p-ब्लॉक तत्व आवर्त सारणी के समूह 13 से 18 तक के तत्व होते हैं, जिनमें अंतिम इलेक्ट्रॉन p-उपकोश में प्रवेश करता है। इन तत्वों का सामान्य इलेक्ट्रॉनिक विन्यास $ns^2np^{1-6}$ होता है। इस अध्याय में समूह 13 (बोरॉन परिवार), 14 (कार्बन परिवार), 15 (नाइट्रोजन परिवार), 16 (ऑक्सीजन परिवार/चाल्कोजन), 17 (हैलोजन) और 18 (अक्रिय गैस) तत्वों की आवर्ती प्रवृत्तियाँ, गुणधर्म तथा यौगिकों का अध्ययन किया जाता है। p-ब्लॉक तत्वों के गुणधर्म कक्षा 11 में पढ़े गए p-ब्लॉक (समूह 13-18 के मूल) से आगे बढ़कर कक्षा 12 में समूह 15-18 के तत्वों का विस्तृत अध्ययन होता है।
2. समूह 15: नाइट्रोजन परिवार (Nitrogen Family)
समूह 15 के तत्व: N, P, As, Sb, Bi। सामान्य विन्यास $ns^2np^3$।
गुणधर्म
वैद्युतऋणात्मकता ऊपर से नीचे घटती है।
परमाणु आकार तथा धात्विक गुण नीचे जाने पर बढ़ते हैं (Bi धातु)।
N से P की ओर जाने पर वैद्युतऋणात्मकता में अंतर कम होता है।
नाइट्रोजन के गुणधर्म
नाइट्रोजन $N_2$ अणु में त्रि-आबंध ($N \equiv N$) होता है, जिसकी बंध एन्थैल्पी (946 kJ/mol) अत्यधिक होती है। इसी कारण नाइट्रोजन निष्क्रिय है।
नाइट्रोजन द्विपरमाणुक है जबकि P4, As4 बहुपरमाणुक अणु बनाते हैं।
ओजोन (O3): $3O_2 \rightleftharpoons 2O_3$, अणुकोणीय संरचना, sp² संकरण, बंध कोण 116.5°। O3 सिलिका जेल से जुड़कर ओज़ोनाइड बनाता है। O3 से Hg, PbS का ऑक्सीकरण होता है। O3 का उपयोग जल शोधन में।
सल्फर
ऑर्थोरोम्बिक सल्फर (α-S) तथा मोनोक्लिनिक सल्फर (β-S) अपररूप।
ऑर्थोरोम्बिक, मोनोक्लिनिक से अधिक स्थायी (369 K से नीचे)।
हैलोजनों के ऑक्सोअम्लों की क्षारकता सामान्यतः एक होती है।
क्लोरीन के ऑक्सोअम्ल: HOCl (हाइपोक्लोरस), HClO₂ (क्लोरस), HClO₃ (क्लोरिक), HClO₄ (परक्लोरिक)। इनकी ऑक्सीकारक क्षमता में ऑक्सीजन की संख्या बढ़ने पर कमी आती है; अम्ल प्रबलता बढ़ती है।
5. समूह 18: अक्रिय गैस (Noble Gases)
समूह 18 के तत्व: He, Ne, Ar, Kr, Xe, Rn। सामान्य विन्यास $ns^2np^6$ (He = 1s²)।
गुणधर्म
अत्यधिक कम क्रियाशीलता (पूर्ण कोश इलेक्ट्रॉन विन्यास)।
आयनन एन्थैल्पी अत्यधिक होती है।
इनमें परमाण्वीय प्रकृति होती है (एकपरमाणुक)।
जल, β-हाइड्रोक्विनोन से क्लैथ्रेट बनाते हैं।
यौगिक (Xe के)
Xe + F2 → XeF2, XeF4, XeF6 (ताप व सांद्रता के अनुसार)।
XeF2 में Xe sp³d संकरण (रैखिक), XeF4 में sp³d² (वर्ग समतलीय), XeF6 में sp³d³ (विकृत अष्टफलकीय)।
Xe सबसे अधिक यौगिक बनाने वाली अक्रिय गैस है।
उपयोग
He: गुब्बारे, गहरे समुद्र श्वसन में।
Ar: उदासीन वातावरण, प्रदीपन बल्ब।
Xe, Kr: विशेष प्रदीपन बल्ब।
6. आवर्ती प्रवृत्तियाँ (Periodic Trends)
p-ब्लॉक में परमाणु आकार ऊपर से नीचे बढ़ता है।
वैद्युतऋणात्मकता घटती है।
आयनन एन्थैल्पी घटती है।
धात्विक गुण बढ़ते हैं।
ऑक्सीकारक क्षमता घटती है।
7. यौगिकों की संरचना तथा आबंधन के सिद्धांत
ऑक्टेट विस्तार: p-ब्लॉक तत्व (जैसे S, P, Xe) अपने रिक्त d-ऑर्बिटलों का उपयोग कर ऑक्टेट से अधिक इलेक्ट्रॉन युक्त यौगिक बनाते हैं, जैसे SF₆, PCl₅, XeF₄।
असंगत आबंध कोण: अकेला युग्म (lone pair) उपस्थित होने पर आबंध कोण मानक मान से घट जाता है — NH₃ में 107°, H₂O में 104.5°।
हाइड्रोजन आबंध का प्रभाव: NH₃, H₂O, HF जैसे यौगिकों में हाइड्रोजन आबंध के कारण क्वथनांक संगत हाइड्राइडों (PH₃, H₂S, HCl) से अधिक होता है।
