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1. परिचय

स्वतंत्रता के बाद भारत ने मिश्रित अर्थव्यवस्था (Mixed Economy) का मॉडल अपनाया, जिसमें सार्वजनिक क्षेत्र तथा निजी क्षेत्र दोनों का सह-अस्तित्व था। योजना आयोग (Planning Commission) की स्थापना 1950 में हुई तथा 1951 में पहली पंचवर्षीय योजना प्रारंभ हुई। विकास का उद्देश्य गरीबी उन्मूलन, रोजगार सृजन, आधुनिकीकरण, आत्मनिर्भरता तथा आर्थिक न्याय प्राप्त करना था। 1950-1990 के दौरान राज्य ने विकास प्रक्रिया में केंद्रीय भूमिका निभाई, जिसे 'मिश्रित अर्थव्यवस्था में सार्वजनिक क्षेत्र की प्रमुखता' कहा जा सकता है।

2. पंचवर्षीय योजनाएँ (Five Year Plans)

  1. पहली पंचवर्षीय योजना (1951-56): मुख्य जोर कृषि पर, 'हैरॉड-डोमर मॉडल' पर आधारित। लक्ष्य 2.1 प्रतिशत, प्राप्ति 3.6 प्रतिशत।
  2. दूसरी पंचवर्षीय योजना (1956-61): पी.सी. महालनोबिस मॉडल; मुख्य जोर औद्योगीकरण एवं भारी उद्योगों पर।
  3. तीसरी पंचवर्षीय योजना (1961-66): कृषि तथा उद्योग दोनों पर जोर; लक्ष्य प्राप्त नहीं हुआ, 1965-66 में युद्ध एवं सूखे का प्रभाव।
  4. योजना अवकाश (1966-69): तीन वार्षिक योजनाएँ; स्थिरता पर जोर।
  5. चौथी से आठवीं योजना तक: गरीबी उन्मूलन (गरीबी हटाओ - 5वीं), रोजगार, स्वास्थ्य, बुनियादी सुविधाएँ।

3. कृषि क्षेत्र (Agriculture)

भूमि सुधार (Land Reforms)

  1. जमींदारी उन्मूलन: बिचौलियों (जमींदारों) को समाप्त कर किसानों को भूमि का स्वामित्व दिया गया।
  2. किरायेदारी सुधार: किरायेदारों की भूमि की सुरक्षा तथा उचित किराया निर्धारण।
  3. भूमि सीमा (Land Ceiling): एक परिवार द्वारा धारण की जा सकने वाली भूमि की अधिकतम सीमा; अतिरिक्त भूमि भूमिहीनों में बाँटी गई।

हरित क्रांति (Green Revolution)

1960 के दशक के मध्य में नई कृषि तकनीक (HYV बीज, उर्वरक, सिंचाई) की शुरुआत से खाद्यान्न उत्पादन में क्रांतिकारी वृद्धि हुई। इसकी शुरुआत पंजाब, हरियाणा, पश्चिमी उत्तर प्रदेश जैसे क्षेत्रों से हुई।

हरित क्रांति के प्रभाव

  1. खाद्यान्न उत्पादन में वृद्धि तथा आत्मनिर्भरता की ओर अग्रसर।
  2. किसानों की आय में वृद्धि, किंतु क्षेत्रीय असमानता (केवल सिंचित क्षेत्रों में लाभ)।
  3. गेहूँ एवं चावल में सफलता, दलहन-तिलहन में सीमित।
  4. छोटे किसानों की तुलना में बड़े किसानों को अधिक लाभ।

4. औद्योगिक क्षेत्र (Industry)

औद्योगिक नीति 1956 (Industrial Policy Resolution 1956)

  1. मिश्रित अर्थव्यवस्था का आधार: सार्वजनिक एवं निजी क्षेत्रों की भूमिका निर्धारित की गई।
  2. उद्योगों का वर्गीकरण: तीन सूचियाँ - केवल राज्य के लिए (लोहा-इस्पात, हथियार), मिश्रित (कृषि मशीनरी), तथा निजी क्षेत्र के लिए खुला।
  3. लाइसेंस राज (License Raj): नए उद्योग स्थापित करने के लिए सरकारी लाइसेंस अनिवार्य, जिससे 'प्रशासनिक स्वतंत्रता' पर नियंत्रण रहा।

छोटे पैमाने के उद्योग (Small Scale Industries)

