खनिज प्राकृतिक रूप से पाए जाने वाले अकार्बनिक पदार्थ हैं, जो पृथ्वी की पपड़ी में विशिष्ट रासायनिक संरचना एवं भौतिक गुणों के साथ मिलते हैं। खनिजों का विकास में महत्वपूर्ण योगदान है — ये उद्योगों का कच्चा माल, ऊर्जा का स्रोत एवं रोजगार के साधन हैं। भारत खनिज संसाधनों में समृद्ध देश है। खनिजों को दो मुख्य श्रेणियों में बाँटा गया है — धात्विक खनिज (लौह अयस्क, ताँबा, बॉक्साइट, मैंगनीज) और अधात्विक खनिज (कोयला, पेट्रोलियम, चूना पत्थर, अभ्रक)। खनिज अक्षय (non-renewable) संसाधन हैं, अर्थात इनका निर्माण नहीं होता और ये एक बार समाप्त होने पर पुनः प्राप्त नहीं होते।
लौह अयस्क: इस्पात निर्माण का मुख्य कच्चा माल। भारत में लौह अयस्क के प्रमुख भंडार ओडिशा (केउझर, मयूरभंज), झारखंड (सिंहभूम), छत्तीसगढ़ (बस्तर, दंतेवाड़ा) में हैं। भारत का सबसे बड़ा लौह अयस्क उत्पादक राज्य ओडिशा है। लौह अयस्क की प्रमुख खानें — बैलाडिला (छत्तीसगढ़), कुद्रेमुख (कर्नाटक), गुआ (झारखंड)। भारत लौह अयस्क का निर्यातक देश है।
ताँबा: विद्युत चालकता के लिए महत्वपूर्ण। भारत में ताँबे के प्रमुख भंडार राजस्थान (खेतड़ी), झारखंड, मध्य प्रदेश में हैं। राजस्थान भारत का सबसे बड़ा ताँबा उत्पादक राज्य है।
बॉक्साइट: एल्युमीनियम का कच्चा माल। भारत में बॉक्साइट के भंडार ओडिशा, गुजरात, झारखंड, महाराष्ट्र में हैं। ओडिशा सबसे बड़ा उत्पादक राज्य है।
मैंगनीज: इस्पात उद्योग में उपयोगी। मध्य प्रदेश (बालाघाट), महाराष्ट्र, ओडिशा में भंडार।
अन्य धात्विक खनिज: सोना (कर्नाटक — कोलार, रायचूर), चाँदी, जस्ता, सीसा (राजस्थान — ज़ावर)।
कोयला: भारत की प्राथमिक ऊर्जा का स्रोत। कोयले के प्रमुख भंडार झारखंड (धनबाद, बोकारो), पश्चिम बंगाल (रानीगंज), ओडिशा (तालचेर), छत्तीसगढ़ (कोरबा) में हैं। भारत का सबसे बड़ा कोयला उत्पादक राज्य झारखंड है। झारखंड में स्थित झरिया कोयला क्षेत्र भारत का सबसे प्रमुख कोयला क्षेत्र है।
पेट्रोलियम: 'काला सोना' कहलाता है। भारत में पेट्रोलियम के प्रमुख भंडार मुंबई हाई, गुजरात (अंकलेश्वर, कलोल), असम (दिग्बोई, नाहरकटिया) में हैं। मुंबई हाई भारत का सबसे बड़ा तेल क्षेत्र है। राजस्थान (बाड़मेर) में भी तेल भंडार पाए गए हैं। भारत अपनी पेट्रोलियम आवश्यकता का अधिकांश भाग आयात करता है।
अभ्रक: विद्युत उद्योग में प्रयुक्त। झारखंड (कोडरमा) विश्व का सबसे बड़ा अभ्रक उत्पादक क्षेत्र है।
चूना पत्थर: सीमेंट उद्योग का कच्चा माल।
ऊर्जा संसाधन दो प्रकार के होते हैं — पारंपरिक (जीवाश्म) ऊर्जा और गैर-पारंपरिक (नवीकरणीय) ऊर्जा।
