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1. परिचय

अनुपात (Ratio) दो संबंधित आँकड़ों के बीच का गणितीय संबंध है। वित्तीय विवरणों की विभिन्न मदों के बीच संबंध प्रकट करने वाले अनुपातों को लेखांकन अनुपात या वित्तीय अनुपात कहते हैं। अनुपात विश्लेषण वित्तीय विवरणों के विश्लेषण की सबसे लोकप्रिय विधि है। इसका उपयोग कंपनी की तरलता, सॉल्वेंसी, लाभप्रदता, गतिविधि और बाजार स्थिति का आकलन करने में होता है।

2. अनुपातों के प्रकार (Classification of Ratios)

अनुपातों को निम्नलिखित मुख्य श्रेणियों में बाँटा गया है:

  1. तरलता अनुपात (Liquidity Ratios)
  2. सॉल्वेंसी अनुपात (Solvency Ratios)
  3. लाभप्रदता अनुपात (Profitability Ratios)
  4. गतिविधि/टर्नओवर अनुपात (Activity/Turnover Ratios)

3. तरलता अनुपात (Liquidity Ratios)

तरलता अनुपात अल्पकालीन देयताओं का भुगतान करने की कंपनी की क्षमता को मापते हैं।

(क) चालू अनुपात (Current Ratio)

$$ \text{चालू अनुपात} = \frac{\text{चालू संपत्तियाँ}}{\text{चालू देयताएँ}} $$

आदर्श अनुपात: 2:1

(ख) त्वरित/अम्ल परीक्षण अनुपात (Quick/Liquid/Acid Test Ratio)

$$ \text{त्वरित अनुपात} = \frac{\text{त्वरित संपत्तियाँ}}{\text{चालू देयताएँ}} $$

$$ \text{त्वरित संपत्तियाँ} = \text{चालू संपत्तियाँ} - \text{सूची} - \text{अग्रिम व्यय} $$

आदर्श अनुपात: 1:1

4. सॉल्वेंसी अनुपात (Solvency Ratios)

ये अनुपात दीर्घकालीन देयताओं का भुगतान करने की क्षमता मापते हैं।

(क) ऋण-समता अनुपात (Debt-Equity Ratio)

$$ \text{ऋण-समता अनुपात} = \frac{\text{दीर्घकालीन ऋण}}{\text{अंशधारकों की निधि}} $$

(ख) कुल संपत्ति ऋण अनुपात (Total Assets to Debt Ratio)

$$ \text{कुल संपत्ति ऋण अनुपात} = \frac{\text{कुल संपत्तियाँ}}{\text{कुल दीर्घकालीन ऋण}} $$

(ग) ब्याज सम्पादन अनुपात (Interest Coverage Ratio)

$$ \text{ब्याज सम्पादन अनुपात} = \frac{\text{कर से पूर्व लाभ + ब्याज}}{\text{ब्याज}} $$

5. गतिविधि/टर्नओवर अनुपात (Activity/Turnover Ratios)

ये अनुपात संपत्तियों के उपयोग की दक्षता मापते हैं।

(क) सूची टर्नओवर अनुपात (Inventory Turnover Ratio)

$$ \text{सूची टर्नओवर} = \frac{\text{बेचे गए माल की लागत}}{\text{औसत सूची}} $$

$$ \text{औसत सूची} = \frac{\text{प्रारंभिक सूची} + \text{अंतिम सूची}}{2} $$

(ख) व्यापारिक प्राप्य टर्नओवर अनुपात (Trade Receivables Turnover Ratio)

$$ \text{प्राप्य टर्नओवर} = \frac{\text{शुद्ध ऋण विक्रय}}{\text{औसत व्यापारिक प्राप्य}} $$

(ग) व्यापारिक देय टर्नओवर अनुपात (Trade Payables Turnover Ratio)

$$ \text{देय टर्नओवर} = \frac{\text{शुद्ध ऋण क्रय}}{\text{औसत व्यापारिक देय}} $$

(घ) कार्यशील पूँजी टर्नओवर अनुपात (Working Capital Turnover Ratio)

$$ \text{कार्यशील पूँजी टर्नओवर} = \frac{\text{शुद्ध विक्रय}}{\text{कार्यशील पूँजी}} $$

6. लाभप्रदता अनुपात (Profitability Ratios)

(क) सकल लाभ अनुपात (Gross Profit Ratio)

$$ \text{सकल लाभ अनुपात} = \frac{\text{सकल लाभ}}{\text{शुद्ध विक्रय}} \times 100 $$

(ख) शुद्ध लाभ अनुपात (Net Profit Ratio)

$$ \text{शुद्ध लाभ अनुपात} = \frac{\text{कर के बाद शुद्ध लाभ}}{\text{शुद्ध विक्रय}} \times 100 $$

