भारत में मानव बस्तियाँ विविध रूपों में पाई जाती हैं, जो भौगोलिक परिस्थितियों, इतिहास एवं संस्कृति का प्रतिबिंब हैं। भारत की बस्तियों को ग्रामीण बस्तियाँ एवं नगरीय बस्तियाँ में वर्गीकृत किया जाता है। 2011 की जनगणना के अनुसार भारत की 68.8 प्रतिशत जनसंख्या ग्रामीण क्षेत्रों में तथा 31.2 प्रतिशत नगरीय क्षेत्रों में निवास करती है। भारत में लगभग 6.4 लाख गाँव हैं, जो ग्रामीण जीवन का आधार हैं। बस्तियों का अध्ययन बस्तियों के प्रकार, उनके स्वरूप, वितरण एवं कार्यों के आधार पर किया जाता है।
भारत में ग्रामीण बस्तियों को मुख्यतः भू-आकृति एवं जल उपलब्धता के आधार पर वर्गीकृत किया जाता है: - सघन बस्तियाँ: उत्तरी भारत के मैदानी क्षेत्रों (गंगा-सतलुज मैदान) में पाई जाती हैं। घर पास-पास होते हैं। - प्रकीर्ण बस्तियाँ: मध्य भारत, हिमालयी क्षेत्र एवं उच्च वर्षा वाले क्षेत्रों (पूर्वोत्तर) में। घर दूर-दूर होते हैं। - हैमलेटेड बस्तियाँ: झारखंड, पूर्वी उत्तर प्रदेश में — एक मुख्य गाँव के चारों ओर उपग्रह बस्तियाँ। - प्लान बस्तियाँ: नियोजित बस्तियाँ, जैसे पंजाब के पुनर्स्थापित गाँव।
भारत में सघन बस्तियाँ प्रायः नदियों के किनारे, कुएँ एवं तालाब के आसपास विकसित हुई हैं, जबकि अधिक वर्षा वाले क्षेत्रों में बस्तियाँ प्रकीर्ण हैं।
भारत में नगरीय बस्तियों की संख्या लगातार बढ़ रही है। 2011 की जनगणना के अनुसार भारत में 7,935 नगर थे। भारत के प्रमुख नगरों में दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, चेन्नई, बेंगलुरु, हैदराबाद, अहमदाबाद, पुणे शामिल हैं। मुंबई भारत का सबसे बड़ा नगर है। भारत में नगरीय केंद्रों को जनसंख्या के आधार पर वर्गीकृत किया जाता है — नगर, शहर, महानगर (10 लाख+), मेगा नगर (1 करोड़+)। दिल्ली एवं मुंबई भारत के मेगा नगर हैं। भारत में शहरीकरण की दर बढ़ रही है, किंतु यह विकसित देशों की तुलना में कम है।
भारत में शहरीकरण की प्रवृत्तियाँ निम्नलिखित हैं: - 1901 में भारत की केवल 10.84 प्रतिशत जनसंख्या नगरों में रहती थी, जो 2011 में बढ़कर 31.2 प्रतिशत हो गई। - नगरीय विकास मुख्यतः औद्योगीकरण, व्यापार, परिवहन एवं सेवाओं के कारण हुआ है। - तटीय राज्य (गोवा, तमिलनाडु, महाराष्ट्र) तथा राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र अधिक नगरीकृत हैं। - उत्तर-पूर्वी राज्य (सिक्किम, मिजोरम) में भी नगरीकरण बढ़ा है। - भारत में ग्रामीण-नगरीय प्रवास शहरीकरण का प्रमुख कारण है।
भारत में बस्तियों के वितरण एवं विकास को प्रभावित करने वाले कारक हैं: - भौगोलिक कारक: जल उपलब्धता, उपजाऊ मृदा, अनुकूल जलवायु, समतल भूमि। - आर्थिक कारक: कृषि, उद्योग, व्यापार, खनन के अवसर। - सामाजिक-सांस्कृतिक कारक: धार्मिक स्थल, सुरक्षा, सामुदायिक संबंध। - ऐतिहासिक कारक: प्राचीन व्यापार मार्ग, रियासतें, औपनिवेशिक केंद्र।
गंगा के मैदान, तटीय मैदान एवं नदी डेल्टा क्षेत्रों में बस्तियाँ सघन हैं, जबकि हिमालय, राजस्थान के मरुस्थल एवं मध्य भारत के पठारों में विरल हैं।
तेजी से बढ़ते शहरीकरण से भारत के नगरों में अनेक समस्याएँ उत्पन्न हुई हैं: - मलिन बस्तियाँ: बड़े नगरों में झुग्गी-झोपड़ियों का विस्तार। - आवास की समस्या: बढ़ती जनसंख्या के अनुपात में आवास की कमी। - परिवहन की समस्या: यातायात की भीड़ एवं प्रदूषण। - जल आपूर्ति एवं स्वच्छता की कमी। - बेरोजगारी एवं अपराध। - पर्यावरणीय क्षरण — वायु प्रदूषण, अपशिष्ट प्रबंधन।
भारत सरकार शहरी समस्याओं के समाधान हेतु स्मार्ट सिटी मिशन, अटल मिशन फॉर रिजुवनेशन एंड अर्बन ट्रांसफॉर्मेशन (AMRUT), प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) जैसी योजनाएँ चला रही है।
भारत की बस्तियों का भविष्य नियोजित, धारणीय एवं समावेशी विकास से जुड़ा है। स्मार्ट सिटी परियोजनाएँ, डिजिटल बुनियादी ढाँचा, स्वच्छ ऊर्जा एवं पर्यावरण-अनुकूल नियोजन भविष्य की बस्तियों को आकार देंगे। ग्रामीण बस्तियों में भी बेहतर सुविधाओं (सड़क, जल, विद्युत, इंटरनेट) का विस्तार 'ग्राम उत्थान' की दिशा में कार्य कर रहा है।
| प्रकार | क्षेत्र |
|---|---|
| सघन | गंगा-सतलुज मैदान |
| प्रकीर्ण | मध्य भारत, पूर्वोत्तर |
| हैमलेटेड | झारखंड, पूर्वी उत्तर प्रदेश |
| प्लान | पंजाब के पुनर्स्थापित गाँव |
| नगर | विशेषता |
|---|---|
| मुंबई | भारत का सबसे बड़ा नगर |
| दिल्ली | राष्ट्रीय राजधानी |
| कोलकाता | पूर्वी भारत का केंद्र |
| बेंगलुरु | IT का केंद्र |
| वर्ष | नगरीय जनसंख्या (%) |
|---|---|
| 1901 | 10.84 |
| 2011 | 31.2 |
भारत की मानव बस्तियाँ उसकी सांस्कृतिक, ऐतिहासिक एवं भौगोलिक विविधता को दर्शाती हैं। ग्रामीण बस्तियाँ कृषि प्रधान जीवन का आधार हैं, जबकि नगरीय बस्तियाँ आर्थिक गतिविधियों के केंद्र हैं। भारत में शहरीकरण बढ़ रहा है, किंतु इसके साथ मलिन बस्तियाँ, आवास की कमी एवं प्रदूषण जैसी समस्याएँ भी बढ़ी हैं। स्मार्ट सिटी मिशन, AMRUT जैसी योजनाओं से नगरों का कायाकल्प हो रहा है। भविष्य में नियोजित, धारणीय एवं समावेशी बस्तियों का विकास ही भारत के समग्र विकास की दिशा तय करेगा।