यह अध्याय तीन प्रमुख विकासशील अर्थव्यवस्थाओं - भारत, चीन और पाकिस्तान - के विकास अनुभवों का तुलनात्मक अध्ययन करता है। 1950 के दशक की शुरुआत में तीनों देशों की आर्थिक स्थितियाँ समान थीं - सभी कृषि प्रधान, कम प्रति व्यक्ति आय, निम्न साक्षरता। किंतु समय के साथ तीनों देशों ने अलग-अलग नीतियाँ अपनाईं, जिनके परिणाम भी भिन्न रहे। चीन ने 1978 में बाजार सुधारों की शुरुआत की, भारत ने 1991 में आर्थिक सुधार किए, जबकि पाकिस्तान का विकास मुख्यतः कृषि एवं पशुपालन पर केंद्रित रहा।
2. चीन (China)
चीन का विकास मॉडल
1949-1978: समाजवादी मॉडल, सामूहिक कृषि, केंद्रीय नियोजन।
1978 से: 'ग्रेट लीप' के स्थान पर बाजार सुधार, खेती परिवारों को सौंपी गई, विदेशी निवेश आकर्षित किया गया।
विशेष आर्थिक क्षेत्र (SEZ): विदेशी निवेश को आकर्षित करने के लिए विशेष क्षेत्र।
चीन की उपलब्धियाँ
अत्यधिक तीव्र आर्थिक वृद्धि (लगभग 9-10 प्रतिशत दशकों तक)।
विनिर्माण क्षेत्र का विश्व में प्रभुत्व।
विदेशी मुद्रा भंडार में वृद्धि।
गरीबी में भारी कमी।
चीन की चुनौतियाँ
जनसंख्या नीति (एक बालक नीति) के परिणामस्वरूप लिंग असंतुलन।
बढ़ती आय असमानता।
पर्यावरणीय प्रदूषण।
विनिर्माण से सेवा क्षेत्र में संक्रमण की आवश्यकता।
3. पाकिस्तान (Pakistan)
पाकिस्तान का विकास मॉडल
1950-1980: कृषि एवं पशुपालन पर केंद्रित।
निजी क्षेत्र को प्रोत्साहन, सार्वजनिक क्षेत्र की सीमित भूमिका।
विदेशी सहायता (अमेरिकी सहायता) पर निर्भरता।
पाकिस्तान की विशेषताएँ
प्रति व्यक्ति आय भारत से अधिक रही (कुछ वर्षों में)।
कृषि और पशुपालन (दुग्ध, ऊन) में विशेषज्ञता।
GDP में सेवा क्षेत्र का उच्च हिस्सा।
विनिर्माण क्षेत्र का अपेक्षाकृत कम विकास।
पाकिस्तान की समस्याएँ
राजनीतिक अस्थिरता एवं सैन्य शासन।
बढ़ती बेरोजगारी।
विदेशी ऋण एवं सहायता पर निर्भरता।
सामाजिक विकास (शिक्षा, स्वास्थ्य) में पिछड़ापन।
4. भारत बनाम चीन बनाम पाकिस्तान: तुलनात्मक अध्ययन
सामान्य विशेषताएँ (1950 के दशक में)
तीनों देशों में समान प्रति व्यक्ति आय।
कृषि प्रधान अर्थव्यवस्थाएँ।
निम्न जीवन स्तर एवं साक्षरता।
प्राकृतिक संसाधनों से संपन्न।
अंतर (विकास के मार्ग)
आधार
भारत
चीन
पाकिस्तान
सुधारों की शुरुआत
1991
1978
देर से, अधूरे
मुख्य क्षेत्र
सेवा
विनिर्माण
कृषि/सेवा
विदेशी निवेश
महत्वपूर्ण
अत्यधिक
सीमित
GDP में कृषि का हिस्सा
घटता
घटता
घटता
जनसंख्या नीति
स्वैच्छिक
एक बालक नीति
सीमित
5. मानव विकास की तुलना (Human Development Comparison)
शिक्षा एवं स्वास्थ्य के संकेतक
भारत की साक्षरता दर तीनों में निम्नतम है (चीन सर्वाधिक)।
शिशु मृत्यु दर (IMR) चीन में सबसे कम, पाकिस्तान में सबसे अधिक।
जीवन प्रत्याशा चीन में सबसे अधिक।
पाकिस्तान सामाजिक क्षेत्र (शिक्षा-स्वास्थ्य) में सबसे पिछड़ा।
जनसंख्या एवं रोजगार
भारत एवं पाकिस्तान में जनसंख्या वृद्धि उच्च।
चीन में एक बालक नीति से वृद्धि दर घटी, किंतु लिंग असंतुलन उत्पन्न हुआ।
तीनों देशों में सेवा क्षेत्र का GDP में योगदान बढ़ा।
6. सीख (Lessons)
बाजार सुधार एवं विदेशी निवेश से विकास में तेजी आती है (चीन का अनुभव)।
समावेशी विकास के लिए शिक्षा-स्वास्थ्य में निवेश अनिवार्य है।
