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1. परिचय

रोजगार (Employment) किसी देश की अर्थव्यवस्था का केंद्रीय तत्व है। यह अध्याय भारत में रोजगार की वृद्धि, रोजगार के विभिन्न रूपों, क्षेत्रीय संरचना तथा अनौपचारिकीकरण (Informalisation) की प्रवृत्तियों का विश्लेषण करता है। किसी व्यक्ति को तब कार्यरत माना जाता है जब वह आर्थिक क्रियाकलाप में संलग्न हो। कार्यशील जनसंख्या (Workforce) वह जनसंख्या है जो आर्थिक रूप से सक्रिय है। भारत में रोजगार की संरचना कृषि प्रधान है, किंतु समय के साथ सेवा क्षेत्र की भूमिका बढ़ी है।

2. कार्यशील जनसंख्या एवं रोजगार की अवधारणाएँ

$$\text{कार्यशील जनसंख्या अनुपात} = \frac{\text{कार्यशील जनसंख्या}}{\text{कुल जनसंख्या}} \times 100$$

3. भारत में रोजगार की संरचना

क्षेत्रीय संरचना (Sectoral Distribution)

भारत में रोजगार की संरचना में कृषि (प्राथमिक क्षेत्र) का हिस्सा सबसे अधिक रहा है, किंतु GDP में कृषि का योगदान घटता गया है। इस अंतर को 'रोजगार की कृषि ग्रस्तता' कहा जाता है।

रोजगार के रूप (Nature of Employment)

  1. औपचारिक (Formal/Salaried): नियमित वेतनभोगी, सामाजिक सुरक्षा युक्त।
  2. अनौपचारिक (Informal): कोई सामाजिक सुरक्षा नहीं, अनियमित।
  3. स्व-नियोजित (Self-Employed): अपना स्वयं का कार्य करने वाले।
  4. अनियमित/छिटपुट (Casual): दैनिक मजदूरी पर कार्य।

अनौपचारिकीकरण (Informalisation)

अनौपचारिकीकरण से आशय है कि कुल रोजगार में अनौपचारिक रोजगार (बिना सामाजिक सुरक्षा, बिना लिखित अनुबंध) का हिस्सा बढ़ता जा रहा है। यहाँ तक कि औपचारिक क्षेत्र की फर्मों में भी अनौपचारिक श्रमिकों (अनुबंधित श्रमिक, अस्थायी) की संख्या बढ़ी है।

4. बेरोजगारी (Unemployment)

बेरोजगारी के प्रकार

  1. खुली बेरोजगारी (Open Unemployment): कार्ययोग्य व्यक्ति कार्य खोजने के बाद भी रोजगार नहीं पाता।
  2. छिपी हुई बेरोजगारी (Disguised Unemployment): किसी कार्य में आवश्यकता से अधिक श्रमिक लगे हों, अतिरिक्त श्रमिकों को हटाने पर उत्पादन में कोई कमी नहीं आती।
  3. मौसमी बेरोजगारी (Seasonal Unemployment): कृषि जैसे कार्यों में किसी मौसम में बेरोजगारी।
  4. राजभाषा बेरोजगारी/संरचनात्मक (Structural): कौशल और रोजगार के अवसरों के बीच बेमेल।
  5. चक्रीय बेरोजगारी (Cyclical Unemployment): व्यापार चक्र के अवसाद के समय।
  6. शैक्षिक बेरोजगारी (Educated Unemployment): शिक्षित युवाओं की बेरोजगारी।

5. रोजगार सृजन की नीतियाँ (Employment Generation Policies)

  1. आर्थिक सुधारों का रोजगार पर प्रभाव: सुधारों के बाद आर्थिक विकास तीव्र हुआ, किंतु रोजगार सृजन विकास दर के अनुपात में नहीं हुआ, जिसे 'बेरोजगार वृद्धि' (Jobless Growth) कहा जाता है।
  2. विशेष रोजगार कार्यक्रम: - प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (PMEGP) - महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (MGNREGA) - 100 दिन रोजगार गारंटी - राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (NRLM)
  3. कौशल विकास: प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना (PMKVY) जैसे कार्यक्रमों से कौशल प्रशिक्षण।
  4. स्वरोजगार को प्रोत्साहन: सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (MSME) क्षेत्र को बढ़ावा।

