प्रवास से तात्पर्य लोगों का एक स्थान से दूसरे स्थान पर अपना निवास बदलकर जाना है। प्रवास जनसंख्या परिवर्तन का तीसरा महत्वपूर्ण घटक है (जन्म दर एवं मृत्यु दर के बाद)। प्रवास न केवल जनसंख्या के आकार को प्रभावित करता है, बल्कि सामाजिक, आर्थिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक संरचनाओं को भी बदलता है। भारत में प्रवास का अध्ययन जनगणना एवं राष्ट्रीय नमूना सर्वेक्षण (NSSO) के आँकड़ों के आधार पर किया जाता है। प्रवासी वह व्यक्ति है जो अपना निवास स्थान बदलता है। भारत में प्रवास मुख्यतः ग्रामीण क्षेत्रों से नगरीय क्षेत्रों की ओर होता है।
प्रवास को निम्न प्रकारों में विभाजित किया जाता है: - आंतरिक प्रवास (Internal Migration): देश के भीतर राज्य से राज्य या जिले से जिले में प्रवास। - अंतर्राष्ट्रीय प्रवास (International Migration): एक देश से दूसरे देश में प्रवास। - अप्रवासन (Immigration): किसी देश में बाहर से आकर बसना। - उत्प्रवासन (Emigration): किसी देश से बाहर जाकर दूसरे देश में बसना। - ग्रामीण-नगरीय प्रवास: गाँव से नगर की ओर प्रवास। - स्थायी प्रवास एवं अस्थायी/मौसमी प्रवास।
प्रवास के कारण — धक्का कारक (Push Factors) और खिंचाव कारक (Pull Factors)।
प्रवास के मुख्य कारणों को दो श्रेणियों में बाँटा गया है: - धक्का कारक (Push Factors): ये वे कारक हैं जो लोगों को अपने मूल स्थान से जाने के लिए विवश करते हैं। इनमें बेरोजगारी, कम मजदूरी, कृषि में असफलता, प्राकृतिक आपदाएँ (बाढ़, सूखा), जातिगत-सामाजिक भेदभाव, राजनीतिक अस्थिरता, संघर्ष एवं युद्ध शामिल हैं। - खिंचाव कारक (Pull Factors): ये वे कारक हैं जो लोगों को नए स्थान की ओर आकर्षित करते हैं। इनमें रोजगार के बेहतर अवसर, अधिक मजदूरी, बेहतर शिक्षा एवं स्वास्थ्य सुविधाएँ, अच्छा जीवन स्तर, बेहतर सामाजिक सुरक्षा एवं सुरक्षित वातावरण शामिल हैं।
अधिकांश प्रवासी आर्थिक कारणों (रोजगार) से प्रवास करते हैं। भारत में सर्वाधिक प्रवास विवाह के कारण होता है (विशेषकर महिलाओं का)।
भारतीय जनगणना के अनुसार, प्रवासी वह व्यक्ति है जो पिछली जनगणना के स्थान से भिन्न स्थान पर निवास कर रहा है। 2011 की जनगणना के अनुसार भारत में कुल प्रवासियों की संख्या लगभग 45.36 करोड़ थी। इनमें महिला प्रवासियों की संख्या पुरुषों से अधिक है। भारत में प्रवास के प्रमुख कारण — विवाह (लगभग 45%), कार्य/रोजगार, शिक्षा, परिवार के साथ जाना। ग्रामीण-नगरीय प्रवास का मुख्य कारण रोजगार की तलाश है। राज्यों के बीच प्रवास मुख्यतः उत्तर प्रदेश, बिहार से महाराष्ट्र, दिल्ली, गुजरात की ओर होता है।
प्रवास के सकारात्मक एवं नकारात्मक दोनों प्रकार के परिणाम होते हैं: सकारात्मक परिणाम: - रोजगार एवं जीवन स्तर में सुधार। - प्रवासी श्रम से औद्योगिक एवं नगरीय विकास को गति। - प्रेषण (Remittance) द्वारा घरेलू अर्थव्यवस्था को सहारा। - सांस्कृतिक आदान-प्रदान एवं सामाजिक समरसता।
नकारात्मक परिणाम: - ग्रामीण क्षेत्रों में कुशल श्रम की कमी। - नगरों में जनसंख्या का बोझ, बेरोजगारी, मलिन बस्तियाँ, आवास की समस्या। - परिवार विघटन एवं सामाजिक समस्याएँ। - अंतर्राष्ट्रीय प्रवास में मस्तिष्क अपवाह (Brain Drain) की समस्या।
प्रवासी अपनी आय का एक भाग अपने परिवारों को भेजते हैं, जिसे प्रेषण कहा जाता है। प्रेषण विकासशील देशों की अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण आय स्रोत है। भारत विश्व में प्रेषण प्राप्त करने वाला सबसे बड़ा देश है। खाड़ी देशों (सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात, कुवैत) में कार्यरत भारतीय प्रवासी बड़ी मात्रा में प्रेषण भारत भेजते हैं, जो विदेशी मुद्रा भंडार को मजबूत करता है।
अंतर्राष्ट्रीय प्रवास का नकारात्मक पक्ष 'मस्तिष्क अपवाह' है, जिसमें किसी देश के उच्च शिक्षित, प्रशिक्षित एवं कुशल व्यक्ति बेहतर अवसरों की तलाश में दूसरे देशों में जा बसते हैं। इससे मूल देश को कुशल जनशक्ति की हानि होती है। विकासशील देशों से विकसित देशों (अमेरिका, ब्रिटेन, कनाडा) की ओर कुशल पेशेवरों का प्रवास आम है।
| प्रकार | विवरण |
|---|---|
| आंतरिक प्रवास | देश के भीतर |
| अंतर्राष्ट्रीय प्रवास | एक देश से दूसरे देश |
| अप्रवासन | बाहर से आना |
| उत्प्रवासन | बाहर जाना |
| धक्का कारक | खिंचाव कारक |
|---|---|
| बेरोजगारी | रोजगार के अवसर |
| प्राकृतिक आपदाएँ | बेहतर शिक्षा-स्वास्थ्य |
| राजनीतिक अस्थिरता | अच्छा जीवन स्तर |
| कम मजदूरी | अधिक मजदूरी |
| सकारात्मक | नकारात्मक |
|---|---|
| जीवन स्तर सुधार | कुशल श्रम की कमी |
| प्रेषण से अर्थव्यवस्था | मलिन बस्तियाँ |
| नगरीय विकास | परिवार विघटन |
प्रवास मानव जीवन का अभिन्न अंग है, जो जनसंख्या परिवर्तन का महत्वपूर्ण घटक है। धक्का एवं खिंचाव कारक लोगों को प्रवास के लिए प्रेरित करते हैं। भारत में प्रवास मुख्यतः विवाह एवं रोजगार के कारण होता है, और यह ग्रामीण से नगरीय क्षेत्रों की ओर बढ़ रहा है। प्रवास के सकारात्मक पक्ष (जीवन स्तर सुधार, प्रेषण, नगरीय विकास) के साथ-साथ नकारात्मक पक्ष (शहरी बोझ, मलिन बस्तियाँ, मस्तिष्क अपवाह) भी हैं। संतुलित एवं नियोजित प्रवास प्रबंधन से प्रवास को देश के विकास का साधन बनाया जा सकता है।