केवल आर्थिक विकास पर्याप्त नहीं, मानव विकास पर भी ध्यान देना चाहिए।
राजनीतिक स्थिरता विकास का महत्वपूर्ण आधार है।
जनसंख्या नीति सावधानीपूर्वक बनानी चाहिए (चीन का लिंग असंतुलन)।
त्वरित पुनरावृत्ति तालिकाएँ
तालिका 1: सुधारों का समय
देश
सुधारों की शुरुआत
प्रमुख मॉडल
चीन
1978
बाजार समाजवाद
भारत
1991
मिश्रित अर्थव्यवस्था से उदारीकरण
पाकिस्तान
देर से
निजी क्षेत्र प्रधान
तालिका 2: मानव विकास संकेतक (सामान्य प्रवृत्ति)
संकेतक
भारत
चीन
पाकिस्तान
साक्षरता
मध्यम
उच्चतम
मध्यम
IMR
मध्यम
निम्नतम
उच्चतम
जीवन प्रत्याशा
मध्यम
उच्चतम
निम्न
प्रति व्यक्ति आय
मध्यम
उच्चतम
मध्यम
तालिका 3: GDP में क्षेत्रीय योगदान (प्रवृत्ति)
क्षेत्र
भारत
चीन
पाकिस्तान
कृषि
घटता
घटता
घटता
उद्योग
मध्यम
उच्च (विनिर्माण)
कम
सेवा
उच्च
बढ़ता
उच्च
माइंड मैप
graph TD
A["तुलनात्मक विकास अनुभव"] --> B["भारत: 1991 सुधार, सेवा क्षेत्र"]
A --> C["चीन: 1978 सुधार, विनिर्माण"]
A --> D["पाकिस्तान: कृषि/पशुपालन"]
A --> E["सामान्य प्रारंभिक विशेषताएँ"]
A --> F["मानव विकास की तुलना"]
C --> G["SEZ, विदेशी निवेश"]
F --> H["साक्षरता, IMR, जीवन प्रत्याशा"]
A --> I["सीख: बाजार सुधार, मानव विकास"]
महत्वपूर्ण आरेख (SVG)
सामान्य गलतियाँ
सुधारों के वर्षों में भ्रम: चीन के सुधार 1978 में, भारत के 1991 में शुरू हुए।
मुख्य क्षेत्रों का भ्रम: चीन का विकास विनिर्माण पर, भारत का सेवा क्षेत्र पर, पाकिस्तान का कृषि/पशुपालन पर केंद्रित रहा।
चीन की 'एक बालक नीति' के परिणाम भूलना: इससे लिंग असंतुलन उत्पन्न हुआ।
प्रति व्यक्ति आय की तुलना: चीन की प्रति व्यक्ति आय तीनों में सर्वाधिक है।
पाकिस्तान के विकास को भारत से अधिक मानना: केवल कुछ वर्षों में प्रति व्यक्ति आय अधिक रही, समग्र विकास में भारत आगे है।
चीन के SEZ का अर्थ भूलना: SEZ (विशेष आर्थिक क्षेत्र) विदेशी निवेश हेतु बनाए गए विशेष क्षेत्र हैं।
सामाजिक विकास में पाकिस्तान की स्थिति: पाकिस्तान शिक्षा-स्वास्थ्य में तीनों में सबसे पिछड़ा है।
परीक्षा युक्तियाँ
तीनों देशों के विकास मॉडल (केंद्रीय नियोजन, मिश्रित, निजी क्षेत्र) की तुलना करें।
सुधारों की शुरुआत (चीन 1978, भारत 1991) को वर्ष सहित लिखें।
मानव विकास संकेतकों (साक्षरता, IMR, जीवन प्रत्याशा) की तुलनात्मक तालिका बनाएँ।
चीन की तीव्र वृद्धि के कारण (SEZ, FDI, विनिर्माण) को स्पष्ट करें।
पाकिस्तान की विकास समस्याओं (राजनीतिक अस्थिरता, विनिर्माण की कमजोरी) का विश्लेषण करें।
तीनों देशों की सामान्य प्रारंभिक विशेषताओं (1950) का उल्लेख करें।
चीन और भारत के विकास अनुभवों से मिलने वाली सीख को लिखें।
निष्कर्ष
भारत, चीन और पाकिस्तान, तीनों ने लगभग समान प्रारंभिक स्थितियों से विकास प्रारंभ किया, किंतु अलग-अलग नीतियों के कारण परिणाम भिन्न रहे। चीन ने बाजार सुधारों (1978) से विनिर्माण एवं विदेशी निवेश के माध्यम से सबसे तीव्र विकास किया। भारत ने 1991 के सुधारों से सेवा क्षेत्र में प्रगति की। पाकिस्तान कृषि-पशुपालन पर निर्भर रहा और राजनीतिक अस्थिरता तथा सामाजिक पिछड़ेपन से जूझता रहा। इन अनुभवों से सीख है कि बाजार सुधार, शिक्षा-स्वास्थ्य में निवेश और राजनीतिक स्थिरता समावेशी विकास की कुंजी हैं।