"On the Face of It" कक्षा 12 की पाठ्यपुस्तक विस्टाज़ में संकलित ब्रिटिश लेखिका सुसान हिल (Susan Hill) द्वारा लिखी गई एक मार्मिक कहानी है। यह कहानी विकलांगता, आत्मविश्वास, दोस्ती और जीवन के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण के बारे में है। कहानी के दो मुख्य पात्र हैं - डेरिक (Derry) नामक एक लड़का, जिसके चेहरे का एक हिस्सा जलने से विकृत हो गया है, और मिस्टर लैम्ब (Mr. Lamb) नामक एक बुजुर्ग व्यक्ति, जिसका एक पैर कृत्रिम है।
कहानी की शुरुआत डेरिक से होती है, जो लोगों की नज़रों से दूर भागता है, क्योंकि उसका चेहरा जलने से विकृत हो गया है। लोग उसे घूरते हैं और उसकी शक्ल पर टिप्पणियाँ करते हैं, जिससे वह अकेला और उदास रहता है। वह जीवन से निराश है और सोचता है कि लोग केवल उसका चेहरा देखते हैं, उसकी आत्मा नहीं।
कहानी में डेरिक की मुलाकात मिस्टर लैम्ब से होती है, जो अपने बगीचे में सीढ़ी पर चढ़कर सेब तोड़ रहे थे। मिस्टर लैम्ब का एक पैर कृत्रिम है, लेकिन वे जीवन के प्रति बहुत सकारात्मक हैं। वे अपनी विकलांगता को जीवन की बाधा नहीं मानते। मिस्टर लैम्ब डेरिक से दोस्ती करते हैं और उसे जीवन को सकारात्मक रूप से देखना सिखाते हैं। कहानी विकलांगता और जीवन के प्रति दृष्टिकोण पर गहरा संदेश देती है।
सुसान हिल (Susan Hill) एक प्रसिद्ध ब्रिटिश लेखिका हैं, जो उपन्यास, कहानी और नाटक लिखती हैं। उनका जन्म 1942 में इंग्लैंड में हुआ था। उनकी प्रसिद्ध रचनाओं में "The Woman in Black" (द वुमन इन ब्लैक) और "I'm the King of the Castle" (आई एम द किंग ऑफ़ द कैसल) शामिल हैं। "The Woman in Black" एक प्रसिद्ध गॉथिक उपन्यास है, जिस पर फिल्म भी बनी है।
सुसान हिल की लेखनी में मानवीय संवेदना, मनोवैज्ञानिक गहराई और सामाजिक मुद्दों का गहरा चित्रण मिलता है। "On the Face of It" उनका एक नाटक है, जो विकलांगता और मानवीय संबंधों पर आधारित है। वे विकलांग व्यक्तियों की पीड़ा, उनके अकेलेपन और उनकी इच्छाओं को संवेदनशील ढंग से प्रस्तुत करती हैं। उनका मानना था कि साहित्य समाज की कमियों को उजागर करने का एक माध्यम है।
कहानी की शुरुआत डेरिक से होती है, जो एक बंद पार्क में घूम रहा है। वह वहाँ से निकलना चाहता है, क्योंकि उसे लगता है कि लोग उसे घूरेंगे। लेकिन वहाँ उसकी मुलाकात मिस्टर लैम्ब से होती है, जो अपने बगीचे में सेब तोड़ रहे हैं। मिस्टर लैम्ब डेरिक को बुलाते हैं और उससे बात करते हैं। डेरिक शुरू में झिझकता है, लेकिन मिस्टर लैम्ब की मित्रता से वह बात करने लगता है।
डेरिक बताता है कि उसका चेहरा जलने से विकृत हो गया है, इसलिए लोग उसे घूरते हैं और उससे दूर रहते हैं। वह कहता है कि लोग उससे घृणा करते हैं और उसे अकेला छोड़ देते हैं। वह जीवन से निराश है और सोचता है कि उसका जीवन बेकार है। डेरिक की बातें सुनकर मिस्टर लैम्ब उसे समझाते हैं कि जीवन में सब कुछ खत्म नहीं हुआ है।
मिस्टर लैम्ब अपने बारे में बताते हैं कि उनका एक पैर कृत्रिम है। वे युद्ध में घायल हो गए थे, इसलिए उनका पैर कट गया था। लेकिन वे जीवन से निराश नहीं हैं। वे कहते हैं कि हमें जीवन को वैसे ही स्वीकार करना चाहिए, जैसा वह है। उनका कहना है कि विकलांगता जीवन का अंत नहीं है, बल्कि हमें जीवन के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण रखना चाहिए।
