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1. परिचय

d-ब्लॉक तत्वों को संक्रमण धातु कहा जाता है, जिनमें अंतिम इलेक्ट्रॉन (n-1)d उपकोश में प्रवेश करता है। इन तत्वों के धनायनों का सामान्य विन्यास $ns^{0-2}(n-1)d^{1-10}$ होता है। संक्रमण धातुओं की विशेषताएँ — चर ऑक्सीकरण अवस्थाएँ, रंगीन यौगिक, उत्प्रेरक गुण, अनुचुंबकत्व, उपसहसंयोजन यौगिक बनाने की क्षमता तथा अंतरालीय यौगिकों का निर्माण — इन्हें विशेष बनाती हैं। f-ब्लॉक तत्वों (लैंथेनॉइड तथा एक्टिनॉइड) में इलेक्ट्रॉन 4f तथा 5f उपकोशों में प्रवेश करते हैं। इस अध्याय में संक्रमण धातुओं के गुणधर्म, K₂Cr₂O₇, KMnO₄ जैसे महत्वपूर्ण यौगिक तथा लैंथेनॉइड-एक्टिनॉइड का अध्ययन होता है।

2. d-ब्लॉक तत्वों का वर्गीकरण

Zn, Cd, Hg की विशेष स्थिति

Zn (3d¹⁰4s²), Cd, Hg पूर्ण d उपकोश रखते हैं, अतः इन्हें कभी-कभी संक्रमण श्रेणी से बाहर माना जाता है (हालाँकि वे d-ब्लॉक में ही हैं)। इनमें सामान्य ऑक्सीकरण अवस्था +2 होती है।

3. इलेक्ट्रॉनिक विन्यास तथा आवर्ती प्रवृत्तियाँ

सामान्य विन्यास

$$(n-1)d^{1-10}\,ns^{1-2}$$

परमाणु आकार

आयनन एन्थैल्पी

लैंथेनॉइड संकुचन (Lanthanoid Contraction)

f-ब्लॉक में नाभिकीय आवेश में वृद्धि के साथ 4f इलेक्ट्रॉनों के अच्छे परिरक्षण के अभाव के कारण परमाणु त्रिज्या में निरंतर कमी आती है। इसी से Zr–Hf त्रिज्या समानता और 5d श्रेणी के तत्वों का व्यवहार निर्धारित होता है।

4. संक्रमण धातुओं के सामान्य गुणधर्म

  1. चर ऑक्सीकरण अवस्थाएँ: (n-1)d और ns इलेक्ट्रॉनों के कारण। Mn में सबसे अधिक (+2 से +7 तक)। Mn की सबसे स्थायी अवस्था +2 है। Cu में +1 तथा +2; Cu²⁺ जल में स्थायी (अधिक जलयोजन एन्थैल्पी)।
  2. रंगीन यौगिक: d-d संक्रमण के कारण रंग प्रदर्शित होता है। उदाहरण: K₂Cr₂O₇ (नारंगी), KMnO₄ (बैंगनी), CuSO₄·5H₂O (नीला)।
  3. उत्प्रेरक गुण: चर ऑक्सीकरण अवस्था और सतह पर सोखने की क्षमता के कारण। उदाहरण: V₂O₅ (संपर्क प्रक्रम), Fe (हेबर प्रक्रम), Ni (हाइड्रोजनीकरण)।
  4. अनुचुंबकत्व तथा चुंबकीय आघूर्ण: अयुग्मित इलेक्ट्रॉनों की संख्या से। चुंबकीय आघूर्ण $\mu = \sqrt{n(n+2)}$ BM।
  5. उपसहसंयोजन यौगिक: छोटे आकार तथा उच्च आवेश के कारण।
  6. अंतरालीय यौगिक: हाइड्रोजन, कार्बन, नाइट्रोजन के साथ। ये कठोर, उच्च गलनांक वाले होते हैं।
  7. मिश्रधातु बनाना: परमाणु आकार में समानता के कारण।

सामान्य ऑक्सीकरण अवस्थाएँ

5. K₂Cr₂O₇ (पोटैशियम डाइक्रोमेट) का निर्माण तथा गुण

निर्माण

क्रोमाइट अयस्क (FeCr₂O₄) से: 1. भर्जन: $4FeCr_2O_4 + 8Na_2CO_3 + 7O_2 \rightarrow 8Na_2CrO_4 + 2Fe_2O_3 + 8CO_2$ 2. सोडियम डाइक्रोमेट: $2Na_2CrO_4 + H_2SO_4 \rightarrow Na_2Cr_2O_7 + Na_2SO_4 + H_2O$ 3. KCl से विनिमय: $Na_2Cr_2O_7 + 2KCl \rightarrow K_2Cr_2O_7 + 2NaCl$