पारंपरिक ऊर्जा स्रोत: कोयला, पेट्रोलियम, प्राकृतिक गैस, जल विद्युत, नाभिकीय ऊर्जा। ये स्रोत सीमित हैं और पर्यावरण प्रदूषण करते हैं।
गैर-पारंपरिक ऊर्जा स्रोत: सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा, भू-तापीय ऊर्जा, ज्वारीय ऊर्जा, बायोमास ऊर्जा। ये नवीकरणीय, प्रदूषण रहित एवं स्थायी हैं।
भारत का सबसे बड़ा पवन ऊर्जा क्षेत्र तमिलनाडु में है। राजस्थान में सौर ऊर्जा की अपार संभावनाएँ हैं। भारत में भावी ऊर्जा स्रोतों के रूप में सौर एवं पवन ऊर्जा पर बल दिया जा रहा है।
भारत में खनिज संसाधनों का वितरण असमान है: - छोटानागपुर पठार (झारखंड, पश्चिम बंगाल, ओडिशा, छत्तीसगढ़): कोयला, लौह अयस्क, अभ्रक — 'खनिज भंडार का केंद्र'। - पश्चिमी घाट क्षेत्र (गोवा, कर्नाटक, महाराष्ट्र): लौह अयस्क, बॉक्साइट, मैंगनीज। - अरावली क्षेत्र (राजस्थान): ताँबा, जस्ता, सीसा। - प्रायद्वीपीय भारत खनिजों से समृद्ध है, जबकि उत्तर-पूर्वी क्षेत्र में तेल एवं गैस के भंडार हैं।
खनन से जुड़ी समस्याएँ — वनों की कटाई, भूमि क्षरण, जल एवं वायु प्रदूषण, खनिकों के स्वास्थ्य संबंधी खतरे, अवैध खनन एवं जनजातीय विस्थापन। खनिज संरक्षण हेतु — खनिजों का संतुलित उपयोग, पुनर्चक्रण (recycling), वैकल्पिक पदार्थों का विकास, नवीकरणीय ऊर्जा को बढ़ावा तथा कुशल खनन तकनीक आवश्यक है।
भारत की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने हेतु नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में निवेश बढ़ रहा है। भारत ने अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन (International Solar Alliance) की स्थापना की। सौर, पवन एवं बायोमास ऊर्जा के विकास से भारत पारंपरिक ऊर्जा पर निर्भरता घटा रहा है।
| धात्विक | अधात्विक |
|---|---|
| लौह अयस्क | कोयला |
| ताँबा | पेट्रोलियम |
| बॉक्साइट | अभ्रक |
| मैंगनीज | चूना पत्थर |
| खनिज | प्रमुख राज्य |
|---|---|
| लौह अयस्क | ओडिशा |
| ताँबा | राजस्थान |
| कोयला | झारखंड |
| बॉक्साइट | ओडिशा |
| अभ्रक | झारखंड |
| पारंपरिक | गैर-पारंपरिक |
|---|---|
| कोयला, पेट्रोलियम, गैस | सौर, पवन |
| जल विद्युत | भू-तापीय |
| नाभिकीय | ज्वारीय, बायोमास |
खनिज एवं ऊर्जा संसाधन किसी भी देश के औद्योगिक विकास की नींव हैं। भारत लौह अयस्क, कोयला, अभ्रक आदि में समृद्ध है, किंतु पेट्रोलियम में आयात पर निर्भर है। खनिज अक्षय संसाधन हैं, इसलिए इनका संरक्षण एवं संतुलित उपयोग अनिवार्य है। भविष्य की ऊर्जा सुरक्षा के लिए नवीकरणीय ऊर्जा (सौर, पवन) का विस्तार आवश्यक है। संधारणीय खनन एवं ऊर्जा संक्रमण से ही भारत अपने विकास लक्ष्यों को पूरा कर सकता है और पर्यावरण की रक्षा भी कर सकता है।