जैव अणु (Biomolecules) वे कार्बनिक यौगिक हैं जो जीवों के शरीर में पाए जाते हैं और जीवन की मूलभूत प्रक्रियाओं में भाग लेते हैं। इनमें कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन, वसा (लिपिड), न्यूक्लिक अम्ल, विटामिन तथा एंजाइम मुख्य हैं। प्रत्येक जीवित कोशिका में ये अणु विशिष्ट कार्य करते हैं — ऊर्जा प्रदान करना (कार्बोहाइड्रेट, वसा), संरचना बनाना (प्रोटीन), आनुवंशिक सूचना संग्रहण (न्यूक्लिक अम्ल) तथा जैव अभिक्रियाओं को तेज करना (एंजाइम)। यह अध्याय कार्बोहाइड्रेटों का वर्गीकरण और संरचना, प्रोटीन के अमीनो अम्लों की संरचना, एंजाइमों की क्रियाविधि, विटामिन, न्यूक्लिक अम्ल तथा डीऑक्सीराइबोज न्यूक्लिक अम्ल (DNA) का अध्ययन कराता है।
2. कार्बोहाइड्रेट (Carbohydrates)
कार्बोहाइड्रेट पॉलीहाइड्रॉक्सी एल्डिहाइड या कीटोन होते हैं। इनका सामान्य सूत्र $C_x(H_2O)_y$ होता है। ये जीवों का प्रमुख ऊर्जा स्रोत हैं।
वर्गीकरण
मोनोसैकराइड (Monosaccharides): सरलतम, जल-अपघटन पर और सरल अणु नहीं देते। जैसे ग्लूकोस (C₆H₁₂O₆), फ्रक्टोस, गैलेक्टोस।
ओलिगोसैकराइड (Oligosaccharides): 2-10 मोनोसैकराइड इकाइयाँ। जल-अपघटन पर मोनोसैकराइड देते हैं। जैसे सुक्रोस (ग्लूकोस + फ्रक्टोस), माल्टोस (2 ग्लूकोस), लैक्टोस (ग्लूकोस + गैलेक्टोस)।
पॉलीसैकराइड (Polysaccharides): कई मोनोसैकराइड इकाइयाँ। जैसे स्टार्च, सेल्यूलोस, ग्लाइकोजन। जल में अविलेय।
मोनोसैकराइडों का वर्गीकरण
कार्बनिल समूह के आधार पर: एल्डोस (एल्डिहाइड) या कीटोस (कीटोन)।
कार्बन परमाणुओं की संख्या के आधार पर: ट्रायोस (3C), टेट्रोस (4C), पेंटोस (5C), हेक्सोस (6C)।
3. ग्लूकोस (Glucose)
सूत्र: $C_6H_{12}O_6$
ग्लूकोस एक एल्डोहेक्सोस है।
इसकी खुली श्रृंखला में एल्डिहाइड समूह तथा पाँच -OH समूह होते हैं।
ग्लूकोस चक्रीय संरचना में α तथा β दो रूपों में पाया जाता है (पाइरोनोस रूप)।
जल में घोलने पर म्यूटारोटेशन होता है — α-ग्लूकोस तथा β-ग्लूकोस के बीच संतुलन।
अपचायक शर्करा (Reducing sugar) — टॉलेन तथा फेलिंग को अपचयित करता है।
ग्लूकोस की संरचना स्थापित करने में निम्न तथ्य सहायक:
ग्लूकोस + 5CH₃COOH → पेंटाएसिटेट (5 -OH समूह)।
ग्लूकोस + HCN → हाइड्रोसायनाइड (एल्डिहाइड समूह)।
ग्लूकोस एल्डिहाइड-विशिष्ट अभिक्रियाएँ देता है (एल्डोस)।
4. फ्रक्टोस (Fructose)
सूत्र: $C_6H_{12}O_6$ (ग्लूकोस के समावयवी)।
यह एक कीटोहेक्सोस है।
फलों में मीठा घटक।
5. सुक्रोस, माल्टोस तथा लैक्टोस
डाइसैकराइड
घटक मोनोसैकराइड
अपचायक शर्करा?
