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1. परिचय

निर्धनता (Poverty) वह स्थिति है जिसमें व्यक्ति अपनी आधारभूत आवश्यकताओं (भोजन, वस्त्र, आवास, शिक्षा, स्वास्थ्य) को पूरा करने में असमर्थ होता है। भारत में निर्धनता एक बड़ी सामाजिक-आर्थिक समस्या है। निर्धनता का मापन करने के लिए गरीबी रेखा (Poverty Line) की अवधारणा प्रयोग की जाती है। गरीबी रेखा वह न्यूनतम आय (या उपभोग) स्तर है जिसके नीचे व्यक्ति आधारभूत आवश्यकताओं को पूरा नहीं कर पाता। गरीबी रेखा से नीचे जीने वालों को 'निर्धन' या 'गरीब' कहा जाता है। भारत में निर्धनता का आधिकारिक आकलन नीति आयोग (पूर्व में योजना आयोग) करता था।

2. निर्धनता का मापन (Measurement of Poverty)

निरपेक्ष निर्धनता (Absolute Poverty)

जब कोई व्यक्ति गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन करता है तो उसे निरपेक्ष निर्धनता कहते हैं। यह मापन 'सिर की गिनती अनुपात' (Head Count Ratio - HCR) से किया जाता है।

$$\text{HCR} = \frac{\text{गरीबी रेखा से नीचे जनसंख्या}}{\text{कुल जनसंख्या}} \times 100$$

सापेक्ष निर्धनता (Relative Poverty)

जब किसी आय वर्ग की तुलना समाज के अन्य आय वर्गों से की जाती है तो सापेक्ष निर्धनता ज्ञात होती है। यह आय असमानता का संकेत है।

3. निर्धनता के कारण (Causes of Poverty)

  1. ऐतिहासिक कारण: ब्रिटिश शासन के कारण हस्तशिल्प का पतन, कृषि की दयनीय स्थिति।
  2. विस्फोटक जनसंख्या वृद्धि: संसाधनों पर दबाव, प्रति व्यक्ति आय में वृद्धि सीमित।
  3. बेरोजगारी एवं अल्परोजगार: ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों में रोजगार के अवसरों की कमी।
  4. आय की असमानता: धनी और निर्धन के बीच बढ़ता अंतर।
  5. संपत्ति का असमान वितरण: भूमिहीनता तथा पूँजी का संकेंद्रण।
  6. कम कृषि उत्पादकता: छोटी जोत, पिछड़ी तकनीक।
  7. सामाजिक कारण: शिक्षा एवं कौशल का अभाव, भेदभाव, महिला सशक्तिकरण का अभाव।
  8. आर्थिक असमानताएँ: नौकरशाही, भ्रष्टाचार तथा सुधारों का सीमित लाभ।

4. निर्धनता से निपटने के उपाय (Poverty Alleviation Programmes)

राज्य द्वारा कल्याणकारी कार्यक्रम (1991 से पहले)

  1. रोजगार कार्यक्रम: जवाहर रोजगार योजना (1989), इंटीग्रेटेड रूरल डेवलपमेंट प्रोग्राम (IRDP), राष्ट्रीय रोजगार कार्यक्रम।
  2. गरीबी रेखा रेखांकन: NSSO सर्वेक्षणों से गरीबों की पहचान।

1991 के बाद के प्रमुख कार्यक्रम

  1. स्वर्ण जयंती ग्राम स्वरोजगार योजना (SGSY): ग्रामीण स्वरोजगार को बढ़ावा।
  2. प्रधानमंत्री रोजगार योजना (PMRY): शहरी बेरोजगारों के लिए स्वरोजगार।
  3. महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (MGNREGA): 2005 में लागू; प्रत्येक ग्रामीण परिवार को वर्ष में 100 दिन का रोजगार की कानूनी गारंटी।
  4. राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (NFSA): 2013 में लागू; रियायती दरों पर खाद्यान्न की उपलब्धता।

5. निर्धनता की विशेषताएँ (Features of Poverty)

  1. भारत में निर्धनता ग्रामीण क्षेत्रों में अधिक, शहरी क्षेत्रों में अपेक्षाकृत कम।
  2. अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, वृद्ध, महिला मुखिया वाले परिवारों में निर्धनता अधिक।
  3. खेतिहर मजदूर एवं भूमिहीन श्रमिक सर्वाधिक प्रभावित।
  4. शहरी निर्धनता मुख्यतः झुग्गी-झोंपड़ियों में रहने वालों से संबंधित।
  5. निर्धनता का शिकार वर्ग विशेष - 'मलिन बस्ती' निवासी।

