जैव प्रौद्योगिकी का उपयोग कृषि, चिकित्सा और उद्योग में कई क्षेत्रों में किया जाता है। पिछले अध्याय में हमने जैव प्रौद्योगिकी के सिद्धांत और प्रक्रमों का अध्ययन किया। इस अध्याय में हम जैव प्रौद्योगिकी के विभिन्न अनुप्रयोगों का अध्ययन करेंगे, जिनमें कृषि में ट्रांसजेनिक फसलें, चिकित्सा में रोग निदान और उपचार, जीन थेरेपी, DNA फिंगरप्रिंटिंग और ट्रांसजेनिक जीव शामिल हैं। जैव प्रौद्योगिकी का लक्ष्य जीन संशोधन द्वारा बेहतर उत्पाद, रोगों का उपचार और पर्यावरणीय समस्याओं का समाधान करना है।
कृषि में जैव प्रौद्योगिकी का उद्देश्य उच्च उत्पादन वाली, रोग प्रतिरोधी, कीट प्रतिरोधी और प्रतिकूल परिस्थितियों को सहन करने वाली ट्रांसजेनिक (आनुवंशिक रूप से संशोधित - GM) फसलों का विकास करना है। ट्रांसजेनिक फसलें वे पौधे हैं जिनमें वांछित जीन का स्थानांतरण किया गया हो।
Bt कपास सबसे प्रसिद्ध ट्रांसजेनिक फसल है। इसमें बैसिलस थुरिंजिएन्सिस (Bt) जीवाणु से क्राय जीन (Cry genes) का स्थानांतरण किया गया है। ये क्राय जीन विषैले प्रोटीन (Cry proteins) का निर्माण करते हैं, जो कुछ कीटों (जैसे बॉलवर्म) के लिए विषैले होते हैं। जब कीट Bt कपास का भोजन करते हैं, तो विषैला प्रोटीन उनकी आंतों को नष्ट कर देता है। इस प्रकार Bt कपास कीटों से सुरक्षित रहती है और कीटनाशकों का उपयोग घटता है।
ट्रांसजेनिक फसलों के अन्य लाभ: - खरपतवारनाशकों (Herbicides) के प्रति सहनशील फसलें, जैसे राउंडअप रेडी सोयाबीन। - उच्च पोषण मूल्य वाली फसलें।
चिकित्सा में जैव प्रौद्योगिकी के प्रमुख अनुप्रयोग रोगों का निदान, जीन थेरेपी, ट्रांसजेनिक जीवों से औषधियाँ और रोग प्रतिरोधक उत्पाद हैं।
पुनः संयोजक DNA तकनीक द्वारा मानव प्रोटीन का उत्पादन किया जा सकता है। उदाहरण: - इंसुलिन (Insulin): मधुमेह के उपचार में। पहले इंसुलिन जानवरों (गाय, सूअर) से प्राप्त होता था, परंतु अब मानव इंसुलिन का उत्पादन E. coli में किया जाता है। ह्यूमुलिन (Humulin) मानव इंसुलिन का व्यापारिक रूप है। - ग्रोथ हार्मोन (Growth Hormone): बौनेपन के उपचार में। - इंटरफेरॉन (Interferons): वायरल संक्रमण के उपचार में। - ब्लड क्लॉटिंग फैक्टर (Blood clotting factors): हीमोफीलिया के उपचार में।
जीन थेरेपी एक ऐसी तकनीक है जिसमें किसी रोगग्रस्त जीन को सामान्य जीन से प्रतिस्थापित (replace) किया जाता है। जीन थेरेपी का पहला प्रयोग सन् 1990 में किया गया था, जब SCID (Severe Combined Immuno Deficiency) रोग से पीड़ित एक बच्ची का उपचार किया गया। इस उपचार में ऐडेनोसिन डेअमिनेज़ (ADA) एंजाइम की कमी वाले रोग में सामान्य ADA जीन को लिम्फोसाइट में पहुँचाया गया।
ADA की कमी का उपचार: - अस्थि मज्जा प्रत्यारोपण - एंजाइम इंजेक्शन - जीन थेरेपी
जैव प्रौद्योगिकी की तकनीकों से रोगों का प्रारंभिक अवस्था में सटीक निदान संभव है: - PCR: संक्रमण की पहचान में। - ELISA (Enzyme Linked Immunosorbent Assay): एड्स और अन्य संक्रमणों के निदान में। - DNA प्रोब (DNA Probes): आनुवंशिक रोगों की पहचान में।
