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1. परिचय

विश्व की बढ़ती जनसंख्या को भोजन उपलब्ध कराना आज की सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक है। खाद्य उत्पादन बढ़ाने के लिए कृषि और पशुपालन दोनों क्षेत्रों में विज्ञान का उपयोग किया जा रहा है। इस अध्याय में हम फसल सुधार की विधियाँ, पादप प्रजनन (Plant Breeding), जैव केंद्रित उर्वरक, जैव कीटनाशक, पशुपालन, दुग्ध उत्पादन (Operation Flood) तथा मत्स्य पालन जैसे विषयों का अध्ययन करेंगे। खाद्य उत्पादन बढ़ाने के लिए 'हरित क्रांति' (Green Revolution) और 'श्वेत क्रांति' (White Revolution) ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। हरित क्रांति का संबंध अनाज उत्पादन से है, जबकि श्वेत क्रांति का संबंध दुग्ध उत्पादन से है।

2. पादप प्रजनन (Plant Breeding)

पादप प्रजनन वह विज्ञान है जिसमें मनुष्य की आवश्यकताओं के अनुसार पौधों के वांछनीय गुणों वाली किस्मों को विकसित किया जाता है। पादप प्रजनन का उद्देश्य अधिक उत्पादन, बेहतर गुणवत्ता, रोग प्रतिरोधक क्षमता, कीट प्रतिरोधक क्षमता तथा प्रतिकूल जलवायु सहनशीलता वाली किस्में विकसित करना है।

पादप प्रजनन की मुख्य विधियाँ: 1. संकरण (Hybridization): दो भिन्न किस्मों के पौधों का परागण कराकर संकर (Hybrid) प्राप्त करना। जिस पौधे से पराग लिया जाता है वह नर जनक और जिसमें दिया जाता है वह मादा जनक कहलाता है। 2. उत्परिवर्ती प्रजनन (Mutation Breeding): उत्परिवर्तन (Mutation) द्वारा नई किस्में विकसित करना। उदाहरण: शीघ्र परिपक्व होने वाली चावल की किस्में। शीघ्र पकने वाले (early maturing) चावल ने कृषि में क्रांति लाई है। 3. जीन समाक्षण (Genetic Engineering): आधुनिक तकनीकों से वांछित जीन का स्थानांतरण कर नई किस्में बनाना।

भारत में विकसित प्रमुख फसल किस्में: - गेहूँ: सोनालिका, कल्याण सोना (उच्च उत्पादन) - चावल: आई.आर.-8 (IR-8), जया, पद्म (शीघ्र परिपक्व) - सरसों: पूसा सरसों-21 (रोग प्रतिरोधी) - मक्का: गंगा-5, रतन (जलभराव सहनशील)

2.1 बेहतर उपयोगिता वाली किस्में

भारत में खाद्यान्न उत्पादन बढ़ाने के लिए उच्च उत्पादकता वाली किस्मों (High Yielding Varieties - HYVs) का विकास किया गया। इनमें बौनी किस्में (dwarf varieties) प्रमुख हैं, जैसे सोनालिका और कल्याण सोना गेहूँ, तथा IR-8 चावल। इन किस्मों में अधिक उर्वरक और सिंचाई से अधिक उत्पादन मिलता है।

3. रोग प्रतिरोधी किस्में (Disease Resistant Varieties)

पौधों को रोगों से बचाने के लिए रोग प्रतिरोधी किस्मों का विकास किया गया है। इन्हें विकसित करने की विधियाँ: - चयन (Selection): प्राकृतिक रूप से रोग प्रतिरोधी पौधों का चयन। - संकरण और चयन (Hybridization and Selection): रोग प्रतिरोधी और उच्च उत्पादक किस्मों का संकरण। - उत्परिवर्तन (Mutation): उत्परिवर्तन से रोग प्रतिरोधी किस्में।