(ग) परिचालन अनुपात (Operating Ratio)

$$ \text{परिचालन अनुपात} = \frac{\text{परिचालन व्यय}}{\text{शुद्ध विक्रय}} \times 100 $$

$$ \text{परिचालन लाभ अनुपात} = 100 - \text{परिचालन अनुपात} $$

(घ) लाभांश अनुपात (Return on Investment - ROI)

$$ \text{ROI} = \frac{\text{कर के बाद लाभ}}{\text{निवेशित पूँजी}} \times 100 $$

7. अनुपात विश्लेषण के लाभ एवं सीमाएँ

लाभ:

  1. तुलना की सुविधा
  2. वित्तीय स्थिति का आकलन
  3. निर्णय लेने में सहायता
  4. समस्या की पहचान

सीमाएँ:

  1. ऐतिहासिक आँकड़ों पर आधारित
  2. मुद्रास्फीति का प्रभाव
  3. गुणात्मक कारक नहीं मापते
  4. विभिन्न लेखा नीतियाँ
graph TD A["अनुपात विश्लेषण"] --> B["तरलता अनुपात"] A --> C["सॉल्वेंसी अनुपात"] A --> D["गतिविधि अनुपात"] A --> E["लाभप्रदता अनुपात"] B --> F["चालू = चा.सं. / चा.दे. (2:1)"] B --> G["त्वरित = त्व.सं. / चा.दे. (1:1)"] C --> H["ऋण-समता"] D --> I["सूची/प्राप्य/देय टर्नओवर"] E --> J["सकल/शुद्ध लाभ अनुपात"]

8. अनुपातों की विस्तृत व्याख्या एवं प्रयोग

अनुपातों का अध्ययन करते समय यह समझना आवश्यक है कि प्रत्येक अनुपात कंपनी के एक विशेष पहलू को मापता है। तरलता अनुपात कंपनी की अल्पकालीन देयताओं का भुगतान करने की क्षमता को दर्शाते हैं। चालू अनुपात 2:1 का अर्थ है कि प्रत्येक एक रुपये की चालू देयता के लिए कंपनी के पास दो रुपये की चालू संपत्तियाँ हैं, जो सुरक्षित स्थिति को दर्शाता है। त्वरित अनुपात 1:1 से अधिक होना अत्यधिक संतोषजनक माना जाता है, क्योंकि यह बिना सूची के भी देयताओं का भुगतान करने की क्षमता प्रकट करता है। सॉल्वेंसी अनुपात दीर्घकालीन वित्तीय स्थिरता का माप हैं। ऋण-समता अनुपात यह बताता है कि कंपनी की पूँजी में ऋण और स्वामियों की निधि का अनुपात कितना है; कम अनुपात कंपनी के लिए अधिक सुरक्षित माना जाता है। ब्याज सम्पादन अनुपात कंपनी की अपने ब्याज दायित्वों को पूरा करने की क्षमता को दर्शाता है; यह अनुपात जितना अधिक हो, उतना ही बेहतर है। गतिविधि अनुपात संपत्तियों के उपयोग की दक्षता का माप हैं। सूची टर्नओवर अनुपात बताता है कि वर्ष में सूची कितनी बार बेची एवं पुनः क्रय की गई; उच्च अनुपात बेहतर प्रबंधन का संकेत है। प्राप्य टर्नओवर अनुपात से ज्ञात होता है कि देनदारों से राशि कितनी शीघ्र प्राप्त होती है। लाभप्रदता अनुपात कंपनी की कमाई की क्षमता को मापते हैं। सकल लाभ अनुपात माल के क्रय-विक्रय की दक्षता दर्शाता है, जबकि शुद्ध लाभ अनुपात समग्र लाभप्रदता को प्रकट करता है। परिचालन अनुपात यह बताता है कि शुद्ध विक्रय का कितना भाग परिचालन व्यय में चला गया है। इन सभी अनुपातों का समग्र विश्लेषण करके ही कंपनी की वास्तविक वित्तीय स्थिति का सही आकलन किया जा सकता है। एकल अनुपात के आधार पर निर्णय लेना अनुचित है, क्योंकि प्रत्येक अनुपात एक भिन्न पहलू का माप है।

त्वरित पुनरावृत्ति तालिकाएँ

तालिका 1: तरलता अनुपात

अनुपात सूत्र आदर्श
चालू अनुपात चालू संपत्तियाँ / चालू देयताएँ 2:1
त्वरित अनुपात त्वरित संपत्तियाँ / चालू देयताएँ 1:1