6. रोजगार से जुड़े प्रमुख मुद्दे

  1. रोजगार की गुणवत्ता: अनौपचारिक एवं असुरक्षित रोजगार बढ़ा।
  2. मजदूरी की असमानता: क्षेत्रीय एवं लैंगिक भेद।
  3. ग्रामीण-शहरी अंतर: ग्रामीण क्षेत्रों में कृषि पर अत्यधिक निर्भरता।
  4. महिला कार्य भागीदारी: भारत में महिला श्रम बल भागीदारी दर अपेक्षाकृत कम है।
  5. कौशल की कमी: शिक्षा प्रणाली और रोजगार की आवश्यकता में बेमेल।
  6. असंगठित क्षेत्र का प्रभुत्व: अधिकांश कार्यबल असंगठित क्षेत्र में कार्यरत है।

त्वरित पुनरावृत्ति तालिकाएँ

तालिका 1: बेरोजगारी के प्रकार

प्रकार विशेषता उदाहरण
खुली कार्य न मिलना शहरी युवा
छिपी हुई अतिरिक्त श्रमिक ग्रामीण कृषि
मौसमी मौसम के अनुसार कृषि मजदूर
संरचनात्मक कौशल बेमेल अप्रशिक्षित
चक्रीय व्यापार चक्र अवसाद काल
शैक्षिक शिक्षित बेरोजगार स्नातक युवा

तालिका 2: रोजगार के रूप

रूप सामाजिक सुरक्षा नियमितता
औपचारिक उपलब्ध नियमित
अनौपचारिक अनुपलब्ध अनियमित
स्व-नियोजित सीमित स्वयं के अनुसार
छिटपुट अनुपलब्ध दैनिक

तालिका 3: प्रमुख रोजगार कार्यक्रम

कार्यक्रम उद्देश्य
MGNREGA 100 दिन रोजगार गारंटी
PMEGP स्वरोजगार
PMKVY कौशल विकास
NRLM ग्रामीण आजीविका

माइंड मैप

graph TD A["रोजगार: वृद्धि, अनौपचारिकीकरण"] --> B["कार्यशील जनसंख्या"] A --> C["रोजगार के रूप"] A --> D["बेरोजगारी के प्रकार"] A --> E["अनौपचारिकीकरण"] A --> F["रोजगार नीतियाँ"] D --> G["खुली, छिपी, मौसमी"] E --> H["बिना सामाजिक सुरक्षा"] F --> I["MGNREGA, PMEGP, PMKVY"]

महत्वपूर्ण आरेख (SVG)

बेरोजगारी के प्रकार खुली बेरोजगारी कार्य खोजने के बाद भी रोजगार न मिलना शहरी क्षेत्रों में अधिक छिपी हुई आवश्यकता से अधिक श्रमिक हटाने पर उत्पादन अपरिवर्तित ग्रामीण कृषि में अधिक मौसमी बेरोजगारी कृषि में मौसम के अनुसार फसल कटाई के बाद रोजगार में विराम संरचनात्मक बेरोजगारी कौशल और अवसरों का बेमेल तकनीकी बदलाव से कुछ कौशल अप्रचलित शैक्षिक बेरोजगारी शिक्षित युवाओं की बेरोजगारी शिक्षा और कार्य की आवश्यकता में बेमेल चक्रीय बेरोजगारी: व्यापार चक्र के अवसाद काल में अनौपचारिकीकरण: सामाजिक सुरक्षा रहित रोजगार में वृद्धि स्वर्ण नियम छिपी बेरोजगारी में श्रमिक हटाने पर उत्पादन नहीं घटता, यह ग्रामीण क्षेत्रों में अधिक है।
रोजगार की क्षेत्रीय संरचना कृषि (प्राथमिक) रोजगार में हिस्सा सर्वाधिक (लगभग 45%) GDP में योगदान कम (लगभग 18%) छिपी बेरोजगारी मौसमी बेरोजगारी रोजगार की कृषि ग्रस्तता उद्योग (द्वितीयक) रोजगार में हिस्सा सीमित (लगभग 25%) GDP में योगदान मध्यम निर्माण एवं विनिर्माण औपचारिक/अनौपचारिक दोनों प्रकार सेवा (तृतीयक) रोजगार में हिस्सा बढ़ता हुआ (लगभग 30%) GDP में योगदान सर्वाधिक (लगभग 55%) वित्त, पर्यटन, IT कुशल रोजगार बेरोजगार वृद्धि रोजगार का बड़ा हिस्सा कृषि में, किंतु GDP में सेवा क्षेत्र का योगदान सर्वाधिक यही क्षेत्रीय असंतुलन 'रोजगार की कृषि ग्रस्तता' कहलाता है Golden Rule भारत में रोजगार में कृषि का हिस्सा सर्वाधिक किंतु GDP में सबसे कम है।

