भारत विश्व का दूसरा सबसे अधिक जनसंख्या वाला देश है। भारत की जनसंख्या का अध्ययन उसके वितरण, घनत्व, वृद्धि और संघटन के आधार पर किया जाता है। 2011 की जनगणना के अनुसार भारत की जनसंख्या 121.08 करोड़ थी। विश्व की कुल जनसंख्या में भारत की हिस्सेदारी लगभग 17.5 प्रतिशत है, जबकि विश्व के क्षेत्रफल में भारत का योगदान केवल 2.4 प्रतिशत है। इस प्रकार भारत की जनसंख्या उसके क्षेत्रफल के अनुपात में काफी अधिक है। भारतीय जनगणना (Census) प्रत्येक दशक में की जाती है और यह जनसंख्या अध्ययन का प्रमुख स्रोत है।
भारत की जनसंख्या असमान रूप से वितरित है। कुछ राज्य (जैसे उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, बिहार, पश्चिम बंगाल) अधिक जनसंख्या वाले हैं, जबकि कुछ राज्य (जैसे सिक्किम, अरुणाचल प्रदेश, लक्षद्वीप) कम जनसंख्या वाले हैं। उत्तर प्रदेश भारत का सबसे अधिक जनसंख्या वाला राज्य है। जनसंख्या वितरण को प्रभावित करने वाले कारक हैं — भू-आकृति, जलवायु, मृदा, जल उपलब्धता, कृषि, औद्योगीकरण, नगरीकरण और परिवहन। उत्तरी मैदान, तटीय क्षेत्र और डेल्टा क्षेत्र घने बसे हैं, जबकि हिमालय, राजस्थान का मरुस्थल और मध्य भारत के पठारी क्षेत्र विरल हैं।
जनसंख्या घनत्व = कुल जनसंख्या / कुल क्षेत्रफल। 2011 की जनगणना के अनुसार भारत का औसत जनसंख्या घनत्व 382 व्यक्ति प्रति वर्ग किमी था। क्षेत्रीय रूप से घनत्व में बड़ा अंतर है: - सर्वाधिक घनत्व: बिहार (1106 व्यक्ति/वर्ग किमी), पश्चिम बंगाल (1028), केरल (860), दिल्ली (11,320 — संघ शासित प्रदेश)। - न्यूनतम घनत्व: अरुणाचल प्रदेश (17), मिजोरम, सिक्किम, लद्दाख। - गंगा का मैदान एवं तटीय क्षेत्र सघन बसे हैं, जबकि हिमालय एवं मरुस्थलीय क्षेत्र विरल हैं।
जनसंख्या वृद्धि से तात्पर्य समय के साथ जनसंख्या में होने वाले परिवर्तन से है। भारत में जनसंख्या वृद्धि के चार चरण रहे हैं: 1. 1901-1921: स्थिर जनसंख्या — उच्च जन्म एवं उच्च मृत्यु दर, स्वास्थ्य सुविधाओं का अभाव, महामारियाँ। इसे 'स्थिर जनसंख्या का दशक' कहा जाता है। 2. 1921-1951: मध्यम वृद्धि — मृत्यु दर में कमी। 3. 1951-1981: तीव्र वृद्धि — 'जनसंख्या विस्फोट' का दौर, चिकित्सा सुविधाओं से मृत्यु दर में तेज कमी। 4. 1981-2011: घटती वृद्धि दर किंतु अधिक वृद्धि — परिवार नियोजन, शिक्षा के कारण जन्म दर में कमी।
वर्ष 1921 को भारत में 'महान विभाजक वर्ष' (Great Divide Year) कहा जाता है, क्योंकि इसी वर्ष से जनसंख्या में निरंतर वृद्धि प्रारंभ हुई। 2011 की जनगणना के अनुसार दशकीय वृद्धि दर 17.64 प्रतिशत थी।
