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1. परिचय

ग्रामीण विकास (Rural Development) से आशय ग्रामीण क्षेत्रों के आर्थिक एवं सामाजिक उत्थान की समग्र प्रक्रिया से है। इसका उद्देश्य ग्रामीण जनता के जीवन स्तर में सुधार करना, कृषि की उत्पादकता बढ़ाना, गैर-कृषि क्षेत्रों का विकास करना तथा ग्रामीण अवसंरचना का निर्माण करना है। भारत की अधिकांश जनसंख्या ग्रामीण क्षेत्रों में निवास करती है, इसलिए समावेशी विकास के लिए ग्रामीण विकास अनिवार्य है। ग्रामीण विकास के मुख्य आयाम हैं - कृषि का विकास, साख की व्यवस्था, विपणन, विविधीकरण, अवसंरचना तथा कल्याणकारी योजनाएँ।

2. ग्रामीण साख (Rural Credit)

कृषि एवं ग्रामीण कार्यों के लिए आवश्यक ऋण की व्यवस्था ग्रामीण साख कहलाती है। ग्रामीण साख के स्रोत:

अनौपचारिक स्रोत (Informal Sources)

  1. साहूकार (मनी लेंडर), व्यापारी, बड़े किसान, रिश्तेदार।
  2. उच्च ब्याज दरें तथा शोषणकारी शर्तें।
  3. 1951 में ग्रामीण ऋण का लगभग 70 प्रतिशत अनौपचारिक स्रोतों से आता था।

औपचारिक स्रोत (Formal Sources)

  1. सहकारी समितियाँ
  2. क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक (RRB)
  3. वाणिज्यिक बैंक
  4. NABARD - ग्रामीण साख का शीर्ष संस्थान (1982 में स्थापित)
  5. सरकार (तात्कालिक साख)

सुधारों के बाद अनौपचारिक स्रोतों का हिस्सा घटकर लगभग 30 प्रतिशत तक आ गया, किंतु छोटे किसान अभी भी साहूकारों पर निर्भर हैं।

3. कृषि विपणन (Agricultural Marketing)

कृषि विपणन से आशय कृषि उपज को किसान से अंतिम उपभोक्ता तक पहुँचाने की समग्र प्रक्रिया है। इसमें संग्रहण, छँटाई, भंडारण, परिवहन, प्रसंस्करण तथा बिक्री शामिल है। कृषि विपणन की समस्याएँ:

  1. बिचौलियों (मध्यस्थों) का शोषण - किसान को उचित मूल्य नहीं मिलता।
  2. भंडारण एवं गोदामों की कमी।
  3. अव्यवस्थित बाजार एवं जानकारी का अभाव।
  4. आवश्यक अवसंरचना का अभाव।

कृषि विपणन के सुधार (APMC सुधार 2003)

2003 में सरकार ने कृषि विपणन में सुधार हेतु 'मॉडल APMC अधिनियम' प्रस्तुत किया, जिसके अंतर्गत: 1. निजी क्षेत्र को मंडियों की स्थापना की अनुमति। 2. किसानों को सीधे बिक्री की स्वतंत्रता। 3. प्रत्यक्ष विपणन (Contract Farming) तथा 'किसान-उपभोक्ता' सीधा संबंध। 4. ई-नाम (e-NAM) राष्ट्रीय कृषि बाजार की शुरुआत 2016 में।

4. ग्रामीण विकास के अन्य आयाम

कृषि का विविधीकरण (Diversification)

कृषि पर निर्भरता घटाने तथा आय बढ़ाने के लिए कृषि विविधीकरण आवश्यक है: 1. फसल विविधीकरण (खाद्यान्न से दुग्ध, मछली, बागवानी की ओर)। 2. पशुपालन, मुर्गीपालन, मत्स्य पालन। 3. गैर-कृषि क्षेत्रों (लघु उद्योग, हस्तशिल्प) का विकास।

ग्रामीण अवसंरचना

बिजली, सड़क, सिंचाई, शिक्षा, स्वास्थ्य, संचार जैसी अवसंरचना का विकास ग्रामीण विकास का आधार है।

कल्याणकारी योजनाएँ

प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना, स्वच्छ भारत मिशन, प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण), डिजिटल इंडिया जैसी योजनाएँ ग्रामीण विकास को गति देती हैं।