गुणधर्म

6. KMnO₄ (पोटैशियम परमैंगनेट) का निर्माण तथा गुण

निर्माण

पाइरोलूसाइट (MnO₂) से: 1. MnO₂ को KOH + O₂ से गलाने पर: $2MnO_2 + 4KOH + O_2 \rightarrow 2K_2MnO_4 + 2H_2O$ (हरा मैंगनेट) 2. K₂MnO₄ का वैद्युत-ऑक्सीकरण या Cl₂ से ऑक्सीकरण: $$2K_2MnO_4 + Cl_2 \rightarrow 2KMnO_4 + 2KCl$$

गुणधर्म

7. f-ब्लॉक तत्व (Lanthanoids and Actinoids)

लैंथेनॉइड (4f, Ce से Lu)

एक्टिनॉइड (5f, Th से Lr)

लैंथेनॉइड संकुचन का प्रभाव

8. संक्रमण धातुओं के अनुप्रयोग

9. संक्रमण धातुओं के महत्वपूर्ण यौगिकों की विशेषताएँ

  1. रंगीन यौगिकों का कारण: d-d संक्रमण के कारण संक्रमण धातुओं के यौगिक रंगीन होते हैं। जिन यौगिकों में d-इलेक्ट्रॉन नहीं होते (जैसे Sc³⁺), वे रंगहीन होते हैं।
  2. उत्प्रेरकीय क्रिया का स्पष्टीकरण: संक्रमण धातुएँ चर ऑक्सीकरण अवस्थाओं के कारण मध्यवर्ती संकुल बनाकर अभिक्रिया पथ को बदलती हैं, जिससे सक्रियण ऊर्जा घटती है।
  3. विलेयता के नियम: संक्रमण धातुओं के हाइड्रॉक्साइडों की क्षारकता एवं विलेयता श्रृंखला में भिन्न होती है। Mn²⁺, Fe²⁺, Ni²⁺ जैसे आयन जल में विलेय लवण बनाते हैं।
  4. ऑक्सीकरण अवस्था की स्थिरता: स्थायित्व अयुग्मित इलेक्ट्रॉनों की संख्या और क्रिस्टल क्षेत्र स्थायीकरण पर निर्भर करता है।
  5. अंतरालीय यौगिकों के गुण: ये कठोर, उच्च गलनांक वाले तथा विद्युत के सुचालक होते हैं, क्योंकि इनमें धातु की संरचना परिवर्तित नहीं होती।
  6. मिश्रधातुओं के अनुप्रयोग: स्टेनलेस स्टील (Fe-Cr-Ni), पीतल (Cu-Zn), कांसा (Cu-Sn) जैसी मिश्रधातुएँ संक्रमण धातुओं से बनती हैं और संक्षारण प्रतिरोधी होती हैं।

त्वरित पुनरावृत्ति तालिकाएँ

तालिका 1: महत्वपूर्ण संक्रमण धातु यौगिक

यौगिक रंग ऑक्सीकरण अवस्था (धातु)
K2Cr2O7 नारंगी +6
K2CrO4 पीला +6
KMnO4 बैंगनी +7
CuSO4·5H2O नीला +2
K2MnO4 हरा +6

तालिका 2: KMnO4 के माध्यमिक उत्पाद

माध्यम अपचयन उत्पाद रंग
अम्लीय Mn2+ रंगहीन
उदासीन/दुर्बल क्षारीय MnO2 भूरा
प्रबल क्षारीय MnO4²- हरा

तालिका 3: कुछ ऑक्सीकरण अवस्थाएँ

धातु ऑक्सीकरण अवस्थाएँ
Mn +2, +3, +4, +6, +7
Fe +2, +3
Cu +1, +2
Zn +2

माइंड मैप

graph TD A["d एवं f-ब्लॉक तत्व"] --> B["d-ब्लॉक (संक्रमण धातु)"] B --> C["सामान्य विन्यास (n-1)d1-10 ns1-2"] B --> D["चर ऑक्सीकरण अवस्था"] B --> E["रंगीन यौगिक (d-d संक्रमण)"] B --> F["उत्प्रेरक गुण"] B --> G["अनुचुंबकत्व μ = √(n(n+2))"] B --> H["अंतरालीय यौगिक"] A --> I["K2Cr2O7"] I --> J["नारंगी, प्रबल ऑक्सीकारक"] A --> K["KMnO4"] K --> L["बैंगनी, माध्यम अनुसार उत्पाद"] A --> M["f-ब्लॉक"] M --> N["लैंथेनॉइड (4f)"] M --> O["एक्टिनॉइड (5f)"] N --> P["लैंथेनॉइड संकुचन"] N --> Q["सामान्य अवस्था +3"]