छोटे पैमाने के उद्योगों को संरक्षण दिया गया क्योंकि ये श्रम प्रधान हैं, कम पूँजी में रोजगार देते हैं तथा ग्रामीण क्षेत्रों में फैलाव संभव है।

5. व्यापार नीति (Trade Policy - Import Substitution)

1950-1990 में भारत ने आयात प्रतिस्थापन (Import Substitution) नीति अपनाई: 1. घरेलू उद्योगों की सुरक्षा के लिए आयात पर उच्च शुल्क एवं कोटा। 2. विदेशी प्रतिस्पर्धा से घरेलू उद्योगों की रक्षा। 3. आयात सस्ते न रहने से उपभोक्ताओं को महँगे माल मिले। 4. निर्यात को बढ़ावा सीमित रहा, क्योंकि प्रतिस्पर्धा की कमी थी।

6. सार्वजनिक क्षेत्र की भूमिका (Role of Public Sector)

  1. अवसंरचना विकास: ऊर्जा, परिवहन, संचार में राज्य निवेश।
  2. सामाजिक न्याय: नियंत्रित कीमतों पर आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति (PDS)।
  3. उद्योगों का विकास: भारी एवं बुनियादी उद्योगों (इस्पात, तेल, कोयला) में सार्वजनिक क्षेत्र का निवेश।

7. मिश्रित अर्थव्यवस्था की विशेषताएँ

  1. सार्वजनिक एवं निजी क्षेत्रों का सह-अस्तित्व।
  2. राज्य नियोजन के माध्यम से संसाधनों का आवंटन।
  3. लाभ का उद्देश्य निजी क्षेत्र के लिए, कल्याण सार्वजनिक क्षेत्र का लक्ष्य।
  4. कीमत तंत्र के साथ-साथ सरकारी नियंत्रण।

त्वरित पुनरावृत्ति तालिकाएँ

तालिका 1: प्रमुख पंचवर्षीय योजनाएँ

योजना अवधि मुख्य जोर
पहली 1951-56 कृषि, हैरॉड-डोमर मॉडल
दूसरी 1956-61 औद्योगीकरण, महालनोबिस मॉडल
तीसरी 1961-66 कृषि + उद्योग
योजना अवकाश 1966-69 वार्षिक योजनाएँ, स्थिरता

तालिका 2: भूमि सुधारों के प्रकार

सुधार उद्देश्य
जमींदारी उन्मूलन बिचौलियों की समाप्ति
किरायेदारी सुधार किरायेदारों की सुरक्षा
भूमि सीमा अधिकतम भूमि की सीमा
भूमि समेकन भूमि के टुकड़ों को जोड़ना

तालिका 3: हरित क्रांति के परिणाम

सकारात्मक नकारात्मक
उत्पादन में वृद्धि क्षेत्रीय असमानता
आत्मनिर्भरता छोटे किसानों की उपेक्षा
किसानों की आय में वृद्धि पर्यावरणीय दबाव

माइंड मैप

graph TD A["भारतीय अर्थव्यवस्था 1950-1990"] --> B["मिश्रित अर्थव्यवस्था"] A --> C["पंचवर्षीय योजनाएँ"] A --> D["कृषि: भूमि सुधार, हरित क्रांति"] A --> E["उद्योग: औद्योगिक नीति 1956, लाइसेंस राज"] A --> F["व्यापार: आयात प्रतिस्थापन"] A --> G["सार्वजनिक क्षेत्र की भूमिका"] C --> H["पहली: कृषि, दूसरी: औद्योगीकरण"] D --> I["HYV बीज, उर्वरक, सिंचाई"] E --> J["सार्वजनिक और निजी क्षेत्र"]

महत्वपूर्ण आरेख (SVG)

