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1. परिचय

भारत विश्व का दूसरा सबसे अधिक जनसंख्या वाला देश है। भारत की जनसंख्या का अध्ययन उसके वितरण, घनत्व, वृद्धि और संघटन के आधार पर किया जाता है। 2011 की जनगणना के अनुसार भारत की जनसंख्या 121.08 करोड़ थी। विश्व की कुल जनसंख्या में भारत की हिस्सेदारी लगभग 17.5 प्रतिशत है, जबकि विश्व के क्षेत्रफल में भारत का योगदान केवल 2.4 प्रतिशत है। इस प्रकार भारत की जनसंख्या उसके क्षेत्रफल के अनुपात में काफी अधिक है। भारतीय जनगणना (Census) प्रत्येक दशक में की जाती है और यह जनसंख्या अध्ययन का प्रमुख स्रोत है।

2. जनसंख्या का वितरण

भारत की जनसंख्या असमान रूप से वितरित है। कुछ राज्य (जैसे उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, बिहार, पश्चिम बंगाल) अधिक जनसंख्या वाले हैं, जबकि कुछ राज्य (जैसे सिक्किम, अरुणाचल प्रदेश, लक्षद्वीप) कम जनसंख्या वाले हैं। उत्तर प्रदेश भारत का सबसे अधिक जनसंख्या वाला राज्य है। जनसंख्या वितरण को प्रभावित करने वाले कारक हैं — भू-आकृति, जलवायु, मृदा, जल उपलब्धता, कृषि, औद्योगीकरण, नगरीकरण और परिवहन। उत्तरी मैदान, तटीय क्षेत्र और डेल्टा क्षेत्र घने बसे हैं, जबकि हिमालय, राजस्थान का मरुस्थल और मध्य भारत के पठारी क्षेत्र विरल हैं।

3. जनसंख्या घनत्व

जनसंख्या घनत्व = कुल जनसंख्या / कुल क्षेत्रफल। 2011 की जनगणना के अनुसार भारत का औसत जनसंख्या घनत्व 382 व्यक्ति प्रति वर्ग किमी था। क्षेत्रीय रूप से घनत्व में बड़ा अंतर है: - सर्वाधिक घनत्व: बिहार (1106 व्यक्ति/वर्ग किमी), पश्चिम बंगाल (1028), केरल (860), दिल्ली (11,320 — संघ शासित प्रदेश)। - न्यूनतम घनत्व: अरुणाचल प्रदेश (17), मिजोरम, सिक्किम, लद्दाख। - गंगा का मैदान एवं तटीय क्षेत्र सघन बसे हैं, जबकि हिमालय एवं मरुस्थलीय क्षेत्र विरल हैं।

4. जनसंख्या वृद्धि

जनसंख्या वृद्धि से तात्पर्य समय के साथ जनसंख्या में होने वाले परिवर्तन से है। भारत में जनसंख्या वृद्धि के चार चरण रहे हैं: 1. 1901-1921: स्थिर जनसंख्या — उच्च जन्म एवं उच्च मृत्यु दर, स्वास्थ्य सुविधाओं का अभाव, महामारियाँ। इसे 'स्थिर जनसंख्या का दशक' कहा जाता है। 2. 1921-1951: मध्यम वृद्धि — मृत्यु दर में कमी। 3. 1951-1981: तीव्र वृद्धि — 'जनसंख्या विस्फोट' का दौर, चिकित्सा सुविधाओं से मृत्यु दर में तेज कमी। 4. 1981-2011: घटती वृद्धि दर किंतु अधिक वृद्धि — परिवार नियोजन, शिक्षा के कारण जन्म दर में कमी।

वर्ष 1921 को भारत में 'महान विभाजक वर्ष' (Great Divide Year) कहा जाता है, क्योंकि इसी वर्ष से जनसंख्या में निरंतर वृद्धि प्रारंभ हुई। 2011 की जनगणना के अनुसार दशकीय वृद्धि दर 17.64 प्रतिशत थी।