भारत में विकसित रोग प्रतिरोधी किस्मों के उदाहरण: - गेहूँ: Himgiri (पत्ती रतुआ, बाल रतुआ के प्रति प्रतिरोधी) - सरसों: पूसा स्वर्णीम, पूसा सरसों-21 (सफेद रतुआ) - चावल: पूसा शुगंध-1 (रोग प्रतिरोधी, सुगंधित) - टमाटर: पूसा रूबी (पत्ती कुंचन वायरस प्रतिरोधी) - सन/फ्लैक्स: पूसा श्यामा

4. जैव उर्वरक और जैव कीटनाशक (Biofertilizers and Biopesticides)

रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों के अत्यधिक उपयोग से मिट्टी और पर्यावरण को हानि पहुँचती है। इसलिए जैव उर्वरक (Biofertilizers) और जैव कीटनाशक (Biopesticides) का उपयोग बढ़ाया जा रहा है।

4.1 जैव उर्वरक (Biofertilizers)

जैव उर्वरक जीवित सूक्ष्मजीव हैं जो पौधों को पोषक तत्व प्रदान करते हैं: - राइज़ोबियम (Rhizobium): फलीदार पौधों की जड़ों की ग्रंथियों में पाया जाता है और वायुमंडलीय नाइट्रोजन का स्थिरीकरण करता है। - सायनोबैक्टीरिया (Cyanobacteria): जैसे नोस्टॉक, एनाबीना, जो नाइट्रोजन स्थिरीकरण करते हैं। इन्हें नीले-हरे शैवाल कहते हैं। - माइकोराइज़ा (Mycorrhiza): कवक और पौधों की जड़ों का सहजीवी संबंध, जो फॉस्फोरस के अवशोषण में सहायता करता है। - एज़ोटोबैक्टर (Azotobacter) और एज़ोस्पाइरिलम (Azospirillum): स्वतंत्र नाइट्रोजन स्थिरीकरण करने वाले जीवाणु।

4.2 जैव कीटनाशक (Biopesticides)

5. पशुपालन (Animal Husbandry)

पशुपालन खाद्य उत्पादन का महत्वपूर्ण अंग है, जिसमें पशुओं का पालन, प्रजनन और प्रबंधन शामिल है। पशुपालन से दूध, मांस, अंडे, ऊन आदि प्राप्त होते हैं।

5.1 मत्स्य पालन (Fisheries)

मत्स्य पालन (Fisheries) मछली उत्पादन से संबंधित है। मछली पोषण का उत्कृष्ट स्रोत है (प्रोटीन युक्त)। भारत में ताजे जल (fresh water) और समुद्री जल (marine) दोनों में मत्स्य पालन होता है। ताजे जल की मछलियाँ: कैटला, रोहू, मृगल। समुद्री मछलियाँ: हिल्सा, सार्डिन, टूना। मत्स्य पालन में पोखर (pond), तालाब और जलाशयों का उपयोग होता है। मछली प्रजनन और विकास में विभिन्न हार्मोनों का उपयोग होता है।

5.2 मधुमक्खी पालन (Apiculture)

मधुमक्खी पालन (Apiculture) से शहद और मोम प्राप्त होता है। मधुमक्खियों के पालन से फसलों का परागण भी बढ़ता है। भारत में पाली जाने वाली मुख्य मधुमक्खी प्रजाति एपिस सेराना (Apis cerana) है। शहद एक पौष्टिक आहार है जिसमें शर्करा, विटामिन और खनिज होते हैं।

5.3 कुक्कुट पालन (Poultry Farming)

कुक्कुट पालन मुर्गियों के पालन से संबंधित है, जिससे मांस और अंडे प्राप्त होते हैं। अंडा प्रोटीन और विटामिन का उत्कृष्ट स्रोत है।

5.4 पशु प्रजनन (Animal Breeding)

पशु प्रजनन में अच्छी नस्लों का विकास किया जाता है। प्रजनन के प्रकार: - अंतःप्रजनन (Inbreeding): एक ही नस्ल के जानवरों का प्रजनन, जिससे शुद्ध नस्ल बनी रहती है। - बहिर्प्रजनन (Outbreeding): भिन्न नस्लों के जानवरों का प्रजनन, जिससे उन्नत नस्लें मिलती हैं।