5. NABARD की भूमिका (Role of NABARD)

राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक (NABARD) की स्थापना 1982 में हुई। यह ग्रामीण साख का शीर्ष संस्थान है जो: 1. कृषि ऋण के लिए पुनर्वित्त (Refinance) की व्यवस्था करता है। 2. ग्रामीण बैंकों को सहायता प्रदान करता है। 3. ग्रामीण अवसंरचना विकास निधि (RIDF) से विकास कार्यों को वित्तपोषित करता है। 4. ग्रामीण विकास के लिए नीति निर्माण में सहायता करता है।

6. ग्रामीण विकास की चुनौतियाँ (Challenges)

  1. भूमि स्वामित्व की विषमता एवं छोटी जोतें।
  2. अनौपचारिक साख पर निर्भरता।
  3. कृषि विपणन में मध्यस्थों का शोषण।
  4. अवसंरचना का अपर्याप्त विकास।
  5. मानव पूँजी (शिक्षा-स्वास्थ्य) का पिछड़ापन।
  6. ऋण की उत्पादक उपयोग न होना।

7. ग्रामीण विकास में सरकारी पहल

सरकार ने ग्रामीण विकास के लिए अनेक कार्यक्रम प्रारंभ किए हैं। इनमें ग्रामीण सड़कों के लिए प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना, ग्रामीण आवास के लिए प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण), स्वच्छता के लिए स्वच्छ भारत मिशन तथा बिजली के लिए दीनदयाल उपाध्याय ग्राम ज्योति योजना प्रमुख हैं। इन योजनाओं से ग्रामीण अवसंरचना में सुधार हुआ है।

ग्रामीण साख की संस्थागत संरचना

स्तर संस्था कार्य
शीर्ष NABARD पुनर्वित्त एवं नीति
मध्य राज्य सहकारी बैंक राज्य स्तरीय साख
क्षेत्रीय क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक जिला स्तरीय साख
तल प्राथमिक सहकारी समितियाँ गाँव स्तरीय साख

ग्रामीण साख की इस संस्थागत संरचना का उद्देश्य किसानों को उचित ब्याज दरों पर ऋण उपलब्ध कराना तथा साहूकारों के शोषण से बचाना है। कृषि ऋण माफी जैसी नीतियाँ अल्पावधि में राहत देती हैं, किंतु दीर्घकालिक समाधान उत्पादक ऋण की व्यवस्था तथा सिंचाई-अवसंरचना के विकास में ही निहित है। समावेशी विकास के लिए ग्रामीण बैंकिंग का विस्तार अनिवार्य है।

त्वरित पुनरावृत्ति तालिकाएँ

तालिका 1: ग्रामीण साख के स्रोत

औपचारिक स्रोत अनौपचारिक स्रोत
सहकारी समितियाँ साहूकार
क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक व्यापारी
वाणिज्यिक बैंक बड़े किसान
NABARD (शीर्ष संस्थान) रिश्तेदार

तालिका 2: कृषि विपणन की समस्याएँ

समस्या परिणाम
मध्यस्थों का शोषण किसान को कम मूल्य
भंडारण की कमी फसल खराब होना
जानकारी का अभाव उचित मूल्य न मिलना
अवसंरचना का अभाव परिवहन लागत अधिक

तालिका 3: विविधीकरण के लाभ

क्षेत्र लाभ
पशुपालन आय का नियमित स्रोत
मत्स्य पालन पोषण एवं आय
बागवानी उच्च मूल्य फसलें
लघु उद्योग रोजगार सृजन

माइंड मैप

graph TD A["ग्रामीण विकास"] --> B["ग्रामीण साख"] A --> C["कृषि विपणन"] A --> D["विविधीकरण"] A --> E["अवसंरचना"] A --> F["कल्याणकारी योजनाएँ"] B --> G["NABARD, RRB, सहकारी समितियाँ"] C --> H["APMC सुधार, e-NAM"] D --> I["पशुपालन, मत्स्य, बागवानी"] E --> J["सड़क, बिजली, सिंचाई"]

महत्वपूर्ण आरेख (SVG)

