द्वितीयक क्रियाएँ वे आर्थिक क्रियाएँ हैं जिनमें कच्चे माल का प्रसंस्करण करके उपयोगी वस्तुओं का निर्माण किया जाता है। इनमें विनिर्माण उद्योग, निर्माण कार्य, विद्युत उत्पादन तथा बिजली-गैस-जल आपूर्ति जैसी क्रियाएँ शामिल हैं। द्वितीयक क्रियाएँ प्राथमिक क्रियाओं द्वारा प्राप्त कच्चे माल को संसाधित करके मूल्यवर्धित वस्तुएँ बनाती हैं। इन्हें 'कन्वर्शन' या 'विनिर्माण' की क्रियाएँ भी कहा जाता है। द्वितीयक क्षेत्र का विकास किसी देश के औद्योगिक विकास एवं आर्थिक समृद्धि का संकेतक होता है। विकसित देशों में द्वितीयक क्षेत्र का योगदान उल्लेखनीय है, जबकि विकासशील देशों में यह धीरे-धीरे विस्तारित हो रहा है।
विनिर्माण का शाब्दिक अर्थ है 'हाथ से बनाना' (manufacture शब्द लैटिन के 'manu' = हाथ और 'facture' = बनाना से बना है)। विनिर्माण वह प्रक्रिया है जिसमें कच्चे माल को विभिन्न यांत्रिक एवं रासायनिक प्रक्रियाओं से गुजारकर उच्च मूल्य वाली वस्तुओं में बदला जाता है। विनिर्माण उद्योग के स्थानीकरण को प्रभावित करने वाले कारक हैं — कच्चे माल की उपलब्धता, बाजार (उपभोक्ता), शक्ति/ऊर्जा (बिजली, कोयला), श्रम (कुशल एवं अकुशल), परिवहन, पूँजी, सरकारी नीतियाँ तथा भूमि। उद्योग आमतौर पर कच्चे माल या बाजार के निकट स्थापित होते हैं। एग्नेल वेबर ने 'औद्योगिक स्थानीकरण सिद्धांत' (Theory of Industrial Location) दिया, जिसमें उन्होंने बताया कि उद्योग ऐसे स्थान पर स्थापित होता है जहाँ परिवहन लागत न्यूनतम हो।
उद्योगों को विभिन्न आधारों पर वर्गीकृत किया जाता है: - कच्चे माल के आधार पर: कृषि आधारित उद्योग (चीनी, सूती वस्त्र), वन आधारित (लुगदी, फर्नीचर), खनिज आधारित (इस्पात, सीमेंट), पशु आधारित (चमड़ा, डेयरी)। - आकार के आधार पर: लघु, मध्यम और बृहद् उद्योग। बृहद् उद्योगों में बड़ी पूँजी एवं अधिक श्रम लगता है। - पूँजी निवेश के आधार पर: लघु उद्योग (घरेलू उद्योग, कुटीर उद्योग) और बड़े उद्योग। - स्वामित्व के आधार पर: सार्वजनिक (राज्य के स्वामित्व वाले), निजी (व्यक्तिगत स्वामित्व) और संयुक्त (साझेदारी) उद्योग।
उद्योगों के प्रमुख संकेन्द्रण क्षेत्र (औद्योगिक प्रदेश) निम्नलिखित हैं: 1. यूरोपीय मेगालोपोलिस: रूहर बेसिन (जर्मनी) — कोयला एवं इस्पात उद्योग का केंद्र; फ्रांस, बेल्जियम के औद्योगिक क्षेत्र। 2. उत्तर-पूर्वी संयुक्त राज्य अमेरिका: ग्रेट लेक्स क्षेत्र (डेट्रॉइट, शिकागो, पिट्सबर्ग) — मोटर वाहन, इस्पात उद्योग। 3. जापान के औद्योगिक क्षेत्र: टोक्यो, योकोहामा, ओसाका — इलेक्ट्रॉनिक्स, मोटर वाहन उद्योग। 4. भारत के औद्योगिक प्रदेश: हुगली क्षेत्र (कोलकाता) — सूती वस्त्र, पटसन; दक्षिण-पूर्व रेलवे क्षेत्र (तमिलनाडु); मुंबई-पुणे क्षेत्र — सूती वस्त्र। 5. चीन का पूर्वी तटीय क्षेत्र: शंघाई, शेनझेन — विनिर्माण हब।
