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1. परिचय

जैव विविधता (Biodiversity) का अर्थ पृथ्वी पर विद्यमान विभिन्न प्रकार के जीवों की विविधता है। इसमें सभी जीवाणु, कवक, पौधे, पशु और सूक्ष्म जीव शामिल हैं। जैव विविधता शब्द का प्रयोग वाल्टर रोज़ेन (Walter Rosen) ने सन् 1985 में किया। जैव विविधता के तीन मुख्य स्तर होते हैं: आनुवंशिक विविधता (Genetic diversity), प्रजाति विविधता (Species diversity) और पारितंत्र विविधता (Ecological diversity)। जैव विविधता मानव कल्याण के लिए अत्यंत आवश्यक है, क्योंकि यह भोजन, औषधियाँ, स्वच्छ जल, ऑक्सीजन और पारितंत्र की स्थिरता प्रदान करती है। इस अध्याय में हम जैव विविधता के स्तर, वैश्विक वितरण, नुकसान के कारण और संरक्षण के उपायों का अध्ययन करेंगे।

2. जैव विविधता के स्तर (Levels of Biodiversity)

जैव विविधता को तीन स्तरों पर समझा जाता है:

  1. आनुवंशिक विविधता (Genetic Diversity): एक ही प्रजाति के विभिन्न व्यक्तियों में पाई जाने वाली आनुवंशिक भिन्नताएँ। जैसे मानवों में रंग, ऊँचाई आदि में भिन्नताएँ। यह विविधता जीवों की अनुकूलन क्षमता बढ़ाती है।
  2. प्रजाति विविधता (Species Diversity): किसी क्षेत्र में पाई जाने वाली विभिन्न प्रजातियों की विविधता। जैसे विभिन्न पक्षी प्रजातियाँ, पादप प्रजातियाँ।
  3. पारितंत्र विविधता (Ecological Diversity): विभिन्न पारितंत्रों की विविधता, जैसे वन, घासस्थल, मरुस्थल, जलीय पारितंत्र।

3. वैश्विक जैव विविधता (Global Biodiversity)

पृथ्वी पर जीवों की कुल संख्या का अनुमान अभी भी पूर्ण रूप से ज्ञात नहीं है। वैज्ञानिकों के अनुसार पृथ्वी पर लगभग 1.7 से 1.8 मिलियन प्रजातियाँ खोजी जा चुकी हैं। सबसे अधिक प्रजातियाँ कीटों की पाई जाती हैं, जिनकी संख्या सबसे अधिक है। उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों (Tropics) में सबसे अधिक जैव विविधता पाई जाती है, क्योंकि यहाँ तापमान और आर्द्रता जीवों के लिए अनुकूल होती है।

3.1 जैव विविधता के हॉटस्पॉट (Biodiversity Hotspots)

जैव विविधता के हॉटस्पॉट वे क्षेत्र हैं जिनमें अत्यधिक जैव विविधता होती है, लेकिन साथ ही वे गंभीर रूप से खतरे में होते हैं। हॉटस्पॉट की पहचान नॉर्मन मेयर (Norman Myers) ने की। हॉटस्पॉट क्षेत्रों की मुख्य विशेषताएँ: - इनमें कम से कम 1,500 स्थानिक (endemic) संवहनी पादप प्रजातियाँ होती हैं। - इनमें मूल निवास का कम से कम 70% भाग नष्ट हो चुका होता है।

विश्व में कुल 34 जैव विविधता हॉटस्पॉट हैं। इनमें से चार भारत में स्थित हैं: - पूर्वी हिमालय (Eastern Himalayas) - पश्चिमी घाट (Western Ghats) - इंडो-बर्मा (Indo-Burma) - सुंडालैंड (Sundaland)

4. जैव विविधता का महत्व (Importance of Biodiversity)

जैव विविधता का मानव जीवन में अत्यधिक महत्व है: - भोजन: पृथ्वी पर लगभग 20,000 पादप प्रजातियाँ खाने योग्य हैं, परंतु केवल 20-30 प्रजातियाँ ही मानव की मुख्य आहार आवश्यकताएँ पूर्ण करती हैं। - औषधियाँ: अनेक औषधियाँ पौधों और जीवों से प्राप्त होती हैं। जैसे कुनैन (Cinchona से), पैनिसिलिन (कवक से)। - आर्थिक मूल्य: वन उत्पाद, मछली, रेशम, शहद आदि। - पारिस्थितिकीय सेवाएँ: ऑक्सीजन उत्पादन, जल शुद्धिकरण, परागण, मृदा उर्वरता, जलवायु नियंत्रण। - आनुवंशिक संसाधन: भविष्य की फसलों के लिए जीन का स्रोत।

5. जैव विविधता के नुकसान के कारण (Causes of Biodiversity Loss)

जैव विविधता का नुकसान अनेक कारणों से हो रहा है। प्रमुख कारणों को चार समूहों में बाँटा जा सकता है (ईविल क्वार्टेट - The Evil Quartet):