सामान्य गलतियाँ

  1. कार्यशील जनसंख्या और कुल जनसंख्या में भ्रम: कार्यशील जनसंख्या वह है जो आर्थिक रूप से सक्रिय है, कुल जनसंख्या नहीं।
  2. छिपी बेरोजगारी की परिभाषा गलत समझना: इसमें अतिरिक्त श्रमिकों को हटाने पर उत्पादन में कोई कमी नहीं आती।
  3. मौसमी और चक्रीय बेरोजगारी में भ्रम: मौसमी कृषि से, चक्रीय व्यापार चक्र से संबंधित है।
  4. अनौपचारिकीकरण का अर्थ: केवल ग्रामीण क्षेत्रों में ही नहीं, औपचारिक क्षेत्र की फर्मों में भी अनौपचारिक श्रमिक बढ़े हैं।
  5. 'बेरोजगार वृद्धि' (Jobless Growth) की अवधारणा: विकास दर बढ़ने पर भी रोजगार सृजन सीमित रहना।
  6. क्षेत्रीय रोजगार संरचना का भ्रम: रोजगार में कृषि सर्वाधिक, किंतु GDP में सेवा क्षेत्र सर्वाधिक।
  7. काम करने की आयु: सामान्यतः 15 वर्ष से अधिक (या 15-59) मानी जाती है।

परीक्षा युक्तियाँ

  1. कार्यशील जनसंख्या एवं श्रम बल का अंतर स्पष्ट करें।
  2. बेरोजगारी के सभी प्रकारों की परिभाषा उदाहरण सहित लिखें।
  3. छिपी बेरोजगारी को कृषि क्षेत्र के संदर्भ में समझाएँ।
  4. अनौपचारिकीकरण की प्रवृत्ति तथा इसके कारणों का विश्लेषण करें।
  5. भारत में रोजगार की क्षेत्रीय संरचना (कृषि, उद्योग, सेवा) की तुलना करें।
  6. MGNREGA, PMEGP, PMKVY जैसे रोजगार कार्यक्रमों का उद्देश्य लिखें।
  7. 'बेरोजगार वृद्धि' की अवधारणा को विकास दर और रोजगार लोच से समझाएँ।

निष्कर्ष

भारत में रोजगार की संरचना कृषि ग्रस्त है, जबकि आर्थिक विकास सेवा क्षेत्र से प्रेरित है। बेरोजगारी के अनेक रूप - खुली, छिपी, मौसमी, संरचनात्मक, चक्रीय एवं शैक्षिक - विभिन्न समस्याओं को दर्शाते हैं। अनौपचारिकीकरण और 'बेरोजगार वृद्धि' रोजगार की गुणवत्ता से जुड़ी चुनौतियाँ हैं। MGNREGA, PMEGP तथा PMKVY जैसे कार्यक्रम रोजगार सृजन एवं कौशल विकास के प्रयास हैं। समावेशी विकास के लिए रोजगार सृजन को विकास का केंद्रीय लक्ष्य बनाना आवश्यक है।