6. दुग्ध उत्पादन (Dairy Farming) और श्वेत क्रांति

भारत में दुग्ध उत्पादन बढ़ाने के लिए 'श्वेत क्रांति' (White Revolution) शुरू की गई, जो 'ऑपरेशन फ्लड' (Operation Flood) के नाम से जानी जाती है। इसके जनक डॉ. वर्गीज़ कुरियन हैं। श्वेत क्रांति ने भारत को विश्व का सबसे बड़ा दुग्ध उत्पादक देश बना दिया। दुग्ध उत्पादन में वृद्धि के लिए उच्च उत्पादन देने वाली नस्लों (जैसे साहीवाल, रेड सिंधी, जर्सी, होल्स्टीन) का उपयोग किया जाता है। कृत्रिम गर्भाधान (Artificial Insemination - AI) तकनीक से उत्तम नस्ल के शुक्राणु मादा पशुओं में डाले जाते हैं।

6.1 कृत्रिम गर्भाधान (Artificial Insemination)

कृत्रिम गर्भाधान में उत्तम नस्ल के नर पशु के शुक्राणु (Semen) को सावधानीपूर्वक मादा पशु के गर्भाशय में डाला जाता है। इसके लाभ: रोगों की संभावना कम, एक नर से अधिक संतति, संग्रहित वीर्य का उपयोग। साहीवाल और रेड सिंधी भारतीय दुधारू नस्लें हैं, जबकि जर्सी और होल्स्टीन विदेशी नस्लें हैं।

त्वरित पुनरावृत्ति तालिकाएँ

तालिका 1: भारत में विकसित फसल किस्में

फसल किस्म विशेषता
गेहूँ सोनालिका, कल्याण सोना उच्च उत्पादन, बौनी
चावल IR-8, जया, पद्म शीघ्र परिपक्व
सरसों पूसा सरसों-21 रोग प्रतिरोधी
टमाटर पूसा रूबी रोग प्रतिरोधी

तालिका 2: जैव उर्वरक

जैव उर्वरक कार्य
राइज़ोबियम नाइट्रोजन स्थिरीकरण (फलीदार)
नोस्टॉक, एनाबीना नाइट्रोजन स्थिरीकरण
माइकोराइज़ा फॉस्फोरस अवशोषण
एज़ोटोबैक्टर स्वतंत्र नाइट्रोजन स्थिरीकरण

तालिका 3: दुधारू नस्लें

नस्ल प्रकार
साहीवाल भारतीय
रेड सिंधी भारतीय
जर्सी विदेशी
होल्स्टीन विदेशी

माइंड मैप

graph TD A["खाद्य उत्पादन में वृद्धि"] --> B["पादप प्रजनन"] A --> C["जैव उर्वरक/कीटनाशक"] A --> D["पशुपालन"] A --> E["दुग्ध उत्पादन"] A --> F["मत्स्य पालन"] B --> B1["संकरण"] B --> B2["उत्परिवर्तन"] B --> B3["जीन इंजीनियरिंग"] C --> C1["राइज़ोबियम"] C --> C2["Bt जीवाणु"] D --> D1["मत्स्य, मधुमक्खी"] D --> D2["कुक्कुट पालन"] E --> E1["श्वेत क्रांति"] E --> E2["कृत्रिम गर्भाधान"]

महत्वपूर्ण आरेख (SVG)

आरेख 1: पादप प्रजनन की विधियाँ

पादप प्रजनन की विधियाँ पादप प्रजनन संकरण दो किस्मों का परागण नर/मादा जनक उत्परिवर्ती प्रजनन उत्परिवर्तन से नई किस्म शीघ्र परिपक्व चावल जीन इंजीनियरिंग वांछित जीन का स्थानांतरण Bt कपास उद्देश्य अधिक उत्पादन, रोग प्रतिरोध, कीट प्रतिरोध, गुणवत्ता सुधार Golden Rule: हरित क्रांति में उच्च उत्पादक किस्मों (सोनालिका, IR-8) के विकास से भारत खाद्यान्न उत्पादन में आत्मनिर्भर हुआ।