  1. आवास का नुकसान और विखंडन (Habitat loss and fragmentation): वनों की कटाई, शहरीकरण, कृषि विस्तार से जीवों के आवास नष्ट हो रहे हैं। यह जैव विविधता के नुकसान का सबसे प्रमुख कारण है।
  2. विदेशी प्रजातियों का परिचय (Introduction of exotic species): विदेशी प्रजातियों का आगमन देशी प्रजातियों के लिए खतरा बनता है। उदाहरण: नील गंध (Water Hyacinth - Eichhornia), लैंटाना कैमरा और अफ्रीकी कैटफिश (Clarias gariepinus)।
  3. अति शोषण (Over-exploitation): जीवों का अत्यधिक शिकार और पौधों का अत्यधिक दोहन। उदाहरण: स्टेलर समुद्री गाय और यात्री कबूतर (Passenger pigeon) का विलुप्त होना अति शोषण के कारण।
  4. सह-विलुप्ति (Co-extinction): जब एक प्रजाति विलुप्त होती है, तो उससे जुड़ी अन्य प्रजातियाँ भी विलुप्त हो जाती हैं। उदाहरण: जब कोई शिकारी मछली विलुप्त होती है, तो उसके परजीवी भी विलुप्त हो जाते हैं।

6. जैव विविधता का संरक्षण (Conservation of Biodiversity)

जैव विविधता के संरक्षण के दो मुख्य तरीके हैं:

6.1 स्थाने संरक्षण (In-situ Conservation)

इसमें जीवों को उनके प्राकृतिक आवास में ही संरक्षित किया जाता है। इनमें शामिल हैं: - राष्ट्रीय उद्यान (National Parks) - अभयारण्य (Wildlife Sanctuaries) - बायोस्फीयर रिजर्व (Biosphere Reserves) - सींचीत वन (Sacred Groves)

भारत में 18 बायोस्फीयर रिजर्व हैं। प्रसिद्ध बायोस्फीयर रिजर्व: नीलगिरि, नंदा देवी, सुंदरबन। भारत के प्रमुख राष्ट्रीय उद्यान: कॉर्बेट, कान्हा, गिर, काजीरंगा।

6.2 बहि:स्थान संरक्षण (Ex-situ Conservation)

इसमें जीवों को उनके प्राकृतिक आवास के बाहर संरक्षित किया जाता है। इनमें शामिल हैं: - प्राणि उद्यान (Zoos) - वनस्पति उद्यान (Botanical Gardens) - बीज बैंक (Seed Banks) - जीन बैंक (Gene Banks) - क्रायोप्रिजर्वेशन (Cryopreservation): वीर्य, अंडाणु, भ्रूण को अत्यंत कम तापमान पर संरक्षित करना। - इन विट्रो फर्टिलाइज़ेशन (IVF) और टिशू कल्चर तकनीक।

7. जैव विविधता के संरक्षण हेतु अंतर्राष्ट्रीय प्रयास (International Efforts)

त्वरित पुनरावृत्ति तालिकाएँ

तालिका 1: जैव विविधता के स्तर

स्तर विवरण
आनुवंशिक विविधता एक प्रजाति के व्यक्तियों में भिन्नताएँ
प्रजाति विविधता क्षेत्र में विभिन्न प्रजातियाँ
पारितंत्र विविधता विभिन्न पारितंत्र

तालिका 2: जैव विविधता हानि के कारण (ईविल क्वार्टेट)

कारण उदाहरण
आवास हानि वनों की कटाई
विदेशी प्रजातियाँ नील गंध, लैंटाना
अति शोषण स्टेलर समुद्री गाय
सह-विलुप्ति परजीवी का विलुप्त होना

तालिका 3: संरक्षण के प्रकार

प्रकार विधियाँ
स्थाने संरक्षण राष्ट्रीय उद्यान, अभयारण्य, बायोस्फीयर रिजर्व
बहि:स्थान संरक्षण चिड़ियाघर, वनस्पति उद्यान, बीज बैंक, जीन बैंक

माइंड मैप

graph TD A["जैव विविधता"] --> B["स्तर"] A --> C["हॉटस्पॉट"] A --> D["नुकसान के कारण"] A --> E["संरक्षण"] B --> B1["आनुवंशिक"] B --> B2["प्रजाति"] B --> B3["पारितंत्र"] C --> C1["भारत में 4"] D --> D1["ईविल क्वार्टेट"] E --> E1["स्थाने संरक्षण"] E --> E2["बहि:स्थान संरक्षण"]

महत्वपूर्ण आरेख (SVG)

