रासायनिक बलगतिकी (Chemical Kinetics) रसायन विज्ञान की वह शाखा है जिसमें रासायनिक अभिक्रियाओं की दर, उनकी क्रियाविधि तथा दर को प्रभावित करने वाले कारकों का अध्ययन किया जाता है। रासायनिक अभिक्रिया कितनी तेजी से होती है, कौन से कारक उसकी गति को बदलते हैं, तथा किस पथ (क्रियाविधि) से अभिक्रिया संपन्न होती है — यह सब रासायनिक बलगतिकी के अंतर्गत आता है। ऊष्मागतिकी यह बताती है कि अभिक्रिया हो सकती है या नहीं, जबकि बलगतिकी यह बताती है कि अभिक्रिया कितनी तेजी से होगी। अभिक्रिया की दर, दर नियम, अभिक्रिया की कोटि, अर्ध-आयु काल, सक्रियण ऊर्जा और क्रियाविधि इस अध्याय के प्रमुख विषय हैं।
किसी रासायनिक अभिक्रिया में अभिकारकों की सांद्रता में प्रति इकाई समय में होने वाला परिवर्तन अभिक्रिया की दर कहलाता है।
सामान्य अभिक्रिया के लिए: $$R \rightarrow P$$
$$\text{दर} = -\frac{\Delta[R]}{\Delta t} = +\frac{\Delta[P]}{\Delta t}$$
अभिक्रिया $aA + bB \rightarrow cC + dD$ के लिए: $$\text{दर} = -\frac{1}{a}\frac{\Delta[A]}{\Delta t} = -\frac{1}{b}\frac{\Delta[B]}{\Delta t} = +\frac{1}{c}\frac{\Delta[C]}{\Delta t} = +\frac{1}{d}\frac{\Delta[D]}{\Delta t}$$
किसी अभिक्रिया की दर को अभिकारकों की सांद्रता से संबंधित करने वाला व्यंजक दर नियम कहलाता है। $$\text{दर} = k[A]^x[B]^y$$
यहाँ $k$ = दर स्थिरांक (अभिक्रिया का वेग स्थिरांक), $x$ तथा $y$ = कोटियाँ।
दर स्थिरांक की इकाई: $(mol\,L^{-1})^{1-n}\,s^{-1}$, जहाँ $n$ = कुल कोटि।
किसी अभिक्रिया की कोटि, दर नियम में सांद्रता पदों की घातों का योग होती है। यह प्रायोगिक रूप से निर्धारित होती है और भिन्नात्मक या शून्य भी हो सकती है।
किसी अभिक्रिया में भाग लेने वाले अभिकारक अणुओं की न्यूनतम संख्या को अणुभारकता कहते हैं। यह पूर्णांक होती है और अभिक्रिया के समीकरण से ज्ञात होती है।
कोटि और अणुभारकता में अंतर:
| गुण | कोटि | अणुभारकता |
|---|---|---|
| परिभाषा | दर नियम की घातों का योग | प्राथमिक अभिक्रिया के अणुओं की संख्या |
| निर्धारण | प्रायोगिक | समीकरण से |
| मान | पूर्णांक या भिन्न | सदैव पूर्णांक |
| मान हो सकता है | शून्य | शून्य कभी नहीं |
जिसमें दर सांद्रता से स्वतंत्र होती है। $$k = \frac{[R]_0 - [R]}{t}$$
अर्ध-आयु काल: $t_{1/2} = \frac{[R]_0}{2k}$
$$k = \frac{2.303}{t}\log\frac{[R]_0}{[R]}$$
अर्ध-आयु काल: $t_{1/2} = \frac{0.693}{k}$
प्रथम कोटि की अभिक्रिया के लिए अर्ध-आयु काल आरंभिक सांद्रता से स्वतंत्र होता है। यह प्रथम कोटि की अभिक्रिया की विशेषता है।
$$2H_2O_2 \rightarrow 2H_2O + O_2$$ $$^{14}C \rightarrow \,^{14}N + e^-$$ $$RCl + OH^- \rightarrow ROH + Cl^-$$