तत्वों की ऑक्सीकरण अवस्थाएँ: p-ब्लॉक तत्व अपने वर्ग संख्या के अनुसार अधिकतम ऑक्सीकरण अवस्था प्रदर्शित करते हैं — N तथा O अपनी उच्चतम अवस्थाएँ (क्रमशः +5, +6) कुछ अपवादों के साथ नहीं बनाते।
अक्रिय युग्म प्रभाव (Inert Pair Effect): समूह में नीचे जाने पर ns² इलेक्ट्रॉन युग्म की क्रियाशीलता कम हो जाती है, जिससे निम्न ऑक्सीकरण अवस्थाएँ स्थायी होती हैं — जैसे Pb²⁺, Bi³⁺, Tl⁺।
वैद्युतऋणात्मकता में परिवर्तन: हैलोजन से अक्रिय गैस की ओर जाने पर वैद्युतऋणात्मकता घटती है, परंतु F तथा O में अधिकतम वैद्युतऋणात्मकता होती है।
त्वरित पुनरावृत्ति तालिकाएँ
तालिका 1: समूहों के तत्व तथा विन्यास
समूह
तत्व
सामान्य विन्यास
प्रमुख अयस्क/स्रोत
15
N, P, As, Sb, Bi
ns²np³
NH3, PH3
16
O, S, Se, Te, Po
ns²np⁴
O2, S8, H2SO4
17
F, Cl, Br, I, At
ns²np⁵
F2, Cl2, Br2, I2
18
He, Ne, Ar, Kr, Xe, Rn
ns²np⁶
XeF2, XeF4
तालिका 2: Xe के फ्लोराइड
यौगिक
संकरण
संरचना
XeF2
sp³d
रैखिक
XeF4
sp³d²
वर्ग समतलीय
XeF6
sp³d³
विकृत अष्टफलकीय
तालिका 3: ऑक्सीकारक क्षमता तथा अम्लता
गुण
क्रम
हैलोजन ऑक्सीकारक क्षमता
F2 > Cl2 > Br2 > I2
हाइड्रोजन हैलाइड अम्लता
HF < HCl < HBr < HI
फॉस्फोरस ऑक्सोअम्ल क्षारकता
H3PO2 (1) < H3PO3 (2) < H3PO4 (3)
माइंड मैप
graph TD
A["p-ब्लॉक तत्व"] --> B["समूह 15 (N, P)"]
B --> C["हेबर: NH3 (Fe उत्प्रेरक)"]
B --> D["ओस्टवाल्ड: HNO3"]
B --> E["P4 श्वेत/लाल"]
A --> F["समूह 16 (O, S)"]
F --> G["O2 अनुचुंबकीय"]
F --> H["संपर्क: H2SO4 (V2O5)"]
A --> I["समूह 17 (F, Cl, Br, I)"]
I --> J["ऑक्सीकारक: F2 > Cl2 > Br2 > I2"]
I --> K["ब्लीचिंग पाउडर CaOCl2"]
A --> L["समूह 18 (अक्रिय गैस)"]
L --> M["XeF2, XeF4, XeF6"]
L --> N["क्लैथ्रेट"]
महत्वपूर्ण आरेख (SVG)
आरेख 1: NH₃ तथा H₂O की संरचना
आरेख 2: सल्फ्यूरिक अम्ल की संरचना तथा ओस्टवाल्ड प्रक्रम
सामान्य गलतियाँ
N₂ की त्रि-आबंध एन्थैल्पी को कम मानना — यह 946 kJ/mol है, जो इसे निष्क्रिय बनाती है।
NH₃ और PH₃ के क्वथनांकों में अंतर भूलना — NH₃ में H-आबंध के कारण क्वथनांक अधिक।
P₄ की संरचना में बंध कोण 60° होता है — चतुष्फलकीय P4 में 60° लिखने में गलती।
H₃PO₂ की क्षारकता 3 लिखना — वास्तव में 1 (एक -OH समूह)।
XeF₆ की संरचना नियमित अष्टफलकीय लिखना — वह विकृत अष्टफलकीय है।
हैलोजन की ऑक्सीकारक क्षमता का क्रम उल्टा लिखना — F₂ सबसे प्रबल ऑक्सीकारक।
सल्फर के अपररूपों को भ्रमित करना — 369 K से नीचे ऑर्थोरोम्बिक स्थायी।
परीक्षा युक्तियाँ
ओस्टवाल्ड प्रक्रम की तीन अभिक्रियाओं को क्रम से लिखें — NH₃ से HNO₃ तक।
क्षारकता प्रश्नों में -OH समूहों की संख्या गिनें — H₃PO₂ (1), H₃PO₃ (2), H₃PO₄ (3)।
Xe के फ्लोराइडों के संकरण और संरचना की तालिका (sp³d रैखिक, sp³d² वर्ग समतलीय, sp³d³ विकृत अष्टफलकीय) याद रखें।
क्लोरीन की तैयारी MnO₂ + HCl से तथा ब्लीचिंग पाउडर Ca(OH)₂ + Cl₂ से होती है।
अक्रिय गैसों के उपयोग: He (गुब्बारा), Ar (बल्ब)।
निष्कर्ष
p-ब्लॉक तत्वों में समूह 15-18 के तत्वों के विन्यास, आवर्ती प्रवृत्तियाँ, अयस्क-निर्माण प्रक्रम (हेबर, ओस्टवाल्ड, संपर्क) तथा विशेष यौगिकों की संरचना का अध्ययन किया गया। नाइट्रोजन-फास्फोरस-ऑक्सीजन-सल्फर-हैलोजन-अक्रिय गैसों के गुणधर्मों की तुलनात्मक समझ से परीक्षा में विशिष्ट प्रश्नों को हल करना सरल होता है।