6. NSSO सर्वेक्षण (सैम्पल सर्वे)

राष्ट्रीय नमूना सर्वेक्षण संगठन (NSSO) निर्धनता का आकलन 'परिवार उपभोग व्यय सर्वेक्षण' के माध्यम से करता है। गरीबी रेखा निर्धारित करने के लिए पहले 'कैलोरी आधारित' मानदंड (ग्रामीण: 2400 कैलोरी, शहरी: 2100 कैलोरी प्रति दिन) प्रयोग होता था; बाद में विशेषज्ञ समितियों (जैसे रंगराजन समिति 2014) ने मानदंडों में बदलाव किया।

7. निर्धनता उन्मूलन प्रयासों का मूल्यांकन

भारत में निर्धनता अनुपात में निरंतर गिरावट आई है, किंतु निर्धनों की निरपेक्ष संख्या अभी भी विश्व में सर्वाधिक है। रोजगार कार्यक्रमों, खाद्य सुरक्षा तथा आवास योजनाओं का गरीबों तक लाभ सीमित रूप से पहुँच पाया है। कारण यह है कि ये कार्यक्रम कभी-कभी सही लक्ष्य समूह तक नहीं पहुँच पाते तथा रिसाव (Leakage) की समस्या बनी रहती है।

निर्धनता उन्मूलन की चुनौतियाँ

चुनौती विवरण
लक्षितीकरण सही लाभार्थियों की पहचान
रिसाव लाभ का गलत वितरण
रोजगार की गुणवत्ता कम वेतन एवं अनियमित रोजगार
ग्रामीण-शहरी अंतर ग्रामीण निर्धनता अधिक

दीर्घकालिक निर्धनता उन्मूलन के लिए केवल हस्तांतरण पर्याप्त नहीं है, बल्कि शिक्षा, स्वास्थ्य, कौशल विकास तथा उत्पादक रोजगार के अवसर सृजित करने होंगे। समावेशी विकास तथा आर्थिक वृद्धि के लाभों का समान वितरण ही निर्धनता को समाप्त कर सकता है। सतत विकास लक्ष्य (SDG) के अंतर्गत भी 2030 तक सभी रूपों में निर्धनता समाप्त करने का लक्ष्य निर्धारित है।

त्वरित पुनरावृत्ति तालिकाएँ

तालिका 1: निर्धनता के प्रकार

प्रकार परिभाषा उदाहरण
निरपेक्ष निर्धनता गरीबी रेखा से नीचे HCR से मापन
सापेक्ष निर्धनता अन्य वर्गों की तुलना आय असमानता
स्थायी निर्धनता दीर्घकालिक भूमिहीन श्रमिक
अस्थायी निर्धनता अल्पकालिक प्राकृतिक आपदा से

तालिका 2: प्रमुख कार्यक्रम

कार्यक्रम वर्ष उद्देश्य
IRDP 1978 ग्रामीण विकास
जवाहर रोजगार योजना 1989 रोजगार सृजन
SGSY 1999 स्वरोजगार
MGNREGA 2005 100 दिन रोजगार गारंटी
NFSA 2013 खाद्य सुरक्षा

तालिका 3: गरीबी रेखा के मानदंड (पूर्व में)

क्षेत्र कैलोरी मानदंड (प्रति दिन)
ग्रामीण 2400 कैलोरी
शहरी 2100 कैलोरी

माइंड मैप

graph TD A["निर्धनता"] --> B["निरपेक्ष निर्धनता"] A --> C["सापेक्ष निर्धनता"] A --> D["कारण: जनसंख्या, बेरोजगारी, असमानता"] A --> E["मापन: HCR, गरीबी रेखा"] A --> F["उपाय: MGNREGA, NFSA, SGSY"] B --> G["HCR = गरीब/कुल x 100"] D --> H["ऐतिहासिक + सामाजिक कारण"] F --> I["रोजगार गारंटी, खाद्य सुरक्षा"]

महत्वपूर्ण आरेख (SVG)