5. जनसंख्या वृद्धि के घटक

जनसंख्या वृद्धि के मुख्य घटक — जन्म दर, मृत्यु दर और प्रवास। भारत में वार्षिक जन्म दर घट रही है, किंतु अभी भी यह प्रतिस्थापन स्तर से अधिक है। मृत्यु दर में चिकित्सा सुविधाओं के कारण कमी आई है। प्रवास भी जनसंख्या वृद्धि को प्रभावित करता है। 2011 में भारत की वार्षिक जन्म दर 21.8 प्रति हजार थी।

6. जनसंख्या संघटन

भारत की जनसंख्या के संघटन का अध्ययन निम्न आधारों पर किया जाता है: - लिंग संघटन: 2011 की जनगणना में लिंग अनुपात 943 था। केरल में लिंग अनुपात सर्वाधिक (1084) है, जबकि दमन एवं दीव में सबसे कम (618)। हरियाणा में लिंग अनुपात कम (879) है। - आयु संघटन: भारत में कार्यशील जनसंख्या (15-59 वर्ष) का अनुपात बढ़ रहा है, जिसे 'जनसांख्यिकीय लाभांश' (Demographic Dividend) कहते हैं। बाल जनसंख्या (0-14) घट रही है। - ग्रामीण-शहरी संघटन: 2011 में भारत की 68.8 प्रतिशत जनसंख्या ग्रामीण क्षेत्रों में निवास करती है। - साक्षरता: 2011 में भारत की साक्षरता दर 73 प्रतिशत थी। पुरुष साक्षरता 80.9 प्रतिशत तथा महिला साक्षरता 64.6 प्रतिशत थी। केरल की साक्षरता दर सर्वाधिक (94 प्रतिशत) है। - व्यावसायिक संघटन: भारत में सर्वाधिक कार्यशील जनसंख्या प्राथमिक क्षेत्र (कृषि) में संलग्न है, हालाँकि इसका प्रतिशत घट रहा है।

7. जनगणना का महत्व

भारतीय जनगणना 1872 से प्रारंभ हुई और 1881 से प्रत्येक दशक में नियमित रूप से की जाती रही है। 2011 की जनगणना भारत की 15वीं जनगणना थी। जनगणना से प्राप्त आँकड़े योजना निर्माण, नीति निर्धारण, संसाधन आवंटन और निर्वाचन क्षेत्रों के परिसीमन में सहायक होते हैं।

त्वरित पुनरावृत्ति तालिकाएँ

तालिका 1: भारत की जनसंख्या वृद्धि के चरण

चरण अवधि विशेषता
प्रथम 1901-1921 स्थिर जनसंख्या
द्वितीय 1921-1951 मध्यम वृद्धि
तृतीय 1951-1981 तीव्र वृद्धि (विस्फोट)
चतुर्थ 1981-2011 घटती दर, अधिक वृद्धि

तालिका 2: उच्च एवं निम्न जनसंख्या घनत्व वाले राज्य

राज्य घनत्व (व्यक्ति/वर्ग किमी)
बिहार 1106
पश्चिम बंगाल 1028
केरल 860
अरुणाचल प्रदेश 17

तालिका 3: भारत का जनसंख्या संघटन (2011)

संकेतक मान
लिंग अनुपात 943
साक्षरता दर 73%
ग्रामीण जनसंख्या 68.8%
दशकीय वृद्धि दर 17.64%

माइंड मैप

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महत्वपूर्ण आरेख (SVG)

आरेख 1: जनसंख्या वृद्धि के चार चरण

भारत में जनसंख्या वृद्धि के चरण 1901-1921 स्थिर जनसंख्या 1921-1951 मध्यम वृद्धि 1951-1981 जनसंख्या विस्फोट 1981-2011 घटती दर 1921 = महान विभाजक वर्ष वृद्धि दर (बढ़ती) → Golden Rule: 1921 से पहले स्थिर, 1951-81 में जनसंख्या विस्फोट, उसके बाद घटती वृद्धि।

