"My Mother at Sixty-six" कक्षा 12 की पाठ्यपुस्तक फ्लेमिंगो में संकलित प्रसिद्ध भारतीय कवयित्री कामला दास (Kamala Das) द्वारा लिखी गई एक मार्मिक कविता है। यह कविता एक बेटी के अपनी बूढ़ी माँ के प्रति गहरे प्रेम और बुढ़ापे की कड़वी वास्तविकता का वर्णन करती है। कविता में कवयित्री अपनी साठ-छियासी (66) वर्ष की माँ को विमान से यात्रा के दौरान देखती है और उनके बुढ़ापे तथा मृत्यु के भय को महसूस करती है।
कविता की शुरुआत में कवयित्री कोयलम (Kochi) स्थित अपने पिता के घर से विमान से निकलती है। उसकी माँ उन्हें छोड़ने आई थीं। विमान में बैठने के दौरान कवयित्री अपनी माँ को देखती है, जो दरवाजे के पास खड़ी थीं। वह माँ की ओर देखती है और उनका चेहरा देखकर चौंक जाती है - माँ का चेहरा पीला और झुर्रियों से भरा हुआ है, और उसकी माँ सो रही थी।
कविता में कवयित्री माँ की तुलना सर्दियों के बाद बची हुई एक पुरानी लकीर (ashen winters) से करती है। उसके बाल भूरे हो गए हैं और चेहरे पर झुर्रियाँ हैं। कवयित्री के मन में उनके अलग होने का डर पैदा होता है। वह सोचती है कि उसकी माँ की यह स्थिति उनके मृत्यु की ओर बढ़ने का संकेत है। यह दृश्य कवयित्री को अपने बचपन की याद दिलाता है, जब उसने अपनी माँ को अलविदा कहा था।
कामला दास (Kamala Das) (1934-2009) भारतीय अंग्रेज़ी साहित्य की एक महान कवयित्री थीं। उन्हें 'मद्रासिका' (Madhavikutty) के नाम से मलयालम में भी जाना जाता है। वे भारतीय अंग्रेज़ी कविता की प्रमुख स्तंभों में से एक हैं। उनकी रचनाओं में स्त्री विमर्श, निजी अनुभव, प्रेम और पीड़ा का गहरा चित्रण मिलता है। उनकी प्रसिद्ध आत्मकथा "My Story" (माई स्टोरी) है।
कामला दास की कविताओं में स्त्री की आंतरिक भावनाएँ, पारिवारिक रिश्ते और मानवीय संवेदनाएँ प्रमुखता से झलकती हैं। वे अपनी कविताओं में सीधी, सरल और मार्मिक भाषा का प्रयोग करती हैं। उनकी कविता "My Mother at Sixty-six" माँ-बेटी के गहरे भावनात्मक रिश्ते और बुढ़ापे के दुखद पहलू को प्रस्तुत करती है। उन्होंने साहित्य में उत्कृष्ट योगदान के लिए कई पुरस्कार प्राप्त किए।
कविता की शुरुआत कवयित्री के कोयलम से विमान से निकलने से होती है। उसकी माँ दरवाजे के पास खड़ी थीं। कवयित्री पीछे मुड़कर अपनी माँ की ओर देखती है और चौंक जाती है। माँ का चेहरा पीला और झुर्रियों से भरा हुआ है, और वे सो रही थीं। उनके होंठ बंद थे और चेहरे से बुढ़ापा और कमजोरी झलक रही थी। यह दृश्य कवयित्री के मन में गहरा आघात पहुँचाता है।
कवयित्री माँ के चेहरे का वर्णन करती है। वह माँ के चेहरे को सर्दियों के बाद की बची लकीरों (ashen winters) जैसा बताती है, जिससे बुढ़ापे और निर्जीवता का भाव प्रकट होता है। इस दृश्य से कवयित्री को अपने बचपन की याद आती है, जब उसने अपनी माँ को अलविदा कहा था। उसके मन में माँ से अलग होने का डर पैदा होता है। यह भय उसे बचपन में भी सताता था।
कविता के अंत में कवयित्री अपनी माँ के साथ अलविदा के क्षण का वर्णन करती है। वह अपनी माँ के चेहरे की ओर देखती है और उनके सफेद बाल देखती है। वह मुस्कुराने की कोशिश करती है, लेकिन उसकी आँखों से आँसू निकल आते हैं। कविता का अंत एक महत्वपूर्ण संदेश देता है - कि माँ बूढ़ी हो रही हैं, लेकिन उनका प्यार कभी बूढ़ा नहीं होता। कवयित्री माँ के प्रति अपने प्रेम को व्यक्त करती है और कहती है कि वह माँ को कभी भूल नहीं पाएगी।
इस कविता का मूल भाव यह है कि माँ-बेटी के रिश्ते में गहरा प्रेम और भावनात्मक बंधन होता है। कवयित्री अपनी बूढ़ी माँ के बुढ़ापे को देखकर दुखी होती है और उनके अलग होने तथा मृत्यु के भय को महसूस करती है। कविता बुढ़ापे की कड़वी वास्तविकता और उसके दुखद पहलुओं को प्रस्तुत करती है।
कविता का संदेश यह है कि हमें अपने माता-पिता का सम्मान करना चाहिए और उनके बुढ़ापे में उनकी देखभाल करनी चाहिए। कवयित्री दिखाती है कि माँ का प्यार और त्याग कभी कम नहीं होता, भले ही वे बूढ़ी हो जाएँ। हमें अपने माता-पिता की उम्र बढ़ने पर भी उनके प्रति उसी प्रेम और सम्मान को बनाए रखना चाहिए।
कविता का एक और संदेश यह है कि समय बीतता जाता है और बुढ़ापा आता है, इसलिए हमें अपने प्रियजनों के साथ समय बिताना चाहिए। कवयित्री के मन में जो डर है - कि माँ कभी भी उससे अलग हो सकती हैं - वह हर व्यक्ति के जीवन में आता है। कविता हमें सिखाती है कि हमें अपने रिश्तों को महत्व देना चाहिए।
| पहलू | विवरण |
|---|---|
| कवयित्री | कामला दास |
| माँ की आयु | 66 वर्ष |
| स्थान | कोयलम, विमान यात्रा |
| माँ की स्थिति | बूढ़ी, पीला चेहरा, भूरे बाल |
| मुख्य भाव | माँ से अलग होने का डर |
| प्रतीक | अर्थ |
|---|---|
| सर्दियाँ (Winters) | बुढ़ापा और मृत्यु |
| राख (Ashes) | निर्जीवता और कमजोरी |
| विमान यात्रा | जीवन की यात्रा |
| भूरे बाल | बुढ़ापे के लक्षण |
"My Mother at Sixty-six" कामला दास की एक अत्यंत मार्मिक और संवेदनशील कविता है, जो माँ-बेटी के गहरे भावनात्मक रिश्ते को प्रस्तुत करती है। कवयित्री ने अपनी बूढ़ी माँ के बुढ़ापे, कमजोरी और मृत्यु के भय को जिस संवेदनशीलता से चित्रित किया है, वह हर पाठक के हृदय को छू जाती है। कविता हमें यह सिखाती है कि माँ का प्यार और त्याग कभी कम नहीं होता, चाहे वे कितनी भी बूढ़ी क्यों न हो जाएँ। यह कविता हमें अपने माता-पिता के साथ समय बिताने और उनके प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने की प्रेरणा देती है। यह भारतीय अंग्रेज़ी कविता की एक अमर रचना है।