जनसंख्या भूगोल, मानव भूगोल की वह शाखा है जो जनसंख्या के स्थानिक वितरण, घनत्व, वृद्धि, संघटन, प्रवास एवं जनसंख्या गतिकी का अध्ययन करती है। विश्व जनसंख्या का अध्ययन यह समझने में सहायक है कि लोग पृथ्वी के विभिन्न भागों में किस प्रकार फैले हुए हैं और किस क्षेत्र में उनका घनत्व अधिक या कम है। वर्ष 2011 में विश्व की जनसंख्या लगभग 7 अरब तक पहुँच चुकी थी। जनसंख्या वितरण के अध्ययन से हमें यह पता चलता है कि विश्व के कुल क्षेत्रफल का केवल 30 प्रतिशत भूमि है, और इस भूमि पर जनसंख्या समान रूप से वितरित नहीं है। कुछ क्षेत्र जनसंख्या के विशाल समूहों का आवास हैं, जबकि कुछ क्षेत्र लगभग निर्जन हैं।
जनसंख्या का वितरण भौगोलिक कारकों और आर्थिक-सामाजिक-सांस्कृतिक कारकों दोनों द्वारा नियंत्रित होता है। भौगोलिक कारकों में जल की उपलब्धता, भू-आकृति (धरातल), जलवायु, मृदा और खनिज संसाधन शामिल हैं। जल उपलब्धता के अंतर्गत वर्षा और भूजल की पर्याप्तता जनसंख्या वितरण को प्रभावित करती है। मैदानी क्षेत्र कृषि एवं औद्योगिक विकास के लिए अनुकूल होने के कारण अधिक घने बसे हैं, जबकि पहाड़ी, मरुस्थलीय एवं दलदली क्षेत्र विरल जनसंख्या वाले हैं। जलवायु की दृष्टि से अत्यधिक गर्म, अत्यधिक ठंडे एवं अत्यधिक वर्षा वाले क्षेत्रों में जनसंख्या कम है। उपजाऊ मृदा वाले क्षेत्र कृषि के लिए अनुकूल होने से सघन बसे हैं।
आर्थिक, सामाजिक एवं सांस्कृतिक कारकों में खनिज संसाधनों की उपलब्धता, नगरीकरण, औद्योगीकरण, परिवहन, सामाजिक सुरक्षा, शिक्षा और जीवन स्तर शामिल हैं। खनिज क्षेत्रों (जैसे जोहानिसबर्ग, दक्षिण अफ्रीका) में जनसंख्या घनत्व अधिक है। औद्योगिक एवं वाणिज्यिक नगरों (जैसे मुंबई, कोलकाता, न्यूयॉर्क, टोक्यो) में बड़ी जनसंख्या निवास करती है। परिवहन सुविधाओं का विकास भी जनसंख्या को आकर्षित करता है।
विश्व की अधिकांश जनसंख्या चार प्रमुख प्रदेशों में केंद्रित है, जो निम्नलिखित हैं: 1. पूर्वी एशिया: चीन, जापान, कोरिया — विश्व का सर्वाधिक जनसंख्या वाला प्रदेश। यहाँ घाटियों एवं तटीय मैदानों में सघन बसाव है। 2. दक्षिण एशिया: भारत, पाकिस्तान, बांग्लादेश, श्रीलंका — उपजाऊ नदी घाटियों एवं मानसूनी जलवायु के कारण सघन जनसंख्या। 3. दक्षिण-पूर्व एशिया: जावा, सुमात्रा, बोर्नियो — इंडोनेशिया के जावा द्वीप में अत्यधिक जनसंख्या घनत्व। 4. यूरोप का उत्तर-पश्चिमी भाग: ब्रिटेन, नॉर्थ वेस्ट यूरोप — औद्योगिक क्रांति के कारण सघन बसाव।
इनके अतिरिक्त पूर्वी उत्तर अमेरिका (संयुक्त राज्य अमेरिका का अटलांटिक तट) भी घनी आबादी वाला प्रदेश है, जहाँ औद्योगिक विकास एवं नगरीकरण हुआ है।
