मानव विकास की अवधारणा विकास के पारंपरिक आर्थिक दृष्टिकोण से भिन्न है। परंपरागत रूप से विकास को केवल आर्थिक वृद्धि (राष्ट्रीय आय, प्रति व्यक्ति आय) से मापा जाता था, किंतु मानव विकास इससे आगे बढ़कर लोगों की क्षमताओं के विस्तार और उनकी पसंद के बढ़ने पर केंद्रित है। मानव विकास की अवधारणा को सबसे पहले डॉ. महबूब उल हक ने प्रतिपादित किया। उनके अनुसार, मानव विकास का मूल उद्देश्य मनुष्य के विकल्पों (choices) का विस्तार करना है। बाद में अर्थशास्त्री अमर्त्य सेन ने इस अवधारणा को 'क्षमता दृष्टिकोण' (Capability Approach) के रूप में आगे बढ़ाया। संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (UNDP) प्रत्येक वर्ष 'मानव विकास रिपोर्ट' (Human Development Report) जारी करता है, जिसमें विभिन्न देशों के मानव विकास सूचकांक (HDI) का प्रकाशन होता है।
मानव विकास जनसंख्या के कल्याण तथा जीवन की गुणवत्ता में सुधार लाने की प्रक्रिया है। यह आय, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे संकेतकों द्वारा मापा जाता है। मानव विकास में 'पसंद का विस्तार' (expansion of choices) सबसे महत्वपूर्ण है। लोगों की मूलभूत पसंदों में लंबी एवं स्वस्थ जीवन जीना, शिक्षा प्राप्त करना और सभ्य जीवन स्तर प्राप्त करना शामिल है। इसके अतिरिक्त राजनीतिक स्वतंत्रता, आर्थिक अवसर और सामाजिक सुविधाएँ भी पसंद के विस्तार में सहायक होती हैं।
मानव विकास के चार मुख्य स्तंभ हैं: 1. समता (Equity): सभी लोगों को संसाधनों और अवसरों तक समान पहुँच। यहाँ भेदभाव नहीं होना चाहिए। 2. स्थिरता (Sustainability): संसाधनों का उपयोग इस प्रकार किया जाए कि वे आने वाली पीढ़ियों के लिए भी बने रहें। इसका संबंध धारणीय विकास से है। 3. उत्पादकता (Productivity): लोगों की कार्य क्षमता और उत्पादन में वृद्धि, जिससे जीवन स्तर ऊँचा हो। 4. सशक्तिकरण (Empowerment): लोगों की अपने जीवन से संबंधित निर्णय लेने की शक्ति में वृद्धि।
मानव विकास के अध्ययन के प्रमुख दृष्टिकोण हैं: - आय दृष्टिकोण (Income Approach): इसमें मानव विकास का संबंध आय के स्तर से जोड़ा जाता है। अधिक आय का अर्थ अधिक पसंद। - कल्याण दृष्टिकोण (Welfare Approach): इसमें सरकार की भूमिका पर बल दिया जाता है। यहाँ सेवाओं और कल्याणकारी योजनाओं से लोगों का जीवन स्तर सुधारा जाता है। - क्षमता दृष्टिकोण (Capability Approach): अमर्त्य सेन का यह दृष्टिकोण लोगों की क्षमताओं को बढ़ाने पर केंद्रित है। इसके अनुसार विकास का अर्थ क्षमताओं का विस्तार है। - मूलभूत आवश्यकताएँ दृष्टिकोण (Basic Needs Approach): इसके अनुसार मानव विकास का उद्देश्य लोगों की मूलभूत आवश्यकताओं (भोजन, आवास, स्वास्थ्य, शिक्षा) की पूर्ति करना है।
मानव विकास सूचकांक (HDI) का निर्माण UNDP द्वारा 1990 में प्रारंभ किया गया। HDI तीन प्रमुख आयामों पर आधारित है: 1. दीर्घ एवं स्वस्थ जीवन: जीवन प्रत्याशा द्वारा मापा जाता है। 2. शिक्षा: वयस्क साक्षरता दर तथा स्कूलों में नामांकन दर (सकल नामांकन अनुपात) से मापी जाती है। 3. सभ्य जीवन स्तर: प्रति व्यक्ति आय (GDP per capita) से मापा जाता है।