निर्धनता के कारण आर्थिक कारण बेरोजगारी अल्परोजगार कम कृषि उत्पादकता जनसांख्यिकीय विस्फोटक जनसंख्या संसाधनों पर दबाव कम प्रति व्यक्ति आय सामाजिक कारण शिक्षा का अभाव भेदभाव महिला सशक्तिकरण अभाव संरचनात्मक कारण - संपत्ति का असमान वितरण - भूमिहीनता - आय की असमानता - ब्रिटिश विरासत - नौकरशाही एवं भ्रष्टाचार प्रभावित वर्ग - ग्रामीण निर्धन अधिक - अनुसूचित जाति/जनजाति - भूमिहीन श्रमिक - महिला मुखिया परिवार - शहरी झुग्गीवासी स्वर्ण नियम निर्धनता के कारण आर्थिक, सामाजिक एवं जनसांख्यिकीय तीनों क्षेत्रों से जुड़े हैं।
निर्धनता उन्मूलन के प्रमुख कार्यक्रम MGNREGA (2005) प्रत्येक ग्रामीण परिवार को वर्ष में 100 दिन रोजगार की कानूनी गारंटी अधिकार आधारित कार्यक्रम NFSA (2013) रियायती दरों पर खाद्यान्न खाद्य सुरक्षा का कानूनी अधिकार PDS का सुदृढ़ीकरण SGSY (1999) ग्रामीण स्वरोजगार का प्रोत्साहन स्वयं सहायता समूहों को सहायता जवाहर रोजगार योजना (1989) IRDP (1978) गरीब परिवारों को आस्ति सृजन अनुदान एवं ऋण सुविधा PMRY: शहरी स्वरोजगार मापन: HCR = गरीब जनसंख्या/कुल जनसंख्या x 100 NSSO परिवार उपभोग व्यय सर्वेक्षण से आकलन Golden Rule MGNREGA रोजगार का, NFSA खाद्यान्न का कानूनी अधिकार देता है।

सामान्य गलतियाँ

  1. निरपेक्ष और सापेक्ष निर्धनता में भ्रम: निरपेक्ष निर्धनता गरीबी रेखा से, सापेक्ष निर्धनता समाज की तुलना से संबंधित है।
  2. HCR के सूत्र में गलती: HCR = गरीब जनसंख्या/कुल जनसंख्या x 100, न कि विपरीत।
  3. कैलोरी मानदंड को उल्टा करना: ग्रामीण (2400 कैलोरी) शहरी (2100 कैलोरी) से अधिक है, क्योंकि ग्रामीणों का श्रम अधिक शारीरिक होता है।
  4. MGNREGA की तारीख एवं रोजगार दिवस: MGNREGA 2005 में लागू; 100 दिन रोजगार गारंटी, 60 या 90 नहीं।
  5. SGSY और JRY में अंतर न करना: SGSY (1999) स्वरोजगार हेतु, JRY (1989) रोजगार सृजन हेतु।
  6. NSSO की भूमिका भूल जाना: निर्धनता का आकलन NSSO के उपभोग व्यय सर्वेक्षण से होता है।
  7. गरीबी रेखा का निर्धारण स्थायी मानना: गरीबी रेखा के मानदंड समय-समय पर समितियों (जैसे रंगराजन समिति 2014) द्वारा बदले जाते हैं।

परीक्षा युक्तियाँ

  1. निरपेक्ष एवं सापेक्ष निर्धनता के अंतर को परिभाषा सहित लिखें।
  2. HCR के सूत्र को उदाहरण सहित समझाएँ।
  3. निर्धनता के कारणों को आर्थिक, सामाजिक, जनसांख्यिकीय भागों में बाँटकर लिखें।
  4. MGNREGA और NFSA के प्रावधानों को अलग-अलग स्पष्ट करें।
  5. गरीबी रेखा के मापन की पुरानी कैलोरी पद्धति तथा नई समितियों का उल्लेख करें।
  6. स्थायी एवं अस्थायी निर्धनता में अंतर स्पष्ट करें।
  7. सरकारी कार्यक्रमों के सकारात्मक एवं नकारात्मक पक्षों का मूल्यांकन करें।

निष्कर्ष

निर्धनता भारत की सबसे बड़ी सामाजिक-आर्थिक समस्या है, जो ऐतिहासिक, संरचनात्मक, सामाजिक तथा जनसांख्यिकीय कारणों से जन्मी है। गरीबी रेखा तथा HCR जैसे उपकरण इसके मापन में सहायक हैं। सरकार ने रोजगार गारंटी (MGNREGA), खाद्य सुरक्षा (NFSA) तथा स्वरोजगार (SGSY) जैसे कार्यक्रमों से निर्धनता उन्मूलन का प्रयास किया है। निर्धनता में कमी आई है, किंतु आय असमानता तथा ग्रामीण-शहरी भेद अभी भी चुनौती हैं। दीर्घकालिक समाधान के लिए शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार तथा समावेशी विकास पर ध्यान देना आवश्यक है।