1991 में भारत गंभीर भुगतान संतुलन संकट (Balance of Payments Crisis) का सामना कर रहा था। विदेशी मुद्रा भंडार लगभग तीन सप्ताह के आयात के लिए भी पर्याप्त नहीं थे। इस संकट से निपटने तथा दीर्घकालिक विकास के लिए भारत सरकार ने नई आर्थिक नीति (New Economic Policy - NEP) 1991 में प्रारंभ की, जिसमें तीन मुख्य घटक थे - उदारीकरण (Liberalisation), निजीकरण (Privatisation) तथा वैश्वीकरण (Globalisation), जिन्हें सामूहिक रूप से LPG कहा जाता है। इस नीति का उद्देश्य अर्थव्यवस्था को प्रतिस्पर्धी बनाना, सरकारी नियंत्रण कम करना तथा विदेशी निवेश आकर्षित करना था।
2. संकट के कारण (Reasons for the Crisis)
अत्यधिक सरकारी नियंत्रण एवं लाइसेंस राज के कारण उद्योगों में कार्यकुशलता में कमी।
बढ़ता राजकोषीय घाटा और सार्वजनिक ऋण।
आयात की उच्च आवश्यकता किंतु निर्यात में सीमित वृद्धि।
विदेशी मुद्रा भंडार में भारी गिरावट।
खाड़ी युद्ध (1990-91) के कारण तेल की कीमतों में वृद्धि तथा प्रेषण में कमी।
राजनीतिक अस्थिरता ने अंतर्राष्ट्रीय निवेशकों का विश्वास कम किया।
3. उदारीकरण (Liberalisation)
उदारीकरण का अर्थ है सरकारी नियंत्रण, लाइसेंस तथा प्रतिबंधों को कम करना तथा अर्थव्यवस्था को बाजार तंत्र के लिए खोलना। औद्योगिक क्षेत्र में उदारीकरण के प्रमुख उपाय:
औद्योगिक लाइसेंस की समाप्ति: कुछ खतरनाक उद्योगों को छोड़कर सभी उद्योगों के लिए लाइसेंस अनिवार्यता समाप्त।
आयात शुल्कों में कमी: आयात पर उच्च शुल्क घटाकर प्रतिस्पर्धा को प्रोत्साहन।
विदेशी निवेश के लिए खुलापन: उद्योगों में विदेशी निवेश की सीमा बढ़ाई गई (FDI प्रवाह स्वचालित रूप से अनुमत)।
MRTP सीमा की समाप्ति: बड़े औद्योगिक घरानों पर विस्तार की सीमा हटाई गई।
बैंकिंग एवं वित्तीय सुधार: ब्याज दरों में लचीलापन, निजी बैंकों की स्थापना की अनुमति।
प्रत्यक्ष करों में सुधार: कर दरों में कमी तथा कर ढाँचे का सरलीकरण।
4. निजीकरण (Privatisation)
निजीकरण का अर्थ है सार्वजनिक क्षेत्र की इकाइयों के स्वामित्व एवं नियंत्रण को निजी क्षेत्र में स्थानांतरित करना। इसके मुख्य तरीके:
विनिवेश (Disinvestment): सरकार द्वारा सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों में अपनी हिस्सेदारी निजी क्षेत्र को बेचना।
स्वामित्व का हस्तांतरण: सार्वजनिक क्षेत्र की इकाइयों को निजी कंपनियों को बेचना।
स्वैच्छिक पुनर्भरण (Voluntary Retirement Scheme): अतिरिक्त कर्मचारियों की कमी हेतु।
नवरत्न और मिनिरत्न
कुछ कुशल सार्वजनिक क्षेत्र की इकाइयों को अधिक स्वायत्तता दी गई। शीर्ष कुशल कंपनियों को 'नवरत्न' (जैसे BHEL, ONGC) तथा अन्य को 'मिनिरत्न' का दर्जा दिया गया, ताकि वे बाजार में स्वतंत्र रूप से प्रतिस्पर्धा कर सकें।
निजीकरण के पक्ष-विपक्ष
पक्ष: कार्यकुशलता में वृद्धि, सरकार पर वित्तीय बोझ में कमी, तकनीकी आधुनिकीकरण।
विपक्ष: रोजगार में कटौती की आशंका, प्राकृतिक एकाधिकार की समस्या, सामाजिक कल्याण में कमी की आशंका।
5. वैश्वीकरण (Globalisation)
वैश्वीकरण से आशय विभिन्न देशों की अर्थव्यवस्थाओं के बीच वस्तुओं, सेवाओं, पूँजी, तकनीक तथा जानकारी के प्रवाह का एकीकरण है। वैश्वीकरण के प्रमुख उपाय:
विदेशी व्यापार का उदारीकरण: आयात-निर्यात पर कोटा एवं शुल्क में कमी।
FDI एवं FII में वृद्धि: विदेशी निवेश को प्रोत्साहन।
तकनीकी हस्तांतरण: विदेशी तकनीक से उत्पादन की गुणवत्ता में सुधार।
विश्व व्यापार संगठन (WTO): 1995 में स्थापित, व्यापार के नियम बनाने वाली अंतर्राष्ट्रीय संस्था।
WTO की भूमिका
