पृष्ठ रसायन (Surface Chemistry) रसायन विज्ञान की वह शाखा है जिसमें विभिन्न प्रकार के पृष्ठों पर होने वाली घटनाओं — अधिशोषण, उत्प्रेरण, कोलॉइड बनना — का अध्ययन किया जाता है। पृष्ठ रसायन में ठोस-गैस, ठोस-द्रव, द्रव-द्रव तथा द्रव-गैस अंतरापृष्ठों पर होने वाली क्रियाएँ शामिल हैं। किसी पदार्थ की सतह पर दूसरे पदार्थ के अणुओं का जुड़ना अधिशोषण कहलाता है, जो अधिशोषक और अधिशोष्य पर निर्भर करता है। यह अध्याय अधिशोषण के प्रकार, फ्रायंडलिख तथा लैंगम्यूर समताप वक्र, उत्प्रेरकों की क्रिया, कोलॉइडी विलयनों के गुणधर्म, इमल्शन तथा उनके अनुप्रयोगों का विस्तृत अध्ययन कराता है। औद्योगिक, जैविक तथा पर्यावरणीय दृष्टिकोण से यह अत्यंत महत्वपूर्ण है।
2. अधिशोषण (Adsorption)
किसी ठोस या द्रव की सतह पर किसी गैस या विलेय के अणुओं का एकत्रित होना अधिशोषण कहलाता है। जो पदार्थ अधिशोषण करता है उसे अधिशोषक (Adsorbent) तथा जो पदार्थ अधिशोषित होता है उसे अधिशोष्य (Adsorbate) कहते हैं।
अधिशोषण सतह की घटना है, जबकि अवशोषण (Absorption) संपूर्ण पिंड में होती है।
अधिशोषण ऊष्माक्षेपी (Exothermic) प्रक्रिया है।
अधिशोषण की मात्रा ताप बढ़ने पर घटती है।
अधिशोषण के कारण
पृष्ठ पर स्थित परमाणु/अणु, आंतरिक परमाणुओं की तुलना में असंतुलित बलों का अनुभव करते हैं। यही असंतुलित बल दूसरे पदार्थ के अणुओं को अपनी ओर खींचते हैं।
अधिशोषण के प्रकार
भौतिक अधिशोषण (Physisorption): वांडरवाल्स बलों द्वारा। कम विशिष्ट, बहुपरतीय, ऊष्मा अल्प (20-40 kJ/mol), प्रतिवर्ती, ताप बढ़ने पर घटता है।
रासायनिक अधिशोषण (Chemisorption): रासायनिक बंधों द्वारा। अत्यधिक विशिष्ट, एकपरतीय, ऊष्मा अधिक (80-240 kJ/mol), अनुत्क्रमणीय, सक्रियण ऊर्जा आवश्यक।
3. अधिशोषण को प्रभावित करने वाले कारक
अधिशोषक का पृष्ठ क्षेत्रफल: पृष्ठ क्षेत्रफल बढ़ने पर अधिशोषण बढ़ता है।
ताप: अधिशोषण ऊष्माक्षेपी है, अतः ताप बढ़ने पर अधिशोषण घटता है।
गैस की प्रकृति: आसानी से द्रवित होने वाली गैसें (जैसे SO₂, NH₃) अधिक अधिशोषित होती हैं।
दाब: दाब बढ़ने पर अधिशोषण बढ़ता है।
अधिशोषक की प्रकृति: सूक्ष्म रंध्रयुक्त पदार्थ (चारकोल, सिलिका जेल) अच्छे अधिशोषक होते हैं।
4. अधिशोषण समताप वक्र (Adsorption Isotherm)
फ्रायंडलिख समताप वक्र (Freundlich Isotherm)
$$\frac{x}{m} = k \cdot p^{1/n}$$
लघुगणकीय रूप:
$$\log\frac{x}{m} = \log k + \frac{1}{n}\log p$$
यहाँ $x$ = अधिशोषित गैस की मात्रा, $m$ = अधिशोषक का द्रव्यमान, $p$ = दाब, $k$ तथा $n$ = स्थिरांक ($n > 1$)।