लौह-इस्पात उद्योग (Iron and Steel Industry): इसे 'बुनियादी उद्योग' कहा जाता है क्योंकि यह अन्य सभी उद्योगों के लिए कच्चा माल प्रदान करता है। चीन, जापान, अमेरिका, भारत प्रमुख इस्पात उत्पादक देश हैं। सूती वस्त्र उद्योग: विश्व का सबसे प्राचीन उद्योग; भारत, चीन, अमेरिका, जापान प्रमुख उत्पादक। रसायन उद्योग: रबड़, प्लास्टिक, उर्वरक, दवाएँ — विकसित देशों में संकेंद्रित। खाद्य प्रसंस्करण उद्योग: कृषि उत्पादों का प्रसंस्करण — विश्व में तेजी से बढ़ता उद्योग। ऑटोमोबाइल उद्योग: जापान, जर्मनी, अमेरिका, दक्षिण कोरिया प्रमुख। सूचना प्रौद्योगिकी एवं इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योग: आधुनिक विकास का प्रतीक।
कुटीर एवं लघु उद्योग वे हैं जिनमें कम पूँजी, पारिवारिक श्रम और सरल तकनीक का उपयोग होता है। ये उद्योग ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार प्रदान करते हैं तथा ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करते हैं। भारत में हथकरघा, हस्तशिल्प, खादी, बीड़ी, अगरबत्ती जैसे उद्योग ग्रामीण विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। द्वितीयक क्रियाओं में निर्माण उद्योग (भवन, सड़क, बाँध) भी शामिल है, जो बुनियादी ढाँचे का विकास करता है।
द्वितीयक क्षेत्र का महत्वपूर्ण अंग विद्युत उत्पादन है, जो उद्योगों का 'जीवन रक्त' है। विद्युत उत्पादन के स्रोत — तापीय (कोयला, पेट्रोलियम, गैस), जल विद्युत (नदियों के प्रपात), नाभिकीय (यूरेनियम), पवन ऊर्जा, सौर ऊर्जा तथा भू-तापीय ऊर्जा। विकसित देशों में ऊर्जा खपत अधिक है। जापान, अमेरिका, चीन प्रमुख ऊर्जा उपभोक्ता हैं।
| आधार | प्रकार |
|---|---|
| कच्चा माल | कृषि, वन, खनिज, पशु आधारित |
| आकार | लघु, मध्यम, बृहद् |
| स्वामित्व | सार्वजनिक, निजी, संयुक्त |
| पूँजी निवेश | कुटीर, लघु, मध्यम, बृहद् |
| क्षेत्र | मुख्य उद्योग |
|---|---|
| रूहर बेसिन (जर्मनी) | कोयला, इस्पात |
| ग्रेट लेक्स (अमेरिका) | मोटर वाहन, इस्पात |
| हुगली क्षेत्र (कोलकाता) | पटसन, सूती वस्त्र |
| टोक्यो-योकोहामा (जापान) | इलेक्ट्रॉनिक्स, वाहन |
| स्रोत | उदाहरण |
|---|---|
| तापीय | कोयला, गैस, पेट्रोलियम |
| जल विद्युत | नदी प्रपात |
| नाभिकीय | यूरेनियम |
| नवीकरणीय | पवन, सौर, भू-तापीय |
द्वितीयक क्रियाएँ कच्चे माल के प्रसंस्करण द्वारा मूल्यवर्धन की प्रक्रिया हैं, जो आर्थिक विकास की रीढ़ होती हैं। विनिर्माण उद्योग, निर्माण कार्य और विद्युत उत्पादन द्वितीयक क्षेत्र के मुख्य अंग हैं। औद्योगिक स्थानीकरण कच्चे माल, बाजार, श्रम, ऊर्जा, परिवहन और पूँजी जैसे कारकों से निर्धारित होता है। लौह-इस्पात, सूती वस्त्र, रसायन, खाद्य प्रसंस्करण तथा सूचना प्रौद्योगिकी जैसे उद्योग विश्व की अर्थव्यवस्थाओं को आकार देते हैं। किसी देश के औद्योगिक विकास का स्तर उसकी समृद्धि एवं विकास का सूचक होता है।