जनसंख्या संघटन से आशय जनसंख्या की उन विशेषताओं से है जिनके द्वारा हम जनसंख्या को विभिन्न समूहों में वर्गीकृत कर सकते हैं, जैसे आयु, लिंग, व्यवसाय, शिक्षा, निवास स्थान (ग्रामीण-शहरी), जाति, धर्म तथा भाषा। जनसंख्या संघटन का अध्ययन जनसंख्या भूगोल की प्रमुख शाखा है। इसके अध्ययन से हमें जनसंख्या की गुणवत्ता, आर्थिक क्रियाएँ, सामाजिक ढाँचा तथा विकास की स्थिति का ज्ञान होता है। किसी क्षेत्र के विकास की दिशा तय करने में जनसंख्या संघटन का विश्लेषण महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। मुख्य रूप से जनसंख्या संघटन को आयु संघटन, लिंग संघटन, व्यावसायिक संघटन, शैक्षिक संघटन और ग्रामीण-शहरी संघटन के रूप में विभाजित करके अध्ययन किया जाता है।
जनसंख्या के आयु संघटन का अर्थ है विभिन्न आयु समूहों में जनसंख्या का वितरण। सामान्यतः आयु संघटन को तीन मुख्य आयु समूहों में बाँटा जाता है: - 0-14 वर्ष: बाल आयु समूह — आश्रित जनसंख्या। - 15-59 वर्ष: कार्यशील आयु समूह — देश की आर्थिक रीढ़। - 60 वर्ष और उससे अधिक: वृद्ध आयु समूह — आश्रित जनसंख्या।
आयु संघटन का अध्ययन आयु-लिंग पिरामिड (Age-Sex Pyramid) के माध्यम से किया जाता है। पिरामिड में आधार बाल आयु समूह, मध्य भाग कार्यशील आयु समूह तथा शिखर वृद्ध आयु समूह को दर्शाता है। विकासशील देशों (जैसे भारत) में पिरामिड का आधार चौड़ा और शिखर पतला होता है, क्योंकि जन्म दर अधिक होती है। विकसित देशों (जैसे जापान) में पिरामिड लगभग आयताकार या ऊपर की ओर चौड़ा होता है, क्योंकि जन्म दर कम है और वृद्ध जनसंख्या अधिक है। निर्भरता अनुपात का अर्थ है आश्रित जनसंख्या (0-14 तथा 60+) और कार्यशील जनसंख्या (15-59) का अनुपात, जो 40 प्रतिशत के आसपास सामान्य माना जाता है।
लिंग संघटन से आशय किसी क्षेत्र में पुरुषों और महिलाओं की संख्या के अनुपात से है। इसे लिंग अनुपात (Sex Ratio) के द्वारा मापा जाता है। लिंग अनुपात को प्रति 1000 पुरुषों पर स्त्रियों की संख्या के रूप में व्यक्त किया जाता है। विश्व में लिंग अनुपात को प्रभावित करने वाले कारकों में सामाजिक रीति-रिवाज, बाल विवाह, कन्या भ्रूण हत्या, युद्ध, प्रवास, रोजगार अवसर तथा स्वास्थ्य सुविधाएँ शामिल हैं। विश्व के कई देशों (जैसे कतर, संयुक्त अरब अमीरात, सऊदी अरब) में पुरुष अधिक हैं, क्योंकि वहाँ प्रवासी श्रमिक पुरुष अधिक आते हैं। कई यूरोपीय देशों में महिलाओं की संख्या पुरुषों से अधिक है क्योंकि पुरुषों की जीवन प्रत्याशा कम होती है। भारत में ऐतिहासिक रूप से लिंग अनुपात महिलाओं के प्रति प्रतिकूल रहा है। भारत की 2011 की जनगणना के अनुसार लिंग अनुपात 943 था।
व्यावसायिक संघटन जनसंख्या के विभिन्न आर्थिक क्रियाओं (व्यवसायों) में संलग्न होने का वितरण है। आर्थिक क्रियाओं को मुख्यतः तीन क्षेत्रों में बाँटा जाता है: - प्राथमिक क्षेत्र: कृषि, पशुपालन, वानिकी, मत्स्यन, खनन। - द्वितीयक क्षेत्र: निर्माण उद्योग (वस्तु निर्माण)। - तृतीयक क्षेत्र: सेवाएँ — व्यापार, परिवहन, संचार, बैंकिंग, शिक्षा, स्वास्थ्य।
किसी देश के आर्थिक विकास का अनुमान उसके व्यावसायिक संघटन से लगाया जाता है। विकासशील देशों में प्राथमिक क्षेत्र में कार्यरत जनसंख्या का प्रतिशत अधिक होता है, जबकि विकसित देशों में तृतीयक क्षेत्र में कार्यरत जनसंख्या अधिक होती है। भारत में प्राथमिक क्षेत्र (मुख्यतः कृषि) में कार्यरत जनसंख्या का प्रतिशत सर्वाधिक है, जबकि विकसित देशों जैसे अमेरिका, ब्रिटेन में तृतीयक क्षेत्र का योगदान सर्वाधिक है।