मिस्टर लैम्ब डेरिक को जीवन के बारे में कई महत्वपूर्ण बातें सिखाते हैं। वे कहते हैं कि हमें अपनी समस्याओं पर ध्यान नहीं देना चाहिए, बल्कि जीवन की अच्छी चीज़ों पर ध्यान देना चाहिए। वे कहते हैं कि जीवन में हर चीज़ का अपना महत्व है - पेड़, पत्ते, फूल, कीड़े। हमें प्रकृति और जीवन का आनंद लेना चाहिए। मिस्टर लैम्ब की बातों से डेरिक में धीरे-धीरे सकारात्मकता आने लगती है।
मिस्टर लैम्ब डेरिक को बताते हैं कि लोग उन्हें 'लैम्ब' कहकर बुलाते हैं, जिसका अर्थ है 'भेड़'। वे कहते हैं कि नाम से क्या होता है, हमें अपने काम और अपने जीवन पर ध्यान देना चाहिए। वे डेरिक को प्रोत्साहित करते हैं कि वह जीवन में कुछ करके दिखाए। डेरिक को मिस्टर लैम्ब की बातें अच्छी लगती हैं और वह उनकी दोस्ती को महत्व देता है।
कहानी के अंत में डेरिक घर जाता है, लेकिन वह वापस मिस्टर लैम्ब से मिलने का वादा करता है। उसके मन में मिस्टर लैम्ब के प्रति स्नेह और प्रेरणा है। लेकिन जब वह दोबारा मिस्टर लैम्ब के घर पहुँचता है, तो उसे पता चलता है कि मिस्टर लैम्ब सीढ़ी से गिरकर मृत्यु हो गई है। डेरिक दुखी होता है, लेकिन उसके जीवन में मिस्टर लैम्ब द्वारा दिया गया सकारात्मक दृष्टिकोण हमेशा रहेगा। कहानी का अंत मार्मिक है।
इस कहानी का मूलभाव यह है कि विकलांगता जीवन का अंत नहीं है। डेरिक का चेहरा विकृत है, लेकिन मिस्टर लैम्ब उसे सिखाते हैं कि जीवन को सकारात्मक रूप से देखना चाहिए। मिस्टर लैम्ब खुद भी एक पैर से विकलांग हैं, लेकिन वे जीवन का आनंद लेते हैं। कहानी दिखाती है कि विकलांगता मन की स्थिति है, शरीर की नहीं।
कहानी का संदेश यह है कि हमें अपनी शारीरिक सीमाओं के बारे में सोचकर दुखी नहीं होना चाहिए, बल्कि अपनी क्षमताओं पर ध्यान देना चाहिए। मिस्टर लैम्ब कहते हैं कि जीवन में हर चीज़ का अपना महत्व है और हमें जीवन का आनंद लेना चाहिए। डेरिक को यह समझ आता है कि जीवन खत्म नहीं हुआ है।
कहानी का एक और संदेश यह है कि समाज को विकलांग लोगों के प्रति संवेदनशील होना चाहिए। लोग डेरिक को घूरते हैं और उससे दूर रहते हैं, जिससे वह दुखी होता है। कहानी हमें सिखाती है कि हमें विकलांग लोगों के साथ सम्मान और करुणा से पेश आना चाहिए, और उनकी आत्मा को देखना चाहिए, न कि केवल उनकी शक्ल को।
| डेरिक | मिस्टर लैम्ब |
|---|---|
| चेहरा जला हुआ | एक पैर कृत्रिम |
| निराश | सकारात्मक |
| अकेला | मिलनसार |
| जीवन से दुखी | जीवन का आनंद लेने वाला |
| विषय | विवरण |
|---|---|
| विकलांगता | शारीरिक सीमाएँ जीवन का अंत नहीं |
| दोस्ती | मिस्टर लैम्ब की दोस्ती से बदलाव |
| आत्मविश्वास | अपनी क्षमताओं पर ध्यान |
| समाज | विकलांगों के प्रति संवेदनशीलता |
"On the Face of It" सुसान हिल का एक मार्मिक नाटक है, जो विकलांगता, अकेलेपन और जीवन के प्रति दृष्टिकोण पर गहरा संदेश देता है। डेरिक और मिस्टर लैम्ब की मुलाकात के माध्यम से लेखिका दिखाती हैं कि विकलांगता जीवन का अंत नहीं है। मिस्टर लैम्ब अपने कृत्रिम पैर के बावजूद जीवन का आनंद लेते हैं और डेरिक को सिखाते हैं कि हमें अपनी क्षमताओं पर ध्यान देना चाहिए। कहानी हमें सिखाती है कि समाज को विकलांग लोगों के प्रति संवेदनशील होना चाहिए और उनकी आत्मा को देखना चाहिए, न कि केवल उनकी शक्ल को। यह मानवीय संवेदना और जीवन के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण की एक प्रेरणादायक कहानी है।