WTO वस्तुओं एवं सेवाओं के व्यापार को मुक्त करता है, बौद्धिक संपदा अधिकारों की रक्षा करता है तथा व्यापार विवादों का निपटारा करता है। भारत WTO का संस्थापक सदस्य है।
6. सुधारों का मूल्यांकन (Appraisal)
सकारात्मक: आर्थिक विकास दर में वृद्धि, विदेशी निवेश में वृद्धि, उपभोक्ताओं को अधिक विकल्प, उद्योगों में प्रतिस्पर्धा।
नकारात्मक: कृषि क्षेत्र की उपेक्षा, रोजगार सृजन में सीमित सफलता, आय असमानता में वृद्धि, छोटे उद्योगों पर प्रतिस्पर्धा का दबाव।
कृषि, स्वास्थ्य एवं शिक्षा पर सार्वजनिक व्यय में सापेक्षिक कमी।
त्वरित पुनरावृत्ति तालिकाएँ
तालिका 1: LPG के घटक
घटक
मुख्य उपाय
उदारीकरण
लाइसेंस समाप्त, कर में कमी, FDI खुला
निजीकरण
विनिवेश, स्वामित्व हस्तांतरण, नवरत्न दर्जा
वैश्वीकरण
व्यापार उदारीकरण, WTO, तकनीक हस्तांतरण
तालिका 2: सुधारों के प्रभाव
सकारात्मक
नकारात्मक
विकास दर में वृद्धि
कृषि की उपेक्षा
विदेशी निवेश में वृद्धि
रोजगार सृजन सीमित
प्रतिस्पर्धा में वृद्धि
आय असमानता में वृद्धि
उपभोक्ता विकल्पों में वृद्धि
छोटे उद्योगों पर दबाव
तालिका 3: नवरत्न बनाम मिनिरत्न
आधार
नवरत्न
मिनिरत्न
दर्जा
उच्च (शीर्ष कुशल)
सामान्य (कुशल)
उदाहरण
BHEL, ONGC, SAIL
भारत इलेक्ट्रॉनिक्स आदि
स्वायत्तता
अधिक
अपेक्षाकृत कम
माइंड मैप
graph TD
A["नई आर्थिक नीति 1991 (LPG)"] --> B["उदारीकरण"]
A --> C["निजीकरण"]
A --> D["वैश्वीकरण"]
B --> E["लाइसेंस समाप्त, कर कम, FDI"]
C --> F["विनिवेश, स्वामित्व हस्तांतरण"]
D --> G["व्यापार उदारीकरण, WTO"]
C --> H["नवरत्न, मिनिरत्न"]
A --> I["संकट के कारण: BoP संकट, घाटा"]
A --> J["मूल्यांकन: वृद्धि और असमानता"]
महत्वपूर्ण आरेख (SVG)
सामान्य गलतियाँ
LPG का पूर्ण रूप भूल जाना: LPG = Liberalisation, Privatisation, Globalisation (उदारीकरण, निजीकरण, वैश्वीकरण)।
विनिवेश और निजीकरण को एक समान मानना: विनिवेश सरकार द्वारा हिस्सेदारी की आंशिक बिक्री है, जबकि निजीकरण स्वामित्व का हस्तांतरण।
1991 के संकट का कारण गलत बताना: संकट भुगतान संतुलन एवं विदेशी मुद्रा भंडार की कमी से उत्पन्न हुआ था।
WTO की स्थापना वर्ष भूलना: WTO 1995 में स्थापित हुई, GATT से अलग।
नवरत्न/मिनिरत्न की अवधारणा भ्रम: नवरत्न शीर्ष कुशल PSU हैं, मिनिरत्न सामान्य कुशल।
उदारीकरण केवल व्यापार मानना: उदारीकरण औद्योगिक, वित्तीय, कर सहित सभी क्षेत्रों में नियंत्रण घटाना है।
सुधारों के नकारात्मक प्रभावों की उपेक्षा: सुधारों से आय असमानता और कृषि की उपेक्षा जैसे दोष भी जुड़े हैं।
परीक्षा युक्तियाँ
1991 के आर्थिक संकट के कारणों को पाँच बिंदुओं में लिखें।
उदारीकरण, निजीकरण और वैश्वीकरण की परिभाषाएँ तथा उपाय अलग-अलग लिखें।
विनिवेश की अवधारणा को स्वामित्व के हस्तांतरण के संदर्भ में समझाएँ।
निजीकरण के पक्ष-विपक्ष की तुलनात्मक सूची बनाएँ।
WTO की स्थापना, उद्देश्य एवं भारत पर प्रभाव का विश्लेषण करें।
सुधारों का मूल्यांकन सकारात्मक एवं नकारात्मक पक्षों सहित करें।
'नवरत्न' और 'मिनिरत्न' की अवधारणाओं को उदाहरण सहित स्पष्ट करें।
निष्कर्ष
1991 की नई आर्थिक नीति ने भारतीय अर्थव्यवस्था को एक नए युग में प्रवेश कराया। उदारीकरण से सरकारी नियंत्रण घटा, निजीकरण से कार्यकुशलता बढ़ी तथा वैश्वीकरण से भारत विश्व अर्थव्यवस्था से जुड़ा। इन सुधारों से विकास दर और विदेशी निवेश में वृद्धि हुई, किंतु कृषि की उपेक्षा, आय असमानता और रोजगार सृजन में सीमित सफलता जैसी चुनौतियाँ भी उभरीं। LPG की समझ समकालीन भारतीय अर्थव्यवस्था के विश्लेषण के लिए अनिवार्य है।