शैक्षिक संघटन से आशय जनसंख्या में साक्षर और निरक्षर लोगों का वितरण है। साक्षरता दर जनसंख्या की गुणवत्ता का मुख्य संकेतक है। साक्षरता दर किसी देश के आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृतिक विकास को दर्शाती है। उच्च साक्षरता दर वाले देशों में जीवन स्तर ऊँचा, मृत्यु दर कम तथा तकनीकी विकास अधिक होता है। विश्व में साक्षरता दर में सबसे आगे यूरोपीय देश एवं उत्तरी अमेरिका हैं। विकासशील देशों में विशेषकर महिला साक्षरता कम है। साक्षरता स्तर के आधार पर जनसंख्या को निम्न तथा उच्च शिक्षित श्रेणियों में वर्गीकृत किया जा सकता है।
जनसंख्या का ग्रामीण और शहरी संघटन निवास स्थान के आधार पर किया जाता है। विकासशील देशों में ग्रामीण जनसंख्या का प्रतिशत अधिक है, क्योंकि कृषि प्रधान अर्थव्यवस्था होती है। विकसित देशों में शहरी जनसंख्या का प्रतिशत अधिक है, क्योंकि वहाँ औद्योगीकरण और सेवा क्षेत्र का विकास अधिक है। शहरीकरण की दर किसी देश के विकास को दर्शाती है। विश्व में नगरीय जनसंख्या का प्रतिशत निरंतर बढ़ रहा है। 1950 में विश्व की केवल 29 प्रतिशत जनसंख्या नगरों में रहती थी, जो वर्तमान में 55 प्रतिशत से अधिक है।
जनसंख्या संघटन में जातीय संघटन (रंग, नस्ल, जनजाति के आधार पर), धार्मिक संघटन तथा भाषाई संघटन भी शामिल होते हैं। अफ्रीका में जातीय विविधता अत्यधिक है, जहाँ सैकड़ों जनजातियाँ निवास करती हैं। भाषाई संघटन किसी क्षेत्र की सांस्कृतिक पहचान का प्रतीक है। भारत जैसे बहुभाषी देश में हजारों बोलियाँ और कई प्रमुख भाषाएँ प्रचलित हैं। धार्मिक संघटन जनसंख्या के विभिन्न धार्मिक समूहों में विभाजन को दर्शाता है।
आयु-लिंग पिरामिड जनसंख्या संघटन का ग्राफीय निरूपण है, जिसमें बाईं ओर पुरुषों और दाईं ओर महिलाओं की संख्या/प्रतिशत को दर्शाया जाता है। इसकी आकृति से हम जन्म दर, मृत्यु दर और जनसंख्या वृद्धि की प्रवृत्तियों का पता लगाते हैं। चौड़े आधार वाला पिरामिड उच्च जन्म दर को दर्शाता है, जबकि संकीर्ण आधार वाला पिरामिड निम्न जन्म दर को दर्शाता है। पिरामिड के विश्लेषण से शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार एवं पेंशन जैसी नीतियों की योजना बनाने में सहायता मिलती है।
| आयु समूह | श्रेणी | भूमिका |
|---|---|---|
| 0-14 वर्ष | बाल आयु समूह | आश्रित जनसंख्या |
| 15-59 वर्ष | कार्यशील आयु समूह | आर्थिक गतिविधियों में संलग्न |
| 60 वर्ष और अधिक | वृद्ध आयु समूह | आश्रित जनसंख्या |
| क्षेत्र | क्रियाएँ | विकसित देशों में स्थिति |
|---|---|---|
| प्राथमिक | कृषि, पशुपालन, खनन, वानिकी, मत्स्यन | कम प्रतिशत कार्यशील जनसंख्या |
| द्वितीयक | निर्माण उद्योग | मध्यम प्रतिशत |
| तृतीयक | व्यापार, परिवहन, बैंकिंग, शिक्षा | सर्वाधिक प्रतिशत |
| आयाम | मापक |
|---|---|
| आयु संघटन | आयु-लिंग पिरामिड |
| लिंग संघटन | लिंग अनुपात (प्रति 1000 पुरुषों पर स्त्रियाँ) |
| व्यावसायिक संघटन | आर्थिक क्षेत्रों में वितरण |
| शैक्षिक संघटन | साक्षरता दर |
जनसंख्या संघटन जनसंख्या की गुणात्मक एवं संरचनात्मक विशेषताओं का अध्ययन है। आयु, लिंग, व्यवसाय, शिक्षा और ग्रामीण-शहरी निवास के आधार पर जनसंख्या का विश्लेषण किसी देश की सामाजिक-आर्थिक स्थिति को स्पष्ट करता है। आयु-लिंग पिरामिड जन्म दर तथा वृद्धि की प्रवृत्तियों को दर्शाता है, जबकि व्यावसायिक संघटन आर्थिक विकास की दशा बताता है। जनसंख्या संघटन का अध्ययन योजना निर्माण, संसाधन आवंटन और सतत विकास के लिए आधारभूत ज्ञान प्रदान करता है।