अनुपात (Ratio) दो संबंधित आँकड़ों के बीच का गणितीय संबंध है। वित्तीय विवरणों की विभिन्न मदों के बीच संबंध प्रकट करने वाले अनुपातों को लेखांकन अनुपात या वित्तीय अनुपात कहते हैं। अनुपात विश्लेषण वित्तीय विवरणों के विश्लेषण की सबसे लोकप्रिय विधि है। इसका उपयोग कंपनी की तरलता, सॉल्वेंसी, लाभप्रदता, गतिविधि और बाजार स्थिति का आकलन करने में होता है।
अनुपातों को निम्नलिखित मुख्य श्रेणियों में बाँटा गया है:
तरलता अनुपात अल्पकालीन देयताओं का भुगतान करने की कंपनी की क्षमता को मापते हैं।
$$ \text{चालू अनुपात} = \frac{\text{चालू संपत्तियाँ}}{\text{चालू देयताएँ}} $$
आदर्श अनुपात: 2:1
$$ \text{त्वरित अनुपात} = \frac{\text{त्वरित संपत्तियाँ}}{\text{चालू देयताएँ}} $$
$$ \text{त्वरित संपत्तियाँ} = \text{चालू संपत्तियाँ} - \text{सूची} - \text{अग्रिम व्यय} $$
आदर्श अनुपात: 1:1
ये अनुपात दीर्घकालीन देयताओं का भुगतान करने की क्षमता मापते हैं।
$$ \text{ऋण-समता अनुपात} = \frac{\text{दीर्घकालीन ऋण}}{\text{अंशधारकों की निधि}} $$
$$ \text{कुल संपत्ति ऋण अनुपात} = \frac{\text{कुल संपत्तियाँ}}{\text{कुल दीर्घकालीन ऋण}} $$
$$ \text{ब्याज सम्पादन अनुपात} = \frac{\text{कर से पूर्व लाभ + ब्याज}}{\text{ब्याज}} $$
ये अनुपात संपत्तियों के उपयोग की दक्षता मापते हैं।
$$ \text{सूची टर्नओवर} = \frac{\text{बेचे गए माल की लागत}}{\text{औसत सूची}} $$
$$ \text{औसत सूची} = \frac{\text{प्रारंभिक सूची} + \text{अंतिम सूची}}{2} $$
$$ \text{प्राप्य टर्नओवर} = \frac{\text{शुद्ध ऋण विक्रय}}{\text{औसत व्यापारिक प्राप्य}} $$
$$ \text{देय टर्नओवर} = \frac{\text{शुद्ध ऋण क्रय}}{\text{औसत व्यापारिक देय}} $$
$$ \text{कार्यशील पूँजी टर्नओवर} = \frac{\text{शुद्ध विक्रय}}{\text{कार्यशील पूँजी}} $$
$$ \text{सकल लाभ अनुपात} = \frac{\text{सकल लाभ}}{\text{शुद्ध विक्रय}} \times 100 $$
$$ \text{शुद्ध लाभ अनुपात} = \frac{\text{कर के बाद शुद्ध लाभ}}{\text{शुद्ध विक्रय}} \times 100 $$
$$ \text{परिचालन अनुपात} = \frac{\text{परिचालन व्यय}}{\text{शुद्ध विक्रय}} \times 100 $$
$$ \text{परिचालन लाभ अनुपात} = 100 - \text{परिचालन अनुपात} $$
$$ \text{ROI} = \frac{\text{कर के बाद लाभ}}{\text{निवेशित पूँजी}} \times 100 $$
अनुपातों का अध्ययन करते समय यह समझना आवश्यक है कि प्रत्येक अनुपात कंपनी के एक विशेष पहलू को मापता है। तरलता अनुपात कंपनी की अल्पकालीन देयताओं का भुगतान करने की क्षमता को दर्शाते हैं। चालू अनुपात 2:1 का अर्थ है कि प्रत्येक एक रुपये की चालू देयता के लिए कंपनी के पास दो रुपये की चालू संपत्तियाँ हैं, जो सुरक्षित स्थिति को दर्शाता है। त्वरित अनुपात 1:1 से अधिक होना अत्यधिक संतोषजनक माना जाता है, क्योंकि यह बिना सूची के भी देयताओं का भुगतान करने की क्षमता प्रकट करता है। सॉल्वेंसी अनुपात दीर्घकालीन वित्तीय स्थिरता का माप हैं। ऋण-समता अनुपात यह बताता है कि कंपनी की पूँजी में ऋण और स्वामियों की निधि का अनुपात कितना है; कम अनुपात कंपनी के लिए अधिक सुरक्षित माना जाता है। ब्याज सम्पादन अनुपात कंपनी की अपने ब्याज दायित्वों को पूरा करने की क्षमता को दर्शाता है; यह अनुपात जितना अधिक हो, उतना ही बेहतर है। गतिविधि अनुपात संपत्तियों के उपयोग की दक्षता का माप हैं। सूची टर्नओवर अनुपात बताता है कि वर्ष में सूची कितनी बार बेची एवं पुनः क्रय की गई; उच्च अनुपात बेहतर प्रबंधन का संकेत है। प्राप्य टर्नओवर अनुपात से ज्ञात होता है कि देनदारों से राशि कितनी शीघ्र प्राप्त होती है। लाभप्रदता अनुपात कंपनी की कमाई की क्षमता को मापते हैं। सकल लाभ अनुपात माल के क्रय-विक्रय की दक्षता दर्शाता है, जबकि शुद्ध लाभ अनुपात समग्र लाभप्रदता को प्रकट करता है। परिचालन अनुपात यह बताता है कि शुद्ध विक्रय का कितना भाग परिचालन व्यय में चला गया है। इन सभी अनुपातों का समग्र विश्लेषण करके ही कंपनी की वास्तविक वित्तीय स्थिति का सही आकलन किया जा सकता है। एकल अनुपात के आधार पर निर्णय लेना अनुचित है, क्योंकि प्रत्येक अनुपात एक भिन्न पहलू का माप है।
| अनुपात | सूत्र | आदर्श |
|---|---|---|
| चालू अनुपात | चालू संपत्तियाँ / चालू देयताएँ | 2:1 |
| त्वरित अनुपात | त्वरित संपत्तियाँ / चालू देयताएँ | 1:1 |
| अनुपात | सूत्र |
|---|---|
| सकल लाभ अनुपात | सकल लाभ / शुद्ध विक्रय x 100 |
| शुद्ध लाभ अनुपात | शुद्ध लाभ / शुद्ध विक्रय x 100 |
| परिचालन अनुपात | परिचालन व्यय / शुद्ध विक्रय x 100 |
| ROI | कर-पश्चात लाभ / निवेशित पूँजी x 100 |
| अनुपात | सूत्र |
|---|---|
| ऋण-समता | दीर्घकालीन ऋण / अंशधारकों की निधि |
| कुल संपत्ति ऋण | कुल संपत्तियाँ / दीर्घकालीन ऋण |
| ब्याज सम्पादन | (EBIT) / ब्याज |
अनुपात विश्लेषण वित्तीय विवरणों के विश्लेषण की सबसे व्यावहारिक विधि है। तरलता, सॉल्वेंसी, गतिविधि एवं लाभप्रदता अनुपात कंपनी की वित्तीय स्थिति के विभिन्न पहलुओं को प्रकट करते हैं। सूत्रों का स्मरण एवं गणनाओं का अभ्यास परीक्षा में उच्च अंक दिलाने में सहायक है। अगला अध्याय (रोकड़ प्रवाह विवरण) तरलता एवं नकदी स्थिति का गहन विश्लेषण करता है।