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1. परिचय

एल्कोहल, फीनॉल एवं ईथर कार्बनिक यौगिक हैं जिनमें ऑक्सीजन युक्त कार्यात्मक समूह उपस्थित होते हैं। एल्कोहल में हाइड्रॉक्सिल समूह (-OH) एल्किल कार्बन से जुड़ा होता है, फीनॉल में -OH बेंजीन वलय के sp² कार्बन से, तथा ईथर में ऑक्सीजन दो एल्किल या एरिल समूहों से जुड़ी होती है (R-O-R')। इन यौगिकों के गुणधर्म हाइड्रोजन आबंध, इलेक्ट्रॉन-अपनेशन (I) तथा अनुनाद प्रभावों से निर्धारित होते हैं। इस अध्याय में निर्माण विधियाँ, भौतिक गुण, रासायनिक अभिक्रियाएँ, एल्कोहल-फीनॉल-ईथर की प्रतिस्थापन अभिक्रियाएँ तथा विशेष परीक्षणों का अध्ययन होता है।

2. एल्कोहलों का वर्गीकरण तथा नामकरण

वर्गीकरण (OH से जुड़े कार्बन के आधार पर)

  1. प्राथमिक (1°): $RCH_2OH$ — मेथेनॉल, इथेनॉल।
  2. द्वितीयक (2°): $R_2CHOH$ — प्रोपेन-2-ऑल।
  3. तृतीयक (3°): $R_3COH$ — 2-मेथिलप्रोपेन-2-ऑल।

मोनोहाइड्रिक, डाइहाइड्रिक (एथिलीन ग्लाइकॉल), पॉलीहाइड्रिक (ग्लिसरॉल) भी वर्गीकरण के आधार हैं।

नामकरण

3. एल्कोहलों की निर्माण विधियाँ

1. एल्कीनों का जलयोजन

$$CH_2=CH_2 + H_2O \xrightarrow{H_3PO_4} CH_3CH_2OH$$ मार्कोव्निकोव नियम लागू होता है। असममित एल्कीन से द्वितीयक/तृतीयक एल्कोहल बनते हैं।

2. हैलोएल्केन का जल-अपघटन

$$R-X + KOH(जल) \rightarrow ROH + KX$$

3. कार्बोनिल यौगिकों का अपचयन

4. ग्रिगनार्ड अभिकर्मक से

$$R'MgX + HCHO \rightarrow R'CH_2OH \text{ (प्राथमिक)}$$ $$R'MgX + RCHO \rightarrow R'CH(OH)R \text{ (द्वितीयक)}$$ $$R'MgX + R_2CO \rightarrow R'_2COH... \text{ (तृतीयक)}$$

5. औद्योगिक विधि — किण्वन

ग्लूकोस का किण्वन: $C_6H_{12}O_6 \xrightarrow{zymase} 2C_2H_5OH + 2CO_2$ एथेनॉल ज़ाइमेज़ एंजाइम से ग्लूकोस से बनता है।

4. फीनॉलों की निर्माण विधियाँ

1. डाउ प्रक्रम

$$C_6H_5Cl + NaOH \xrightarrow{300^\circ C, 300 atm} C_6H_5OH + NaCl$$

2. क्यूमीन प्रक्रम (Hock)

$$C_6H_5CH(CH_3)_2 + O_2 \rightarrow C_6H_5OH + CH_3COCH_3$$ क्यूमीन के ऑक्सीकरण से फीनॉल और एसीटोन बनते हैं।

3. सल्फोनिक अम्ल से

$$C_6H_5SO_3H + NaOH \xrightarrow{गलन} C_6H_5ONa \xrightarrow{H^+} C_6H_5OH$$

4. डायज़ोनियम लवण से

$$C_6H_5N_2^+Cl^- + H_2O \xrightarrow{\Delta} C_6H_5OH + N_2 + HCl$$

5. भौतिक गुणधर्म

6. एल्कोहलों की रासायनिक अभिक्रियाएँ

(क) अम्लता (Acidity)

एल्कोहल दुर्बल अम्ल हैं। अम्लता क्रम: $3^\circ < 2^\circ < 1^\circ$ (आरम-I प्रभाव से)। फीनॉल एल्कोहल से अधिक अम्लीय है क्योंकि फीनॉक्साइड आयन अनुनाद द्वारा स्थायी होता है।

(ख) ऑक्सीकरण

(ग) निर्जलीकरण (Dehydration)

एल्कोहल से H₂O हटाकर एल्कीन बनाना: $$CH_3CH_2OH \xrightarrow{H_2SO_4, 443K} CH_2=CH_2 + H_2O$$ जेत्सेव नियम लागू — अधिक प्रतिस्थापित एल्कीन।