आरेख 2: भारत का जनसंख्या संघटन (2011)

भारत का जनसंख्या संघटन (2011) लिंग अनुपात 943 केरल सर्वाधिक (1084) साक्षरता दर 73% पुरुष 80.9%, महिला 64.6% ग्रामीण जनसंख्या 68.8% नगरीय 31.2% औसत घनत्व 382/वर्ग किमी बिहार 1106, अरुणाचल 17 जनसांख्यिकीय लाभांश बढ़ती कार्यशील जनसंख्या (15-59 वर्ष) आर्थिक विकास का अवसर स्वर्ण नियम: भारत विश्व क्षेत्रफल का 2.4% पर विश्व जनसंख्या का लगभग 17.5% निवास करता है।

सामान्य गलतियाँ

  1. औसत घनत्व का आँकड़ा: 2011 में भारत का जनसंख्या घनत्व 382 व्यक्ति/वर्ग किमी था; इसे अन्य वर्षों के आँकड़ों से न मिलाएँ।
  2. 1921 का महत्व: 1921 को 'महान विभाजक वर्ष' कहा जाता है, क्योंकि इससे पहले जनसंख्या स्थिर थी; इसे 1951 से न जोड़ें।
  3. लिंग अनुपात का अर्थ: लिंग अनुपात 943 का अर्थ है प्रति 1000 पुरुषों पर 943 स्त्रियाँ; इसे उल्टा समझना गलत है।
  4. सर्वाधिक घनत्व वाला राज्य: बिहार सर्वाधिक जनसंख्या घनत्व वाला राज्य है, जबकि उत्तर प्रदेश सर्वाधिक कुल जनसंख्या वाला राज्य है — दोनों में भेद करें।
  5. जनसंख्या विस्फोट का दौर: जनसंख्या विस्फोट 1951-1981 का दौर है; इसे 1981 के बाद का बताना गलत है।
  6. जनगणना का आरंभ: भारत में जनगणना 1872 से प्रारंभ हुई और 1881 से दशकवार नियमित हुई; 2011 की जनगणना 15वीं थी।

परीक्षा युक्तियाँ

  1. भारत की जनसंख्या के प्रमुख आँकड़े (121.08 करोड़, घनत्व 382, लिंग अनुपात 943, साक्षरता 73%) याद रखें।
  2. जनसंख्या वृद्धि के चार चरणों को अवधि एवं विशेषता के साथ तालिका बनाकर पढ़ें।
  3. उच्च एवं निम्न घनत्व वाले राज्यों के नाम और आँकड़े याद रखें।
  4. 'महान विभाजक वर्ष' (1921) और जनसंख्या विस्फोट (1951-81) पर विशेष ध्यान दें।
  5. जनसंख्या संघटन के सभी आयाम (लिंग, आयु, साक्षरता, व्यवसाय, ग्रामीण-शहरी) का वर्णन करने का अभ्यास करें।

निष्कर्ष

भारत विश्व की सबसे बड़ी जनसंख्या वाला देश बन चुका है। भारत की जनसंख्या का वितरण असमान है — उत्तरी मैदान एवं तटीय क्षेत्र सघन बसे हैं, जबकि हिमालय एवं मरुस्थल विरल हैं। जनसंख्या वृद्धि 1921 के 'महान विभाजक वर्ष' से तीव्र हुई, जो 1951-81 में विस्फोट तक पहुँची, किंतु अब घटती जा रही है। लिंग अनुपात, साक्षरता एवं व्यावसायिक संघटन में सुधार हो रहा है। बढ़ती कार्यशील जनसंख्या 'जनसांख्यिकीय लाभांश' का अवसर प्रस्तुत करती है। जनसंख्या के इस व्यवस्थित अध्ययन से सतत विकास एवं नीति निर्माण में सहायता मिलती है।