सरकारी बजट (Government Budget) एक वित्तीय वर्ष के लिए सरकार के अनुमानित प्राप्तियों एवं व्ययों का एक वित्तीय विवरण है। भारतीय संविधान के अनुच्छेद 112 के अंतर्गत प्रत्येक वर्ष केंद्रीय बजट संसद में प्रस्तुत किया जाता है। बजट का मुख्य उद्देश्य संसाधनों का पुनर्वितरण, आर्थिक स्थिरता, आर्थिक विकास तथा सार्वजनिक वस्तुओं की आपूर्ति करना है। बजट के दो मुख्य भाग होते हैं - प्राप्तियाँ (Receipts) और व्यय (Expenditure)। बजट में सरकार राजकोषीय नीति (Fiscal Policy) का क्रियान्वयन करती है।
2. बजट के प्रकार (Types of Budget)
संतुलित बजट (Balanced Budget): जब अनुमानित प्राप्तियाँ = अनुमानित व्यय।
आधिक्य बजट (Surplus Budget): जब अनुमानित प्राप्तियाँ > अनुमानित व्यय।
घाटे का बजट (Deficit Budget): जब अनुमानित व्यय > अनुमानित प्राप्तियाँ।
3. बजट प्राप्तियाँ (Budget Receipts)
राजस्व प्राप्तियाँ (Revenue Receipts)
वे प्राप्तियाँ जो सरकार की कुल संपत्ति को नहीं घटातीं और उत्तरदायित्व नहीं बढ़ातीं, राजस्व प्राप्तियाँ कहलाती हैं। इनमें शामिल हैं:
कर राजस्व: प्रत्यक्ष कर (आयकर, निगम कर, संपत्ति कर) और अप्रत्यक्ष कर (GST, सीमा शुल्क, उत्पाद शुल्क)।
वे प्राप्तियाँ जो सरकार की संपत्ति को घटाती हैं या उत्तरदायित्व बढ़ाती हैं। इनमें शामिल हैं:
ऋण प्राप्तियाँ (आंतरिक एवं बाह्य ऋण)।
विनिवेश (Disinvestment) की प्राप्तियाँ।
ऋणों की वसूली।
4. बजट व्यय (Budget Expenditure)
राजस्व व्यय (Revenue Expenditure)
वह व्यय जिससे सरकार की कोई संपत्ति नहीं बनती और उत्तरदायित्व घटता नहीं, राजस्व व्यय कहलाता है। जैसे वेतन, पेंशन, ब्याज भुगतान, सब्सिडी, रक्षा व्यय का रखरखाव भाग।
पूँजी व्यय (Capital Expenditure)
वह व्यय जिससे सरकार की संपत्ति का सृजन होता है या उत्तरदायित्व घटता है। जैसे सड़क, बाँध, मशीनरी खरीद, विदेशों को ऋण, ऋणों की वापसी।
5. बजट घाटे के प्रकार (Types of Budget Deficits)
राजकोषीय घाटा (Fiscal Deficit)
यह सरकार के कुल व्यय तथा कुल गैर-ऋण प्राप्तियों के बीच का अंतर है।
राजस्व घाटे में से सरकार द्वारा दी गई ऋण सहायता (Grants for Creation of Capital Assets) घटाकर प्राप्त किया जाता है।
6. घाटे की पूर्ति के स्रोत (Means of Financing Deficit)
RBI से ऋण (वेज़ ऐंड मीन्स ऐडवांस): मुद्रा आपूर्ति बढ़ती है, जिससे मुद्रास्फीति का दबाव बन सकता है।
बाजार से ऋण: बाजार ऋण (सरकारी प्रतिभूतियाँ बेचकर) से मुद्रा आपूर्ति पर कोई सीधा प्रभाव नहीं पड़ता, किंतु ब्याज भुगतान का बोझ बढ़ता है।
विदेशी ऋण: विदेशी ऋण से विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव पड़ सकता है।
7. बजट के आर्थिक प्रभाव
संसाधनों का पुनर्वितरण: कर तथा व्यय नीति से आय एवं संपत्ति का पुनर्वितरण होता है।
आर्थिक स्थिरता: मुद्रास्फीति एवं अपस्फीति से निपटने में बजट सहायक है।
आर्थिक विकास: अवसंरचना पर पूँजी व्यय से विकास को गति मिलती है।
क्षेत्रीय संतुलन: पिछड़े क्षेत्रों में व्यय करके क्षेत्रीय असमानताएँ कम की जाती हैं।
सार्वजनिक वस्तुओं की आपूर्ति: रक्षा, शिक्षा, स्वास्थ्य जैसी सार्वजनिक वस्तुओं की आपूर्ति बजट से होती है।
त्वरित पुनरावृत्ति तालिकाएँ
तालिका 1: प्राप्तियाँ एवं व्यय का वर्गीकरण
राजस्व प्राप्तियाँ
पूँजी प्राप्तियाँ