(घ) एस्टरीकरण (Esterification)

$$R-OH + R'COOH \xrightarrow{H^+} R'COOR + H_2O$$

(ङ) विलियम्सन संश्लेषण (ईथर बनाना)

$$R-ONa + R'-X \rightarrow R-O-R' + NaX$$ सोडियम एल्कॉक्साइड + एल्किल हैलाइड → ईथर। यह ईथर बनाने की सर्वोत्तम विधि है। (तृतीयक हैलाइड से एलिमिनेशन होता है, अतः उपयुक्त नहीं।)

7. फीनॉल की रासायनिक अभिक्रियाएँ

(क) अम्लता

$$C_6H_5OH \rightleftharpoons C_6H_5O^- + H^+$$ फीनॉल एल्कोहल से अधिक अम्लीय। फीनॉक्साइड आयन में ऋण आवेश अनुनाद द्वारा विस्थानीकृत होता है।

(ख) ब्रोमिनेशन

फीनॉल का ब्रोमीन जल से अभिक्रिया कर 2,4,6-ट्राइब्रोमोफीनॉल का श्वेत अवक्षेप देता है। (बिना उत्प्रेरक के भी ऑर्थो-पैरा प्रतिस्थापन)। CS₂ में एकल ब्रोमो प्रतिस्थापन (o- और p-ब्रोमोफीनॉल)।

(ग) नाइट्रेशन

तनु HNO₃ से o- तथा p-नाइट्रोफीनॉल; सांद्र HNO₃ से पिक्रिक अम्ल (2,4,6-ट्राइनाइट्रोफीनॉल)।

(घ) फीनॉल का परीक्षण

8. ईथरों की निर्माण विधियाँ

  1. विलियम्सन संश्लेषण: $R-ONa + R'-X \rightarrow R-O-R' + NaX$। सबसे अच्छी विधि।
  2. एल्कोहलों का निर्जलीकरण: $2ROH \xrightarrow{H_2SO_4, 413K} R-O-R + H_2O$ (एल्कोहल अधिकता में)।
  3. डायज़ोमेथेन द्वारा फीनॉलों से।

9. ईथरों के गुणधर्म

10. विशेष परीक्षण तथा अन्य महत्वपूर्ण बिंदु

  1. ल्यूकास परीक्षण: निर्जल ZnCl₂ + HCl से 1°, 2°, 3° एल्कोहल की पहचान — तृतीयक एल्कोहल तुरंत धुंध देता है, द्वितीयक कुछ मिनट में, प्राथमिक लगभग नहीं।
  2. फीनॉल की अम्लता पर समूहों का प्रभाव: -NO₂ जैसे इलेक्ट्रॉन-आकर्षी समूह अम्लता बढ़ाते हैं; -CH₃, -OCH₃ जैसे इलेक्ट्रॉन-मुक्ति समूह घटाते हैं।
  3. फीनॉल का हाइड्रोजनीकरण: फीनॉल को Ni उत्प्रेरक के साथ हाइड्रोजनीकृत करने पर साइक्लोहेक्सेनॉल बनता है।
  4. फीनॉल से एनिलीन: फीनॉल का जल के साथ अमोनिया तथा ZnCl₂ से एनिलीन में रूपांतरण होता है।
  5. एल्कोहल का सोडियम से अभिक्रिया: 2ROH + 2Na → 2RONa + H₂, जिसमें हाइड्रोजन गैस मुक्त होती है। यह एल्कोहल के -OH समूह की पहचान का स्रोत है।
  6. फीनॉल की कार्बोनेट से अभिक्रिया: फीनॉल सोडियम कार्बोनेट से अभिक्रिया नहीं करता क्योंकि कार्बोनिक अम्ल फीनॉल से प्रबल होता है, जबकि एल्कोहल भी ऐसा नहीं करता। यह फीनॉल तथा कार्बोक्सिलिक अम्ल के बीच अंतर का आधार है।
  7. एल्कोहलों का अभिक्रियाशीलता क्रम: हैलोजन अम्ल के प्रति क्रियाशीलता 3° > 2° > 1° होती है क्योंकि कार्बोकैटायन का स्थायित्व इसी क्रम में होता है।

त्वरित पुनरावृत्ति तालिकाएँ

तालिका 1: निर्माण विधियाँ

यौगिक विधि अभिकर्मक
एथेनॉल किण्वन ग्लूकोस + ज़ाइमेज़
फीनॉल डाउ प्रक्रम C6H5Cl + NaOH
फीनॉल क्यूमीन प्रक्रम क्यूमीन + O2
ईथर विलियम्सन संश्लेषण RONa + R'X

तालिका 2: ऑक्सीकरण उत्पाद

एल्कोहल ऑक्सीकरण उत्पाद
प्राथमिक एल्डिहाइड → कार्बोक्सिलिक अम्ल
द्वितीयक कीटोन
तृतीयक सामान्यतः नहीं

तालिका 3: अम्लता क्रम

यौगिक अम्लता
फीनॉल अधिक (अनुनाद स्थायी फीनॉक्साइड)
1° एल्कोहल मध्यम
2° एल्कोहल कम
3° एल्कोहल सबसे कम