मिश्रित अर्थव्यवस्था की संरचना मिश्रित अर्थव्यवस्था सार्वजनिक क्षेत्र - लोहा-इस्पात, हथियार, तेल - सामाजिक कल्याण का लक्ष्य - PDS के माध्यम से आपूर्ति - अवसंरचना विकास - नियोजित संसाधन आवंटन निजी क्षेत्र - उपभोक्ता वस्तुएँ - लाभ का उद्देश्य - लाइसेंस की आवश्यकता - छोटे उद्योगों को संरक्षण - बाजार की कीमतों पर कार्य औद्योगिक नीति 1956 ने दोनों क्षेत्रों की भूमिकाएँ निर्धारित कीं राज्य योजना के माध्यम से संसाधनों का आवंटन करता है स्वर्ण नियम मिश्रित अर्थव्यवस्था में सार्वजनिक क्षेत्र कल्याण, निजी क्षेत्र लाभ का लक्ष्य रखता है।
हरित क्रांति: प्रभाव और चुनौतियाँ सकारात्मक प्रभाव 1. खाद्यान्न उत्पादन में वृद्धि 2. आत्मनिर्भरता की ओर 3. किसानों की आय में वृद्धि 4. रोजगार में वृद्धि 5. नई तकनीक का प्रसार 6. गेहूँ-चावल में सफलता 7. अर्थव्यवस्था को स्थिरता नकारात्मक प्रभाव 1. क्षेत्रीय असमानता 2. छोटे किसानों की उपेक्षा 3. दलहन-तिलहन में सीमित 4. पर्यावरणीय दबाव 5. जल स्रोतों पर दबाव 6. मिट्टी का क्षरण 7. आय असमानता बढ़ी हरित क्रांति की शुरुआत: 1960 के दशक के मध्य प्रारंभिक क्षेत्र: पंजाब, हरियाणा, पश्चिमी उत्तर प्रदेश Golden Rule हरित क्रांति = HYV बीज + उर्वरक + सिंचाई; परिणाम खाद्यान्न आत्मनिर्भरता।

सामान्य गलतियाँ

  1. योजनाओं का मॉडल भ्रम: पहली योजना हैरॉड-डोमर मॉडल पर और दूसरी महालनोबिस मॉडल पर आधारित थी।
  2. औद्योगिक नीति 1956 और 1948 का भ्रम: प्रमुख औद्योगिक नीति 1956 है, जो मिश्रित अर्थव्यवस्था का आधार बनी।
  3. हरित क्रांति की शुरुआत के क्षेत्र: यह पूरे भारत में नहीं, मुख्यतः पंजाब, हरियाणा, पश्चिमी उत्तर प्रदेश में प्रारंभ हुई।
  4. आयात प्रतिस्थापन को निर्यात प्रोत्साहन समझना: यह नीति आयात घटाने और घरेलू उत्पादन बढ़ाने पर केंद्रित थी।
  5. भूमि सीमा का अर्थ भूल जाना: भूमि सीमा किसी परिवार की अधिकतम भूमि धारण की सीमा है, न कि न्यूनतम।
  6. लाइसेंस राज का संबंध गलत समझना: लाइसेंस नए उद्योगों की स्थापना के लिए सरकारी अनुमति की व्यवस्था थी।
  7. हरित क्रांति का क्षेत्रीय प्रभाव: हरित क्रांति के लाभ केवल सिंचित क्षेत्रों तक सीमित रहे, जिससे क्षेत्रीय असमानता बढ़ी।

परीक्षा युक्तियाँ

  1. पहली एवं दूसरी पंचवर्षीय योजनाओं के मॉडल तथा जोर को याद रखें।
  2. भूमि सुधारों के प्रकार (जमींदारी उन्मूलन, किरायेदारी सुधार, भूमि सीमा) को परिभाषा सहित लिखें।
  3. हरित क्रांति के सकारात्मक एवं नकारात्मक प्रभावों की तुलनात्मक सूची बनाएँ।
  4. औद्योगिक नीति 1956 की प्रमुख विशेषताएँ तथा लाइसेंस राज का वर्णन करें।
  5. आयात प्रतिस्थापन नीति के उद्देश्य और दोषों को स्पष्ट करें।
  6. सार्वजनिक क्षेत्र की भूमिका को चार-पाँच बिंदुओं में लिखें।
  7. मिश्रित अर्थव्यवस्था की विशेषताओं को उदाहरण सहित समझाएँ।

निष्कर्ष

1950-1990 का युग नियोजित विकास, मिश्रित अर्थव्यवस्था तथा सार्वजनिक क्षेत्र की प्रमुख भूमिका का काल था। भूमि सुधारों और हरित क्रांति ने कृषि को आत्मनिर्भर बनाया, औद्योगिक नीति 1956 ने भारी उद्योगों की नींव रखी तथा आयात प्रतिस्थापन ने घरेलू उद्योगों को सुरक्षा दी। किंतु लाइसेंस राज, नौकरशाही तथा संरक्षण की अधिकता ने अर्थव्यवस्था की प्रतिस्पर्धा को सीमित कर दिया। इन्हीं कमजोरियों के कारण 1991 में आर्थिक सुधारों का मार्ग प्रशस्त हुआ, जो अगले अध्याय का विषय है।