सुक्रोस
ग्लूकोस + फ्रक्टोस
नहीं (गैर-अपचायक)
माल्टोस
ग्लूकोस + ग्लूकोस
हाँ
लैक्टोस
ग्लूकोस + गैलेक्टोस
हाँ
सुक्रोस का ग्लूकोस तथा फ्रक्टोस दोनों के एनोमेरिक कार्बन आबद्ध होते हैं, अतः यह गैर-अपचायक शर्करा है।
सुक्रोस का जल-अपघटन → इन्वर्ट शर्करा (ग्लूकोस + फ्रक्टोस)।
6. पॉलीसैकराइड (Polysaccharides)
स्टार्च (Starch): अमाइलोस (रैखिक, α-1,4 आबंध) तथा अमाइलोपेक्टिन (शाखित)।
सेल्यूलोस (Cellulose): β-1,4 आबंधों से जुड़े ग्लूकोस; पौधों की कोशिका भित्ति; मानव में पाचक एंजाइम नहीं, अतः आहार-रेशे।
ग्लाइकोजन (Glycogen): जंतुओं में ऊर्जा भंडार; यकृत और पेशियों में; शाखित संरचना।
7. प्रोटीन तथा अमीनो अम्ल (Proteins and Amino Acids)
अमीनो अम्ल प्रोटीन की संरचनात्मक इकाइयाँ हैं।
$$R-CH(NH_2)COOH$$
अमीनो अम्लों के गुण
अमीनो अम्लों में -NH₂ (क्षारक) तथा -COOH (अम्लीय) दोनों समूह होते हैं।
ज्विटर आयन (Zwitterion): उदासीन जल में अमीनो अम्ल आंतरिक लवण के रूप में रहते हैं: $^+NH_3-CH(R)-COO^-$।
समवैद्युत बिंदु (Isoelectric point): वह pH जिस पर अमीनो अम्ल कोई कुल आवेश नहीं रखता।
अमीनो अम्लों की संख्या: 20 मानक अमीनो अम्ल।
पेप्टाइड आबंध
दो अमीनो अम्लों के बीच -COOH और -NH₂ के निर्जलीकरण से पेप्टाइड आबंध ($-CO-NH-$) बनता है।
$$H_2N-CHR-COOH + H_2N-CHR'-COOH \rightarrow H_2N-CHR-CO-NH-CHR'-COOH + H_2O$$
प्रोटीन की संरचना स्तर
प्राथमिक संरचना: अमीनो अम्लों का रैखिक अनुक्रम।
द्वितीयक संरचना: α-हेलिक्स (पेप्टाइड आबंधों में N-H...O=C हाइड्रोजन आबंध) या β-प्लीटेड शीट।
तृतीयक संरचना: 3D व्यवस्था (हाइड्रोफोबिक, आयनिक, H-आबंध, -S-S- ब्रिज)।
चतुष्क संरचना: कई उपइकाइयों की संरचना।
प्रोटीन के प्रकार
रेशेदार प्रोटीन: रैखिक, जल में अविलेय (केराटिन, कोलेजन, फाइब्रिन)।
गोलाकार प्रोटीन: गोल, जल में विलेय (इंसुलिन, एल्ब्यूमिन)।
विकृतीकरण (Denaturation)
ऊष्मा, अम्ल, क्षार या आयनिक अभिकर्मकों से प्रोटीन की द्वितीयक/तृतीयक संरचना नष्ट होना। उदाहरण: अंडे का उबालना, दूध का दही बनना।
8. एंजाइम (Enzymes)
एंजाइम जैव-उत्प्रेरक होते हैं जो जैव अभिक्रियाओं की दर बढ़ाते हैं।
ये प्रोटीन होते हैं (कुछ RNA-आधारित राइबोजाइम)।
एंजाइमों की क्रियाविधि — लॉक-एंड-की मॉडल।
एंजाइम अत्यधिक विशिष्ट होते हैं।
सब्सट्रेट को उत्पाद में बदलते समय कम ऊर्जा बाधा की आवश्यकता (सक्रियण ऊर्जा घटाना)।
जाइमेज़, सुक्रेज़, माल्टेज़, इन्वर्टेज़ कुछ उदाहरण।
एंजाइम की क्रिया के लिए कॉफ़ैक्टर (विटामिन, धातु आयन) आवश्यक हो सकते हैं।
9. विटामिन (Vitamins)
विटामिन ऐसे कार्बनिक यौगिक हैं जो कम मात्रा में आवश्यक होते हैं परंतु शरीर में संश्लेषित नहीं होते (कुछ को छोड़कर)।
वसा-विलेय विटामिन: A, D, E, K।
जल-विलेय विटामिन: B समूह (B₁, B₂, B₆, B₁₂) तथा C।
विटामिन B₁₂ में कोबाल्ट (Co) होता है।