विश्व के कुछ प्रदेश जनसंख्या की दृष्टि से अत्यंत विरल हैं: 1. सहारा मरुस्थल — विश्व का सबसे बड़ा मरुस्थल, जहाँ अत्यंत शुष्क जलवायु के कारण जनसंख्या लगभग नहीं है। 2. उत्तरी अमेरिका के वर्षणरहित शुष्क क्षेत्र — ग्रेट बेसिन, जहाँ वर्षा अत्यल्प है। 3. भूमध्यरेखीय वर्षा वन (अमेजन, कांगो बेसिन) — उच्च तापमान, सघन वन तथा प्रतिकूल रोगों के कारण जनसंख्या विरल है। 4. टुंड्रा एवं ध्रुवीय प्रदेश (ग्रीनलैंड, उत्तरी कनाडा, साइबेरिया) — अत्यधिक शीत के कारण विरल जनसंख्या। 5. उच्च पर्वतीय क्षेत्र — हिमालय, एंडीज, रॉकीज़ के ऊँचे भागों में कम जनसंख्या।
जनसंख्या घनत्व का अर्थ है प्रति इकाई क्षेत्रफल में निवास करने वाले लोगों की संख्या। इसे निम्न सूत्र से मापा जाता है: $$जनसंख्या\;घनत्व = \frac{कुल\;जनसंख्या}{कुल\;क्षेत्रफल}$$ जनसंख्या घनत्व तीन प्रकार का होता है — अंकगणितीय घनत्व (कुल जनसंख्या को कुल क्षेत्रफल से विभाजित करने पर), शारीरिक घनत्व (कुल जनसंख्या को कृषि योग्य भूमि से विभाजित करने पर) तथा कृषि घनत्व (कुल कृषक जनसंख्या को कृषि योग्य भूमि से विभाजित करने पर)। विश्व के सर्वाधिक घनत्व वाले देशों में मकाउ, सिंगापुर, हांगकांग, मोनाको शामिल हैं, जबकि विशाल मंगोलिया, नामीबिया, आस्ट्रेलिया, कनाडा विरल जनसंख्या वाले देश हैं। ग्रीनलैंड प्रति वर्ग किमी जनसंख्या घनत्व में सर्वाधिक कम है।
जनसंख्या वृद्धि से आशय किसी क्षेत्र में समय के साथ जनसंख्या में हुए परिवर्तन से है। जनसंख्या वृद्धि के तीन मुख्य घटक हैं — जन्म दर, मृत्यु दर और प्रवास। जन्म दर प्रति हजार जनसंख्या पर जन्मों की संख्या है, मृत्यु दर प्रति हजार जनसंख्या पर मृत्युओं की संख्या है। जन्म दर तथा मृत्यु दर का अंतर प्राकृतिक वृद्धि दर कहलाता है। इसके अतिरिक्त, अप्रवासन (इमिग्रेशन) और उत्प्रवासन (एमिग्रेशन) जनसंख्या में वृद्धि या कमी लाते हैं। जनसंख्या परिवर्तन को तीन प्रकार की विश्वव्यापी प्रवृत्तियों में देखा जाता है — उच्च वृद्धि वाले क्षेत्र (एशिया, अफ्रीका के विकासशील देश), मध्यम वृद्धि वाले क्षेत्र तथा निम्न या ऋणात्मक वृद्धि वाले क्षेत्र (यूरोप, जापान)।
जनसंख्या वृद्धि के मुख्य घटकों में जन्म दर, मृत्यु दर और प्रवास प्रमुख हैं। जन्म दर को प्रति 1000 जनसंख्या पर जीवित जन्मों की संख्या से मापा जाता है। मृत्यु दर प्रति 1000 जनसंख्या पर मृत्युओं की संख्या है। प्राकृतिक वृद्धि दर = जन्म दर − मृत्यु दर। जब अप्रवासन उत्प्रवासन से अधिक होता है तो जनसंख्या बढ़ती है और इसका विपरीत होने पर घटती है। आधुनिक युग में स्वास्थ्य सेवाओं के सुधार, शिक्षा, परिवार नियोजन और आर्थिक विकास ने जन्म एवं मृत्यु दर को प्रभावित किया है। विकसित देशों में जन्म एवं मृत्यु दर दोनों कम हैं, जबकि विकासशील देशों में जन्म दर अधिक और मृत्यु दर में कमी आ रही है।