फ्रायंडलिख समताप वक्र दाब की मध्यम श्रेणी में मान्य होता है।
लैंगम्यूर समताप वक्र (Langmuir Isotherm)
लैंगम्यूर सिद्धांत के अनुसार अधिशोषण एकपरतीय होता है और अधिशोषक की सतह पर निश्चित संख्या में सक्रिय स्थल होते हैं। समीकरण:
$$\frac{p}{x/m} = \frac{1}{k_1} + \frac{k_2}{k_1} p$$
लैंगम्यूर समताप वक्र उच्च दाब पर पूर्ण संतृप्ति दर्शाता है।
5. उत्प्रेरण (Catalysis)
उत्प्रेरक वह पदार्थ है जो अभिक्रिया की दर बदलता है किंतु स्वयं रासायनिक रूप से अपरिवर्तित रहता है। यह प्रक्रिया उत्प्रेरण कहलाती है।
उत्प्रेरक के लक्षण
उत्प्रेरक अभिक्रिया की दर बढ़ाता है (धनात्मक उत्प्रेरक) या घटाता है (ऋणात्मक उत्प्रेरक/अवरोधक)।
उत्प्रेरक अभिक्रिया की सक्रियण ऊर्जा कम करता है।
उत्प्रेरक साम्य स्थिरांक (K) नहीं बदलता, केवल साम्य तक पहुँचने की गति बढ़ाता है।
उत्प्रेरक अत्यधिक विशिष्ट होते हैं — एक उत्प्रेरक केवल एक ही अभिक्रिया को तेज करता है।
एक निश्चित अभिक्रिया के लिए अल्प मात्रा में उत्प्रेरक पर्याप्त होता है।
सक्रियण ऊर्जा पर प्रभाव
उत्प्रेरक दोनों दिशाओं की सक्रियण ऊर्जाओं को समान रूप से घटाता है, अतः ΔH अपरिवर्तित रहता है।
ओस्टवाल्ड प्रक्रम: NH₃ → NO, उत्प्रेरक: Pt (प्लैटिनम)।
हाइड्रोजनीकरण: वनस्पति घी बनाने में Ni उत्प्रेरक।
6. जिओलाइट (Zeolites)
जिओलाइट एल्युमिनोसिलिकेट के जलयोजित होते हैं जिनमें क्रमबद्ध आकार के रंध्र होते हैं। इनका उपयोग आकार-चयनात्मक उत्प्रेरण (Shape-selective catalysis) में होता है। उदाहरण: ZSM-5 द्वारा बेंजीन से एथिलबेंजीन बनाना।
7. कोलॉइड (Colloids)
कोलॉइडी विलयन दो प्रावस्थाओं का विषमांगी मिश्रण होता है जिसमें कणों का आकार 1 से 1000 nm (1 nm–1000 nm) के बीच होता है।
परिक्षिप्त प्रावस्था (Dispersed phase): सूक्ष्म कणों वाला घटक।
परिक्षेपण माध्यम (Dispersion medium): वह माध्यम जिसमें कण बिखरे होते हैं।
कोलॉइडी विलयनों के प्रकार
परिक्षिप्त प्रावस्था
माध्यम
नाम
उदाहरण
ठोस
ठोस
ठोस-सोल
रूबी काँच, मिश्र धातु
ठोस
द्रव
सोल
पेंट, इंक
ठोस
गैस
धुआँ
धुआँ, वायु-धूल
द्रव
ठोस
जेल
पनीर, जेली
द्रव
द्रव
इमल्शन
दूध, क्रीम
द्रव
गैस
तरल एयरोसोल
मिस्ट, बादल
गैस
ठोस
ठोस-फोम
प्यूमिस, स्पंज
गैस
द्रव
फोम
झाग, व्हीप्ड क्रीम
लियोफिलिक तथा लियोफोबिक सोल
लियोफिलिक सोल (जल-स्नेही): कोलॉइड कणों का माध्यम से आकर्षण अधिक। प्रतिवर्ती, स्थायी, आसानी से बनते हैं (जैसे जिलेटिन, स्टार्च, रबर)। दुर्बल अधिशोषण सुरक्षा।
लियोफोबिक सोल (जल-विरोधी): कणों का माध्यम से आकर्षण कम। अनुत्क्रमणीय, अस्थायी, सुरक्षा के लिए वैद्युत आवेश आवश्यक (जैसे धातु सल्फाइड सोल)।
