जल पृथ्वी पर जीवन का आधार है। पृथ्वी की सतह का लगभग 71 प्रतिशत भाग जल से ढका है, किंतु इसका अधिकांश भाग (97 प्रतिशत) लवणीय (खारा) है। स्वच्छ एवं उपयोग योग्य मीठे जल का भाग अत्यंत सीमित है। भारत में जल संसाधन के प्रमुख स्रोत हैं — वर्षा, नदियाँ, झीलें, तालाब, भूजल, हिमनद एवं हिमपात। भारत को विश्व में वर्षा की दृष्टि से 'सही समय पर, सही स्थान पर' जल मिलता है, किंतु इसका वितरण अत्यंत असमान है। जल संसाधन का अध्ययन जल की उपलब्धता, उपयोग, समस्याएँ एवं संरक्षण के आधार पर किया जाता है।
भारत में जल के मुख्य स्रोत: - वर्षा: भारत की वार्षिक औसत वर्षा लगभग 119 सेमी है। उत्तर-पूर्व भारत (मेघालय) में सर्वाधिक वर्षा होती है, जबकि राजस्थान में सबसे कम। - सतही जल (नदियाँ): भारत की प्रमुख नदियाँ — गंगा, ब्रह्मपुत्र, सिंधु, गोदावरी, कृष्णा, कावेरी। भारत की कुल वार्षिक सतही जल क्षमता लगभग 1,869 घन किमी है। - भूजल: जलधारण क्षमता (Aquifers) से प्राप्त होता है। भारत विश्व का सबसे बड़ा भूजल उपभोक्ता देश है। - हिमनद एवं हिम: हिमालय के हिमनद नदियों के स्थायी जल स्रोत हैं।
भारत की कुल औसत वार्षिक जल उपलब्धता लगभग 1,869 घन किमी है, जिसमें से उपयोग योग्य जल लगभग 1,122 घन किमी है। जल के प्रमुख उपयोग हैं — कृषि सिंचाई, पेयजल, उद्योग, विद्युत उत्पादन, पशुपालन, मत्स्यन, परिवहन एवं मनोरंजन। भारत में जल का सर्वाधिक उपयोग कृषि (सिंचाई) में होता है, जो कुल जल उपयोग का लगभग 90 प्रतिशत है। जल उपयोग में क्षेत्रीय अंतर हैं — उत्तर-पश्चिमी भारत में सिंचाई अधिक है, जबकि उत्तर-पूर्वी भारत में अधिक वर्षा के कारण सिंचाई कम आवश्यक है।
भारत में जल संसाधनों से संबंधित प्रमुख समस्याएँ: - जल की कमी/अभाव: कुछ क्षेत्रों (राजस्थान, गुजरात, महाराष्ट्र के कुछ भाग) में जल की भारी कमी। - जल की गुणवत्ता में गिरावट: प्रदूषण, औद्योगिक अपशिष्ट, कृषि रसायनों से जल प्रदूषित हो रहा है। - भूजल स्तर में गिरावट: अत्यधिक पंपिंग से कई क्षेत्रों (पंजाब, हरियाणा, राजस्थान) में भूजल स्तर तेजी से गिर रहा है। - जल लवणीकरण एवं जलभराव: अति सिंचाई वाले क्षेत्रों में। - बाढ़ एवं सूखा: जल वितरण की असमानता के कारण। - जलवायु परिवर्तन: हिमनदों के पिघलने से नदियों के जल प्रवाह पर प्रभाव।
जल संरक्षण के प्रमुख उपाय: - वर्षा जल संचयन (Rainwater Harvesting): छतों एवं सतहों से वर्षा जल का संग्रहण। - बूंद-बूंद सिंचाई (Drip Irrigation): कम पानी में अधिक फसल। - कुएँ, तालाब एवं जलाशयों का पुनरुद्धार। - भूजल रिचार्ज — रिचार्ज कुँए, चेक डैम। - जल बचाओ अभियान। - सिंचाई में कुशल तकनीक — स्प्रिंकलर सिंचाई। - वाटरशेड प्रबंधन।
भारत में 'जल जीवन मिशन' का उद्देश्य हर ग्रामीण घर तक नल से पेयजल पहुँचाना है। 'अटल भूजल योजना' भूजल प्रबंधन से संबंधित है।
भारत में बहुउद्देश्यीय नदी घाटी परियोजनाएँ सिंचाई, विद्युत उत्पादन, बाढ़ नियंत्रण एवं जल आपूर्ति में सहायक हैं: - भाखड़ा-नांगल परियोजना: सतलुज नदी पर; भारत की सबसे बड़ी बहुउद्देश्यीय परियोजना। - दामोदर घाटी परियोजना: बिहार-पश्चिम बंगाल; बाढ़ नियंत्रण एवं विद्युत। - इंदिरा गांधी नहर परियोजना: राजस्थान में; विश्व की सबसे लंबी नहर प्रणाली। - हीराकुंड बाँध: महानदी पर; एशिया का सबसे लंबा बाँध। - नर्मदा सागर परियोजना।
बढ़ती जनसंख्या, शहरीकरण, औद्योगीकरण एवं जलवायु परिवर्तन के कारण जल संसाधनों पर दबाव बढ़ रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार भविष्य में 'जल युद्ध' की आशंका हो सकती है। इसलिए जल का समुचित प्रबंधन, संरक्षण एवं नवीकरण अनिवार्य है। 'एक राष्ट्र, एक जल रीति' जैसे प्रयासों से जल संसाधनों का समन्वित प्रबंधन किया जा रहा है।
| स्रोत | विवरण |
|---|---|
| वर्षा | वार्षिक औसत लगभग 119 सेमी |
| सतही जल | नदियाँ, झीलें, तालाब |
| भूजल | जलधारण क्षमता से |
| हिमनद | हिमालय के हिमनद |
| समस्या | संरक्षण उपाय |
|---|---|
| जल की कमी | वर्षा जल संचयन |
| भूजल गिरावट | भूजल रिचार्ज |
| जल प्रदूषण | औद्योगिक अपशिष्ट प्रबंधन |
| अति सिंचाई | बूंद-बूंद सिंचाई |
| परियोजना | नदी |
|---|---|
| भाखड़ा-नांगल | सतलुज |
| हीराकुंड | महानदी |
| दामोदर घाटी | दामोदर |
| इंदिरा गांधी नहर | सतलुज-राजस्थान |
जल मानव सभ्यता का आधार है, किंतु इसका संकट दिन-प्रतिदिन गहराता जा रहा है। भारत में जल का वितरण असमान है — कहीं बाढ़ तो कहीं सूखा। कृषि में अति जल उपयोग, भूजल की अत्यधिक पंपिंग एवं प्रदूषण ने जल संकट को बढ़ाया है। वर्षा जल संचयन, बूंद-बूंद सिंचाई, भूजल रिचार्ज एवं वाटरशेड प्रबंधन जैसे उपाय जल सुरक्षा सुनिश्चित कर सकते हैं। बहुउद्देश्यीय परियोजनाओं से सिंचाई एवं विद्युत में सहायता मिली है। जल संरक्षण की आदत ही भविष्य में मानव जीवन को बचाएगी।