भारत का मानव विकास देश की जनसंख्या की गुणवत्ता, स्वास्थ्य, शिक्षा एवं आय के स्तर का संकेतक है। भारत में मानव विकास का मूल्यांकन जीवन प्रत्याशा, साक्षरता दर, प्रति व्यक्ति आय तथा मानव विकास सूचकांक (HDI) के आधार पर किया जाता है। संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (UNDP) की मानव विकास रिपोर्ट में भारत को 'मध्यम मानव विकास' वाला देश माना गया है। भारत में मानव विकास के क्षेत्रीय अंतर महत्वपूर्ण हैं — कुछ राज्य उच्च मानव विकास वाले हैं, जबकि कुछ पिछड़े हुए हैं।
भारत में मानव विकास के प्रमुख संकेतक हैं: - जीवन प्रत्याशा: 2011-15 में भारत की औसत जीवन प्रत्याशा लगभग 68.3 वर्ष थी। केरल में यह सर्वाधिक है। - साक्षरता दर: 2011 की जनगणना में भारत की साक्षरता दर 73 प्रतिशत थी। केरल (94%) सर्वाधिक साक्षर राज्य है। - प्रति व्यक्ति आय: भारत की प्रति व्यक्ति आय बढ़ रही है, किंतु क्षेत्रीय असमानताएँ बनी हैं। - मानव विकास सूचकांक: UNDP के अनुसार भारत का HDI मान लगभग 0.64 है, जो मध्यम श्रेणी में आता है।
भारत में मानव विकास का वितरण असमान है: - उच्च मानव विकास: केरल, गोवा, तमिलनाडु, पंजाब, महाराष्ट्र — उच्च साक्षरता, बेहतर स्वास्थ्य एवं अपेक्षाकृत अधिक आय। - मध्यम मानव विकास: गुजरात, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश आदि। - निम्न मानव विकास: बिहार, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, झारखंड, राजस्थान — कम साक्षरता, उच्च निर्धनता, स्वास्थ्य सुविधाओं का अभाव।
केरल को भारत का सर्वाधिक मानव विकास वाला राज्य माना जाता है। भारत में मानव विकास की क्षेत्रीय असमानताएँ आर्थिक विकास, शिक्षा, स्वास्थ्य सुविधाओं एवं ऐतिहासिक कारकों से उत्पन्न होती हैं।
भारत में मानव विकास के प्रमुख मुद्दे हैं: - निर्धनता: भारत में अभी भी बड़ी जनसंख्या बहुआयामी निर्धनता में जीवन यापन करती है। - कुपोषण: बच्चों एवं महिलाओं में कुपोषण की दर ऊँची है। - शिशु मृत्यु दर: कई राज्यों में शिशु मृत्यु दर अभी भी अधिक है। - लैंगिक असमानता: लिंग अनुपात, महिला साक्षरता एवं महिला कार्यबल भागीदारी में असमानता। - स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी: ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य केंद्रों एवं चिकित्सकों की कमी। - शिक्षा की गुणवत्ता: स्कूल छोड़ने की दर अधिक है, विशेषकर बालिकाओं में।
भारत सरकार ने मानव विकास में सुधार हेतु अनेक योजनाएँ प्रारंभ की हैं: - शिक्षा: सर्व शिक्षा अभियान, मिड-डे मील, राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020, बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ। - स्वास्थ्य: आयुष्मान भारत (स्वास्थ्य बीमा), राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन, पोषण अभियान, मिशन इंद्रधनुष। - रोजगार एवं कल्याण: मनरेगा (MGNREGA), जन धन योजना, सामाजिक सुरक्षा योजनाएँ। - बुनियादी सुविधाएँ: जल जीवन मिशन, स्वच्छ भारत अभियान, ग्रामीण विद्युतीकरण।
इन प्रयासों से भारत के मानव विकास सूचकांक में लगातार सुधार हो रहा है, किंतु अभी भी लक्ष्य प्राप्त करने की दिशा में लंबा सफर तय करना है।
भारत का मानव विकास सूचकांक दक्षिण एशियाई देशों के औसत से तुलनीय है। श्रीलंका, मालदीव जैसे देश भारत से ऊँचे HDI पर हैं। विकसित देशों (नॉर्वे, स्विट्जरलैंड) की तुलना में भारत का HDI निम्न है। हालाँकि, भारत में पिछले दशकों में जीवन प्रत्याशा, साक्षरता एवं प्रति व्यक्ति आय में लगातार सुधार हुआ है। भारत का लक्ष्य 'मानव विकास' को 'मानव कल्याण' में परिवर्तित करना है।
भारत में मानव विकास को प्रभावित करने वाले कारक हैं — शिक्षा की उपलब्धता, स्वास्थ्य सुविधाएँ, आय का स्तर, रोजगार के अवसर, लिंग समानता, बुनियादी ढाँचा, सामाजिक सुरक्षा तथा शासन की गुणवत्ता। राज्य सरकारों की नीतियाँ एवं स्थानीय स्थितियाँ मानव विकास के क्षेत्रीय अंतर को निर्धारित करती हैं।
| संकेतक | मान |
|---|---|
| जीवन प्रत्याशा | लगभग 68.3 वर्ष |
| साक्षरता दर | 73 प्रतिशत |
| HDI मान | लगभग 0.64 (मध्यम) |
| केरल साक्षरता | लगभग 94 प्रतिशत |
| स्तर | राज्य |
|---|---|
| उच्च | केरल, गोवा, तमिलनाडु, पंजाब |
| मध्यम | गुजरात, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश |
| निम्न | बिहार, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश |
| क्षेत्र | योजना |
|---|---|
| शिक्षा | सर्व शिक्षा अभियान, मिड-डे मील |
| स्वास्थ्य | आयुष्मान भारत, पोषण अभियान |
| रोजगार | मनरेगा |
| बुनियादी सुविधाएँ | जल जीवन मिशन, स्वच्छ भारत |
भारत का मानव विकास पिछले दशकों में लगातार सुधरा है, किंतु क्षेत्रीय असमानताएँ अभी भी बनी हुई हैं। केरल जैसे राज्य उच्च मानव विकास में अग्रणी हैं, जबकि बिहार, उत्तर प्रदेश जैसे राज्य निम्न स्तर पर हैं। निर्धनता, कुपोषण, लैंगिक असमानता और स्वास्थ्य-शिक्षा सुविधाओं की कमी भारत के मानव विकास के प्रमुख मुद्दे हैं। सरकार ने आयुष्मान भारत, मनरेगा, बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ जैसी योजनाओं से मानव विकास को गति दी है। भारत का लक्ष्य शिक्षा, स्वास्थ्य एवं समावेशी विकास के माध्यम से हर नागरिक को सम्मानजनक जीवन प्रदान करना है।