्य (या सममूल्य पर, यदि शोधन प्रीमियम पर है तो प्रीमियम सहित) का भुगतान किया जाता है। इस अध्याय में शोधन के स्रोत, विधियाँ और लेखांकन का अध्ययन किया जाएगा।
शोधन निम्नलिखित तरीकों से हो सकता है: 1. सममूल्य पर शोधन (at Par): ऋणपत्रधारक को अंकित मूल्य का भुगतान। 2. प्रीमियम पर शोधन (at Premium): अंकित मूल्य + शोधन प्रीमियम का भुगतान। 3. छूट पर शोधन (at Discount): कम राशि का भुगतान।
$$ \text{शोधन राशि} = \text{अंकित मूल्य} \pm \text{प्रीमियम/छूट} $$
भारतीय कंपनी अधिनियम, 2013 के अनुसार, जब ऋणपत्रों का शोधन लाभों से किया जाता है, तो ऋणपत्र शोधन आरक्षित बनाना अनिवार्य है।
ऋणपत्रों का शोधन लाभों से करते समय कंपनी लाभ का एक हिस्सा ऋणपत्र शोधन आरक्षित में स्थानांतरित करती है। यह एक विनियोग (Appropriation) है:
लाभ-हानि विनियोजन खाता डेबिट
ऋणपत्र शोधन आरक्षित खाता क्रेडिट
शोधन के बाद DRR का शेष सामान्य आरक्षित में स्थानांतरित किया जाता है।
सभी ऋणपत्रों का एक साथ शोधन। प्रविष्टि:
ऋणपत्र खाता डेबिट
शोधन प्रीमियम खाता (यदि कोई) डेबिट
बैंक खाता क्रेडिट
ऋणपत्रधारकों का खाता क्रेडिट (यदि अप्रत्यक्ष)
निर्धारित समय अंतराल पर कुछ ऋणपत्रों का शोधन (जैसे लाटरी या सममूल्य पर)।
कंपनी अपने ही ऋणपत्रों को खुले बाजार से कम या अंकित मूल्य पर खरीदकर रद्द कर देती है। यदि खरीद मूल्य अंकित मूल्य से कम हो, तो अंतर लाभ है:
ऋणपत्र खाता डेबिट (अंकित मूल्य)
बैंक खाता क्रेडिट (क्रय मूल्य)
ऋणपत्र शोधन लाभ खाता क्रेडिट (अंतर)
ऋणपत्रों को अंशों या नए ऋणपत्रों में परिवर्तित करके शोधन:
ऋणपत्र खाता डेबिट
समता अंश पूँजी खाता क्रेडिट
जब ऋणपत्रों का शोधन प्रीमियम पर होता है, तो शोधन प्रीमियम को लाभ-हानि खाते से चुकाया जाता है या आरक्षितों से। प्रविष्टि:
शोधन प्रीमियम खाता डेबिट
ऋणपत्रधारकों का खाता क्रेडिट
फिर:
लाभ-हानि विनियोजन खाता डेबिट
शोधन प्रीमियम खाता क्रेडिट
शोधन से पहले की अवधि का ब्याज संचित किया जाता है:
ऋणपत्रों पर ब्याज खाता डेबिट
बैंक खाता क्रेडिट
तुलन पत्र में ऋणपत्रों को गैर-चालू देयताओं (Non-current Liabilities) में दिखाया जाता है, और शोधन की आवश्यकता के अनुसार चालू देयता में भी।
ऋणपत्रों के शोधन की प्रक्रिया में सबसे पहले यह निर्धारित किया जाता है कि शोधन किस शर्त पर होगा, अर्थात् सममूल्य पर, प्रीमियम पर या छूट पर। इसके पश्चात् शोधन के स्रोत का निर्धारण होता है, जिसके आधार पर ऋणपत्र शोधन आरक्षित बनाने की आवश्यकता होती है या नहीं। जब कंपनी अपने लाभों से ऋणपत्रों का शोधन करती है, तो वह लाभ-हानि विनियोजन खाते से एक निश्चित राशि ऋणपत्र शोधन आरक्षित खाते में स्थानांतरित करती है। यह राशि ऋणपत्रों के कुल अंकित मूल्य के एक निर्धारित प्रतिशत के बराबर होती है। शोधन के समय ऋणपत्रधारकों को उनकी देय राशि का भुगतान बैंक के माध्यम से किया जाता है, और साथ ही शोधन से पहले की अवधि का ब्याज भी चुकाया जाता है। यदि ऋणपत्रों का शोधन प्रीमियम पर होता है, तो प्रीमियम की राशि लाभ-हानि विनियोजन खाते से चुकाई जाती है, क्योंकि यह कंपनी का एक अतिरिक्त वित्तीय व्यय है। खुले बाजार में ऋणपत्रों के क्रय द्वारा शोधन करते समय यदि कंपनी अपने ऋणपत्रों को अंकित मूल्य से कम मूल्य पर क्रय करती है, तो इस अंतर को ऋणपत्र शोधन लाभ कहा जाता है, जो पूँजी लाभ की प्रकृति का होता है। ऋणपत्रों का परिवर्तन द्वारा शोधन करते समय ऋणपत्रधारकों को कंपनी के समता अंश या नए ऋणपत्र दिए जाते हैं। इस विधि में नकदी का बहिर्वाह नहीं होता, परंतु कंपनी की पूँजी संरचना में परिवर्तन हो जाता है। शोधन की प्रत्येक विधि में अंत में ऋणपत्र खाते की शेष राशि शून्य हो जानी चाहिए, तथा ऋणपत्र शोधन आरक्षित की शेष राशि सामान्य आरक्षित में स्थानांतरित कर दी जाती है। यह सुनिश्चित करना आवश्यक है कि शोधन के बाद कंपनी के तुलन पत्र में ऋणपत्रों की कोई देयता न बचे, अन्यथा शोधन प्रक्रिया अपूर्ण मानी जाएगी।
| विधि | सार |
|---|---|
| एकमुश्त शोधन | सभी ऋणपत्र एक साथ |
| किस्तों में शोधन | समय-अंतराल पर चयनित ऋणपत्र |
| खुले बाजार में क्रय | बाजार मूल्य पर खरीदकर रद्द |
| परिवर्तन द्वारा | अंशों/नए ऋणपत्रों में |
| शर्त | राशि |
|---|---|
| सममूल्य पर | अंकित मूल्य |
| प्रीमियम पर | अंकित मूल्य + प्रीमियम |
| छूट पर | अंकित मूल्य - छूट |
| चरण | प्रविष्टि |
|---|---|
| DRR बनाना | लाभ-हानि विनियोजन Dr., DRR Cr. |
| शोधन | ऋणपत्र Dr., बैंक Cr. |
| DRR स्थानांतरण | DRR Dr., सामान्य आरक्षित Cr. |
ऋणपत्रों का शोधन कंपनी के दीर्घकालीन ऋण प्रबंधन का अंतिम चरण है। शोधन की शर्तें, विधियाँ, DRR का निर्माण एवं स्थानांतरण, तथा शोधन प्रीमियम का लेखांकन—ये सभी परीक्षा के महत्वपूर्ण बिंदु हैं। ऋणपत्रों के निर्गमन और शोधन दोनों की गहन समझ से विद्यार्थी कंपनी लेखांकन में पारंगत हो सकता है।