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1. परिचय

तत्वों के निष्कर्षण के सामान्य सिद्धांत एवं प्रक्रम (General Principles and Processes of Isolation of Elements) में धातुओं तथा अन्य तत्वों को उनके अयस्कों से निकालने की विधियों का अध्ययन किया जाता है। खनिज पृथ्वी की परत में प्राकृतिक रूप से पाए जाने वाले पदार्थ हैं, जबकि अयस्क वे खनिज हैं जिनसे धातु लाभकारी रूप से निकाली जा सकती है। इस अध्याय में अयस्क सांद्रण, निष्कर्षण (धातुकर्म), शोधन और परिष्करण की प्रक्रियाएँ, धातुओं की क्रियाशीलता श्रेणी, तथा विभिन्न धातुओं के निष्कर्षण के विशेष प्रक्रमों — अल्युमिनियम, लोहा, ताँबा, जस्ता — का वर्णन है। धातुकर्म धातुकर्म विज्ञान की वह शाखा है जिसमें धातुओं को अयस्कों से निकालने तथा शोधित करने का अध्ययन किया जाता है।

2. अयस्कों का सांद्रण (Concentration of Ores)

अयस्कों से अपद्रव्यों (गैंग) को हटाकर धातु की मात्रा बढ़ाने की प्रक्रिया सांद्रण या प्रगाढ़न कहलाती है। प्रमुख विधियाँ:

  1. गुरुत्वीय पृथक्करण (Gravity Separation): घनत्व के अंतर के आधार पर। सोने के अयस्क, ऑक्साइड अयस्कों के लिए।
  2. हाइड्रोलिक वाशिंग: जल की धारा द्वारा हल्के अपद्रव्य बहा दिए जाते हैं।
  3. चुंबकीय पृथक्करण (Magnetic Separation): चुंबकीय तथा अचुंबकीय खनिजों को अलग करना। जब अयस्क चुंबकीय हो (जैसे Fe₂O₃) या गैंग चुंबकीय हो।
  4. अपघर्षण (Froth Flotation): सल्फाइड अयस्कों के सांद्रण की विधि। इसमें फोम बनाने वाले (frothing agent — पाइन तेल), प्रभावक (collector — सोडियम एथिल जैंथेट) तथा स्टेबलाइज़र का उपयोग होता है। सल्फाइड कण झाग के साथ ऊपर आ जाते हैं।
  5. निष्कासन (Leaching): विलायक द्वारा अयस्क से धातु का विलयन में निष्कासन। - बॉक्साइट से एल्युमिना निकालना: Baeyer प्रक्रम — $Al_2O_3 + 2NaOH \rightarrow 2NaAlO_2 + H_2O$। - साइनाइड निष्कासन: चाँदी तथा सोने के लिए $4Au + 8CN^- + 2H_2O + O_2 \rightarrow 4[Au(CN)_2]^- + 4OH^-$।

3. धातुकर्म के सामान्य सिद्धांत (Principles of Metallurgy)

धातुकर्म की मुख्य पदावलियाँ: 1. अयस्क का सांद्रण (Concentration) 2. अयस्क का भर्जन या निस्तापन (Roasting or Calcination) 3. धातु का अपचयन (Reduction to metal) 4. धातु का परिष्करण (Refining)

भर्जन (Roasting)

अयस्क को वायु की उपस्थिति में अपने गलनांक से नीचे के ताप पर गर्म करना। सल्फाइड अयस्कों पर भर्जन होता है। $$2ZnS + 3O_2 \rightarrow 2ZnO + 2SO_2$$ $$2Cu_2S + 3O_2 \rightarrow 2Cu_2O + 2SO_2$$

निस्तापन (Calcination)

अयस्क को वायु की अनुपस्थिति (या सीमित वायु) में उच्च ताप पर गर्म करना। कार्बोनेट तथा हाइड्रेटेड ऑक्साइड अयस्कों पर। $$CaCO_3 \rightarrow CaO + CO_2$$ $$Al_2O_3 \cdot xH_2O \rightarrow Al_2O_3 + xH_2O$$

4. अयस्कों से धातुओं का निष्कर्षण (Extraction of Metals)

अपचयन के विभिन्न उपाय

  1. कार्बन द्वारा अपचयन: उन धातुओं के लिए जो कार्बन से कम क्रियाशील होती हैं (Zn, Pb, Fe)। $$ZnO + C \rightarrow Zn + CO$$ $$Fe_2O_3 + 3C \rightarrow 2Fe + 3CO$$
  2. उत्पादित ताप अपचयन (Self-reduction): Cu₂S का स्मेल्टन — $Cu_2S + 2Cu_2O \rightarrow 6Cu + SO_2$।
  3. वैद्युत-अपघटनी अपचयन: अत्यधिक क्रियाशील धातुएँ (Na, K, Ca, Al)। - अल्युमिनियम: हॉल-हेरोल्ट प्रक्रम में $Al_2O_3$ को क्रायोलाइट ($Na_3AlF_6$) में गलाकर वैद्युत-अपघटन। - कैथोड पर: $Al^{3+} + 3e^- \rightarrow Al$
  4. उष्मितीय प्रक्रम (Thermite Process): $Fe_2O_3 + 2Al \rightarrow 2Fe + Al_2O_3$ (अत्यधिक ऊष्मा, ऊष्माक्षेपी) — रेल पटरी जोड़ने में उपयोग।