कर राजस्व (आयकर, GST)
ऋण प्राप्तियाँ
गैर-कर राजस्व (शुल्क, ब्याज)
विनिवेश प्राप्तियाँ
संपत्ति में कोई कमी नहीं
संपत्ति घटती है
उत्तरदायित्व में कोई वृद्धि नहीं
उत्तरदायित्व बढ़ता है
राजस्व व्यय
पूँजी व्यय
वेतन, पेंशन, ब्याज, सब्सिडी
सड़क, बाँध, मशीनरी
संपत्ति नहीं बनती
संपत्ति का सृजन
उत्तरदायित्व नहीं घटता
उत्तरदायित्व घटता है
तालिका 2: घाटे के प्रकार
घाटा
सूत्र
राजस्व घाटा
राजस्व व्यय - राजस्व प्राप्तियाँ
राजकोषीय घाटा
कुल व्यय - कुल गैर-ऋण प्राप्तियाँ
प्राथमिक घाटा
राजकोषीय घाटा - ब्याज भुगतान
प्रभावी राजस्व घाटा
राजस्व घाटा - ऋण सहायता (पूँजी निर्माण हेतु)
तालिका 3: बजट के प्रकार
प्रकार
शर्त
संतुलित बजट
प्राप्तियाँ = व्यय
आधिक्य बजट
प्राप्तियाँ > व्यय
घाटे का बजट
व्यय > प्राप्तियाँ
माइंड मैप
graph TD
A["सरकारी बजट और अर्थव्यवस्था"] --> B["बजट के प्रकार: संतुलित, आधिक्य, घाटे का"]
A --> C["प्राप्तियाँ: राजस्व और पूँजी"]
A --> D["व्यय: राजस्व और पूँजी"]
A --> E["घाटे के प्रकार"]
E --> F["राजस्व घाटा"]
E --> G["राजकोषीय घाटा"]
E --> H["प्राथमिक घाटा"]
C --> I["कर एवं गैर-कर राजस्व"]
D --> J["विकास एवं गैर-विकास व्यय"]
महत्वपूर्ण आरेख (SVG)
सामान्य गलतियाँ
राजस्व और पूँजी प्राप्तियों में भ्रम: ऋण लेना पूँजी प्राप्ति है, कर वसूलना राजस्व प्राप्ति। कई विद्यार्थी ऋण को राजस्व मान लेते हैं।
राजकोषीय और राजस्व घाटे की गणना में त्रुटि: राजस्व घाटा केवल राजस्व खाते से, जबकि राजकोषीय घाटा कुल व्यय व गैर-ऋण प्राप्तियों से ज्ञात होता है।
प्राथमिक घाटे से ब्याज भुगतान घटाना भूलना: प्राथमिक घाटा = राजकोषीय घाटा - ब्याज भुगतान।
विनिवेश को राजस्व प्राप्ति मानना: विनिवेश (Disinvestment) पूँजी प्राप्ति है क्योंकि इससे सरकार की संपत्ति घटती है।
सब्सिडी को पूँजी व्यय मानना: सब्सिडी राजस्व व्यय है, पूँजी व्यय नहीं।
बजट के प्रकारों की शर्त भूल जाना: संतुलित बजट में प्राप्तियाँ = व्यय, आधिक्य में प्राप्तियाँ अधिक, घाटे में व्यय अधिक।
ब्याज भुगतान को राजस्व व्यय न मानना: ब्याज भुगतान राजस्व व्यय का प्रमुख अंग है और यह घाटे का बड़ा कारण है।
परीक्षा युक्तियाँ
राजस्व एवं पूँजी प्राप्तियों/व्यय की पहचान के आधार (संपत्ति-उत्तरदायित्व) को हमेशा याद रखें।
घाटे के तीनों मापों (राजस्व, राजकोषीय, प्राथमिक) के सूत्र को क्रमबद्ध रूप से लिखकर अंतर समझाएँ।
राजकोषीय घाटे की पूर्ति के स्रोत तथा मुद्रास्फीति पर प्रभाव का विश्लेषण करें।
बजट के आर्थिक प्रभाव (पुनर्वितरण, स्थिरता, विकास) को पाँच बिंदुओं में लिखें।
विनिवेश, ऋण वसूली, अनुदान जैसी वस्तुनिष्ठ प्रश्नों में आने वाली अवधारणाओं को स्पष्ट रखें।
संतुलित, आधिक्य एवं घाटे के बजट की शर्तों को उदाहरण सहित लिखें।
निष्कर्ष
सरकारी बजट अर्थव्यवस्था में सरकार की आय एवं व्यय नीति का दर्पण है। राजस्व और पूँजी प्राप्तियों तथा व्ययों का वर्गीकरण बजट संरचना को स्पष्ट करता है। राजस्व, राजकोषीय और प्राथमिक घाटे के माप राजकोषीय अनुशासन का आकलन करते हैं। बजट के माध्यम से सरकार संसाधनों का पुनर्वितरण, आर्थिक स्थिरता और विकास के लक्ष्य प्राप्त करती है। इन अवधारणाओं की सटीक समझ से राजकोषीय नीति एवं मुद्रास्फीति जैसी समस्याओं का विश्लेषण सरल होता है।