ग्रामीण विकास (Rural Development) से आशय ग्रामीण क्षेत्रों के आर्थिक एवं सामाजिक उत्थान की समग्र प्रक्रिया से है। इसका उद्देश्य ग्रामीण जनता के जीवन स्तर में सुधार करना, कृषि की उत्पादकता बढ़ाना, गैर-कृषि क्षेत्रों का विकास करना तथा ग्रामीण अवसंरचना का निर्माण करना है। भारत की अधिकांश जनसंख्या ग्रामीण क्षेत्रों में निवास करती है, इसलिए समावेशी विकास के लिए ग्रामीण विकास अनिवार्य है। ग्रामीण विकास के मुख्य आयाम हैं - कृषि का विकास, साख की व्यवस्था, विपणन, विविधीकरण, अवसंरचना तथा कल्याणकारी योजनाएँ।
कृषि एवं ग्रामीण कार्यों के लिए आवश्यक ऋण की व्यवस्था ग्रामीण साख कहलाती है। ग्रामीण साख के स्रोत:
सुधारों के बाद अनौपचारिक स्रोतों का हिस्सा घटकर लगभग 30 प्रतिशत तक आ गया, किंतु छोटे किसान अभी भी साहूकारों पर निर्भर हैं।
कृषि विपणन से आशय कृषि उपज को किसान से अंतिम उपभोक्ता तक पहुँचाने की समग्र प्रक्रिया है। इसमें संग्रहण, छँटाई, भंडारण, परिवहन, प्रसंस्करण तथा बिक्री शामिल है। कृषि विपणन की समस्याएँ:
2003 में सरकार ने कृषि विपणन में सुधार हेतु 'मॉडल APMC अधिनियम' प्रस्तुत किया, जिसके अंतर्गत: 1. निजी क्षेत्र को मंडियों की स्थापना की अनुमति। 2. किसानों को सीधे बिक्री की स्वतंत्रता। 3. प्रत्यक्ष विपणन (Contract Farming) तथा 'किसान-उपभोक्ता' सीधा संबंध। 4. ई-नाम (e-NAM) राष्ट्रीय कृषि बाजार की शुरुआत 2016 में।
कृषि पर निर्भरता घटाने तथा आय बढ़ाने के लिए कृषि विविधीकरण आवश्यक है: 1. फसल विविधीकरण (खाद्यान्न से दुग्ध, मछली, बागवानी की ओर)। 2. पशुपालन, मुर्गीपालन, मत्स्य पालन। 3. गैर-कृषि क्षेत्रों (लघु उद्योग, हस्तशिल्प) का विकास।
बिजली, सड़क, सिंचाई, शिक्षा, स्वास्थ्य, संचार जैसी अवसंरचना का विकास ग्रामीण विकास का आधार है।
प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना, स्वच्छ भारत मिशन, प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण), डिजिटल इंडिया जैसी योजनाएँ ग्रामीण विकास को गति देती हैं।
राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक (NABARD) की स्थापना 1982 में हुई। यह ग्रामीण साख का शीर्ष संस्थान है जो: 1. कृषि ऋण के लिए पुनर्वित्त (Refinance) की व्यवस्था करता है। 2. ग्रामीण बैंकों को सहायता प्रदान करता है। 3. ग्रामीण अवसंरचना विकास निधि (RIDF) से विकास कार्यों को वित्तपोषित करता है। 4. ग्रामीण विकास के लिए नीति निर्माण में सहायता करता है।
सरकार ने ग्रामीण विकास के लिए अनेक कार्यक्रम प्रारंभ किए हैं। इनमें ग्रामीण सड़कों के लिए प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना, ग्रामीण आवास के लिए प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण), स्वच्छता के लिए स्वच्छ भारत मिशन तथा बिजली के लिए दीनदयाल उपाध्याय ग्राम ज्योति योजना प्रमुख हैं। इन योजनाओं से ग्रामीण अवसंरचना में सुधार हुआ है।
| स्तर | संस्था | कार्य |
|---|---|---|
| शीर्ष | NABARD | पुनर्वित्त एवं नीति |
| मध्य | राज्य सहकारी बैंक | राज्य स्तरीय साख |
| क्षेत्रीय | क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक | जिला स्तरीय साख |
| तल | प्राथमिक सहकारी समितियाँ | गाँव स्तरीय साख |
ग्रामीण साख की इस संस्थागत संरचना का उद्देश्य किसानों को उचित ब्याज दरों पर ऋण उपलब्ध कराना तथा साहूकारों के शोषण से बचाना है। कृषि ऋण माफी जैसी नीतियाँ अल्पावधि में राहत देती हैं, किंतु दीर्घकालिक समाधान उत्पादक ऋण की व्यवस्था तथा सिंचाई-अवसंरचना के विकास में ही निहित है। समावेशी विकास के लिए ग्रामीण बैंकिंग का विस्तार अनिवार्य है।
| औपचारिक स्रोत | अनौपचारिक स्रोत |
|---|---|
| सहकारी समितियाँ | साहूकार |
| क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक | व्यापारी |
| वाणिज्यिक बैंक | बड़े किसान |
| NABARD (शीर्ष संस्थान) | रिश्तेदार |
| समस्या | परिणाम |
|---|---|
| मध्यस्थों का शोषण | किसान को कम मूल्य |
| भंडारण की कमी | फसल खराब होना |
| जानकारी का अभाव | उचित मूल्य न मिलना |
| अवसंरचना का अभाव | परिवहन लागत अधिक |
| क्षेत्र | लाभ |
|---|---|
| पशुपालन | आय का नियमित स्रोत |
| मत्स्य पालन | पोषण एवं आय |
| बागवानी | उच्च मूल्य फसलें |
| लघु उद्योग | रोजगार सृजन |
ग्रामीण विकास समावेशी आर्थिक विकास की कुंजी है, क्योंकि भारत की अधिकांश जनसंख्या ग्रामीण क्षेत्रों में निवास करती है। ग्रामीण साख की औपचारिक व्यवस्था (NABARD, RRB, सहकारी समितियाँ), कृषि विपणन में सुधार (e-NAM), तथा कृषि विविधीकरण ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करते हैं। अनौपचारिक साख पर निर्भरता, मध्यस्थों का शोषण तथा अवसंरचना की कमी मुख्य चुनौतियाँ हैं। ग्रामीण अवसंरचना, शिक्षा एवं स्वास्थ्य में निवेश ही ग्रामीण विकास का स्थायी आधार है।