8. कोलॉइडी विलयनों के गुणधर्म
टिंडल प्रभाव (Tyndall Effect): प्रकाश किरण के मार्ग में कोलॉइडी कणों द्वारा प्रकाश का प्रकीर्णन। इससे कोलॉइडी विलयन प्रकाश पथ को दृश्य बनाते हैं।
ब्राउनियन गति (Brownian Motion): कोलॉइडी कणों की निरंतर यादृच्छिक गति।
वैद्युत-कणस्नेही प्रभाव (Electrophoresis): विद्युत क्षेत्र में कोलॉइडी कणों का धनात्मक या ऋणात्मक इलेक्ट्रोड की ओर गमन।
संघनन (Coagulation): वैद्युत आवेश उदासीन होने पर कोलॉइडी कण एकत्रित होकर अवक्षेपित होते हैं।
प्रतिवर्तन (Peptization): अवक्षेप में विद्युत-अपघट्य मिलाकर कोलॉइडी विलयन बनाना।
सुरक्षा तथा सुरक्षात्मक कोलॉइड (Protective Colloids)
लियोफिलिक कोलॉइड लियोफोबिक कोलॉइड को संघनन से बचाते हैं। सुरक्षा शक्ति का मापन स्वर्ण संख्या (Gold Number) से होता है। ज़िगमोंडी के अनुसार, 10 mL सुनहरे-लाल सोल में मिलाए जाने वाले सुरक्षात्मक कोलॉइड की मिलीग्राम में न्यूनतम मात्रा, जो NaCl मिलाने पर रंग को बैंगनी से लाल में बदलने से रोकती है, स्वर्ण संख्या कहलाती है। स्वर्ण संख्या जितनी कम, सुरक्षा शक्ति उतनी अधिक।
9. इमल्शन (Emulsions)
इमल्शन वह कोलॉइडी विलयन है जिसमें दोनों प्रावस्थाएँ द्रव होती हैं।
1. जल-में-तेल (o/w): जल परिक्षेपण माध्यम, तेल परिक्षिप्त। उदाहरण: दूध, डेयरी क्रीम।
2. तेल-में-जल (w/o): तेल माध्यम, जल परिक्षिप्त। उदाहरण: बटर, कोल्ड क्रीम।
इमल्शन स्थायी बनाने के लिए पायसीकारक (Emulsifier) का उपयोग होता है। उदाहरण: दूध में कैसीन (परिक्षेपक)।
10. कोलॉइडी विलयनों के अनुप्रयोग
फोम बुझाने के लिए लैदर बल, साबुन के विलयन (फोम/इमल्शन)।
जल की सफाई में फिटकरी (कोगुलेशन द्वारा गंदगी हटाना)।
चिकित्सा में: मैग्नेशिया का दूध, पेनिसिलिन कोलॉइडी होते हैं।
औषधि वितरण में कोलॉइडी रूप।
प्रगाढ़न (Concentration) — कपड़ों की रंगाई, चमड़ा सिधारना।
त्वरित पुनरावृत्ति तालिकाएँ
तालिका 1: भौतिक तथा रासायनिक अधिशोषण
गुण
भौतिक अधिशोषण
रासायनिक अधिशोषण
बल
वांडरवाल्स
रासायनिक बंध
परतें
बहुपरतीय
एकपरतीय
ऊष्मा
20-40 kJ/mol
80-240 kJ/mol
विशिष्टता
नहीं
हाँ
प्रतिवर्ती
हाँ
नहीं
तालिका 2: कोलॉइड के प्रकार
प्रकार
परिक्षिप्त प्रावस्था
माध्यम
उदाहरण
सोल
ठोस
द्रव
पेंट, इंक
जेल
द्रव
ठोस
पनीर, जेली
इमल्शन
द्रव
द्रव
दूध, क्रीम
फोम
गैस
द्रव
झाग
धुआँ
ठोस
गैस
धुआँ
तालिका 3: औद्योगिक उत्प्रेरक
प्रक्रम
अभिक्रिया
उत्प्रेरक
हेबर
N2 + 3H2 → 2NH3
लोहा
संपर्क
2SO2 + O2 → 2SO3
V2O5