अपचायक की प्रकृति — एलिंघम आरेख (Ellingham Diagram)

एलिंघम आरेख ΔG° बनाम ताप (T) का आलेख है, जो ऑक्साइड के निर्माण की मुक्त ऊर्जा दर्शाता है। यह बताता है कि कौन सा अपचायक (C, CO, H₂) किस ताप पर प्रभावी होगा। ऑक्साइड की स्थिरता ΔG° के ऋणात्मक होने से बढ़ती है।

5. धातुओं की क्रियाशीलता श्रेणी तथा अपचयन विधि

क्रियाशीलता श्रेणी के आधार पर धातुओं का निष्कर्षण: - अत्यधिक क्रियाशील (K, Na, Ca, Mg, Al): वैद्युत-अपघटनी अपचयन। - मध्यम क्रियाशील (Zn, Fe, Pb): कार्बन/CO द्वारा अपचयन। - कम क्रियाशील (Cu, Ag, Au): सामान्यतः मुक्त अवस्था या सरल निष्कर्षण।

6. अल्युमिनियम का निष्कर्षण (Extraction of Aluminium)

7. लोहे का निष्कर्षण (Extraction of Iron)

स्टील बनाना

8. ताँबे का निष्कर्षण (Extraction of Copper)

ताँबे का वैद्युत-अपघटनी परिष्करण

9. जस्ते का निष्कर्षण (Extraction of Zinc)

10. धातुओं का परिष्करण (Refining of Metals)

  1. विद्युत-अपघटनी परिष्करण: अधिकांश धातुओं के लिए (Cu, Ag, Au, Al)।
  2. विलायक निष्कर्षण
  3. क्षेत्र शोधन (Zone Refining): अतिशुद्ध अर्धचालक (Ge, Si) के लिए।
  4. वाष्प चरण परिष्करण (Vapour Phase Refining): Ni का मॉन्ड प्रक्रम — $Ni + 4CO \rightarrow Ni(CO)_4 \rightarrow Ni + 4CO$; Ti का वान आर्केल प्रक्रम।
  5. आसवन परिष्करण: कम क्वथनांक वाली धातुएँ (Hg, Zn)।

मॉन्ड प्रक्रम

$$Ni + 4CO \xrightarrow{60-80^\circ C} Ni(CO)_4 \xrightarrow{180^\circ C} Ni + 4CO$$ अशुद्ध निकल कार्बोनिल बनाता है, जो गर्म करने पर शुद्ध Ni देता है।

क्षेत्र शोधन

पतली धातु की छड़ को विद्युत चालित ताप कुंडली से गर्म करके अशुद्धियों को एक सिरे से दूसरे सिरे तक ले जाना। अर्धचालकों (Si, Ge) के परिष्करण में उपयोगी।

त्वरित पुनरावृत्ति तालिकाएँ

तालिका 1: महत्वपूर्ण अयस्क

धातु अयस्क सूत्र
अल्युमिनियम बॉक्साइट Al2O3·2H2O
लोहा हेमेटाइट Fe2O3
ताँबा कॉपर पाइराइट्स CuFeS2
जस्ता जिंक ब्लेंड ZnS
सोना/चाँदी नेटिव (मुक्त) -

तालिका 2: निष्कर्षण प्रक्रम

धातु सांद्रण विधि अपचयन विधि परिष्करण
Al निष्कासन (Baeyer) वैद्युत-अपघटन वैद्युत-अपघटनी
Fe चुंबकीय/गुरुत्वीय CO द्वारा (ब्लास्ट फर्नेस) ऑक्सीजन स्टील
Cu अपघर्षण स्व-अपचयन वैद्युत-अपघटनी
Zn अपघर्षण कार्बन अपचयन आसवन

तालिका 3: भर्जन बनाम निस्तापन

गुण भर्जन निस्तापन
वायु उपस्थित अनुपस्थित/सीमित
अयस्क सल्फाइड कार्बोनेट/हाइड्रेट
उदाहरण 2ZnS+3O2→2ZnO+2SO2 CaCO3→CaO+CO2