जनसंख्या वृद्धि के मुख्य घटक — जन्म दर, मृत्यु दर और प्रवास। भारत में वार्षिक जन्म दर घट रही है, किंतु अभी भी यह प्रतिस्थापन स्तर से अधिक है। मृत्यु दर में चिकित्सा सुविधाओं के कारण कमी आई है। प्रवास भी जनसंख्या वृद्धि को प्रभावित करता है। 2011 में भारत की वार्षिक जन्म दर 21.8 प्रति हजार थी।
भारत की जनसंख्या के संघटन का अध्ययन निम्न आधारों पर किया जाता है: - लिंग संघटन: 2011 की जनगणना में लिंग अनुपात 943 था। केरल में लिंग अनुपात सर्वाधिक (1084) है, जबकि दमन एवं दीव में सबसे कम (618)। हरियाणा में लिंग अनुपात कम (879) है। - आयु संघटन: भारत में कार्यशील जनसंख्या (15-59 वर्ष) का अनुपात बढ़ रहा है, जिसे 'जनसांख्यिकीय लाभांश' (Demographic Dividend) कहते हैं। बाल जनसंख्या (0-14) घट रही है। - ग्रामीण-शहरी संघटन: 2011 में भारत की 68.8 प्रतिशत जनसंख्या ग्रामीण क्षेत्रों में निवास करती है। - साक्षरता: 2011 में भारत की साक्षरता दर 73 प्रतिशत थी। पुरुष साक्षरता 80.9 प्रतिशत तथा महिला साक्षरता 64.6 प्रतिशत थी। केरल की साक्षरता दर सर्वाधिक (94 प्रतिशत) है। - व्यावसायिक संघटन: भारत में सर्वाधिक कार्यशील जनसंख्या प्राथमिक क्षेत्र (कृषि) में संलग्न है, हालाँकि इसका प्रतिशत घट रहा है।
भारतीय जनगणना 1872 से प्रारंभ हुई और 1881 से प्रत्येक दशक में नियमित रूप से की जाती रही है। 2011 की जनगणना भारत की 15वीं जनगणना थी। जनगणना से प्राप्त आँकड़े योजना निर्माण, नीति निर्धारण, संसाधन आवंटन और निर्वाचन क्षेत्रों के परिसीमन में सहायक होते हैं।
| चरण | अवधि | विशेषता |
|---|---|---|
| प्रथम | 1901-1921 | स्थिर जनसंख्या |
| द्वितीय | 1921-1951 | मध्यम वृद्धि |
| तृतीय | 1951-1981 | तीव्र वृद्धि (विस्फोट) |
| चतुर्थ | 1981-2011 | घटती दर, अधिक वृद्धि |
| राज्य | घनत्व (व्यक्ति/वर्ग किमी) |
|---|---|
| बिहार | 1106 |
| पश्चिम बंगाल | 1028 |
| केरल | 860 |
| अरुणाचल प्रदेश | 17 |
| संकेतक | मान |
|---|---|
| लिंग अनुपात | 943 |
| साक्षरता दर | 73% |
| ग्रामीण जनसंख्या | 68.8% |
| दशकीय वृद्धि दर | 17.64% |
भारत विश्व की सबसे बड़ी जनसंख्या वाला देश बन चुका है। भारत की जनसंख्या का वितरण असमान है — उत्तरी मैदान एवं तटीय क्षेत्र सघन बसे हैं, जबकि हिमालय एवं मरुस्थल विरल हैं। जनसंख्या वृद्धि 1921 के 'महान विभाजक वर्ष' से तीव्र हुई, जो 1951-81 में विस्फोट तक पहुँची, किंतु अब घटती जा रही है। लिंग अनुपात, साक्षरता एवं व्यावसायिक संघटन में सुधार हो रहा है। बढ़ती कार्यशील जनसंख्या 'जनसांख्यिकीय लाभांश' का अवसर प्रस्तुत करती है। जनसंख्या के इस व्यवस्थित अध्ययन से सतत विकास एवं नीति निर्माण में सहायता मिलती है।