DNA फिंगरप्रिंटिंग एक ऐसी तकनीक है जिसके द्वारा प्रत्येक व्यक्ति के DNA की विशिष्ट पहचान की जाती है। यह तकनीक वी.एन.टी.आर (VNTR - Variable Number Tandem Repeats) पर आधारित है। VNTR वे DNA क्षेत्र हैं जिनमें छोटे अनुक्रमों की पुनरावृत्तियाँ होती हैं, और इन पुनरावृत्तियों की संख्या प्रत्येक व्यक्ति में भिन्न होती है। DNA फिंगरप्रिंटिंग की तकनीक एलेक जेफ़्रीज़ (Alec Jeffreys) ने विकसित की।
DNA फिंगरप्रिंटिंग के चरण: 1. DNA का निष्कर्षण। 2. प्रतिबंधन एंजाइमों द्वारा DNA का काटना। 3. जेल इलेक्ट्रोफोरेसिस द्वारा टुकड़ों का पृथक्करण। 4. साउदर्न ब्लॉटिंग (Southern blotting)। 5. रेडियोधर्मी DNA प्रोब द्वारा VNTR का पता लगाना। 6. ऑटोरेडियोग्राफी द्वारा पैटर्न का विश्लेषण।
DNA फिंगरप्रिंटिंग के उपयोग: - अपराध जाँच (फोरेंसिक विज्ञान) - पितृत्व परीक्षण - जैविक रिश्तेदारी की पहचान - दुर्लभ प्रजातियों की पहचान
ट्रांसजेनिक जीव वे जीव हैं जिनमें विदेशी जीन का स्थानांतरण किया गया है। इनमें ट्रांसजेनिक पौधे, पशु और सूक्ष्म जीव शामिल हैं। ट्रांसजेनिक जीवों के उपयोग के साथ-साथ जैव सुरक्षा (Bio-safety) के मुद्दे भी महत्वपूर्ण हैं। जैव सुरक्षा में निम्नलिखित चिंताएँ शामिल हैं: - ट्रांसजेनिक फसलों का पर्यावरण पर प्रभाव। - आनुवंशिक रूप से संशोधित (GM) खाद्य पदार्थों का स्वास्थ्य पर प्रभाव। - जीन प्रवाह (Gene flow) से देशी प्रजातियों पर प्रभाव। - जैव विविधता पर संभावित प्रभाव।
इन चिंताओं के समाधान के लिए आनुवंशिक रूप से संशोधित जीवों (GMOs) के उपयोग पर अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर नियम बनाए गए हैं। भारत में जैव सुरक्षा नियमों के अनुसार GM फसलों की स्वीकृति GEAC (जेनेटिक इंजीनियरिंग अपप्रूवल कमेटी) द्वारा दी जाती है।
| फसल | जीन | विशेषता |
|---|---|---|
| Bt कपास | क्राय जीन | कीट प्रतिरोधी |
| स्वर्ण चावल | फाइटोइन सिंथेज़ | विटामिन A अग्रदूत |
| Bt मक्का | क्राय जीन | कीट प्रतिरोधी |
| राउंडअप रेडी सोया | खरपतवारनाशक सहनशील | खरपतवार नियंत्रण |
| उत्पाद | उपयोग |
|---|---|
| इंसुलिन | मधुमेह |
| ग्रोथ हार्मोन | बौनेपन |
| इंटरफेरॉन | वायरल संक्रमण |
| क्लॉटिंग फैक्टर | हीमोफीलिया |
| तकनीक | उपयोग |
|---|---|
| PCR | संक्रमण की पहचान |
| ELISA | एड्स निदान |
| DNA फिंगरप्रिंटिंग | व्यक्ति की पहचान |
जैव प्रौद्योगिकी के उपयोग ने कृषि और चिकित्सा के क्षेत्र में क्रांति ला दी है। ट्रांसजेनिक फसलें (Bt कपास, स्वर्ण चावल) कीटों और पोषण की समस्याओं का समाधान करती हैं। रिकॉम्बिनेंट इंसुलिन, ग्रोथ हार्मोन और जीन थेरेपी जैसी तकनीकों ने अनेक रोगों के उपचार को संभव बनाया है। DNA फिंगरप्रिंटिंग ने फोरेंसिक विज्ञान और पितृत्व परीक्षण में क्रांति लाई है। इन उपलब्धियों के साथ-साथ जैव सुरक्षा (Bio-safety) की चिंताएँ भी महत्वपूर्ण हैं, जिनके लिए नियमों का पालन आवश्यक है। इस प्रकार, जैव प्रौद्योगिकी का समुचित और नैतिक उपयोग मानव कल्याण के लिए अत्यंत लाभदायक है।