आरेख 2: जैव उर्वरक और जैव कीटनाशक

जैव उर्वरक एवं जैव कीटनाशक जैव उर्वरक जैव कीटनाशक राइज़ोबियम फलीदार जड़ों में नाइट्रोजन स्थिरीकरण नोस्टॉक/एनाबीना नीले-हरे शैवाल नाइट्रोजन स्थिरीकरण माइकोराइज़ा कवक-जड़ सहजीवन फॉस्फोरस अवशोषण Bt (बैसिलस थुरिंजिएन्सिस) कीट विषैला प्रोटीन Bt कपास ट्राइकोडर्मा कवक पादप रोग नियंत्रण स्वर्ण नियम: जैव उर्वरक मिट्टी की उर्वरता बढ़ाते हैं और जैव कीटनाशक पर्यावरण को प्रदूषित किए बिना कीट नियंत्रण करते हैं।

सामान्य गलतियाँ

  1. हरित क्रांति का संबंध अनाज उत्पादन से है, जबकि श्वेत क्रांति का संबंध दुग्ध उत्पादन से; इन्हें मिलाना गलत है।
  2. ऑपरेशन फ्लड के जनक डॉ. वर्गीज़ कुरियन हैं, इसे एम.एस. स्वामीनाथन बताना गलत है।
  3. राइज़ोबियम केवल फलीदार पौधों की जड़ों में नाइट्रोजन स्थिरीकरण करता है, सभी पौधों में नहीं।
  4. Bt (बैसिलस थुरिंजिएन्सिस) एक जीवाणु है, इसे कवक बताना गलत है।
  5. IR-8 चावल की शीघ्र परिपक्व होने वाली किस्म है, इसे गेहूँ की किस्म बताना गलत है।
  6. साहीवाल और रेड सिंधी भारतीय दुधारू नस्लें हैं; जर्सी और होल्स्टीन विदेशी हैं।
  7. कृत्रिम गर्भाधान (AI) में शुक्राणु सीधे मादा के गर्भाशय में डाला जाता है, यह योनि में नहीं डाला जाता।
  8. मधुमक्खी पालन से केवल शहद ही नहीं, बल्कि मोम भी प्राप्त होता है और परागण भी बढ़ता है।

परीक्षा युक्तियाँ

  1. पादप प्रजनन की विधियाँ (संकरण, उत्परिवर्तन, जीन इंजीनियरिंग) और उद्देश्य लिखें।
  2. भारत में विकसित फसल किस्मों (सोनालिका, IR-8, पूसा सरसों-21) की सूची बनाएं।
  3. जैव उर्वरकों (राइज़ोबियम, नोस्टॉक, माइकोराइज़ा) के कार्य याद रखें।
  4. Bt जीवाणु और Bt कपास का महत्व समझें।
  5. श्वेत क्रांति और ऑपरेशन फ्लड का वर्णन करें।
  6. दुधारू नस्लों को भारतीय और विदेशी में वर्गीकृत करें।
  7. कृत्रिम गर्भाधान के लाभ सूचीबद्ध करें।
  8. मत्स्य पालन और मधुमक्खी पालन के महत्व का उल्लेख करें।

निष्कर्ष

खाद्य उत्पादन में वृद्धि के लिए कृषि और पशुपालन दोनों में वैज्ञानिक तकनीकों का उपयोग आवश्यक है। पादप प्रजनन द्वारा उच्च उत्पादक और रोग प्रतिरोधी किस्में विकसित की गई हैं, जिससे हरित क्रांति सफल हुई। जैव उर्वरक और जैव कीटनाशक पर्यावरण-अनुकूल कृषि को बढ़ावा देते हैं। पशुपालन, दुग्ध उत्पादन (श्वेत क्रांति) और मत्स्य पालन ने खाद्य सुरक्षा में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। कृत्रिम गर्भाधान और उन्नत नस्लों के उपयोग से दुग्ध उत्पादन बढ़ा है। इस प्रकार, विज्ञान और तकनीक के समुचित उपयोग से बढ़ती जनसंख्या के लिए पर्याप्त और पौष्टिक भोजन सुनिश्चित किया जा सकता है।