वैद्युत रसायन रसायन विज्ञान की वह शाखा है जिसमें विद्युत ऊर्जा और रासायनिक ऊर्जा के बीच परस्पर रूपांतरण का अध्ययन किया जाता है। इसमें वैद्युत-अपघटन, विद्युत अपघटनी सेल, गैल्वैनी (वोल्टाई) सेल, इलेक्ट्रोड विभव, नर्नस्ट समीकरण, फैराडे के नियम, चालकता तथा संक्षारण जैसे महत्वपूर्ण विषय शामिल हैं। वैद्युत रसायन के सिद्धांतों का उपयोग बैटरी, ईंधन सेल, विद्युत लेपन और धातुओं के निष्कर्षण में होता है। इलेक्ट्रोड विभव की अवधारणा यह निर्धारित करती है कि किस अभिक्रिया की दिशा सहज (स्वतः) होगी।
विद्युत चालन का आधार विलयन में आयनों की गति होती है, न कि इलेक्ट्रॉनों की (जैसा धातुओं में होता है)।
मोलर चालकता (Λ_m): एक मोल वैद्युत-अपघट्य युक्त विलयन की पूर्ण चालकता। $$\Lambda_m = \frac{\kappa \times 1000}{C}$$ यहाँ C = मोलरता। मोलर चालकता की इकाई S cm² mol⁻¹ होती है।
तनुता पर प्रभाव: तनुता बढ़ने (C घटने) पर विशिष्ट चालकता (κ) घटती है परंतु मोलर चालकता (Λ_m) बढ़ती है, क्योंकि आयनों के बीच अंतर-आयनीय आकर्षण घटता है।
अनंत तनुता पर वैद्युत-अपघट्य की सीमांत मोलर चालकता, उसके धनायन तथा ऋणायन की अलग-अलग सीमांत आयनिक चालकताओं के योग के बराबर होती है। $$\Lambda_m^\circ = \lambda_+^\circ + \lambda_-^\circ$$
$$\alpha = \frac{\Lambda_m}{\Lambda_m^\circ}$$
$$K_a = \frac{C\alpha^2}{1 - \alpha}$$
गैल्वैनी सेल वह उपकरण है जिसमें रासायनिक ऊर्जा विद्युत ऊर्जा में परिवर्तित होती है। इसमें दो अर्ध-सेल होते हैं:
डेनियल सेल: $Zn_{(s)} | Zn^{2+}{(aq)} || Cu^{2+}$} | Cu_{(s)
सेल अभिक्रिया: $Zn + Cu^{2+} \rightarrow Zn^{2+} + Cu$
इलेक्ट्रोड विभव का मान मानक हाइड्रोजन इलेक्ट्रोड (SHE) के सापेक्ष मापा जाता है। SHE का मानक इलेक्ट्रोड विभव 0.0 V होता है।
नर्नस्ट समीकरण मानक विभव तथा वास्तविक परिस्थितियों में इलेक्ट्रोड विभव के बीच संबंध स्थापित करता है।
सामान्य अर्ध-अभिक्रिया $M^{n+} + ne^- \rightarrow M$ के लिए: $$E = E^\circ - \frac{0.0591}{n}\log\frac{[M]}{[M^{n+}]}$$
डेनियल सेल के लिए: $$E_{cell} = E_{cell}^\circ - \frac{0.0591}{2}\log\frac{[Zn^{2+}]}{[Cu^{2+}]}$$
कक्ष ताप (25°C) पर, $E_{cell}^\circ$ और साम्य स्थिरांक के बीच संबंध: $$\log K_c = \frac{nE_{cell}^\circ}{0.0591}$$
वैद्युत-अपघट्य सेल में विद्युत ऊर्जा द्वारा रासायनिक अभिक्रिया कराई जाती है (असहज अभिक्रिया)। उदाहरण: जल का वैद्युत-अपघटन।
वैद्युत-अपघटन के नियम (फैराडे के नियम):
किसी इलेक्ट्रोड पर मुक्त या जमा होने वाले पदार्थ का द्रव्यमान, प्रवाहित विद्युत की मात्रा (आवेश) के समानुपाती होता है। $$W = ZIt = ZQ$$ यहाँ $Z$ = वैद्युत-रासायनिक तुल्यांक (ECR), $I$ = धारा, $t$ = समय, $Q$ = आवेश।
समान मात्रा में विद्युत प्रवाहित करने पर विभिन्न पदार्थों के मुक्त होने वाले द्रव्यमान उनके तुल्यांकी द्रव्यमानों के समानुपाती होते हैं। $$\frac{W_1}{E_1} = \frac{W_2}{E_2}$$