आरेख 1: जैव विविधता हानि के कारण

जैव विविधता हानि के कारण (ईविल क्वार्टेट) आवास हानि व विखंडन वनों की कटाई, शहरीकरण सबसे प्रमुख कारण विदेशी प्रजातियाँ नील गंध, लैंटाना अफ्रीकी कैटफिश अति शोषण अत्यधिक शिकार स्टेलर समुद्री गाय सह-विलुप्ति एक प्रजाति के विलुप्त होने पर उससे जुड़ी प्रजातियाँ भी प्रमुख परिणाम प्रजातियों का विलुप्तीकरण, पारितंत्र का असंतुलन Golden Rule: आवास हानि जैव विविधता के नुकसान का सबसे प्रमुख कारण है।

आरेख 2: संरक्षण के प्रकार

जैव विविधता का संरक्षण स्थाने संरक्षण प्राकृतिक आवास में ही बहि:स्थान संरक्षण आवास के बाहर विधियाँ राष्ट्रीय उद्यान अभयारण्य बायोस्फीयर रिजर्व सींचीत वन विधियाँ प्राणि उद्यान वनस्पति उद्यान बीज बैंक, जीन बैंक क्रायोप्रिजर्वेशन भारत के प्रमुख बायोस्फीयर रिजर्व नीलगिरि, नंदा देवी, सुंदरबन स्वर्ण नियम: IUCN की रेड डेटा बुक संकटग्रस्त प्रजातियों की सूची प्रस्तुत करती है।

सामान्य गलतियाँ

  1. जैव विविधता शब्द का प्रयोग वाल्टर रोज़ेन ने 1985 में किया, इसे डार्विन या टेन्सले से जोड़ना गलत है।
  2. हॉटस्पॉट की पहचान नॉर्मन मेयर (Norman Myers) ने की, इसे अन्य वैज्ञानिक बताना गलत है।
  3. भारत में चार हॉटस्पॉट (पूर्वी हिमालय, पश्चिमी घाट, इंडो-बर्मा, सुंडालैंड) हैं, इनकी संख्या पाँच या तीन बताना गलत है।
  4. नील गंध (Eichhornia) एक विदेशी प्रजाति है जो जैव विविधता के लिए खतरा है; इसे देशी प्रजाति बताना गलत है।
  5. सह-विलुप्ति (Co-extinction) में एक प्रजाति के विलुप्त होने से उससे जुड़ी प्रजातियाँ भी विलुप्त होती हैं, इसे सामान्य विलुप्ति समझना गलत है।
  6. क्रायोप्रिजर्वेशन (बहि:स्थान संरक्षण) में जीन/भ्रूण कम तापमान पर संरक्षित होते हैं; इसे स्थाने संरक्षण बताना गलत है।
  7. रेड डेटा बुक IUCN द्वारा प्रकाशित होती है, इसे WHO द्वारा प्रकाशित बताना गलत है।
  8. जैव विविधता का सबसे बड़ा आवास के नुकसान के कारण नुकसान होता है, इसे अति शोषण को सबसे बड़ा कारण बताना गलत है।

परीक्षा युक्तियाँ

  1. जैव विविधता के तीनों स्तरों (आनुवंशिक, प्रजाति, पारितंत्र) के उदाहरण सहित अंतर लिखें।
  2. ईविल क्वार्टेट के चार कारणों और उनके उदाहरणों की सूची बनाएं।
  3. भारत के चार हॉटस्पॉट के नाम याद रखें।
  4. स्थाने और बहि:स्थान संरक्षण की विधियों में अंतर स्पष्ट करें।
  5. IUCN, रेड डेटा बुक और CBD (1992) का संक्षिप्त उल्लेख करें।
  6. विदेशी प्रजातियों (नील गंध, लैंटाना, अफ्रीकी कैटफिश) के नाम याद रखें।
  7. जैव विविधता के महत्व (भोजन, औषधियाँ, पारिस्थितिकीय सेवाएँ) लिखें।
  8. बायोस्फीयर रिजर्व (नीलगिरि, नंदा देवी, सुंदरबन) के नाम याद रखें।

निष्कर्ष

जैव विविधता पृथ्वी पर जीवन की समृद्धि का प्रतीक है। आनुवंशिक, प्रजाति और पारितंत्र स्तरों पर फैली यह विविधता मानव को भोजन, औषधियाँ और पारिस्थितिकीय सेवाएँ प्रदान करती है। परंतु आवास हानि, विदेशी प्रजातियाँ, अति शोषण और सह-विलुप्ति (ईविल क्वार्टेट) के कारण जैव विविधता तीव्र गति से घट रही है। इसके संरक्षण के लिए स्थाने (राष्ट्रीय उद्यान, अभयारण्य, बायोस्फीयर रिजर्व) और बहि:स्थान (चिड़ियाघर, बीज बैंक, जीन बैंक) दोनों प्रकार की विधियाँ अपनाई जा रही हैं। अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर CBD और IUCN के प्रयास भी महत्वपूर्ण हैं। जैव विविधता का संरक्षण मानव और प्रकृति दोनों के भविष्य के लिए अनिवार्य है।