माइंड मैप

graph TD A["धातु निष्कर्षण"] --> B["अयस्क"] B --> C["खनिज vs अयस्क"] A --> D["सांद्रण"] D --> E["गुरुत्वीय, चुंबकीय, अपघर्षण, निष्कासन"] A --> F["धातुकर्म"] F --> G["भर्जन (सल्फाइड, वायु)"] F --> H["निस्तापन (कार्बोनेट, नो वायु)"] F --> I["अपचयन"] I --> J["कार्बन/CO: Zn, Fe"] I --> K["वैद्युत-अपघटन: Na, Al"] I --> L["स्व-अपचयन: Cu"] A --> M["परिष्करण"] M --> N["वैद्युत-अपघटनी"] M --> O["क्षेत्र शोधन (Ge, Si)"] M --> P["मॉन्ड प्रक्रम (Ni)"] A --> Q["एलिंघम आरेख"] Q --> R["ΔG° बनाम ताप"]

महत्वपूर्ण आरेख (SVG)

आरेख 1: ब्लास्ट फर्नेस

ब्लास्ट फर्नेस (लोहा निष्कर्षण) अयस्क + कोक + चूना पत्थर गरम वायु CO (अपचायक) गलित लोहा धातुमल (CaSiO3) नल (tapping) Golden Rule ब्लास्ट फर्नेस में चूना पत्थर का कार्य गैंग को धातुमल (CaSiO3) में बदलना है।

आरेख 2: ताँबे का वैद्युत-अपघटनी परिष्करण

ताँबे का वैद्युत-अपघटनी परिष्करण CuSO4 + H2SO4 विद्युत-अपघट्य अशुद्ध Cu (एनोड) शुद्ध Cu (कैथोड) एनोड पर घुलन: Cu → Cu²⁺ + 2e⁻ (Ag, Au नीचे एनोड कीचड़ में) एनोड कीचड़ (Ag, Au, Pt) स्वर्ण नियम वैद्युत-अपघटनी परिष्करण में शुद्ध धातु कैथोड पर जमा होती है और अशुद्ध धातु एनोड बनती है।

सामान्य गलतियाँ

  1. खनिज और अयस्क को एक मानना — अयस्क वह खनिज है जिससे धातु लाभप्रद रूप से निकाली जा सके।
  2. भर्जन (वायु उपस्थिति, सल्फाइड) और निस्तापन (वायु की अनुपस्थिति, कार्बोनेट) को उल्टा करना।
  3. अपघर्षण विधि को केवल सल्फाइड अयस्कों के लिए मानना और ऑक्साइड के लिए नहीं — यह सही है कि यह सल्फाइड के लिए है; ऑक्साइड के लिए गुरुत्वीय विधि उपयुक्त है।
  4. हॉल-हेरोल्ट प्रक्रम में क्रायोलाइट का कार्य भूलना — यह गलनांक घटाकर चालकता बढ़ाता है।
  5. ताँबे का स्व-अपचयन समीकरण गलत लिखना — $Cu_2S + 2Cu_2O \rightarrow 6Cu + SO_2$ (स्व-अपचयन उत्पादित ताप अपचयन)।
  6. मॉन्ड प्रक्रम को Ni के स्थान पर अन्य धातुओं से जोड़ना।
  7. बेस्सेमर प्रक्रम को स्टील के स्थान पर कच्चा लोहा बनाने की विधि समझना — वह लोहे से अतिरिक्त C हटाने के लिए है।

परीक्षा युक्तियाँ

  1. अयस्क-सूत्र-धातु के युग्मों की तालिका याद रखें — बॉक्साइट, हेमेटाइट, कॉपर पाइराइट्स, जिंक ब्लेंड, कैलेमाइन।
  2. अपचयन विधि को क्रियाशीलता श्रेणी से जोड़कर समझें — अधिक क्रियाशील धातु के लिए वैद्युत-अपघटन।
  3. एलिंघम आरेख से प्रश्न आने पर — ΔG° जितना कम (ऋणात्मक), ऑक्साइड उतना स्थिर; C/CO उच्च ताप पर बेहतर अपचायक।
  4. वैद्युत-अपघटनी परिष्करण में एनोड/कैथोड का विवरण सही लिखें।
  5. क्षेत्र शोधन — Ge, Si; मॉन्ड — Ni; वान आर्केल — Ti के युग्म अक्सर पूछे जाते हैं।
  6. साइनाइड निष्कासन केवल Ag और Au के लिए होता है — यह तथ्य याद रखें।

निष्कर्ष

धातुओं के निष्कर्षण के सिद्धांतों में खनिज-अयस्क की संकल्पना, सांद्रण की विधियाँ, भर्जन-निस्तापन, अपचयन के उपाय तथा परिष्करण की विधियाँ सम्मिलित हैं। एलिंघम आरेख अपचायकों के चयन में सहायक है। अल्युमिनियम, लोहा, ताँबा तथा जस्ते के निष्कर्षण के विशेष प्रक्रमों की समझ इस अध्याय का केंद्र है। इन प्रक्रमों की क्रमबद्ध अभ्यास से परीक्षा में उच्च अंक प्राप्त किए जा सकते हैं।