ग्रामीण साख की संरचना ग्रामीण साख औपचारिक स्रोत 1. सहकारी समितियाँ 2. क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक (RRB) 3. वाणिज्यिक बैंक 4. NABARD (1982, शीर्ष) 5. सरकारी तात्कालिक साख कम ब्याज, सुरक्षित अनौपचारिक स्रोत 1. साहूकार (मनी लेंडर) 2. व्यापारी 3. बड़े किसान 4. रिश्तेदार 5. उच्च ब्याज दरें शोषणकारी शर्तें 1951 में अनौपचारिक ~70%, अब ~30% छोटे किसान अभी भी साहूकारों पर निर्भर स्वर्ण नियम NABARD (1982) ग्रामीण साख का शीर्ष संस्थान है।
कृषि विपणन की प्रक्रिया एवं समस्याएँ किसान उत्पादन मंडी/व्यापारी संग्रहण प्रसंस्करण छँटाई/भंडारण उपभोक्ता अंतिम बिक्री कृषि विपणन की समस्याएँ 1. मध्यस्थों का शोषण 2. भंडारण एवं गोदामों की कमी 3. बाजार की जानकारी का अभाव 4. परिवहन अवसंरचना की कमी 5. अपर्याप्त प्रसंस्करण सुविधाएँ सुधार: APMC सुधार (2003), e-NAM (2016) किसानों को सीधी बिक्री की स्वतंत्रता, निजी मंडियों की अनुमति Golden Rule e-NAM (2016) राष्ट्रीय इलेक्ट्रॉनिक कृषि बाजार है, जो पारदर्शी मूल्य देता है।

सामान्य गलतियाँ

  1. NABARD की स्थापना वर्ष भूलना: NABARD 1982 में स्थापित हुआ, RBI 1935 में।
  2. औपचारिक/अनौपचारिक स्रोतों में भ्रम: सहकारी समितियाँ औपचारिक हैं, साहूकार अनौपचारिक।
  3. e-NAM की शुरुआत का वर्ष: e-NAM 2016 में प्रारंभ हुआ।
  4. कृषि विपणन को केवल बिक्री मानना: इसमें संग्रहण, छँटाई, भंडारण, परिवहन, प्रसंस्करण सब शामिल हैं।
  5. RRB का पूर्ण रूप भूलना: RRB - Regional Rural Bank (क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक)।
  6. विविधीकरण को केवल फसल बदलना मानना: इसमें पशुपालन, मत्स्य पालन, गैर-कृषि क्षेत्र भी शामिल हैं।
  7. APMC सुधार को कानूनी रूप से अनिवार्य मानना: 2003 का मॉडल APMC अधिनियम मॉडल है, जिसे राज्यों को अपनाना था।

परीक्षा युक्तियाँ

  1. ग्रामीण साख के औपचारिक एवं अनौपचारिक स्रोतों की तुलनात्मक सूची बनाएँ।
  2. NABARD की भूमिका को चार-पाँच बिंदुओं में लिखें।
  3. कृषि विपणन की समस्याओं तथा उनके समाधान (APMC, e-NAM) का विश्लेषण करें।
  4. कृषि विविधीकरण का महत्व उदाहरण सहित समझाएँ।
  5. ग्रामीण विकास की चुनौतियों को सूचीबद्ध करें।
  6. ग्रामीण अवसंरचना के महत्व को (बिजली, सड़क, सिंचाई) लिखें।
  7. साहूकारों पर निर्भरता के कारण एवं समाधान का वर्णन करें।

निष्कर्ष

ग्रामीण विकास समावेशी आर्थिक विकास की कुंजी है, क्योंकि भारत की अधिकांश जनसंख्या ग्रामीण क्षेत्रों में निवास करती है। ग्रामीण साख की औपचारिक व्यवस्था (NABARD, RRB, सहकारी समितियाँ), कृषि विपणन में सुधार (e-NAM), तथा कृषि विविधीकरण ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करते हैं। अनौपचारिक साख पर निर्भरता, मध्यस्थों का शोषण तथा अवसंरचना की कमी मुख्य चुनौतियाँ हैं। ग्रामीण अवसंरचना, शिक्षा एवं स्वास्थ्य में निवेश ही ग्रामीण विकास का स्थायी आधार है।