विटामिन की कमी से रोग:
विटामिन A: रतौंधी (रतौंधी/नाइट ब्लाइंडनेस)
विटामिन B₁: बेरी-बेरी
विटामिन C: स्कर्वी (मसूड़ों से रक्तस्राव)
विटामिन D: रिकेट्स (सूखा रोग)
विटामिन K: रक्त का थक्का न बनना
10. न्यूक्लिक अम्ल (Nucleic Acids)
न्यूक्लिक अम्ल आनुवंशिक सूचना संग्रहित करते हैं। इनकी इकाई न्यूक्लियोटाइड होती है।
न्यूक्लियोटाइड = नाइट्रोजन क्षार + पेंटोस शर्करा + फॉस्फेट समूह
RNA (राइबोन्यूक्लिक अम्ल): शर्करा = राइबोस; क्षार = A, U, G, C।
DNA (डीऑक्सीराइबोन्यूक्लिक अम्ल): शर्करा = 2-डीऑक्सीराइबोस; क्षार = A, T, G, C।
graph TD
A["जैव अणु"] --> B["कार्बोहाइड्रेट"]
B --> C["मोनोसैकराइड: ग्लूकोस, फ्रक्टोस"]
B --> D["डाइसैकराइड: सुक्रोस, माल्टोस, लैक्टोस"]
B --> E["पॉलीसैकराइड: स्टार्च, सेल्यूलोस"]
A --> F["प्रोटीन"]
F --> G["अमीनो अम्ल, पेप्टाइड आबंध"]
F --> H["संरचना: प्राथमिक-चतुष्क"]
F --> I["विकृतीकरण"]
A --> J["एंजाइम"]
J --> K["लॉक-एंड-की, विशिष्टता"]
A --> L["विटामिन"]
L --> M["वसा-विलेय: A, D, E, K"]
L --> N["जल-विलेय: B, C"]
A --> O["न्यूक्लिक अम्ल"]
O --> P["DNA: A,T,G,C; डीऑक्सीराइबोस"]
O --> Q["RNA: A,U,G,C; राइबोस"]
महत्वपूर्ण आरेख (SVG)
आरेख 1: DNA का द्वि-कुंडलित मॉडल
आरेख 2: α-हेलिक्स तथा पेप्टाइड आबंध
सामान्य गलतियाँ
सुक्रोस को अपचायक शर्करा लिखना — सुक्रोस गैर-अपचायक है क्योंकि दोनों एनोमेरिक कार्बन आबद्ध हैं।
ग्लूकोस और फ्रक्टोस के सूत्र में अंतर समझना — दोनों C₆H₁₂O₆ (समावयवी) हैं।
सेल्यूलोस को मानव-पाचन-योग्य मानना — मानव में β-1,4 आबंध तोड़ने वाला एंजाइम नहीं होता।
विटामिन A को जल-विलेय लिखना — A, D, E, K वसा-विलेय हैं।
DNA में यूरेसिल और RNA में थायमिन लिखना — DNA में T, RNA में U होता है।
विकृतीकरण को प्राथमिक संरचना नष्ट करना समझना — विकृतीकरण में द्वितीयक/तृतीयक संरचना टूटती है, प्राथमिक बनी रहती है।
एंजाइम को अकार्बनिक उत्प्रेरक मानना — एंजाइम प्रोटीन-आधारित जैव-उत्प्रेरक हैं।
विटामिन-कमी-रोग तालिका का अभ्यास करें (A → रतौंधी, D → रिकेट्स, C → स्कर्वी)।
DNA/RNA के क्षार व शर्करा के अंतर को सूचीबद्ध करें।
पेप्टाइड आबंध निर्माण में जल का उत्सर्जन लिखें।
ज्विटर आयन और समवैद्युत बिंदु की परिभाषा सटीक लिखें।
एंजाइम की विशिष्टता तथा लॉक-एंड-की मॉडल का उल्लेख करें।
निष्कर्ष
जैव अणुओं के अध्ययन में कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन, एंजाइम, विटामिन तथा न्यूक्लिक अम्ल का विस्तृत ज्ञान सम्मिलित है। ग्लूकोस की संरचना, पेप्टाइड आबंध, DNA की द्वि-कुंडलित संरचना और एंजाइमों की क्रियाविधि परीक्षा की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। इन्हें तालिकाओं तथा तुलनात्मक अध्ययन से स्मरण कर परीक्षा में उच्च अंक प्राप्त किए जा सकते हैं।