माइंड मैप

graph TD A["एल्कोहल, फीनॉल, ईथर"] --> B["एल्कोहल (R-OH)"] B --> C["किण्वन, जलयोजन, ग्रिगनार्ड"] B --> D["ऑक्सीकरण: 1°→एल्डिहाइड"] B --> E["निर्जलीकरण → एल्कीन"] B --> F["एस्टरीकरण"] A --> G["फीनॉल (Ar-OH)"] G --> H["डाउ प्रक्रम, क्यूमीन प्रक्रम"] G --> I["अम्लता: फीनॉल > एल्कोहल"] G --> J["FeCl3 परीक्षण (बैंगनी)"] G --> K["ब्रोमीन जल → ट्राइब्रोमो"] A --> L["ईथर (R-O-R')"] L --> M["विलियम्सन संश्लेषण"] L --> N["निर्जलीकरण (413K)"] L --> O["HI → ROH + RI"]

महत्वपूर्ण आरेख (SVG)

आरेख 1: एल्कोहलों का ऑक्सीकरण

एल्कोहलों का ऑक्सीकरण 1° एल्कोहल RCH2OH एल्डिहाइड RCHO कार्बोक्सिलिक अम्ल RCOOH 2° एल्कोहल R2CHOH कीटोन R2CO 3° एल्कोहल R3COH सामान्य परिस्थितियों में ऑक्सीकृत नहीं होता Golden Rule प्राथमिक एल्कोहल एल्डिहाइड, द्वितीयक कीटोन देता है; तृतीयक एल्कोहल ऑक्सीकरण नहीं होता।

आरेख 2: फीनॉल की अम्लता (अनुनाद)

फीनॉक्साइड आयन की अनुनाद संरचनाएँ O संरचना 1 संरचना 2 संरचना 3 संरचना 4 संरचना 5 संरचना 6 स्वर्ण नियम फीनॉक्साइड आयन में ऋण आवेश अनुनाद द्वारा विस्थानीकृत होता है, इसीलिए फीनॉल एल्कोहल से अधिक अम्लीय है।

सामान्य गलतियाँ

  1. फीनॉल को एल्कोहल से कम अम्लीय समझना — फीनॉल अधिक अम्लीय है (अनुनाद स्थायी फीनॉक्साइड)।
  2. 1° एल्कोहल का ऑक्सीकरण सीधे कार्बोक्सिलिक अम्ल में लिखना — मध्यवर्ती एल्डिहाइड होता है।
  3. विलियम्सन संश्लेषण में तृतीयक हैलाइड का उपयोग करना — तृतीयक हैलाइड एलिमिनेशन देता है, ईथर नहीं।
  4. ईथर का क्वथनांक एल्कोहल से अधिक लिखना — H-आबंध के अभाव में ईथर का क्वथनांक कम होता है।
  5. फीनॉल के ब्रोमिनेशन में उत्प्रेरक (FeBr₃) आवश्यक समझना — फीनॉल बिना उत्प्रेरक के ब्रोमीन जल से ट्राइब्रोमो उत्पाद देता है।
  6. मार्कोव्निकोव जलयोजन में पराक्साइड प्रभाव को भी लगाना — जलयोजन में पराक्साइड प्रभाव लागू नहीं।
  7. एस्टरीकरण में H₂O का उपोत्पाद भूलना।

परीक्षा युक्तियाँ

  1. ग्रिगनार्ड अभिकर्मक से एल्कोहल: HCHO → 1°, RCHO → 2°, R₂CO → 3° एल्कोहल।
  2. फीनॉल की पहचान — FeCl₃ से बैंगनी रंग तथा ब्रोमीन जल से सफेद अवक्षेप।
  3. पिक्रिक अम्ल (2,4,6-ट्राइनाइट्रोफीनॉल) फीनॉल के सांद्र HNO₃ से बनता है।
  4. क्यूमीन प्रक्रम से फीनॉल + एसीटोन दोनों बनते हैं — इस उत्पाद युग्म को याद रखें।
  5. विलियम्सन संश्लेषण ईथर बनाने की सर्वोत्तम विधि है।
  6. अम्लता क्रम याद रखें: फीनॉल > 1° एल्कोहल > 2° > 3°।

निष्कर्ष

एल्कोहल, फीनॉल एवं ईथर ऑक्सीजन युक्त कार्बनिक यौगिक हैं जो हाइड्रोजन आबंध, अम्लता और निर्माण विधियों के कारण विशेष महत्व रखते हैं। निर्माण, ऑक्सीकरण, निर्जलीकरण, एस्टरीकरण तथा विलियम्सन संश्लेषण जैसी अभिक्रियाओं की समझ से इस अध्याय में उच्च अंक प्राप्त किए जा सकते हैं। फीनॉल की अम्लता तथा ईथर की क्षारकता का तुलनात्मक अध्ययन परीक्षा के लिए अत्यंत उपयोगी है।