ओस्टवाल्ड
NH3 → NO
Pt
लेड चैम्बर
2SO2 + O2 → 2SO3
NO
माइंड मैप
graph TD
A["पृष्ठ रसायन"] --> B["अधिशोषण"]
B --> C["भौतिक (वांडरवाल्स)"]
B --> D["रासायनिक (रासायनिक बंध)"]
B --> E["फ्रायंडलिख समताप: x/m = kp^(1/n)"]
B --> F["लैंगम्यूर समताप"]
A --> G["उत्प्रेरण"]
G --> H["सजातीय (NO)"]
G --> I["विषमांगी (Fe, V2O5)"]
G --> J["हेबर, संपर्क, ओस्टवाल्ड प्रक्रम"]
A --> K["कोलॉइड"]
K --> L["सोल, जेल, इमल्शन, फोम"]
K --> M["लियोफिलिक/लियोफोबिक"]
K --> N["टिंडल प्रभाव"]
K --> O["ब्राउनियन गति"]
K --> P["वैद्युत-कणस्नेहन"]
A --> Q["इमल्शन"]
Q --> R["o/w: दूध"]
Q --> S["w/o: मक्खन"]
महत्वपूर्ण आरेख (SVG)
आरेख 1: अधिशोषण समताप वक्र
आरेख 2: कोलॉइडी विलयन के गुणधर्म
सामान्य गलतियाँ
अधिशोषण और अवशोषण को एक ही मानना — अधिशोषण सतह पर होता है, अवशोषण पूरे पिंड में।
फ्रायंडलिख समताप वक्र को उच्च दाब पर भी मान्य समझना — यह केवल मध्यम दाब श्रेणी में मान्य है।
उत्प्रेरक साम्य स्थिरांक बदल देता है — यह गलत है; उत्प्रेरक केवल साम्य तक पहुँचने की दर बढ़ाता है।
लियोफिलिक सोल को अस्थायी और लियोफोबिक को स्थायी समझना — वास्तव में लियोफिलिक अधिक स्थायी होते हैं।
टिंडल प्रभाव को सच्चे विलयन में भी होना समझना — टिंडल प्रभाव केवल कोलॉइडी विलयन (और निलंबन) में होता है।
इमल्शन के दो प्रकारों (o/w और w/o) को उल्टा लिखना।
संघनन में विद्युत आवेश के स्थान पर ताप का उपयोग समझना — संघनन आवेश उदासीन करने से होता है।
परीक्षा युक्तियाँ
भौतिक अधिशोषण की ऊष्मा 20-40 kJ/mol तथा रासायनिक अधिशोषण की 80-240 kJ/mol होती है — इन्हें याद रखें।
फ्रायंडलिख समीकरण के लघुगणकीय रूप (log x/m = log k + 1/n log p) से ढाल 1/n और अंतःखंड log k होता है।
हेबर (Fe), संपर्क (V₂O₅), ओस्टवाल्ड (Pt) के उत्प्रेरकों का युग्मन याद रखें।
स्वर्ण संख्या जितनी कम, सुरक्षा उतनी अधिक — इस संबंध को हमेशा सही दिशा में लगाएँ।
कोलॉइड के प्रकारों की तालिका का अभ्यास करें — उदाहरण (दूध = इमल्शन, जेली = जेल) अक्सर पूछे जाते हैं।
संघनन के उपाय — विपरीत आवेश का आयन, इलेक्ट्रोफोरोसिस, उष्मण — के बारे में तैयार रहें।
निष्कर्ष
पृष्ठ रसायन अध्याय में अधिशोषण, समताप वक्र, उत्प्रेरण, कोलॉइडी विलयनों के प्रकार तथा गुणधर्मों का विस्तृत अध्ययन किया गया। यह अध्याय औद्योगिक उत्प्रेरकों, जल शोधन, औषधि वितरण तथा दैनिक जीवन की अनेक प्रक्रियाओं से जुड़ा है। अधिशोषण के नियमों और कोलॉइड के गुणधर्मों की स्पष्ट समझ परीक्षा में उत्कृष्ट प्रदर्शन का आधार है।