प्राकृतिक वृद्धि केवल जन्म दर और मृत्यु दर के बीच के अंतर पर आधारित होती है, जबकि समग्र जनसंख्या वृद्धि में प्रवास (अप्रवासन − उत्प्रवासन) को भी सम्मिलित किया जाता है। इसीलिए किसी क्षेत्र की समग्र वृद्धि = प्राकृतिक वृद्धि + शुद्ध प्रवासन होती है। उदाहरण के लिए, संयुक्त राज्य अमेरिका, कनाडा, आस्ट्रेलिया जैसे देशों में प्राकृतिक वृद्धि निम्न है, किंतु प्रवास के कारण जनसंख्या बढ़ती है।
जनसंख्या विस्फोट से आशय जन्म दर और मृत्यु दर के बीच बड़े अंतर के कारण तीव्र गति से होने वाली जनसंख्या वृद्धि से है। जनांकिकीय संक्रमण सिद्धांत (Demographic Transition Theory) के अनुसार, जनसंख्या वृद्धि तीन अवस्थाओं से गुजरती है — प्रथम अवस्था में उच्च जन्म एवं उच्च मृत्यु दर (स्थिर जनसंख्या), द्वितीय अवस्था में उच्च जन्म दर एवं तीव्र गति से घटती मृत्यु दर (तेज वृद्धि), तथा तृतीय अवस्था में निम्न जन्म एवं निम्न मृत्यु दर (लगभग स्थिर जनसंख्या)। यह सिद्धांत जनसंख्या वृद्धि की गतिशीलता को समझने में सहायक है।
| कारक | उदाहरण/विवरण |
|---|---|
| जल उपलब्धता | वर्षा, नदियाँ, भूजल — सघन बसाव के कारण |
| भू-आकृति | मैदानी क्षेत्र घने, पर्वतीय विरल |
| जलवायु | शुष्क/अति शीत क्षेत्र विरल |
| मृदा | उपजाऊ मृदा सघन कृषि एवं बसाव |
| खनिज संसाधन | खनिज क्षेत्रों में घनत्व अधिक |
| औद्योगीकरण | औद्योगिक नगरों में जनसंख्या केंद्रित |
| प्रदेश | मुख्य देश | विशेषता |
|---|---|---|
| पूर्वी एशिया | चीन, जापान, कोरिया | सर्वाधिक जनसंख्या वाला प्रदेश |
| दक्षिण एशिया | भारत, पाकिस्तान, बांग्लादेश | उपजाऊ नदी घाटियाँ |
| दक्षिण-पूर्व एशिया | इंडोनेशिया, थाईलैंड | जावा द्वीप सघन बसा |
| यूरोप का उत्तर-पश्चिम | ब्रिटेन, जर्मनी, फ्रांस | औद्योगिक क्रांति का प्रदेश |
| प्रकार | सूत्र |
|---|---|
| अंकगणितीय घनत्व | कुल जनसंख्या / कुल क्षेत्रफल |
| शारीरिक घनत्व | कुल जनसंख्या / कृषि योग्य भूमि |
| कृषि घनत्व | कुल कृषक जनसंख्या / कृषि योग्य भूमि |
विश्व जनसंख्या का वितरण, घनत्व एवं वृद्धि भौगोलिक तथा आर्थिक-सामाजिक कारकों का परिणाम है। विश्व की जनसंख्या असमान रूप से वितरित है, जिसमें पूर्वी एशिया, दक्षिण एशिया और यूरोप के उत्तर-पश्चिमी प्रदेश सघन बसे हैं। जनसंख्या वृद्धि जन्म दर, मृत्यु दर एवं प्रवास द्वारा निर्धारित होती है। विकासशील देशों में जनसंख्या विस्फोट की समस्या है, जबकि विकसित देशों में जनसंख्या स्थिर या घटती जा रही है। जनसंख्या के इन अध्ययनों से हमें संसाधनों के संतुलन, नियोजन और सतत विकास की दिशा में कदम बढ़ाने में सहायता मिलती है।