HDI का मान 0 से 1 के बीच होता है। HDI जितना 1 के निकट होगा, मानव विकास उतना ही उच्च माना जाएगा। HDI के आधार पर देशों को उच्च, मध्यम और निम्न मानव विकास वाले वर्गों में बाँटा जाता है। विश्व के उच्च HDI वाले देशों में नॉर्वे, आस्ट्रेलिया, आयरलैंड, स्विट्जरलैंड आदि शामिल हैं, जबकि निम्न HDI वाले देशों में अधिकांश अफ्रीकी देश आते हैं। भारत 'मध्यम' मानव विकास वाले देशों की श्रेणी में आता है।
संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम द्वारा प्रतिवर्ष प्रकाशित होने वाली 'मानव विकास रिपोर्ट' विभिन्न देशों के मानव विकास के स्तर की तुलना प्रस्तुत करती है। यह रिपोर्ट न केवल आय, बल्कि स्वास्थ्य एवं शिक्षा के संकेतकों को भी शामिल करती है। इसके अतिरिक्त 'लैंगिक विकास सूचकांक' (Gender Development Index), 'लैंगिक सशक्तिकरण माप' (Gender Empowerment Measure) और 'बहुआयामी निर्धनता सूचकांक' (Multidimensional Poverty Index) जैसे अन्य सूचकांक भी प्रकाशित होते हैं। ये सूचकांक नीति निर्माण और विकास योजनाओं के मूल्यांकन में सहायक होते हैं।
मानव विकास की अवधारणा में लैंगिक समानता का विशेष महत्व है। लैंगिक विकास सूचकांक (GDI) पुरुषों एवं महिलाओं के मानव विकास के अंतर को दर्शाता है। विकासशील देशों में महिलाओं की शिक्षा, स्वास्थ्य और आय में लिंग-आधारित असमानता अधिक है। महिलाओं के सशक्तिकरण, शिक्षा एवं रोजगार में वृद्धि से मानव विकास को गति मिलती है। भारत में 'बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ' जैसी योजनाएँ लैंगिक समानता को बढ़ावा देती हैं।
मानव विकास के प्रमुख अवरोधों में निर्धनता, भुखमरी, कुपोषण, बेरोजगारी, निरक्षरता, स्वास्थ्य सुविधाओं का अभाव, लैंगिक भेदभाव, राजनीतिक अस्थिरता एवं प्राकृतिक आपदाएँ शामिल हैं। ये अवरोध विशेषकर विकासशील देशों में अधिक पाए जाते हैं। मानव विकास में सुधार हेतु इन अवरोधों को दूर करना आवश्यक है।
| स्तंभ | अर्थ |
|---|---|
| समता | संसाधनों तक समान पहुँच |
| स्थिरता | भावी पीढ़ियों हेतु संसाधनों का संरक्षण |
| उत्पादकता | लोगों की कार्य क्षमता में वृद्धि |
| सशक्तिकरण | निर्णय लेने की शक्ति |
| दृष्टिकोण | मुख्य विशेषता |
|---|---|
| आय दृष्टिकोण | आय स्तर से विकास मापना |
| कल्याण दृष्टिकोण | सरकारी कल्याणकारी योजनाओं पर बल |
| क्षमता दृष्टिकोण | अमर्त्य सेन — क्षमताओं का विस्तार |
| मूलभूत आवश्यकताएँ | भोजन, आवास, स्वास्थ्य, शिक्षा |
| आयाम | संकेतक |
|---|---|
| दीर्घ एवं स्वस्थ जीवन | जीवन प्रत्याशा |
| शिक्षा | साक्षरता दर + नामांकन दर |
| सभ्य जीवन स्तर | प्रति व्यक्ति आय |
मानव विकास की अवधारणा ने विकास की सोच को मौलिक रूप से बदल दिया है। अब विकास को केवल आर्थिक वृद्धि से नहीं, बल्कि लोगों की क्षमताओं, स्वास्थ्य, शिक्षा और जीवन की गुणवत्ता से मापा जाता है। समता, स्थिरता, उत्पादकता और सशक्तिकरण के सिद्धांतों पर आधारित यह दृष्टिकोण हर देश को मानव-केंद्रित विकास की ओर प्रेरित करता है। HDI जैसे सूचकांक इस दिशा में प्रगति की निगरानी में सहायक हैं। मानव विकास का अंतिम उद्देश्य हर व्यक्ति को सम्मानजनक, स्वस्थ एवं सुखी जीवन प्रदान करना है।