रोकड़ प्रवाह विवरण (Cash Flow Statement) वह वित्तीय विवरण है जो किसी विशिष्ट अवधि में कंपनी के नकदी प्रवाहों (Cash Inflows) और नकदी बहिर्वाहों (Cash Outflows) को प्रस्तुत करता है। यह अनुसूची III के अनुसार कंपनी के वित्तीय विवरणों का अनिवार्य भाग है। रोकड़ प्रवाह विवरण का मुख्य उद्देश्य कंपनी की तरलता और नकदी प्रबंधन की दक्षता का आकलन करना है। यह लाभ-हानि विवरण से भिन्न है क्योंकि लेखांकन में उपार्जन (Accrual) आधार का प्रयोग होता है, जबकि रोकड़ प्रवाह नकद आधार पर आधारित होता है।
रोकड़ प्रवाह विवरण तीन गतिविधियों में विभाजित होता है:
$$ \text{शुद्ध नकदी प्रवाह} = \text{संचालन से} + \text{निवेश से} + \text{वित्तीयन से} $$
संचालन गतिविधियाँ मुख्य व्यावसायिक गतिविधियों से उत्पन्न नकदी प्रवाह हैं। इनमें शामिल हैं:
संचालन गतिविधियों से नकदी की गणना दो विधियों से की जाती है:
सभी नकद अंतर्वाहों और बहिर्वाहों को सीधे दर्शाया जाता है।
शुद्ध लाभ से शुरू करके गैर-नकद मदों एवं कार्यशील पूँजी के परिवर्तनों को समायोजित किया जाता है:
$$ \text{संचालन से नकदी} = \text{शुद्ध लाभ} + \text{ह्रास} - \text{गैर-परिचालन आय} + \text{गैर-नकद व्यय} \pm \text{कार्यशील पूँजी में परिवर्तन} $$
निवेश गतिविधियाँ दीर्घकालीन संपत्तियों और निवेशों की खरीद-बिक्री से संबंधित हैं:
वित्तीयन गतिविधियाँ पूँजी एवं ऋण के आकार एवं संरचना में परिवर्तन से संबंधित हैं:
कुछ लेन-देन नकदी को प्रभावित नहीं करते: 1. ह्रास (Depreciation) 2. ख्याति का परिशोधन (Amortisation of Goodwill) 3. संपत्ति के बदले अंश/ऋणपत्र निर्गमन 4. हरण किए गए अंशों का पुनर्निर्गमन 5. आरक्षितों में विनियोजन
चरण 1: शुद्ध लाभ (कर-पश्चात) ज्ञात करें। चरण 2: गैर-नकद मदें जोड़ें (ह्रास, परिशोधन)। चरण 3: गैर-परिचालन आय घटाएं (संपत्ति विक्रय लाभ, निवेश आय)। चरण 4: कार्यशील पूँजी मदों में परिवर्तन समायोजित करें (सूची, देनदार, लेनदार में वृद्धि/कमी)। चरण 5: कर भुगतान समायोजित करें। चरण 6: निवेश एवं वित्तीयन गतिविधियों से नकदी प्रवाह ज्ञात करें। चरण 7: कुल नकदी प्रवाह = तीनों गतिविधियों का योग।
| मद | वृद्धि | कमी |
|---|---|---|
| देनदार | नकदी घटती है | नकदी बढ़ती है |
| सूची | नकदी घटती है | नकदी बढ़ती है |
| लेनदार | नकदी बढ़ती है | नकदी घटती है |
| अग्रिम व्यय | नकदी घटती है | नकदी बढ़ती है |
रोकड़ प्रवाह विवरण तैयार करने के लिए सबसे पहले प्रारंभिक अवधि और अंतिम अवधि के तुलन पत्र तथा लाभ-हानि विवरण की आवश्यकता होती है। अप्रत्यक्ष विधि में गणना का प्रारंभ कर-पश्चात शुद्ध लाभ से होता है। शुद्ध लाभ में उन सभी गैर-नकद व्ययों को जोड़ा जाता है, जिन्हें लाभ-हानि खाते में घटाया गया था, परंतु जिनसे नकदी का बहिर्वाह नहीं हुआ। ह्रास, ख्याति का परिशोधन, ऋणपत्र छूट का परिशोधन आदि ऐसी ही मदें हैं। इसके विपरीत, संपत्ति की बिक्री से हुआ लाभ जैसी गैर-परिचालन आय को शुद्ध लाभ से घटाया जाता है, क्योंकि ऐसी आय निवेश गतिविधि से संबंधित होती है। इसके बाद चालू संपत्तियों एवं चालू देयताओं में हुए परिवर्तनों को समायोजित किया जाता है। यदि देनदार या सूची में वृद्धि होती है, तो वह राशि संचालन नकदी से घटाई जाती है, क्योंकि इसका अर्थ है कि धन इन मदों में फंस गया है। इसके विपरीत, लेनदारों में वृद्धि को संचालन नकदी में जोड़ा जाता है। इस प्रकार समायोजन करने के बाद जो राशि प्राप्त होती है, वह संचालन गतिविधियों से उत्पन्न नकदी होती है। अगले चरण में निवेश गतिविधियों से नकदी प्रवाह ज्ञात किया जाता है, जिसमें स्थिर संपत्तियों की खरीद एवं बिक्री, दीर्घकालीन निवेशों की खरीद एवं बिक्री तथा इनसे प्राप्त ब्याज एवं लाभांश शामिल होते हैं। तीसरे चरण में वित्तीयन गतिविधियों से नकदी प्रवाह ज्ञात किया जाता है, जिसमें अंशों एवं ऋणपत्रों का निर्गमन, दीर्घकालीन ऋणों की प्राप्ति, ऋणपत्रों का शोधन, अंशों का हरण, लाभांश का भुगतान तथा ऋणों की वापसी शामिल होती है। अंत में तीनों गतिविधियों से उत्पन्न नकदी प्रवाहों का योग करके शुद्ध नकदी प्रवाह ज्ञात किया जाता है, जिसे प्रारंभिक रोकड़ शेष में जोड़कर अंतिम रोकड़ शेष निकाला जाता है। यह अंतिम शेष तुलन पत्र की रोकड़ एवं बैंक मद के बराबर होना चाहिए।
| गतिविधि | उदाहरण |
|---|---|
| संचालन | विक्रय, क्रय, वेतन, कर |
| निवेश | संपत्ति क्रय/विक्रय, निवेश |
| वित्तीयन | अंश निर्गमन, ऋण, लाभांश |
| मद | वृद्धि का प्रभाव | कमी का प्रभाव |
|---|---|---|
| देनदार | नकदी कम | नकदी अधिक |
| सूची | नकदी कम | नकदी अधिक |
| लेनदार | नकदी अधिक | नकदी कम |
| मद | प्रभाव |
|---|---|
| ह्रास | नकदी प्रभावित नहीं |
| ख्याति परिशोधन | नकदी प्रभावित नहीं |
| संपत्ति के बदले अंश | नकदी प्रभावित नहीं |
रोकड़ प्रवाह विवरण कंपनी की तरलता एवं नकदी प्रबंधन की क्षमता का महत्वपूर्ण संकेतक है। संचालन, निवेश एवं वित्तीयन गतिविधियों से उत्पन्न नकदी प्रवाह का विश्लेषण निवेशकों और प्रबंधन दोनों के लिए आवश्यक है। अप्रत्यक्ष विधि द्वारा गणना का अभ्यास परीक्षा में अच्छे अंक दिलाने की कुंजी है।