$$F = 96487 \, \text{C mol}^{-1} \approx 96500 \, \text{C mol}^{-1}$$
एक फैराडे विद्युत 1 ग्राम-तुल्यांक पदार्थ मुक्त करती है। - 1 मोल इलेक्ट्रॉन = 1 F - $1 F = N_A \times e = 6.022 \times 10^{23} \times 1.602 \times 10^{-19} = 96500$ C
$$E^\circ: \quad Zn^{2+}/Zn = -0.76V, \quad Cu^{2+}/Cu = +0.34V, \quad H^+/H_2 = 0.00V, \quad Ag^+/Ag = +0.80V$$
जिन्हें पुनः आवेशित नहीं किया जा सकता। उदाहरण: ड्राई सेल (जस्ता-कार्बन)।
ड्राई सेल की अर्ध-अभिक्रियाएँ: - एनोड: $Zn \rightarrow Zn^{2+} + 2e^-$ - कैथोड: $MnO_2 + NH_4^+ + e^- \rightarrow MnO(OH) + NH_3$ - विभव: लगभग 1.5 V
जिन्हें पुनः आवेशित किया जा सकता है। उदाहरण: लेड संचायक बैटरी।
लेड संचायक बैटरी: - एनोड: $Pb + SO_4^{2-} \rightarrow PbSO_4 + 2e^-$ - कैथोड: $PbO_2 + SO_4^{2-} + 4H^+ + 2e^- \rightarrow PbSO_4 + 2H_2O$ - विभव: लगभग 2 V
ईंधन सेल में हाइड्रोजन-ऑक्सीजन से विद्युत उत्पन्न होती है और उत्पाद केवल जल होता है। - एनोड: $2H_2 + 4OH^- \rightarrow 4H_2O + 4e^-$ - कैथोड: $O_2 + 2H_2O + 4e^- \rightarrow 4OH^-$
धातु का वायुमंडलीय क्रियाओं द्वारा धीरे-धीरे नष्ट होना संक्षारण कहलाता है। लोहे का संक्षारण 'जंग लगना' कहलाता है।
जंग लगने की अभिक्रिया: - एनोड: $Fe \rightarrow Fe^{2+} + 2e^-$ - कैथोड: $O_2 + 4H^+ + 4e^- \rightarrow 2H_2O$ - अंतिम उत्पाद: $Fe_2O_3 \cdot xH_2O$ (लाल-भूरा जंग)
रोकथाम के उपाय: 1. जंग हटाने के लिए पेंट लगाना। 2. विद्युत लेपन (गैल्वेनाइजेशन) — जस्ते की परत चढ़ाना। 3. तड़ित रोधक (कैथोडिक संरक्षण) — अधिक क्रियाशील धातु को एनोड बनाना। 4. मिश्रधातु बनाना (जैसे स्टेनलेस स्टील)।
| परिघटना | सूत्र |
|---|---|
| मोलर चालकता | Λ_m = κ × 1000 / C |
| नर्नस्ट समीकरण (अर्ध-सेल) | E = E° - (0.0591/n) log Q |
| सेल विभव | E_cell = E_cathode - E_anode |
| फैराडे प्रथम नियम | W = ZIt |
| वियोजन की मात्रा | α = Λ_m / Λ°_m |
| साम्य स्थिरांक | log K_c = nE°_cell / 0.0591 |
| सेल | प्रकार | एनोड | कैथोड | विभव |
|---|---|---|---|---|
| डेनियल सेल | गैल्वैनी | Zn | Cu | 1.1 V |
| ड्राई सेल | प्राथमिक | Zn | कार्बन | 1.5 V |
| लेड संचायक | द्वितीयक | Pb | PbO2 | 2 V |
| ईंधन सेल | ईंधन | H2 | O2 | 1.23 V |
| विलयन | तनुता पर κ | तनुता पर Λ_m |
|---|---|---|
| प्रबल वैद्युत-अपघट्य | घटती है | थोड़ा बढ़ता है |
| दुर्बल वैद्युत-अपघट्य | घटती है | अधिक बढ़ता है |
वैद्युत रसायन अध्याय में विद्युत और रासायनिक ऊर्जा के पारस्परिक रूपांतरण, चालकता, इलेक्ट्रोड विभव, नर्नस्ट समीकरण, फैराडे के नियम, बैटरियाँ और संक्षारण का अध्ययन किया गया। यह अध्याय औद्योगिक रसायन, बैटरी प्रौद्योगिकी तथा विद्युत लेपन के लिए आधारभूत है। सूत्रों को सही इकाइयों के साथ लागू करके उच्च अंक प्राप्त किए जा सकते हैं।