प्रथम कोटि की अभिक्रिया में अभिकारक की सांद्रता प्रत्येक समान समयांतराल में आधी होती जाती है: $$t_{1/2} = \frac{0.693}{k}$$
औसत आयु (Mean Life): $$\tau = \frac{1}{k}$$
$t_{1/2} = 0.693 \times \tau$
रेडियोधर्मी विघटन प्रथम कोटि की अभिक्रिया है। विघटन दर: $$-\frac{dN}{dt} = \lambda N$$
यहाँ $\lambda$ = विघटन स्थिरांक।
आरहेनियस के अनुसार: $$k = A e^{-E_a/RT}$$
लघुगणकीय रूप: $$\log k = \log A - \frac{E_a}{2.303RT}$$
दो तापों T₁ और T₂ पर दर स्थिरांकों के बीच: $$\log\frac{k_2}{k_1} = \frac{E_a}{2.303R}\left(\frac{T_2 - T_1}{T_1T_2}\right)$$
यहाँ $E_a$ = सक्रियण ऊर्जा, $A$ = आवृत्ति गुणांक (पूर्व-घातांकी गुणांक), $R$ = गैस स्थिरांक (8.314 J K⁻¹ mol⁻¹)।
ताप में प्रत्येक 10°C की वृद्धि पर अधिकांश अभिक्रियाओं की दर लगभग दोगुनी हो जाती है।
अभिक्रिया को सक्रियित संकुल (Activated Complex) बनाने के लिए आवश्यक न्यूनतम ऊर्जा सक्रियण ऊर्जा कहलाती है। कम $E_a$ वाली अभिक्रिया तेज होती है।
उत्प्रेरक दोनों सक्रियण ऊर्जाओं (आगे तथा पीछे) को समान रूप से कम करके अभिक्रिया की दर बढ़ाता है। उत्प्रेरक साम्य को नहीं बदलता, केवल साम्य तक पहुँचने का समय घटाता है।
जब कोई अभिक्रिया एक से अधिक चरणों में संपन्न होती है, तो सबसे धीमा चरण दर-निर्धारक चरण (Rate Determining Step) कहलाता है। पूरी अभिक्रिया की दर इसी चरण पर निर्भर करती है।
उदाहरण: $2NO + O_2 \rightarrow 2NO_2$ - चरण 1 (धीमा): $NO + NO \rightarrow N_2O_2$ - चरण 2 (तेज): $N_2O_2 + O_2 \rightarrow 2NO_2$
दर = $k[NO]^2$ (धीमे चरण के आधार पर)।
| कोटि | दर समीकरण | एकीकृत समीकरण | अर्ध-आयु | इकाई k |
|---|---|---|---|---|
| शून्य | rate = k | k = ([R]0 - [R])/t | t1/2 = [R]0/2k | mol L⁻¹ s⁻¹ |
| प्रथम | rate = k[R] | k = (2.303/t) log([R]0/[R]) | t1/2 = 0.693/k | s⁻¹ |
| द्वितीय | rate = k[R]² | 1/[R] = 1/[R]0 + kt | t1/2 = 1/(k[R]0) | mol⁻¹ L s⁻¹ |
| गुण | कोटि | अणुभारकता |
|---|---|---|
| प्रकार | प्रायोगिक | सैद्धांतिक |
| मान | पूर्णांक/भिन्न/शून्य | केवल धन पूर्णांक |
| सांद्रता पर निर्भरता | हाँ | नहीं |
| कारक | प्रभाव |
|---|---|
| सांद्रता | दर नियम के अनुसार बढ़ती है |
| ताप | बढ़ने पर दर बढ़ती है (लगभग 10°C पर दोगुनी) |
| उत्प्रेरक | E_a घटाकर दर बढ़ाता है |
| पृष्ठ क्षेत्रफल | बढ़ने पर दर बढ़ती है |
रासायनिक बलगतिकी अभिक्रियाओं की गति, दर नियम, कोटि, एकीकृत समीकरण, अर्ध-आयु, आरहेनियस समीकरण और क्रियाविधि का अध्ययन है। यह अध्याय न केवल परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण है बल्कि औद्योगिक अभिक्रियाओं की दर नियंत्रण में भी उपयोगी है। सूत्रों का नियमित अभ्यास तथा इकाइयों पर ध्यान इस अध्याय में पूर्ण अंक दिला सकता है।