तालिका 2: लाभप्रदता अनुपात

अनुपात सूत्र
सकल लाभ अनुपात सकल लाभ / शुद्ध विक्रय x 100
शुद्ध लाभ अनुपात शुद्ध लाभ / शुद्ध विक्रय x 100
परिचालन अनुपात परिचालन व्यय / शुद्ध विक्रय x 100
ROI कर-पश्चात लाभ / निवेशित पूँजी x 100

तालिका 3: सॉल्वेंसी अनुपात

अनुपात सूत्र
ऋण-समता दीर्घकालीन ऋण / अंशधारकों की निधि
कुल संपत्ति ऋण कुल संपत्तियाँ / दीर्घकालीन ऋण
ब्याज सम्पादन (EBIT) / ब्याज

माइंड मैप

graph TD A["अनुपात विश्लेषण"] --> B["तरलता"] A --> C["सॉल्वेंसी"] A --> D["गतिविधि"] A --> E["लाभप्रदता"] B --> F["चालू 2:1, त्वरित 1:1"] C --> G["ऋण-समता, ब्याज सम्पादन"] D --> H["टर्नओवर अनुपात"] E --> I["सकल/शुद्ध/परिचालन"] A --> J["लाभ व सीमाएँ"]

महत्वपूर्ण आरेख (SVG)

तरलता अनुपात चालू अनुपात = चालू संपत्तियाँ / चालू देयताएँ आदर्श = 2:1 अल्पकालीन सॉल्वेंसी का माप त्वरित (अम्ल) अनुपात = त्वरित संपत्तियाँ / चालू देयताएँ आदर्श = 1:1 सूची व अग्रिम व्यय छोड़कर महत्वपूर्ण त्वरित संपत्तियाँ = चालू संपत्तियाँ - सूची - अग्रिम व्यय स्वर्ण नियम चालू अनुपात का आदर्श 2:1 और त्वरित अनुपात का आदर्श 1:1 है
लाभप्रदता अनुपात सकल लाभ अनुपात = सकल लाभ / शुद्ध विक्रय x 100 माल की लागत की दक्षता शुद्ध लाभ अनुपात = शुद्ध लाभ / शुद्ध विक्रय x 100 समग्र लाभप्रदता परिचालन अनुपात = परिचालन व्यय / विक्रय x 100 परिचालन लाभ = 100 - अनुपात ROI (निवेश पर प्रतिफल) = कर-पश्चात लाभ / पूँजी x 100 निवेश की दक्षता स्वर्ण नियम लाभप्रदता अनुपात शुद्ध विक्रय पर आधारित होते हैं

सामान्य गलतियाँ

  1. चालू एवं त्वरित अनुपात के आदर्श मानों का भ्रम: चालू 2:1, त्वरित 1:1।
  2. त्वरित संपत्तियों में सूची को शामिल करना: सूची त्वरित संपत्ति नहीं है।
  3. लाभप्रदता अनुपात में शुद्ध विक्रय के बजाय सकल विक्रय लेना
  4. सॉल्वेंसी अनुपात में दीर्घकालीन ऋण की गलत परिभाषा
  5. औसत सूची की गणना में त्रुटि: औसत = (प्रारंभिक + अंतिम) / 2।
  6. ब्याज सम्पादन अनुपात में EBIT की गलत गणना
  7. अनुपात के अर्थ की व्याख्या न करना: केवल गणना से काम नहीं चलता।

परीक्षा युक्तियाँ

  1. चालू संपत्तियों एवं चालू देयताओं की सही पहचान करें।
  2. त्वरित अनुपात में सूची व अग्रिम व्यय को निकालें।
  3. शुद्ध विक्रय = सकल विक्रय - विक्रय वापसी।
  4. शुद्ध क्रय = सकल क्रय - क्रय वापसी।
  5. औसत सूची निकालना न भूलें।
  6. ब्याज सम्पादन अनुपात में कर-पूर्व लाभ में ब्याज जोड़ें।
  7. अनुपातों की व्याख्या (निष्कर्ष) अवश्य लिखें।

निष्कर्ष

अनुपात विश्लेषण वित्तीय विवरणों के विश्लेषण की सबसे व्यावहारिक विधि है। तरलता, सॉल्वेंसी, गतिविधि एवं लाभप्रदता अनुपात कंपनी की वित्तीय स्थिति के विभिन्न पहलुओं को प्रकट करते हैं। सूत्रों का स्मरण एवं गणनाओं का अभ्यास परीक्षा में उच्च अंक दिलाने में सहायक है। अगला अध्याय (रोकड़ प्रवाह विवरण) तरलता एवं नकदी स्थिति का गहन विश्लेषण करता है।