महत्वपूर्ण आरेख (SVG)

आरेख 1: चुंबकीय आघूर्ण बनाम अयुग्मित इलेक्ट्रॉन

अयुग्मित इलेक्ट्रॉनों से चुंबकीय आघूर्ण अयुग्मित इलेक्ट्रॉन (n) → μ (BM) μ = √(n(n+2)) BM n=1: μ=1.73 n=2: μ=2.83 n=3: μ=3.87 n=4: μ=4.90 Golden Rule चुंबकीय आघूर्ण μ = √(n(n+2)) BM, जहाँ n अयुग्मित इलेक्ट्रॉनों की संख्या है।

आरेख 2: K₂Cr₂O₇ तथा KMnO₄ की संरचना

Cr₂O₇²⁻ तथा MnO₄⁻ संरचना डाइक्रोमेट आयन Cr Cr परमैंगनेट आयन Mn चतुष्फलकीय MnO4⁻ स्वर्ण नियम Cr₂O₇²⁻ में दो Cr (ऑक्सी अवस्था +6) ब्रिज ऑक्सीजन से जुड़े होते हैं; KMnO₄ में Mn का ऑक्सीकरण अवस्था +7 होता है।

सामान्य गलतियाँ

  1. Zn, Cd, Hg को पूर्ण संक्रमण धातु मानना — इनके d उपकोश पूर्ण भरे होते हैं।
  2. Cu की सबसे स्थायी जल अवस्था +1 लिखना — जलीय विलयन में Cu²⁺ अधिक स्थायी (उच्च जलयोजन एन्थैल्पी)।
  3. KMnO₄ के अम्लीय अपचयन उत्पाद को MnO₂ लिखना — अम्लीय माध्यम में Mn²⁺ बनता है।
  4. लैंथेनॉइड की सामान्य ऑक्सीकरण अवस्था को +4 लिखना — सामान्य अवस्था +3 होती है।
  5. चुंबकीय आघूर्ण के सूत्र में n की गणना गलत करना — n अयुग्मित इलेक्ट्रॉन हैं।
  6. K₂Cr₂O₇ का रंग पीला और K₂CrO₄ का नारंगी लिखना — वास्तव में K₂Cr₂O₇ नारंगी और K₂CrO₄ पीला होता है।
  7. लैंथेनॉइड संकुचन का कारण 4f इलेक्ट्रॉनों का अपर्याप्त परिरक्षण है — इसे d-इलेक्ट्रॉनों से जोड़ना गलत है।

परीक्षा युक्तियाँ

  1. ऑक्सीकरण अवस्था का प्रश्न होने पर d+ns इलेक्ट्रॉनों की संख्या देखें; Mn में अधिकतम +7।
  2. KMnO₄ के तीनों माध्यमों के उत्पाद (Mn²⁺, MnO₂, MnO₄²⁻) याद रखें।
  3. चुंबकीय आघूर्ण के प्रश्नों में पहले d-इलेक्ट्रॉनों की व्यवस्था (Hund नियम) करें, फिर n गिनें।
  4. लैंथेनॉइड संकुचन से Zr-Hf त्रिज्या समानता का प्रश्न बार-बार आता है।
  5. K₂Cr₂O₇ के निर्माण में क्रोमाइट अयस्क (FeCr₂O₄) से प्रारंभ करें।
  6. उत्प्रेरक युग्म: V₂O₅ (संपर्क), Fe (हेबर), Ni (हाइड्रोजनीकरण) याद रखें।

निष्कर्ष

d एवं f-ब्लॉक तत्वों के अध्ययन में संक्रमण धातुओं के इलेक्ट्रॉनिक विन्यास, आवर्ती प्रवृत्तियाँ, चर ऑक्सीकरण अवस्थाएँ, रंगीन यौगिक, उत्प्रेरकीय गुण तथा K₂Cr₂O₇, KMnO₄ जैसे महत्वपूर्ण यौगिकों के निर्माण-गुणधर्म सम्मिलित हैं। f-ब्लॉक में लैंथेनॉइड-एक्टिनॉइड के विन्यास, संकुचन तथा रेडियोधर्मिता का अध्ययन किया गया। यह अध्याय उत्प्रेरण, मिश्र धातु विज्ञान और औद्योगिक रसायन की नींव है।